वीएसटी टिलर्स एंड ट्रैक्टर्स लिमिटेड ने फरवरी 2026 के बिक्री आंकड़े जारी करते हुए शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी ने पावर टिलर और ट्रैक्टर दोनों सेगमेंट्स में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। फरवरी 2025 की तुलना में कुल बिक्री में 36.04% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ते मशीनीकरण का स्पष्ट संकेत है। छोटे और सीमांत किसानों के बीच आधुनिक कृषि उपकरणों की मांग बढ़ने तथा सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिलने से कंपनी को मजबूत बढ़त मिली है।
फरवरी 2026 में कंपनी ने कुल 4,435 यूनिट्स (पावर टिलर + ट्रैक्टर) की बिक्री की, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 3,260 यूनिट्स था। इस प्रकार कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर 36.04% की मजबूत वृद्धि दर्ज की।
कुल बिक्री में पावर टिलर की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जबकि ट्रैक्टर सेगमेंट ने सबसे तेज वृद्धि दर दिखाई। यह ट्रेंड बताता है कि कंपनी ने दोनों श्रेणियों में संतुलित विस्तार रणनीति अपनाई है।
पावर टिलर सेगमेंट: 34.24% की मजबूत बढ़त
फरवरी 2026 में वीएसटी ने 3,963 पावर टिलर बेचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 2,952 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस प्रकार पावर टिलर बिक्री में 34.24% की वृद्धि दर्ज की गई।
पावर टिलर विशेष रूप से छोटे खेतों, बागानों और सब्जी उत्पादन क्षेत्रों में अधिक उपयोग किए जाते हैं। भारत में छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या है, जो कम लागत और उच्च उपयोगिता वाले उपकरणों को प्राथमिकता देते हैं। वीएसटी के पावर टिलर इस वर्ग के किसानों के लिए उपयुक्त साबित हो रहे हैं।
सरकार द्वारा कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी योजनाएं भी इस वृद्धि का प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, कंपनी की ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत डीलर नेटवर्क और बेहतर आफ्टर-सेल्स सर्विस ने भी मांग को बढ़ाया है।
ट्रैक्टर सेगमेंट: 53.24% की शानदार छलांग
फरवरी 2026 में कंपनी ने 472 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो फरवरी 2025 के 308 ट्रैक्टरों की तुलना में 53.24% अधिक है। यह ट्रैक्टर सेगमेंट में सबसे तेज वृद्धि दर को दर्शाता है।
हालांकि ट्रैक्टर की कुल बिक्री संख्या पावर टिलर से कम है, लेकिन वृद्धि दर यह संकेत देती है कि कंपनी इस सेगमेंट में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। ट्रैक्टरों की बढ़ती मांग मध्यम आकार के किसानों और बहुउद्देशीय उपयोग के कारण बढ़ रही है।
कंपनी ने हल्के और कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर मॉडल्स के जरिए नए ग्राहकों को आकर्षित किया है। इसके साथ ही वित्तीय संस्थानों के माध्यम से आसान ऋण सुविधा भी बिक्री बढ़ाने में सहायक रही है।
वित्तीय वर्ष 2026 (YTD) का प्रदर्शन
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 की अवधि के दौरान कंपनी ने कुल 51,303 यूनिट्स (पावर टिलर + ट्रैक्टर) की बिक्री की है। पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि (अप्रैल 2024 – फरवरी 2025) में यह आंकड़ा 34,692 यूनिट्स था। इस प्रकार YTD (Year-to-Date) आधार पर कुल बिक्री में 47.88% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कंपनी की विकास दर केवल एक महीने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष के दौरान निरंतर मजबूत बनी हुई है।
YTD पावर टिलर सेल्स: 53.43% की उल्लेखनीय वृद्धि
ग्यारह महीनों की अवधि में पावर टिलर की बिक्री बढ़कर 46,147 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में 30,076 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस प्रकार 53.43% की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि स्पष्ट करती है कि छोटे किसान तेजी से पारंपरिक खेती के तरीकों से आधुनिक मशीनीकरण की ओर बढ़ रहे हैं। पावर टिलर कम लागत, कम ईंधन खपत और बहुउद्देशीय उपयोग के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं। कृषि क्षेत्र में श्रम लागत बढ़ने और मजदूरों की कमी भी किसानों को मशीनों की ओर प्रेरित कर रही है।
YTD ट्रैक्टर सेल्स: स्थिर और सकारात्मक प्रगति
YTD अवधि में ट्रैक्टर बिक्री 5,156 यूनिट्स रही, जो पिछले वर्ष के 4,616 यूनिट्स की तुलना में 11.69% अधिक है। हालांकि ट्रैक्टर सेगमेंट की वृद्धि दर पावर टिलर की तुलना में कम है, लेकिन यह लगातार सकारात्मक रुझान को दर्शाती है। कंपनी ने ट्रैक्टर बाजार में अपनी मौजूदगी को स्थिर रूप से बढ़ाया है और नए क्षेत्रों में विस्तार किया है।
वृद्धि के प्रमुख कारण
वीएसटी की इस शानदार वृद्धि के पीछे कई कारक हैं, जैसे कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाएं, छोटे और सीमांत किसानों के बीच बढ़ती जागरूकता, ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत डीलर नेटवर्क, आसान वित्त और ऋण सुविधा, उत्पादों की गुणवत्ता और टिकाऊपन और इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में बेहतर मानसून और फसल उत्पादन में वृद्धि ने भी उपकरणों की मांग को बढ़ाया है।
बाजार में कंपनी की स्थिति
वीएसटी टिलर्स एंड ट्रैक्टर्स भारत में पावर टिलर सेगमेंट में अग्रणी कंपनियों में से एक मानी जाती है। कंपनी ने वर्षों से छोटे किसानों की जरूरतों को समझते हुए अपने उत्पादों को डिजाइन किया है। ट्रैक्टर सेगमेंट में भी कंपनी धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है। फरवरी 2026 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि कंपनी ने प्रतिस्पर्धी बाजार में मजबूत पकड़ बनाई है।
भविष्य की संभावनाएं
भारतीय कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण की संभावनाएं अभी भी व्यापक हैं। छोटे किसानों की संख्या अधिक होने के कारण पावर टिलर और कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर की मांग भविष्य में भी बढ़ती रहने की संभावना है।
सरकारी नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और ग्रामीण अवसंरचना विकास से इस क्षेत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। ऐसे में वीएसटी के लिए विकास के नए अवसर मौजूद हैं।
फरवरी 2026 की सेल्स रिपोर्ट वीएसटी टिलर्स एंड ट्रैक्टर्स के लिए अत्यंत सकारात्मक रही है। कुल बिक्री में 36.04% की वृद्धि, ट्रैक्टर बिक्री में 53.24% की छलांग और YTD पावर टिलर में 53.43% की बढ़त यह दर्शाती है कि कंपनी ने बाजार में मजबूत स्थिति बना ली है। यह प्रदर्शन भारतीय कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ते मशीनीकरण और किसानों की बदलती जरूरतों को दर्शाता है। आने वाले समय में भी कंपनी की विकास यात्रा जारी रहने की संभावना है, बशर्ते वह गुणवत्ता, नवाचार और ग्राहक सेवा पर समान ध्यान बनाए रखे।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
Escorts Kubota Limited has announced its Powertrac Shaurya series, which introduces paddy tractors that meet the requirements of wetland farming in Southern Indian agricultural regions. The launch strengthens the company’s presence in the agricultural machinery segment and expands its Powertrac portfolio.
The Powertrac Shaurya series offers five tractor variants that deliver power outputs ranging from 39 HP to 52 HP. These tractors are engineered to perform efficiently in waterlogged and muddy fields, which farmers use to grow rice.
Key highlights include:
The company stated that Southern India plays a crucial role in its next phase of growth. The Shaurya series extends its market presence to paddy-dominant regions, which include Telangana, Andhra Pradesh, Tamil Nadu, and Karnataka.
