जनवरी 2026 के खुदरा बिक्री आँकड़े भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में तेज़ बदलाव और कड़ी प्रतिस्पर्धा की कहानी बयां करते हैं। इस वर्ष जनवरी में कुल 1,13,210 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की गई, जबकि जनवरी 2025 में यह संख्या 92,337 यूनिट्स थी। यानी साल-दर-साल (YoY) आधार पर ट्रैक्टर बाजार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। यह बढ़ोतरी न केवल कृषि गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश और किसानों के भरोसे को भी दर्शाती है।
हालांकि, कुल बाजार बढ़ा है, लेकिन सभी कंपनियों के लिए तस्वीर एक जैसी नहीं रही। कुछ ब्रांड्स ने अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत की है, तो कुछ दिग्गज कंपनियों को गिरावट का सामना करना पड़ा है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा एक बार फिर ट्रैक्टर बाजार में नंबर एक स्थान पर बनी हुई है। जनवरी 2026 में कंपनी ने 25,995 यूनिट्स की खुदरा बिक्री की, जो जनवरी 2025 के 22,072 यूनिट्स से कहीं अधिक है। इसके बावजूद, महिंद्रा की बाजार हिस्सेदारी 23.90% से घटकर 22.96% रह गई। यह संकेत देता है, कि भले ही महिंद्रा की बिक्री बढ़ी हो, लेकिन अन्य प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स की गति इससे भी तेज रही। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नए उत्पाद विकल्पों ने महिंद्रा की पकड़ को थोड़ा ढीला किया है, हालांकि कंपनी अब भी स्पष्ट रूप से बाजार की अगुवा बनी हुई है।
स्वराज ट्रैक्टर्स ने जनवरी 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने 21,911 ट्रैक्टर बेचकर अपनी बाजार हिस्सेदारी 18.78% से बढ़ाकर 19.35% कर ली। यह बढ़त दर्शाती है कि स्वराज किसानों के बीच भरोसेमंद ब्रांड बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों में स्वराज की मजबूत डीलरशिप, टिकाऊ मशीनें और सरल तकनीक इसकी लोकप्रियता के प्रमुख कारण माने जा सकते हैं। खासकर मध्यम हॉर्सपावर सेगमेंट में स्वराज की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है।
तीसरे स्थान पर रही सोनालिका ने जनवरी 2026 में 15,376 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की। बाजार हिस्सेदारी 13.32% से बढ़कर 13.58% हो गई, जो कंपनी के निरंतर विस्तार को दर्शाती है। वहीं मैसी फर्ग्यूसन ने 13,460 ट्रैक्टर बेचकर अपनी हिस्सेदारी 11.74% से बढ़ाकर 11.89% कर ली। दोनों ही ब्रांड्स ने यह साबित किया है कि लगातार गुणवत्ता और किसानों की जरूरतों के अनुसार उत्पाद देने से बाजार में स्थिरता बनी रहती है।
जनवरी 2026 के आंकड़ों में एस्कॉर्ट्स सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में शामिल रही। कंपनी ने 12,311 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 9,136 यूनिट्स से काफी अधिक है। इसके साथ ही बाजार हिस्सेदारी 9.89% से बढ़कर 10.87% हो गई।
यह लगभग 1 प्रतिशत की YoY हिस्सेदारी बढ़त दर्शाती है, जो किसी भी बड़े ब्रांड के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। एस्कॉर्ट्स की यह सफलता नए मॉडल्स, बेहतर फाइनेंस स्कीम्स और मजबूत आफ्टर-सेल्स नेटवर्क का परिणाम मानी जा सकती है।
जॉन डियर ने जनवरी 2026 में 7,895 ट्रैक्टर बेचे, जो जनवरी 2025 के 6,488 यूनिट्स से अधिक है। इसके बावजूद, कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 7.03% से घटकर 6.97% रह गई। यह गिरावट बताती है कि जॉन डियर की बिक्री भले ही बढ़ी हो, लेकिन बाजार की कुल वृद्धि दर इससे ज्यादा तेज रही। प्रीमियम सेगमेंट पर अधिक फोकस और सीमित ग्रामीण पहुंच इसका एक कारण हो सकता है।
आयशर (Eicher) के लिए जनवरी 2026 बेहद सकारात्मक रहा। कंपनी ने 7,814 यूनिट्स की बिक्री के साथ अपनी बाजार हिस्सेदारी 6.45% से बढ़ाकर 6.90% कर ली। यह दर्शाता है कि आयशर धीरे-धीरे अपने पैर मजबूत कर रहा है।
वहीं न्यू हॉलैंड (New Holland) ने 5,336 ट्रैक्टर बेचकर अपनी हिस्सेदारी 4.30% से बढ़ाकर 4.71% कर ली। दोनों ब्रांड्स ने यह साबित किया है कि निरंतर सुधार और क्षेत्रीय रणनीति से बाजार में जगह बनाई जा सकती है।
जनवरी 2026 का सबसे बड़ा सरप्राइज ट्रैकस्टार रहा। कंपनी ने 697 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो जनवरी 2025 के 397 यूनिट्स की तुलना में 75.57% की जबरदस्त वृद्धि है।
हालांकि, कुल बाजार हिस्सेदारी अभी सिर्फ 0.62% है, लेकिन इतनी तेज़ ग्रोथ यह साफ संकेत देती है कि छोटे और किफायती ट्रैक्टर सेगमेंट में ट्रैकस्टार तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सीमांत और छोटे किसानों के लिए यह ब्रांड एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है।
कुबोटा के लिए यह महीना निराशाजनक रहा। बिक्री 1,628 यूनिट्स से गिरकर 184 यूनिट्स पर आ गई, और बाजार हिस्सेदारी में 1.60% की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं कैप्टन, प्रीत और एसीई जैसे ब्रांड्स को भी हल्की गिरावट का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर एसडीएफ ने भले ही कम संख्या में बिक्री की हो, लेकिन हिस्सेदारी में सकारात्मक बढ़त दर्ज की है।
जनवरी 2026 के ट्रैक्टर बिक्री आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि भारतीय ट्रैक्टर बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तीव्र हो चुकी है। जहां बड़े ब्रांड्स को अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों की जरूरत है, वहीं छोटे और उभरते ब्रांड्स नए अवसरों का लाभ उठाते नजर आ रहे हैं।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी कंपनियां इस रफ्तार को बनाए रख पाती हैं और कौन बाजार की इस दौड़ में पीछे छूट जाती हैं।