मौसम विभाग के अनुसार 2026 में अल नीनो की संभावना से भारतीय किसानों में चिंता

By: Tractor Choice Published on: 25-Feb-2026
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2026 में अल नीनो की दस्तक का पूर्वानुमान

मौसम विभाग की तरफ से एक बड़ी चेतावनी सामने आ रही है, जो सीधे हमारी खेती-किसानी से जुड़ी है। खबर है, कि साल 2026 में एक बार फिर ‘अल-नीनो’ दस्तक देने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है, कि जुलाई से सितंबर 2026 के बीच प्रशांत महासागर में यह काफी सक्रिय हो सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि इससे हमें क्या फर्क पड़ेगा, तो भाइयों, अल-नीनो आने का सीधा मतलब है कि मानसून की बारिश में कमी आ सकती है, जिससे हमारी फसलों की सिंचाई खतरे में पड़ सकती है। परिणामस्वरुप किसान को उत्पादन और मुनाफे में लाभ की जगह हानि का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं! अल नीनो और ला नीनो के भारतीय कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में।

किसान को मौसम की सही और समय पर जानकारी होना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि समय पर जानकारी होने की वजह से किसान कई सारी अप्रत्याशित घटनाओं से अपनी फसल को बचा सकता है। खेती को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में सबसे बड़ा कारण मौसम ही होता है। हर फसल के लिए एक पर्याप्त मौसम की आवश्यकता होती है। मौसम के अनुकूल होने पर ही फसलों का उत्पादन निर्भर करता है। मौसम में लगातार बदलाव के चलते कृषि उपज पर भी बदलाव देखने को मिलता है।  आइए जानते हैं - अल नीनो और ला नीनो के भारतीय कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में।

आईएमडी के महानिदेशक एम. महापात्रा ने एल-नीनो पर क्या कहा ?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक एम. महापात्रा के अनुसार, इस वर्ष जुलाई के बाद अल नीनो की घटना घटित होने की संभावना है - यह मध्य प्रशांत महासागर का गर्म होना है जिसे अक्सर भारत में कमजोर मानसून वर्षा से जोड़ा जाता है - लेकिन इस बारे में स्पष्टता अप्रैल में ही आएगी।

अल नीनो क्या होता है ?

अल नीनो को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र के औसत तापमान में वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो लगातार पांच तीन-तीन महीने की अवधियों के दौरान औसत से कम से कम आधा डिग्री अधिक होता है। ऐतिहासिक रूप से, 10 में से छह एल नीनो वर्षों का संबंध भारत में कम वर्षा से रहा है। आप इस आंकड़े से यह अंदाजा लगा सकते हैं कि यह किसानों को किस हद तक प्रभावित कर सकता है।

ला नीनो क्या होता है ?

ला नीनो (La Niño) प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक ठंडी होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। इसे आसान भाषा में "ठंडा चरण" कहते हैं, जो अल नीनो (गर्म चरण) के विपरीत काम करता है। इसके कारण भारत में अच्छी बारिश और कड़ाके की ठंड पड़ती है।

इन राज्यों में वर्षा सामान्य से कम का अनुमान

किसानों भाइयों, अभी जो समय चल रहा है यानी जनवरी से मार्च तक, इसमें भी उत्तर-पश्चिमी भारत जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि गेहूं पैदा करने वाले हमारे साथियों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम और सावधानी से करना होगा। हालांकि, मध्य और पूर्वी भारत के किसान साथियों के लिए थोड़ी राहत की बात है, क्योंकि वहां बढ़ती ठंड गेहूं, सरसों और चने के दानों को मजबूती देगी और पैदावार अच्छी हो सकती है।

मानसून किसान की चिंता का मुख्य केंद्र

भारत के किसानों को सबसे ज्यादा खतरा मानसून को लेकर है। साथियों जैसा कि हम सब जानते हैं, कि विगत वर्ष 2024 और 2025 में हमने काफी ज्यादा प्रचंड गर्मी का सामना किया है, और अब 2026 के आखिर में अल-नीनो का प्रभाव और भी मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक एम. महापात्रा के अनुसार विभाग इसको लेकर सटीक जानकारी मार्च के बाद ही दे पाएगा। लेकिन, किसान साथियों को पहले से ही सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है।

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प्रश्नोत्तरी

प्रश्न: अल नीनो क्या होता है ?

उत्तर:  एल नीनो को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र के औसत तापमान में वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो लगातार पांच तीन-तीन महीने की अवधियों के दौरान औसत से कम से कम आधा डिग्री अधिक होता है।

प्रश्न: ला नीनो क्या होता है ?

उत्तर: ला नीनो (La Niño) प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक ठंडी होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है।

प्रश्न: अल नीनो का भारत के किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

उत्तर: अल नीनो की वजह से भारतीय किसानों को वर्षा सामान्य से कम, गर्मियों में तेज लू चलना और उत्पादन में गिरावट जैसे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

प्रश्न: अल नीनो आने का प्रभाव भारत पर पड़ने की कितनी संभावना है ?

उत्तर: अगर हम भारत पर अल नीनो के प्रभाव की बात करें तो ऐतिहासिक रूप से, 10 में से छह एल नीनो वर्षों का संबंध भारत में कम वर्षा से रहा है।

प्रश्न: किसानों को अल नीनो की संभावना के चलते क्या करना चाहिए ?

उत्तर: किसानों को सबसे पहले उन फसलों का चयन करना चाहिए जो कम सिंचाई में भी आसानी से की जा सके। दूसरा सिंचाई के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता खोजें।

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