यूपी किसानों की चमकी किस्मत: 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ

By: Tractor Choice Published on: 18-May-2026
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यूपी में गन्ना किसानों के लिए नई उम्मीद

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समय पर गन्ना भुगतान, एथनॉल उत्पादन में वृद्धि और तकनीक आधारित व्यवस्थाओं ने किसानों का भरोसा मजबूत किया है। यही कारण है कि आज प्रदेश के किसान गन्ने की खेती को लाभकारी मान रहे हैं। सरकार का दावा है कि किसानों को सीधे बैंक खातों में भुगतान देकर पारदर्शिता लाई गई है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई और किसानों को उनका पैसा समय पर मिलने लगा। परिणामस्वरूप यूपी आज देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य बन गया है।

रिकॉर्ड भुगतान से किसानों को मिला बड़ा लाभ

प्रदेश सरकार के अनुसार साल 2017 से अब तक गन्ना किसानों को 3,21,963 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है। यह भुगतान सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजा गया। इससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। सरकार का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर भुगतान ने किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समय पर पैसा मिलने से किसान खेती में दोबारा निवेश कर पा रहे हैं और आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपनाने लगे हैं।

कर्जमाफी और बढ़ी कीमतों से बढ़ा उत्साह

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए सिर्फ भुगतान ही नहीं बल्कि कर्जमाफी की भी बड़ी योजना लागू की। सरकार ने 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर्जमाफी कर किसानों को राहत दी। इसके साथ ही गन्ने की कीमतों में समय-समय पर वृद्धि भी की गई। किसानों का कहना है कि जब फसल का उचित दाम और समय पर भुगतान मिलता है तो खेती के प्रति उनका विश्वास बढ़ता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान अब गन्ने की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

पिछली सरकारों की तुलना में बड़ा अंतर

गन्ना भुगतान के आंकड़ों को देखें तो वर्तमान सरकार का प्रदर्शन पहले की सरकारों की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है। साल 2007 से 2012 के बीच किसानों को 52,131 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। वहीं 2012 से 2017 तक यह आंकड़ा 95,215 करोड़ रुपये रहा। लेकिन 2017 के बाद पिछले 9 वर्षों में रिकॉर्ड 3,21,963 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह आंकड़ा बताता है कि गन्ना किसानों के भुगतान में काफी तेजी आई है। सरकार इसे अपनी पारदर्शी और किसान हितैषी नीति का परिणाम मान रही है।

‘स्मार्ट गन्ना किसान’ पहल से आई पारदर्शिता

प्रदेश सरकार की ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ पहल ने गन्ना खेती और भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। गन्ने का क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को गन्ना पर्ची सीधे उनके मोबाइल फोन पर मिलती है। इससे किसानों को चीनी मिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। डिजिटल व्यवस्था से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी रोक लगी है। किसान अब घर बैठे अपनी जानकारी देख सकते हैं और भुगतान की स्थिति भी ऑनलाइन जान सकते हैं।

2025-26 में गन्ने के दाम में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। इसके बाद अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। इस बढ़ोतरी से किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिला। सरकार का मानना है कि बेहतर मूल्य मिलने से किसानों का उत्साह और बढ़ा है। किसान अब अधिक क्षेत्र में गन्ने की खेती कर रहे हैं और उत्पादन में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

यूपी बना देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य

उत्तर प्रदेश में गन्ने के क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में लगभग 29.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई। यह देश में सबसे अधिक है। सरकार के प्रयासों के कारण यूपी आज देश का अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य बन चुका है। प्रदेश में लगभग 121 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं, जो लाखों किसानों और मजदूरों को रोजगार भी दे रही हैं। गन्ना उद्योग अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन गया है।

एथनॉल उत्पादन से मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था

उत्तर प्रदेश ने एथनॉल उत्पादन में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में एथनॉल उत्पादन बढ़कर लगभग 188 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है। एथनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों की आय में वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को समय पर भुगतान करना आसान हो गया है। इसके अलावा एथनॉल उद्योग ने युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। सरकार का कहना है कि गन्ना और एथनॉल आधारित उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। किसानों की आय बढ़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज हुई हैं और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।

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