छत्तीसगढ़ सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 22 मई 2026 से प्रदेश के सभी 2516 पेट्रोल पंपों पर ड्रम और जरीकेन में फ्यूल देने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि कई जगहों पर बड़े पैमाने पर पेट्रोल और डीजल का अवैध भंडारण किया जा रहा था, जिससे कालाबाजारी और कृत्रिम कमी जैसी समस्याएं पैदा हो रही थीं। ऐसे में सरकार ने फ्यूल वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए यह सख्त फैसला लिया। हालांकि इस निर्णय के बाद किसानों की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने कृषि कार्यों के लिए विशेष राहत देने का ऐलान भी किया है।
सरकार ने साफ किया है कि यह रोक किसानों के नियमित कृषि कार्यों पर लागू नहीं होगी। खेती-किसानी में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंपों के लिए किसानों को डीजल मिलता रहेगा। खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया ताकि किसानों को खेती के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। ग्रामीण इलाकों में कई किसान खेतों तक मशीनें ले जाने और सिंचाई के लिए ड्रम या जरीकेन में डीजल ले जाते हैं। सरकार ने ऐसी जरूरतों को समझते हुए प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वास्तविक किसानों को आवश्यक फ्यूल उपलब्ध कराया जाए। इससे खेती का काम बिना रुकावट जारी रह सकेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि ड्रम और जरीकेन में खुले तौर पर फ्यूल बिक्री से कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही थीं। कुछ लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीदकर उसका अवैध भंडारण कर रहे थे, जबकि कई मामलों में कालाबाजारी की शिकायतें भी मिली थीं। इससे आम लोगों और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को परेशानी होती थी। सरकार ने माना कि यदि इस व्यवस्था पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाता तो भविष्य में फ्यूल संकट जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती थी। इसलिए प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में फिलहाल पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी प्रकार की घबराहट या फ्यूल की कमी की आशंका नहीं रखनी चाहिए। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में लगभग 4 करोड़ 3 लाख लीटर पेट्रोल और 5 करोड़ 55 लाख लीटर डीजल उपलब्ध है। इसके अलावा 24 मई 2026 को नई खेप के रूप में 23 लाख 33 हजार लीटर पेट्रोल और 62 लाख 40 हजार लीटर डीजल राज्य को प्राप्त हुआ है। इन आंकड़ों से यह साफ है कि आने वाले समय में भी राज्य में फ्यूल सप्लाई सामान्य बनी रहेगी।
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले सरकार किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं चाहती। यही कारण है कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार तैयारियां की जा रही हैं। इस समय किसानों को खेत की जुताई, बुवाई और सिंचाई जैसे कई कामों के लिए डीजल की आवश्यकता होती है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना बनाई है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में डीजल मिल सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांव और कृषि क्षेत्रों में फ्यूल सप्लाई पर विशेष नजर रखी जाए ताकि खेती का काम प्रभावित न हो। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को बिना किसी बाधा के कृषि कार्यों के लिए ईंधन उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे फ्यूल आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी करें। जिला स्तर पर समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं भी डीजल की कृत्रिम कमी पैदा न हो। प्रशासन को यह भी कहा गया है कि यदि किसी क्षेत्र में किसानों को डीजल मिलने में परेशानी आती है तो तत्काल समाधान किया जाए। पेट्रोल पंपों पर भी नियमित जांच की जाएगी ताकि नियमों का उल्लंघन न हो। सरकार चाहती है कि फ्यूल वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित रहे, जिससे आम जनता और किसानों दोनों को राहत मिल सके।
सरकार लगातार किसानों को यह भरोसा दिला रही है कि उनके कृषि कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार किसान हैं, इसलिए उनकी जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को समय पर डीजल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि खरीफ सीजन के दौरान किसी भी जिले में ईंधन संकट जैसी स्थिति न बने। किसानों को राहत देने के लिए स्थानीय स्तर पर भी विशेष व्यवस्था बनाने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम भविष्य में फ्यूल वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। ड्रम और जरीकेन में अनियंत्रित फ्यूल बिक्री बंद होने से कालाबाजारी पर रोक लगेगी और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सही मात्रा में ईंधन पहुंच सकेगा। वहीं किसानों को दी गई छूट से कृषि कार्यों पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। यदि प्रशासन सही तरीके से निगरानी करता है तो यह व्यवस्था लंबे समय तक सफल साबित हो सकती है। इससे राज्य में फ्यूल प्रबंधन मजबूत होगा और आम लोगों के साथ किसानों को भी संतुलित लाभ मिल सकेगा।
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प्रश्न: छत्तीसगढ़ सरकार ने ड्रम और जरीकेन में फ्यूल देने पर रोक क्यों लगाई ?
उत्तर: सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और कृत्रिम कमी रोकने के लिए यह सख्त फैसला लागू किया है।
प्रश्न: किसानों को इस फैसले में क्या राहत दी गई है ?
उत्तर: किसानों को ट्रैक्टर और सिंचाई पंप चलाने के लिए जरूरत अनुसार डीजल लेने की विशेष छूट दी गई है।
प्रश्न: राज्य में वर्तमान में कितना डीजल उपलब्ध है ?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में अभी लगभग 5 करोड़ 55 लाख लीटर डीजल उपलब्ध है, जिससे आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
प्रश्न: सरकार ने जिला प्रशासन को क्या निर्देश दिए हैं ?
उत्तर: जिला प्रशासन को डीजल आपूर्ति की निगरानी और किसानों को समय पर ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रश्न: खरीफ सीजन में सरकार की प्राथमिकता क्या है ?
उत्तर: सरकार की प्राथमिकता किसानों को बिना बाधा डीजल उपलब्ध कराकर खेती और सिंचाई कार्य सुचारु रूप से चलाना है।