Nikhil Nanda, Chairman and Managing Director of Escorts Kubota Limited, stated that the company focuses on Southern India as its primary area for business growth. The Shaurya launch helps the company build its paddy market presence, while the new products will increase its operational range in the region.
Escorts Kubota demonstrates its ongoing dedication to creating new products for specific market segments through its most recent Powertrac brand launch. The company operates three tractor brands in India — Kubota, Farmtrac, and Powertrac — and aims to further strengthen its market position through targeted product offerings.
हरियाणा सरकार ने बजट 2026–27 में कृषि और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए व्यापक घोषणाएं की हैं। यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। वित्त आयुक्त एवं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रस्तुत इस बजट में फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, डेयरी विकास, कृषि बिजली आपूर्ति और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है, कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का रोडमैप है। बोनस, अनुदान, बीमा, अवसंरचना विकास और कौशल प्रशिक्षण जैसे प्रावधानों के माध्यम से राज्य को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रैक्टर चॉइस के इस लेख में जानिए कि किसानों के लिए हरियाणा सरकार ने अपने बजट में क्या कुछ दिया है।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा
धान की खेती में अधिक पानी की खपत को देखते हुए सरकार ने फसल विविधीकरण को प्राथमिकता दी है। जो किसान धान की जगह दालें, तिलहन या कपास की खेती करेंगे, उन्हें ₹2,000 प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। इससे किसानों को नई फसलों की ओर प्रोत्साहन मिलेगा और भूजल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
देसी कपास पर विशेष प्रोत्साहन
कपास उत्पादकों को राहत देते हुए देसी कपास प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर ₹4,000 प्रति एकड़ कर दिया गया है। इससे कपास की खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
प्राकृतिक और जैविक खेती को समर्थन
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एपीडा प्रमाणित किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ वार्षिक अनुदान देने की घोषणा की गई है। APEDA (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) से प्रमाणित किसानों को यह लाभ मिलेगा। इससे जैविक उत्पादों के निर्यात और बाजार मूल्य में बढ़ोतरी की संभावना है।
नलकूपों की गुणवत्ता जांच
राज्य में 8 लाख नलकूपों की गुणवत्ता जांच के लिए तीन वर्षीय योजना शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे कृषि उत्पादन की स्थिरता बनी रहेगी।
ग्रामीण हाट और एफपीओ को मजबूती
सरकार ग्रामीण हाट मंडियों की स्थापना करेगी और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को सशक्त बनाएगी। इससे छोटे किसानों को सामूहिक विपणन का लाभ मिलेगा और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
बागवानी बीमा योजना में सुधार
बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा राशि बढ़ाई जाएगी। प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है।
मत्स्य, मधुमक्खी और डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहन
मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और डेयरी क्षेत्र में नई प्रयोगशालाएं, प्रसंस्करण इकाइयां और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे कृषि के सहायक व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की अतिरिक्त आय के स्रोत बढ़ेंगे।
‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ की स्थापना
कृषि बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ नामक नई बिजली वितरण कंपनी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध होगी।
हरियाणा सरकार ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार मानते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।
नए दुग्ध संयंत्र
रेवाड़ी और अंबाला में 300-300 करोड़ रुपये की लागत से दो नए दुग्ध संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता पांच लाख लीटर प्रतिदिन होगी। इससे दुग्ध उत्पादन को बाजार से सीधा जोड़ने में मदद मिलेगी और पशुपालकों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
नए पशु चिकित्सालय
प्रदेश में 7 नए पशु चिकित्सालय खोले जाएंगे। इससे पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी और पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि होगी।
महामारी विज्ञान केंद्र की स्थापना
Hisar में हरियाणा पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान केंद्र की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र पशुओं में फैलने वाली बीमारियों की निगरानी और रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पशुपालन प्रशिक्षण केंद्र
हिसार में एक बहुउद्देश्यीय पशुपालन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, रोग नियंत्रण और बेहतर प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों (SHG) को वित्तीय सहायता और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ऋण और अनुदान योजनाओं को सरल बनाया जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत विधवा, वृद्ध और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सहायता राशि बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता मजबूत होगी।
राज्य सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार सृजन और कौशल विकास को प्राथमिकता दी है। नए प्रशिक्षण केंद्र, आईटीआई उन्नयन और स्टार्टअप प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी।
कृषि आधारित उद्योगों और प्रसंस्करण इकाइयों के विस्तार से ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे पलायन कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
कृषि बिजली आपूर्ति सुधारने के साथ-साथ ग्रामीण सड़कों, मंडियों और भंडारण सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया गया है। बेहतर अवसंरचना से किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और समय पर बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ के माध्यम से कृषि क्षेत्र को अलग से बिजली प्रबंधन प्रणाली दी जाएगी, जिससे बिजली कटौती की समस्या कम होने की उम्मीद है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
यह बजट केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण जीवन स्तर सुधारने का व्यापक प्रयास है। फसल विविधीकरण, जैविक खेती, डेयरी विस्तार और सहायक व्यवसायों के माध्यम से आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि यदि कृषि क्षेत्र मजबूत होगा तो राज्य की अर्थव्यवस्था भी स्थिर और समृद्ध बनेगी।
हरियाणा बजट 2026–27 किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए राहत और अवसरों का दस्तावेज है। फसल विविधीकरण से लेकर प्राकृतिक खेती, डेयरी विकास, बिजली सुधार और सामाजिक सुरक्षा तक, हर क्षेत्र में ठोस कदम उठाए गए हैं। यदि ये घोषणाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव होगी। यह बजट हरियाणा को कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1: हरियाणा बजट 2026–27 में फसल विविधीकरण के लिए किसानों को क्या प्रोत्साहन दिया गया है?
उत्तर: जो किसान धान की जगह दालें, तिलहन या कपास की खेती करेंगे, उन्हें ₹2,000 प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। इसका उद्देश्य पानी की बचत और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
प्रश्न 2: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने क्या घोषणा की है?
उत्तर: एपीडा प्रमाणित किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ वार्षिक अनुदान दिया जाएगा। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा।
प्रश्न 3: डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?
उत्तर: रेवाड़ी और अंबाला में 300-300 करोड़ रुपये की लागत से दो नए दुग्ध संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी क्षमता 5 लाख लीटर प्रतिदिन होगी। साथ ही 7 नए पशु चिकित्सालय और हिसार में पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान केंद्र की स्थापना की जाएगी।
प्रश्न 4: ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
उत्तर: ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ एक नई प्रस्तावित बिजली वितरण कंपनी है, जिसका उद्देश्य किसानों को निर्बाध और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 5: बजट में महिलाओं और युवाओं के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?
