दिसंबर 2025 रिटेल सेल्स रिपोर्ट: 1.12 लाख से ज्यादा ट्रैक्टरों की बिक्री

By: tractorchoice Published on: 06-Jan-2026
Retail Sales Report

दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर रिटेल बिक्री मजबूत

दिसंबर 2025 में भारतीय ट्रैक्टर बाजार ने मजबूती के साफ संकेत दिए, जहां कुल रिटेल बिक्री बढ़कर 1,12,943 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 98,815 यूनिट्स था। यह सालाना आधार पर उल्लेखनीय बढ़त को दर्शाता है। हालांकि, उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार ये आंकड़े FADA द्वारा आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन ब्रांड स्तर पर बाजार की दिशा और प्रतिस्पर्धा को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। इस महीने बड़े ब्रांड्स ने अपनी पकड़ और मजबूत की, जबकि कुछ कंपनियों को बाजार हिस्सेदारी में गिरावट का सामना करना पड़ा।

ब्रांड-वार ट्रैक्टर बिक्री रिपोर्ट: किस कंपनी ने मारी बाज़ी ?

महिंद्रा

महिंद्रा ने ट्रैक्टर बाजार में अपना दबदबा कायम रखते हुए पहला स्थान बरकरार रखा। दिसंबर 2025 में कंपनी ने 29,476 यूनिट्स की बिक्री की। ब्रांड की बाजार हिस्सेदारी 26.10% रही, जो दिसंबर 2024 में 24.59% थी। इस तरह महिंद्रा ने 1.51% की YoY बढ़त दर्ज की। यह बढ़ोतरी कंपनी की मजबूत मांग और व्यापक ग्रामीण पहुंच को दिखाती है।

स्वराज

स्वराज ने दूसरा स्थान बनाए रखा। कंपनी ने दिसंबर 2025 में 22,209 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज की और 19.66% बाजार हिस्सेदारी हासिल की। पिछले साल दिसंबर में यह आंकड़ा 18,230 यूनिट्स और 18.45% बाजार हिस्सेदारी का था। इस तरह स्वराज ने 1.22% की YoY बढ़त दर्ज की, जो उसकी स्थिर वृद्धि को दिखाता है।

सोनालीका

सोनालीका तीसरे स्थान पर रही। कंपनी ने 13,932 यूनिट्स की बिक्री की और 12.34% बाजार हिस्सेदारी हासिल की। हालांकि बिक्री पिछले साल (12,780 यूनिट्स) से ज्यादा रही, लेकिन बाजार हिस्सेदारी 12.93% से घटकर 12.34% हो गई, यानी 0.59% की YoY गिरावट दर्ज की गई।

एस्कॉर्ट्स कुबोटा

एस्कॉर्ट्स (फार्मट्रैक और पावरट्रैक ट्रैक्टर) दिसंबर 2025 में सबसे बड़ा गेनर बनकर उभरा। कंपनी ने 13,097 यूनिट्स की बिक्री की और इसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 11.60% हो गई। यह प्रमुख कंपनियों में 2.23% की सबसे बड़ी YoY बढ़त है।

 कुबोटा

कुबोटा को भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। कंपनी ने दिसंबर 2025 में केवल 324 यूनिट्स की बिक्री की। इसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 0.29% रह गई, जो 1.22% की YoY गिरावट को दिखाता है। यह गिरावट बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दबाव को दिखाती है।

मैसी फर्ग्यूसन

मैसी फर्ग्यूसन ने दिसंबर 2025 में 11,483 यूनिट्स की बिक्री की और इसकी बाजार हिस्सेदारी 10.17% रही। हालांकि बिक्री मजबूत रही, लेकिन पिछले साल की 11.70% हिस्सेदारी के मुकाबले इसमें 1.53% की YoY गिरावट दर्ज की गई।

जॉन डियर

जॉन डियर ने 8,301 ट्रैक्टर बेचे और इसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 7.35% हो गई, जो एक साल पहले 6.33% थी। इस तरह ब्रांड ने 1.02% की YoY बढ़त दर्ज की, जो भारतीय बाजार में इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाती है।

आयशर

आयशर ने 6,907 यूनिट्स की बिक्री की, लेकिन इसकी बाजार हिस्सेदारी 7.06% से घटकर 6.12% रह गई। 0.94% की YoY गिरावट यह संकेत देती है कि प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स की तेज वृद्धि के कारण आइशर की स्थिति कमजोर हुई है।

न्यू हॉलैंड

न्यू हॉलैंड ने 4,860 यूनिट्स की बिक्री की और इसकी बाजार हिस्सेदारी 4.06% से बढ़कर 4.30% हो गई। 0.24% की YoY बढ़त स्थिर और निरंतर बढ़ोतरी को दिखाता है।

कैप्टन

कैप्टन का प्रदर्शन कमजोर रहा। इसकी बिक्री घटकर 516 यूनिट्स रह गई और बाजार हिस्सेदारी 1.22% से गिरकर 0.46% हो गई। यानी 0.77% की YoY गिरावट आई जो कमजोर मांग या प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने को दिखाती है।

इंडो फार्म

इंडो फार्म ने 205 यूनिट्स की बिक्री की। इसकी बाजार हिस्सेदारी 0.20% से घटकर 0.18% रह गई, यानी 0.02% की YoY गिरावट, जो सीमित लेकिन स्थिर प्रदर्शन को दिखाती है।

ऐस

ऐस ने 176 यूनिट्स की बिक्री की और इसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग स्थिर रहते हुए 0.16% रही। 0.01% की मामूली YoY गिरावट से पता चलता है कि कंपनी का प्रदर्शन लगभग स्थिर रहा।

प्रीत

प्रीत ने 112 यूनिट्स की बिक्री की। इसकी बाजार हिस्सेदारी 0.16% से घटकर 0.10% रह गई, यानी 0.06% की YoY गिरावट आई।

एसडीएफ

एसडीएफ ने 65 यूनिट्स की बिक्री की और इसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही, जो 0.07% से घटकर 0.06% हो गई। 0.01% की YoY गिरावट सीमित स्तर के संचालन को दिखाती है।

अन्य ट्रैक्टर्स

अन्य छोटे ट्रैक्टर निर्माताओं ने दिसंबर 2025 में कुल मिलाकर 564 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, लेकिन इसके बावजूद उनकी सामूहिक बाजार हिस्सेदारी में स्पष्ट गिरावट देखने को मिली। पिछले साल जहां इनकी हिस्सेदारी 1.18% थी, वहीं इस बार यह घटकर 0.50% रह गई, यानी सालाना आधार पर 0.68% की कमी आई। यह रुझान साफ तौर पर बताता है कि ट्रैक्टर बाजार धीरे-धीरे एकीकरण की ओर बढ़ रहा है, जहां बड़ी और स्थापित कंपनियां तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं और अधिकांश नई मांग पर कब्जा करती जा रही हैं। छोटे ब्रांड्स के लिए प्रतिस्पर्धा का दबाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।

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