उत्तर: महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों को सशक्त करने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की घोषणा की गई है। युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के उपाय किए गए हैं।
महिंद्रा कंपनी भारत की सुप्रसिद्ध ट्रैक्टर निर्माता कंपनी है। महिंद्रा भारतीय किसानों के लिए 15 से 74 एचपी रेंज में 50 से अधिक ट्रैक्टर मॉडलों की एक विस्तृत बड़ी श्रृंखला पेश करती है। महिंद्रा एक ऐसी कंपनी है, जो 50 वर्षों से अधिक समय से किसानों के लिए एडवांस तकनीक के ट्रैक्टरों का उत्पादन कर रही है। महिंद्रा ट्रैक्टर को उसकी दमदार गुणवत्ता के लिए डेमिंग अवॉर्ड और जापान का क्वालिटी मेडल जैसे बड़े पुरस्कार मिले हैं।
भारतीय किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय महिंद्रा ट्रैक्टर मॉडल में महिंद्रा युवो 575 डीआई, महिंद्रा युवो 415 डीआई और महिंद्रा जीवो 225 डीआई शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, महिंद्रा जीवो 245 डीआई, महिंद्रा युवराज 215 एनएक्सटी, और महिंद्रा जीवो 305 डीआई जैसे मिनी ट्रैक्टर मॉडल किसानों की पहली पसंद है। ट्रैक्टरचॉइस के इस लेख में आज हम महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी द्वारा साझा की गई सेल्स रिपोर्ट के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड ने फरवरी 2026 के लिए अपने ट्रैक्टर बिक्री आंकड़े जारी किए, जिनमें घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती और सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव से कंपनी को इस वित्तीय वर्ष में अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन मिला है।
फरवरी 2026 में कुल बिक्री 34% बढ़ी
फरवरी 2026 में कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री 34,133 यूनिट्स रही, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 25,527 यूनिट्स था। इस तरह साल-दर-साल आधार पर 34% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार में मजबूत मांग को दर्शाती है।
घरेलू बाजार में 35% की शानदार वृद्धि
घरेलू बाजार में कंपनी ने फरवरी 2026 में 32,153 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल फरवरी में बेचे गए 23,880 ट्रैक्टरों से 35% अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती क्रय शक्ति, बेहतर नकदी प्रवाह और सकारात्मक बाजार भावना ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।
निर्यात बाजार में 20% का उछाल
निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है। फरवरी 2026 में 1,980 ट्रैक्टरों का निर्यात किया गया, जो फरवरी 2025 के 1,647 यूनिट्स की तुलना में 20% अधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग में सुधार से कंपनी को लाभ मिला है।
वित्तीय वर्ष 2026 (YTD) में 24% की बढ़ोतरी
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 की अवधि में कंपनी ने कुल 4,81,368 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि के 3,89,707 यूनिट्स से 24% अधिक है। घरेलू बिक्री 4,62,527 यूनिट्स और निर्यात 18,841 यूनिट्स रहा, दोनों में 24% की समान वृद्धि दर्ज की गई।
रबी सीजन और ग्रामीण मांग से मिला समर्थन
महिंद्रा ट्रैक्टर्स की इस मजबूत बिक्री प्रदर्शन के पीछे रबी बुआई क्षेत्र में वृद्धि, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर और अनुकूल खरीफ फसल का बड़ा योगदान रहा है। बेहतर फसल उत्पादन से किसानों की आय और नकदी प्रवाह में सुधार हुआ है, जिससे ट्रैक्टरों की मांग में तेजी आई है।
आने वाले महीनों में भी सकारात्मक संकेत
महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण मांग में मजबूती को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2026 के लिए विकास दर का अनुमान 22–24% कर दिया गया है। फरवरी के नतीजे इस सकारात्मक रुझान की पुष्टि करते हैं और आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन तथा संभावित अच्छे मानसून के चलते बिक्री में और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्नोत्तरी
प्रश्न: महिंद्रा एंड महिंद्रा कितने एचपी श्रेणी के ट्रैक्टर्स पेश करती है ?
उत्तर: महिंद्रा भारतीय किसानों के लिए 15 से 74 एचपी रेंज में 50 से अधिक ट्रैक्टर मॉडलों की एक विस्तृत बड़ी श्रृंखला पेश करती है।
प्रश्न: महिंद्रा ने पिछले वर्ष फरवरी की तुलना में इस माह कितनी बिक्री दर्ज की है ?
उत्तर: फरवरी 2026 में कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री 34,133 यूनिट्स रही, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 25,527 यूनिट्स था।
प्रश्न: महिंद्रा ने घरेलू बाजार में कितने प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है ?
उत्तर: घरेलू बिक्री 4,62,527 यूनिट्स और निर्यात 18,841 यूनिट्स रहा, दोनों में 24% प्रतिशत की समान वृद्धि दर्ज की गई।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा एक बेहद लोक्रप्रिय और विश्वसनीय भारतीय ट्रैक्टर निर्माता ब्रांड है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा किसानों के बजट को ध्यान में रखकर किफायती और ताकतवर ट्रैक्टर बनाता है। हमेशा से एस्कॉर्ट्स कुबोटा का प्रदर्शन काफी जबरदस्त रहा है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा की खूबियों के चलते यह ब्रांड भारतीय किसानों में काफी मशहूर है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के एग्री मशीनरी डिवीजन ने फरवरी 2026 के ट्रैक्टर बिक्री आंकड़े जारी करते हुए 20.4% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। मजबूत ग्रामीण मांग, सक्रिय कृषि गतिविधियों और सरकारी सहायता के चलते कंपनी का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। चालू वित्तीय वर्ष के पहले 11 महीनों (अप्रैल 2025–फरवरी 2026) में भी कंपनी ने 16.7% की समग्र वृद्धि हासिल की है, जो स्थिर मांग और बेहतर बाजार परिस्थितियों को दर्शाता है।
फरवरी 2026 में कंपनी ने कुल 10,339 ट्रैक्टर बेचे, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 8,590 यूनिट्स था। इस प्रकार साल-दर-साल आधार पर 20.4% की वृद्धि दर्ज की गई। यह उछाल ग्रामीण बाजार में बढ़ती खरीदारी क्षमता और खेती से जुड़ी सकारात्मक गतिविधियों का परिणाम माना जा रहा है।
घरेलू बाजार में 22.1% की जोरदार बढ़त
घरेलू बाजार में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने फरवरी 2026 में 9,725 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 7,968 यूनिट्स से 22.1% अधिक है। मजबूत ग्रामीण भावना, रबी सीजन की तैयारियां, कृषि निवेश में बढ़ोतरी और जीएसटी राहत जैसे कारकों ने इस वृद्धि को समर्थन दिया। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारतीय कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टरों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
निर्यात में 1.3% की मामूली गिरावट
फरवरी 2026 में कंपनी का निर्यात घटकर 614 यूनिट्स रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 622 यूनिट्स का निर्यात हुआ था। यह 1.3% की हल्की गिरावट है। हालांकि यह कमी सीमित है और इसे अस्थायी माना जा रहा है, क्योंकि वैश्विक बाजारों में कंपनी की दीर्घकालिक स्थिति मजबूत बनी हुई है।
वित्तीय वर्ष 2026 (YTD) में 16.7% की समग्र वृद्धि
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 की अवधि में कंपनी ने कुल 1,21,551 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि के 1,04,180 यूनिट्स से 16.7% अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पूरे वित्तीय वर्ष में कंपनी ने लगातार मजबूत प्रदर्शन बनाए रखा है।
YTD घरेलू और निर्यात बिक्री में उल्लेखनीय सुधार
चालू वित्तीय वर्ष के पहले 11 महीनों में घरेलू बिक्री 1,15,412 यूनिट्स रही, जो पिछले वर्ष के 99,788 यूनिट्स से 15.7% अधिक है। वहीं, निर्यात में शानदार 39.8% की वृद्धि दर्ज की गई और यह आंकड़ा 6,139 यूनिट्स तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 4,392 यूनिट्स से काफी अधिक है। यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी की मांग मजबूत बनी हुई है।
रबी सीजन और सरकारी नीतियों से आगे भी मजबूती की उम्मीद
फरवरी 2026 में घरेलू ट्रैक्टर उद्योग की वृद्धि सकारात्मक ग्रामीण भावना, अनुकूल सरकारी नीतियों, जीएसटी में राहत और रबी सीजन की अच्छी संभावनाओं से प्रेरित रही। कंपनी को उम्मीद है कि ये परिस्थितियां आने वाले महीनों में भी जारी रहेंगी, जिससे ट्रैक्टर बिक्री में और तेजी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, फरवरी 2026 का प्रदर्शन भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत देता है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्नोत्तरी
प्रश्न: एस्कॉर्ट्स-कुबोटा ने कितने पिछले साल की तुलना में इस माह कितने ट्रैक्टर बेचे ?
उत्तर: फरवरी 2026 में कंपनी ने कुल 10,339 ट्रैक्टर बेचे, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 8,590 यूनिट्स था।
प्रश्न: पिछले वर्ष के मुकाबले 11 महीने में कितनी घरेलू बिक्री दर्ज की है ?
उत्तर: चालू वित्तीय वर्ष के पहले 11 महीनों में घरेलू बिक्री 1,15,412 यूनिट्स रही, जो पिछले वर्ष के 99,788 यूनिट्स से 15.7% अधिक है।
प्रश्न: एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने फरवरी 2026 में कितने ट्रैक्टर्स की बिक्री दर्ज की ?
उत्तर: घरेलू बाजार में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने फरवरी 2026 में 9,725 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 7,968 यूनिट्स से 22.1% अधिक है।
योगी सरकार लगातार किसानों को खुश करने के लिए कोई ना कोई किसान कल्याणकारी योजना लागू कर रही है। अब इसी कड़ी में योगी सरकार ने होली के पावन त्योहार पर लाखों किसानों के चेहरों पर रौनक बखैर डाली है। जी हाँ, योगी सरकार ने होली पर किसानों को बहुत बड़ा तोहफा प्रदान किया है। अब उत्तरप्रदेश के किसान आधुनिक कृषि यंत्रों को खरीदने पर भारी सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने होली के शुभ अवसर पर किसानों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली के रंग भरने के उद्देश्य से यह सराहनीय और कल्याणकारी कदम उठाया है।
ऐसे किसान जो इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, वे किसान 4 मार्च 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। योगी सरकार की योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी, जो महंगे कृषि उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं होते थे। सब्सिडी मिलने से अब वे भी आधुनिक तकनीक से खेती कर अपनी आमदनी को दोगुना कर पाएंगे।
किन योजनाओं के तहत मिलेगा लाभ ?
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने बहुत सारी प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत आवेदन आमंत्रित किए हैं। किसान निम्नलिखित योजनाओं के तहत अनुदान पर कृषि यंत्र प्राप्त कर सकते हैं:-
सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना
फार्म मशीनरी बैंक योजना
कस्टम हायरिंग सेंटर
कृषि ड्रोन योजना
फसल अवशेष प्रबंधन योजना (पराली प्रबंधन)
स्ट्रॉ मैनेजमेंट मशीनें
अवशेष निस्तारण उपकरण
त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम (बैच ड्रायर और मेज सेलर)
जानिए किन कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ मिलेगा ?
योगी सरकार की इस योजना के अंतर्गत किसानों को कई आधुनिक कृषि उपकरणों पर सब्सिडी का लाभ मिलेगा, जिनमें कृषि ड्रोन, सीड ड्रिल (बीज बोने की मशीन), रोटावेटर, रीपर मशीन, पावर वीडर, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, स्प्रे मशीन, पंप सेट व ट्रैक्टर से जुड़े अन्य आधुनिक यंत्र भी शामिल हैं।
ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया की जानकारी
कृषि विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है, ताकि किसानों को कार्यालयों के चक्कर ना काटने पड़े। आवेदन के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:-
सबसे पहले कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.agridarshan.up.gov.in पर जाएं।
होम पेज पर "किसान कॉर्नर" विकल्प पर क्लिक करें।
अब "यंत्र बुकिंग प्रारंभ" या "ऑनलाइन बुकिंग" लिंक पर क्लिक करें।
अपना पंजीकरण करें या पहले से पंजीकृत हैं तो लॉगिन करें।
मांगी गई सभी जानकारी ध्यानपूर्वक भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
अपने लिए उपयुक्त कृषि यंत्र का चयन करें और आवेदन सबमिट करें।
आवेदन के बाद आपको बुकिंग टोकन जारी किया जाएगा।
योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन हेतु जरूरी दस्तावेज
योगी सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की अनिवार्यता होगी :-
आधार कार्ड (किसान का)
बैंक पासबुक (खाता संख्या और IFSC कोड सहित)
खतौनी/भूमि के दस्तावेज (अपनी जमीन का प्रमाण)
आधार से लिंक मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो
जाति प्रमाण पत्र (यदि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से हैं तो)
नोट: किसान भाई यह सुनिश्चित करें कि उनके द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज साफ और सही होने चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आपका आवेदन रद्द किया जा सकता है।
चयन के बाद करनी होगी यह जरूरी प्रक्रिया
किसानों का चयन होने के बाद और टोकन कन्फर्म हो जाता है, तो कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी:-
टोकन कन्फर्म होने के 10 दिन के भीतर कृषि यंत्र खरीदना अनिवार्य है।
यंत्र खरीदने के बाद उसकी रसीद और फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
यह जानकारी www.agridarshan.up.gov.in या upyantratraking.in पर अपलोड करें।
समय सीमा का पालन न करने पर अनुदान रद्द भी हो सकता है।
छोटे किसानों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
योगी सरकार का खास ध्यान छोटे और सीमांत किसानों पर है। बतादें, कि पहले महंगे कृषि यंत्र खरीदना ज्यादातर किसानों के लिए संभव नहीं था। परंतु, अब अनुदान और सामूहिक मशीन बैंक की सुविधा से खेती करना बेहद आसान हो रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से किसान आवश्यकता के अनुसार मशीन किराये पर भी प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को इसकी मदद से बड़ी पूंजी निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती और काम भी आसानी से पूरा हो जाता है।
किसान भाई किन बातों का विशेष ध्यान रखें ?
आवेदन करते समय सभी जानकारी सही-सही भरें।
दस्तावेज साफ-सुथरे स्कैन करके अपलोड करें।
अंतिम तिथि के आखिरी दिन का इंतजार न करें, वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ सकता है।
आवेदन के बाद टोकन जरूर नोट कर लें।
चयन होने पर तय समय में यंत्र खरीदकर रसीद अपलोड करें।
योगी सरकार ने कितने किसानों को कृषि यंत्र मुहैय्या कराने का कार्य किया है ?
उत्तर प्रदेश के अंदर विगत कुछ वर्षों में कृषि यंत्रीकरण की दिशा में जो काम हुआ है, उसके परिणाम अब स्पष्ट तौर पर नजर आने लगे हैं। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं, कि साल 2017 से लेकर 2025 तक राज्य के किसानों को तकरीबन 3 लाख आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इनमें से 2.31 लाख से अधिक एकल कृषि यंत्र सीधे किसानों तक पहुंचाए गए, जिससे वे खेती में आधुनिक तकनीक का आसानी से उपयोग कर सकें।
ऐसे किसान जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं यानी महंगे यंत्र नहीं खरीद सकते, उनके लिए 8,405 कस्टम हायरिंग सेंटर और 7,351 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। जहां से किराये पर मशीनें लेकर खेती करना काफी ज्यादा आसान हो गया है। जानकारी के लिए बतादें, कि इसी कड़ी में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 जनवरी 2026 तक ही 7,777 नए कृषि यंत्र किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। साथ ही, 51 नए कस्टम हायरिंग सेंटर और 64 फार्म मशीनरी बैंक भी शुरू किए गए हैं, जिससे गांव-गांव तक मशीनों की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्नोत्तरी
प्रश्न: किसान योजना का लाभ लेने के लिए कहाँ आवेदन करें ?
उत्तर: किसान इस योजना के लिए आधिकारिक वेबसाइट: www.agridarshan.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न: योजना का लाभ लेने के लिए अंतिम तिथि क्या है ?
उत्तर: योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया 25 फरवरी 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और आवेदन की अंतिम तिथि 4 मार्च 2026 (रात 12 बजे तक) तक निर्धारित की गई है।
प्रश्न: योजना के तहत टोकन मिलने के बाद कितने दिन में यंत्र खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है ?
उत्तर: योजना के तहत यंत्र खरीदने की समय सीमा टोकन कन्फर्म होने के 10 दिन के भीतर है।
प्रश्न: यंत्र खरीदने में असमर्थ किसानों के लिए योगी सरकार ने क्या कार्य किया है ?
उत्तर: जो किसान महंगे यंत्र नहीं खरीद सकते, उनके लिए योगी सरकार ने 8,405 कस्टम हायरिंग सेंटर और 7,351 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधुनिक तकनीक की सबसे क्रांतिकारी खोजों में से एक है। यह ऐसी तकनीक है जो मशीनों और कंप्यूटर सिस्टम को मानव जैसी सोचने, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
AI सिस्टम बड़े डेटा (Big Data) का विश्लेषण करके पैटर्न पहचानते हैं और उसी आधार पर सटीक निर्णय लेते हैं। आज के समय में AI का उपयोग मोबाइल फोन, कृषि मशीनरी, स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग और मौसम पूर्वानुमान तक में किया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में AI आधारित ट्रैक्टर और स्मार्ट मशीनें किसानों को बेहतर उत्पादन, ईंधन की बचत और सटीक खेती में मदद कर रही हैं।
खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नया दौर
भारत में हर क्षेत्र की तरह कृषि क्षेत्र में भी तेजी से तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने भी तकनीकी बदलावों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए देश का पहला AI-speaking यानी “बोलने वाला” ट्रैक्टर ताज लेकफ्रंट होटल, भोपाल में लॉन्च कर दिया है। यह सिर्फ एक नया ट्रैक्टर मॉडल नहीं बल्कि भारतीय खेती के डिजिटलीकरण की तरफ उठाया गया बड़ा और सराहनीय कदम साबित हो रहा है। लंबे समय से भारतीय किसान ऐसी मशीनों की जरूरत महसूस कर रहे थे, जो केवल ताकतवर ही नहीं बल्कि स्मार्ट भी हों। इस नई तकनीक के साथ ट्रैक्टर अब केवल खेत जोतने वाली मशीन नहीं रहा, बल्कि किसान का डिजिटल दोस्त भी बन गया है।
AI तकनीक ट्रैक्टर में कैसे काम करती है ?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी तकनीक है, जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता देती है। महिंद्रा के नए ट्रैक्टर में AI आधारित वॉइस सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रैक्टर की स्थिति, ऑपरेशन और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी किसान को आवाज के माध्यम से बताता है।
उदाहरण के लिए, यदि इंजन पर ज्यादा लोड आ रहा है, ईंधन कम हो रहा है या किसी पार्ट में समस्या की संभावना है, तो ट्रैक्टर तुरंत ड्राइवर को चेतावनी देता है। पहले किसान को इन चीजों के लिए मीटर या संकेतों पर ध्यान देना पड़ता था, लेकिन अब मशीन खुद बोलकर जानकारी देती है। इससे काम करते समय ध्यान भटकने की संभावना कम होती है और सुरक्षा बढ़ती है।
भारतीय किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह लॉन्च
भारत के अंदर काफी बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम किसान हैं, जिनमें से कई तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नहीं होते। पारंपरिक ट्रैक्टरों में मौजूद जटिल सिस्टम को समझना कई बार मुश्किल होता है। AI बोलने वाला ट्रैक्टर इस समस्या को सीधे हल करता है।
यह ट्रैक्टर किसान को सरल भाषा में निर्देश देता है, जैसे गियर बदलने का सही समय, इंजन की स्थिति या मेंटेनेंस की जरूरत। इससे नए ड्राइवर भी आसानी से मशीन चला सकते हैं। विशेषकर, ग्रामीण क्षेत्रों में जहां तकनीकी सहायता तुरंत उपलब्ध नहीं होती, वहां यह फीचर काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
स्मार्ट खेती की दिशा में बड़ा कदम
आज दुनिया “स्मार्ट फार्मिंग” की ओर बढ़ रही है, जहां डेटा और तकनीक के आधार पर खेती की जाती है। AI ट्रैक्टर इसी अवधारणा का हिस्सा है। यह मशीन खेत की परिस्थितियों के अनुसार काम को अधिक कुशल बना सकती है। उदाहरण के तौर पर, मिट्टी की स्थिति और लोड के अनुसार इंजन प्रदर्शन को संतुलित किया जा सकता है, जिससे ईंधन की बचत होती है। लंबे समय में इससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ सकता है। भारत जैसे देश में, जहां खेती अब भी बड़े पैमाने पर पारंपरिक तरीकों पर निर्भर है, ऐसी तकनीक किसानों को वैश्विक स्तर की खेती अपनाने में मदद कर सकती है।
H1R सीरीज़ — नई पीढ़ी के ट्रैक्टर
महिंद्रा ने इस तकनीक को अपनी नई H1R सीरीज़ के तहत पेश किया है। इस सीरीज़ को विशेष रूप से भारतीय खेतों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें महिंद्रा 475 डीआई एच 1 आर ट्रैक्टर (Mahindra 475 DI H1R Tractor), महिंद्रा 575 डीआई एमएस एच 1 आर ट्रैक्टर (Mahindra 575 DI MS H1R Tractor), महिंद्रा 575 डीआई एच 1 आर ट्रैक्टर (Mahindra 575 DI H1R Tractor) और महिंद्रा 585 डीआई एच 1 आर ट्रैक्टर (Mahindra 585 DI H1R Tractor) ट्रैक्टर शामिल हैं।
नोट:- महिंद्रा के इन ट्रैक्टरों में मजबूत इंजन, बेहतर टॉर्क और उन्नत हाइड्रोलिक सिस्टम दिए गए हैं ताकि भारी कृषि कार्य आसानी से किए जा सकें। चाहे गहरी जुताई हो, ट्रॉली खींचना हो या मल्टी-इंप्लीमेंट कार्य, ये ट्रैक्टर विभिन्न जरूरतों के अनुसार अनुकूल प्रदर्शन देने में सक्षम हैं। AI सिस्टम इस पूरी मशीनरी को और अधिक उपयोगकर्ता के अनुकूल बना देता है।
वॉइस असिस्टेंस: किसान का डिजिटल साथी
महिंद्रा के नए लाँच किए गए AI बोलने वाले ट्रैक्टर की सबसे बड़ी खासियत इसका वॉइस असिस्टेंट है। यह सिस्टम ट्रैक्टर के सेंसर से डेटा लेकर उसे आवाज में बदल देता है। मान लीजिए ट्रैक्टर का तापमान बढ़ रहा है, मशीन तुरंत ड्राइवर को चेतावनी देती है। यदि सर्विस का समय आ गया है, तो ट्रैक्टर खुद याद दिलाता है। इससे मशीन की उम्र बढ़ती है और अचानक खराब होने की संभावना कम हो जाती है। भविष्य में ऐसे सिस्टम क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे अलग-अलग राज्यों के किसानों को और अधिक सुविधा मिलेगी।
ईंधन बचत और बेहतर उत्पादकता
खेती में सबसे बड़ा खर्च डीजल और मशीनरी पर आता है। AI आधारित सिस्टम इंजन की कार्यक्षमता को लगातार मॉनिटर करता है और अनावश्यक ईंधन खपत को कम करने में मदद करता है। जब ट्रैक्टर सही RPM पर चलता है, तो न केवल ईंधन बचाता है, बल्कि इंजन पर दबाव भी कम पड़ता है। इससे लंबे समय तक मशीन का प्रदर्शन स्थिर रहता है। किसान के लिए इसका सीधा मतलब है- कम खर्च और ज्यादा काम।
सुरक्षा और आराम पर विशेष ध्यान
पारंपरिक ट्रैक्टर चलाना कई बार थकाऊ और जोखिम भरा हो सकता है, खासकर लंबे समय तक काम करने पर। AI ट्रैक्टर में ड्राइवर को लगातार जानकारी मिलती रहती है, जिससे दुर्घटना की संभावना कम होती है। यदि ड्राइवर कोई गलती करता है या मशीन असामान्य व्यवहार दिखाती है, तो तुरंत चेतावनी मिलती है। इससे खेत में काम करना अधिक सुरक्षित बन जाता है। साथ ही बेहतर एर्गोनॉमिक डिजाइन और स्मूद ऑपरेशन ड्राइवर की थकान भी कम करते हैं।
ग्रामीण भारत में तकनीकी बदलाव का संकेत
AI ट्रैक्टर का लॉन्च केवल एक उत्पाद लॉन्च नहीं बल्कि ग्रामीण भारत में तकनीकी क्रांति का संकेत है। जैसे-जैसे स्मार्टफोन और इंटरनेट गांवों तक पहुंचे हैं, वैसे-वैसे किसान भी नई तकनीक अपनाने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह ट्रैक्टर दिखाता है कि भविष्य की खेती डेटा-ड्रिवन और ऑटोमेशन आधारित होगी। आने वाले समय में GPS आधारित खेती, ऑटो-स्टेयरिंग और रिमोट मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं भी आम हो सकती हैं।
युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने की संभावना
भारत में कई युवा खेती से दूर जा रहे हैं क्योंकि उन्हें यह क्षेत्र पारंपरिक और कम तकनीकी लगता है। लेकिन AI और स्मार्ट मशीनों के आने से खेती आधुनिक और आकर्षक बन सकती है। जब ट्रैक्टर स्मार्ट डिवाइस की तरह काम करेगा, डेटा देगा और डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा, तो तकनीक-प्रेमी युवा भी कृषि क्षेत्र में नए अवसर देख सकेंगे। इससे कृषि में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा मिल सकता है।
भविष्य की खेती कैसी होगी ?
विशेषज्ञों का मानना है, कि आने वाले वर्षों में कृषि मशीनें पूरी तरह कनेक्टेड और इंटेलिजेंट हो जाएंगी। ट्रैक्टर केवल आदेश मानने वाली मशीन नहीं रहेगा, बल्कि निर्णय लेने में किसान की मदद करेगा। AI सिस्टम मौसम, मिट्टी और कार्य डेटा का विश्लेषण करके सुझाव दे सकता है, जैसे किस गति पर काम करना बेहतर रहेगा या किस समय खेत तैयार करना सही होगा। यह तकनीक धीरे-धीरे प्रिसिजन फार्मिंग की दिशा में भारत को आगे बढ़ा सकती है।
महिंद्रा का AI बोलने वाला ट्रैक्टर भारतीय कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह नवाचार केवल तकनीकी उन्नति नहीं बल्कि किसानों के काम को आसान, सुरक्षित और अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास है। जहां एक ओर यह मशीन आधुनिक तकनीक का उदाहरण है, वहीं दूसरी ओर यह दिखाती है कि भारत की कृषि भी डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। यदि ऐसी तकनीकें बड़े पैमाने पर अपनाई जाती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय खेती अधिक स्मार्ट, उत्पादक और टिकाऊ बन सकती है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्नोत्तरी
प्रश्न: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है ?
उत्तर: कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान का एक क्षेत्र है, जो ऐसी बुद्धिमान मशीनें बनाने पर केंद्रित है, जो ऐसे कार्य कर सकती हैं जिनके लिए आमतौर पर मानवीय बुद्धि की आवश्यकता होती है, जैसे सीखना, तर्क करना और समस्या-समाधान करना।
प्रश्न: महिंद्रा ने अपनी किस सीरीज में पहला AI ट्रैक्टर लॉन्च किया है ?
उत्तर: महिंद्रा ने H1R सीरीज के 4 ट्रैक्टर मॉडल्स में भारत के पहले AI बेस्ड ट्रैक्टर की पेशकश की है।
प्रश्न: महिंद्रा के AI ट्रैक्टर मॉडल से किसानों को क्या लाभ होगा ?
उत्तर: महिंद्रा के AI ट्रैक्टर मॉडल की मदद से किसान को ट्रैक्टर से जुड़ी हर जानकारी जैसे लोड कम या ज्यादा, फ्यूल इनफार्मेशन, ट्रैक्टर सर्विस आदि के बारे में पहले से चेतावनी मिल जाएगी।
प्रश्न: महिंद्रा के पहले AI ट्रैक्टर मॉडल्स में कौन कौन से ट्रैक्टर शामिल हैं ?
उत्तर: महिंद्रा 475 डीआई एच 1 आर ट्रैक्टर, महिंद्रा 575 डीआई एमएस एच 1 आर ट्रैक्टर, महिंद्रा 575 डीआई एच 1 आर ट्रैक्टर और महिंद्रा 585 डीआई एच 1 आर ट्रैक्टर शामिल हैं।
प्रश्न: महिंद्रा का यह AI आधारित ट्रैक्टर सुरक्षा के मामले में कैसा है ?
उत्तर: पारंपरिक ट्रैक्टर चलाना कई बार थकाऊ और जोखिम भरा हो सकता है, खासकर लंबे समय तक काम करने पर। AI ट्रैक्टर में ड्राइवर को लगातार जानकारी मिलती रहती है, जिससे दुर्घटना की संभावना कम होती है।
मौसम विभाग की तरफ से एक बड़ी चेतावनी सामने आ रही है, जो सीधे हमारी खेती-किसानी से जुड़ी है। खबर है, कि साल 2026 में एक बार फिर ‘अल-नीनो’ दस्तक देने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है, कि जुलाई से सितंबर 2026 के बीच प्रशांत महासागर में यह काफी सक्रिय हो सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि इससे हमें क्या फर्क पड़ेगा, तो भाइयों, अल-नीनो आने का सीधा मतलब है कि मानसून की बारिश में कमी आ सकती है, जिससे हमारी फसलों की सिंचाई खतरे में पड़ सकती है। परिणामस्वरुप किसान को उत्पादन और मुनाफे में लाभ की जगह हानि का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं! अल नीनो और ला नीनो के भारतीय कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में।
किसान को मौसम की सही और समय पर जानकारी होना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि समय पर जानकारी होने की वजह से किसान कई सारी अप्रत्याशित घटनाओं से अपनी फसल को बचा सकता है। खेती को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में सबसे बड़ा कारण मौसम ही होता है। हर फसल के लिए एक पर्याप्त मौसम की आवश्यकता होती है। मौसम के अनुकूल होने पर ही फसलों का उत्पादन निर्भर करता है। मौसम में लगातार बदलाव के चलते कृषि उपज पर भी बदलाव देखने को मिलता है। आइए जानते हैं - अल नीनो और ला नीनो के भारतीय कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक एम. महापात्रा के अनुसार, इस वर्ष जुलाई के बाद अल नीनो की घटना घटित होने की संभावना है - यह मध्य प्रशांत महासागर का गर्म होना है जिसे अक्सर भारत में कमजोर मानसून वर्षा से जोड़ा जाता है - लेकिन इस बारे में स्पष्टता अप्रैल में ही आएगी।
अल नीनो को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र के औसत तापमान में वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो लगातार पांच तीन-तीन महीने की अवधियों के दौरान औसत से कम से कम आधा डिग्री अधिक होता है। ऐतिहासिक रूप से, 10 में से छह एल नीनो वर्षों का संबंध भारत में कम वर्षा से रहा है। आप इस आंकड़े से यह अंदाजा लगा सकते हैं कि यह किसानों को किस हद तक प्रभावित कर सकता है।
ला नीनो (La Niño) प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक ठंडी होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। इसे आसान भाषा में "ठंडा चरण" कहते हैं, जो अल नीनो (गर्म चरण) के विपरीत काम करता है। इसके कारण भारत में अच्छी बारिश और कड़ाके की ठंड पड़ती है।
किसानों भाइयों, अभी जो समय चल रहा है यानी जनवरी से मार्च तक, इसमें भी उत्तर-पश्चिमी भारत जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि गेहूं पैदा करने वाले हमारे साथियों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम और सावधानी से करना होगा। हालांकि, मध्य और पूर्वी भारत के किसान साथियों के लिए थोड़ी राहत की बात है, क्योंकि वहां बढ़ती ठंड गेहूं, सरसों और चने के दानों को मजबूती देगी और पैदावार अच्छी हो सकती है।
भारत के किसानों को सबसे ज्यादा खतरा मानसून को लेकर है। साथियों जैसा कि हम सब जानते हैं, कि विगत वर्ष 2024 और 2025 में हमने काफी ज्यादा प्रचंड गर्मी का सामना किया है, और अब 2026 के आखिर में अल-नीनो का प्रभाव और भी मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक एम. महापात्रा के अनुसार विभाग इसको लेकर सटीक जानकारी मार्च के बाद ही दे पाएगा। लेकिन, किसान साथियों को पहले से ही सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्न: अल नीनो क्या होता है ?
उत्तर: एल नीनो को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र के औसत तापमान में वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो लगातार पांच तीन-तीन महीने की अवधियों के दौरान औसत से कम से कम आधा डिग्री अधिक होता है।
प्रश्न: ला नीनो क्या होता है ?
उत्तर: ला नीनो (La Niño) प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक ठंडी होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है।
प्रश्न: अल नीनो का भारत के किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर: अल नीनो की वजह से भारतीय किसानों को वर्षा सामान्य से कम, गर्मियों में तेज लू चलना और उत्पादन में गिरावट जैसे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
प्रश्न: अल नीनो आने का प्रभाव भारत पर पड़ने की कितनी संभावना है ?
उत्तर: अगर हम भारत पर अल नीनो के प्रभाव की बात करें तो ऐतिहासिक रूप से, 10 में से छह एल नीनो वर्षों का संबंध भारत में कम वर्षा से रहा है।
प्रश्न: किसानों को अल नीनो की संभावना के चलते क्या करना चाहिए ?
उत्तर: किसानों को सबसे पहले उन फसलों का चयन करना चाहिए जो कम सिंचाई में भी आसानी से की जा सके। दूसरा सिंचाई के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता खोजें।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली में 'पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026' का भव्य आयोजन 25 फरवरी से लेकर 27 फरवरी तक होने जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने मीडिया को बताया कि आगामी 25 से 27 फरवरी 2026 तक पूसा परिसर स्थित मेला ग्राउंड में 'पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026' का आयोजन किया जा रहा है।
किसान साथियों आपकी जानकारी के लिए बतादें कि इस इस तीन दिवसीय मेले का उद्घाटन 25 फरवरी को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा किया जाएगा। मेले के समापन दिवस यानी 27 फरवरी को केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी विभिन्न प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे।
पूसा मेला 2026 की क्या थीम है
IARI के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष मेले की थीम "विकसित कृषि- आत्मनिर्भर भारत" है जो किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सतत, जलवायु-अनुकूल एवं आय-केंद्रित कृषि विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि मेले में देशभर से एक लाख से अधिक किसानों के शामिल होने की उम्मीद है।
पूसा मेला में लगेंगे 200 से ज्यादा स्टॉल
IARI के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने आगे कहा कि पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में IARI, ICAR के अन्य संस्थानों और विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के 200 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले के दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों पर किसान भाई बहनों को जागरूक करने के लिए क्वेश्चन- आंसर सेशन का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरी लोग वर्टिकल फार्मिंग को कैसे सहज तरीके से अपना सकते हैं इसके लिए लोगों को शिक्षित किया जाएगा ताकि शहरों में रहने वाले लोग घरों की बालकनी जैसे सीमित क्षेत्र में प्रभावी ढंग से सब्जियां उगा सकें।
रोबोटिक्स और AI पर विशेष सत्र
IARI के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव द्वारा दी गई जानकारी के अनुरूप मेले में रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल एग्रीकल्चर जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर विशेष सत्र आयोजित होंगे, जहाँ किसान विशेषज्ञों के साथ प्रश्न-उत्तर सत्र के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान कर सकेंगे।
डॉ. राव ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में खेती को सिर्फ 'खाद्य सुरक्षा' तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे 'पोषण सुरक्षा' और 'वेल्थ क्रिएशन' (धन सृजन) का मुख्य आधार बनाना होगा। इस दिशा में किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रदर्शनी का आयोजन यहां मेले में किया जाएगा।
पूसा मेला में महिला सशक्तिकरण के लिए क्या कुछ
किसान साथियों, 2026 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' है इसलिए महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को उद्यमिता और स्टार्टअप की दिशा में प्रेरित करने के लिए तीन दिवसीय मेले में विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं, जिससे उन्हें मूल्य संवर्धन (Value Addition), प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के नए अवसरों से जोड़ा जा सके। किसानों को वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि इस आंकड़े को और बढ़ाया जा सके। साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों में छात्रों की पढ़ाई और शोध किसानों की वास्तविक समस्याओं के ऊपर हो इसके लिए किसानों से सुझाव भी लिए जाएंगे।
पूसा मेला में आने वाले लोगों के लिए क्या इंतजाम है ?
पूसा मेले में आने वाले किसानों की सुविधा के लिए संस्थान ने व्यापक इंतजाम किए हैं। संस्थान के गेट से मेला स्थल तक पहुँचने के लिए नि:शुल्क वाहन सेवा, पंजीकृत किसानों के लिए मुफ्त आवास और भोजन की व्यवस्था की गई है। मेले में धान, बाजरा, मूंग के साथ-साथ भिंडी, लौकी, करेला और खीरा जैसी सब्जियों की उन्नत किस्मों के बीज बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। किसानों को भारी बीज पैकेट ले जाने में असुविधा न हो, इसके लिए परिसर में ई-वाहनों की व्यवस्था डिलीवरी के लिए की गई है।
पूसा मेला में किसानों को दिया जाएगा पुरस्कार
पूसा मेले में नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार 'आईएआरआई-युवा नवोन्मेषी किसान पुरस्कार' दिया जाएगा। इसमें 7 प्रगतिशील किसानों को आईएआरआई फेलो फार्मर और 36 किसानों को नवोन्मेषी किसान पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बतादें, कि यह मेला सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती जैसी सरकारी योजनाओं को किसानों तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगा।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
खेती-किसानी विश्व अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, विशेषकर विकासशील देशों के लिए कृषि किसी वरदान से कम नहीं। क्योंकि, कृषि रोजगार, आय और खाद्य सुरक्षा का प्रमुख स्रोत है। विश्व स्तर पर बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। बहुत सारे देशों की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, विश्व की बड़ी जनसंख्या कृषि गतिविधियों से जुड़ी है, जबकि अनेक देशों के कुल निर्यात में कृषि उत्पादों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। ट्रैक्टरचॉइस के इस लेख में आज हम आपको कृषि का महत्व और विश्व के 10 सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।
विकासशील देशों में कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सतत विकास का आधार भी है। हालांकि, कई कृषि प्रधान देश खाद्य आयात पर निर्भर हैं, फिर भी स्थानीय उत्पादन बढ़ाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। तकनीकी उन्नति, बेहतर नीतियां और आधुनिक खेती पद्धतियों ने वैश्विक कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी है। विश्व की लगभग 11% भूमि खेती के लिए उपयोग होती है, जबकि लगभग 26% भूमि पशुपालन के लिए आरक्षित है। कृषि उत्पादन के मुख्य प्रकारों में खाद्यान्न, ईंधन, रेशा और औद्योगिक कच्चा माल शामिल हैं। आइए अब विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों का संक्षिप्त परिचय जानें।
1. चीन
चीन विश्व का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश है। सीमित कृषि योग्य भूमि के बावजूद यह अपनी विशाल जनसंख्या का भरण-पोषण करता है। आधुनिक तकनीकों और नीतिगत सुधारों के कारण देश ने कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक
गेहूं, मक्का, सोयाबीन और बाजरा का प्रमुख उत्पादक
विशाल सिंचाई क्षेत्र
2. संयुक्त राज्य अमेरिका
संयुक्त राज्य अमेरिका कृषि प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी है।
मक्का, सोयाबीन और गेहूं का विशाल उत्पादन
कृषि उत्पादों का शुद्ध निर्यातक
उन्नत मशीनरी और डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग
3. ब्राजील
ब्राजील कृषि निर्यात में वैश्विक शक्ति है।
गन्ने का विश्व में अग्रणी उत्पादक
कॉफी और सोयाबीन का प्रमुख निर्यातक
संतरे के उत्पादन में अग्रणी
4. भारत
भारत में बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है।
दूध उत्पादन में विश्व में प्रथम
फल, सब्जियां और मसालों का प्रमुख उत्पादक
विश्व का सबसे बड़ा सिंचित क्षेत्र
5. रूस
रूस अनाज उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
गेहूं प्रमुख फसल
विशाल कृषि भूमि
चुकंदर उत्पादन में वृद्धि
6. फ्रांस
फ्रांस यूरोप का प्रमुख कृषि उत्पादक देश है।
तिलहन, अनाज और डेयरी उत्पादन में अग्रणी
शराब और मादक पेय का बड़ा निर्यातक
7. मेक्सिको
मेक्सिको विविध फसलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है।
मक्का, बीन्स और एवोकाडो का प्रमुख उत्पादक
कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका
8. जापान
जापान में सीमित भूमि के बावजूद सघन कृषि की जाती है।
चावल मुख्य फसल
डेयरी और मांस उपभोग में वृद्धि
खाद्य आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयास
9. जर्मनी
जर्मनी यूरोप के प्रमुख कृषि निर्यातकों में शामिल है।
सूअर मांस, आलू और अनाज उत्पादन
जैविक खेती में उल्लेखनीय भागीदारी
10. तुर्की
तुर्की अनुकूल जलवायु के कारण आत्मनिर्भर खाद्य उत्पादक देश है।
गेहूं और चुकंदर प्रमुख
खुबानी, अंजीर और हेज़लनट का बड़ा उत्पादक
कृषि को मुख्य व्यवसाय मानने वाले देश
कुछ देशों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है:-
लाइबेरिया – जीडीपी का लगभग 76.9% कृषि से
सोमालिया – जीडीपी का लगभग 60.2% कृषि से
गिनी-बिसाऊ – जीडीपी का लगभग 55.8% कृषि से
अंततः स्पष्ट है, कि कृषि केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती, रोजगार सृजन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख आधार है। विश्व के कई देशों की आर्थिक संरचना कृषि पर निर्भर करती है, जिससे करोड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। बढ़ती जनसंख्या और बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और सतत कृषि पद्धतियां इस क्षेत्र को नई दिशा दे रही हैं। यदि सरकारें और किसान मिलकर नवाचार, संसाधन संरक्षण और उत्पादकता वृद्धि पर ध्यान दें, तो कृषि भविष्य में और अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और लाभकारी क्षेत्र बन सकती है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
बिहार विधानसभा में पेश किए गए राज्य बजट 2026-27 में किसानों के लिए एक बड़ी राहत का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के किसानों को हर साल 3,000 रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की है। यह राशि केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाले 6,000 रुपये के अलावा होगी। इस तरह अब बिहार के किसानों को कुल 9,000 रुपये सालाना की सीधी आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से खासकर छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी मदद मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की कीमतों में इजाफा किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे समय में राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त 3,000 रुपये की सहायता किसानों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। सरकार का कहना है कि इस राशि से किसान समय पर खेती से जुड़े जरूरी इनपुट खरीद सकेंगे और उन्हें कर्ज पर निर्भरता भी कम होगी। विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए यह मदद उनकी रोजमर्रा की कृषि जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।
वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बजट भाषण के दौरान कृषि क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि रोडमैप-4 पर तेजी से काम कर रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और खेती को लाभकारी बनाना है। सरकार का मानना है कि जब तक किसान आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होंगे, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में अतिरिक्त राशि जोड़ने का फैसला लिया गया है।
मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि योजना के साथ जोड़कर लागू किया जाएगा। पीएम किसान योजना के तहत किसानों को पहले से ही सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में मिलते हैं। अब राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली 3,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता से किसानों की कुल मदद बढ़कर 9,000 रुपये हो जाएगी। सरकार का कहना है कि यह राशि किसानों को समय पर खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में मदद करेगी और उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होगी।
बिहार बजट 2026-27 का कुल आकार 3.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। सरकार ने साफ किया है कि इस बजट में विकास के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखा गया है। एनडीए सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का वादा किया था, जिसे अब बजट के जरिए पूरा किया गया है। साथ ही, इस योजना का नाम महान समाज सुधारक कर्पूरी ठाकुर के नाम पर रखने का संकेत भी पहले दिया जा चुका है।
इस बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क, पुल, बिजली, पानी और भवन निर्माण जैसे बुनियादी ढांचे के लिए 63,455 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शिक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हुए स्कूल और कॉलेज शिक्षा के लिए 68,216 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 21,270 करोड़ रुपये और ग्रामीण विकास के लिए 23,701 करोड़ रुपये रखे गए हैं। महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 10,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता या ऋण का प्रावधान किया गया है। सरकार ने 2025 से 2030 के बीच 1 करोड़ रोजगार सृजन का दावा भी किया है। इसके अलावा सिंचाई, हर खेत तक पानी, गंगा जल आपूर्ति योजना और बिजली उत्पादन बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया गया है।
बिहार बजट 2026-27 में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कई अहम घोषणाएं भी की गई हैं। पीएमसीएच में पहले चरण में 1100 बेड तैयार किए जाएंगे। पूर्णियां, बेतिया, समस्तीपुर, मधेपुरा और सारण के बाद 10 अन्य जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव है। हर पंचायत में मॉडल स्कूल खोलने और हर कमिश्नरी में मेगा स्किल सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की गई है। कुल मिलाकर, यह बजट किसानों को राहत देने के साथ-साथ राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
देश के किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को और मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए सुधारों का प्रस्ताव रखा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के ऐलान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि किसानों को अब अधिक आसान और सुगम तरीके से कृषि ऋण मिल सकेगा। इन बदलावों का उद्देश्य है कि किसानों को समय पर बिना रुकावट लोन उपलब्ध हो, जिससे खेती की लागत कम हो और आर्थिक मजबूती बढ़े।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए तुरंत ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत किसान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, फसल कटाई के बाद के खर्च और अन्य कृषि निवेश के लिए लोन ले सकते हैं। KCC की खासियत यह है कि किसानों को बार-बार बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती और जरूरत के समय वे आसानी से धन निकाल सकते हैं।
यह योजना केवल जमीन के मालिक किसानों तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत किसान, किराएदार किसान, मौखिक पट्टेदार, बटाईदार, स्वयं सहायता समूह (SHG) और संयुक्त देयता समूह (JLG) भी पात्र हैं। इससे उन किसानों को भी वित्तीय सहायता मिलती है जिनके पास अपनी जमीन नहीं है, लेकिन वे कृषि कार्य में सक्रिय हैं।
संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत KCC धारकों को 5 लाख रुपये तक का शॉर्ट-टर्म एग्रीकल्चर लोन दिया जाता है। इस पर 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर लागू होती है। यदि किसान समय पर भुगतान करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 3 प्रतिशत का ब्याज अनुदान मिलता है। इस प्रकार समय पर भुगतान करने वाले किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर और भी कम हो जाती है, जिससे उनकी आर्थिक बचत बढ़ती है।
RBI के प्रस्ताव के तहत KCC की वैधता अवधि बढ़ाकर 6 वर्ष करने की योजना है, जिससे बार-बार नवीनीकरण की आवश्यकता कम होगी। साथ ही, ड्राइंग लिमिट को हर फसल चक्र के अनुसार तय करने का प्रस्ताव है, ताकि किसान अपनी जरूरत के अनुसार धन निकाल सकें। इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन, आधुनिक कृषि यंत्र और डिजिटल तकनीक पर होने वाले खर्च को भी KCC के दायरे में शामिल करने की तैयारी है।
KCC योजना से किसानों को खेती और फसल कटाई के बाद की गतिविधियों के लिए समय पर पूंजी मिलती है। इससे वे अपनी उपज को उचित समय पर बेच सकते हैं और बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी सहायक गतिविधियों में निवेश के अवसर भी बढ़ते हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों की साहूकारों पर निर्भरता कम होती है और वे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़ते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि RBI के प्रस्तावित सुधार लागू होते हैं, तो किसान क्रेडिट कार्ड योजना और अधिक प्रभावी बन जाएगी। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा, आधुनिक तकनीकों को अपनाने का अवसर और आय बढ़ाने का बेहतर मार्ग मिलेगा। आने वाले समय में KCC योजना देश के किसानों के लिए एक सशक्त वित्तीय सहारा साबित हो सकती है।
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