एस्कॉर्ट्स कुबोटा का 35 एचपी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तैयार, सरकार से सब्सिडी का इंतजार

By: Tractor Choice
Published on: 11-Sep-2026
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35 एचपी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर हुआ तैयार

एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड का 35 एचपी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बाजार में उतरने के लिए लगभग तैयार है। कंपनी के अनुसंधान एवं विकास विभाग ने इसके विकास का काम करीब-करीब पूरा कर लिया है।

हालांकि, कंपनी ने फिलहाल इसकी पूर्ण व्यावसायिक लॉन्चिंग को रोक रखा है। कंपनी का कहना है, कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की कीमत अभी डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में काफी अधिक है।

ऐसे में बड़े स्तर पर उत्पादन और बिक्री शुरू करने से पहले सरकार की ओर से सब्सिडी या किसी अन्य प्रोत्साहन की जरूरत है। कंपनी को उम्मीद है कि सरकारी सहायता मिलने के बाद इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को किसानों के लिए अधिक किफायती बनाया जा सकेगा।

सरकारी सहायता मिलने के बाद लॉन्च पर फैसला

एस्कॉर्ट्स कुबोटा के महाप्रबंधक और ईवी सिस्टम इंजीनियरिंग प्रमुख जयगोपाल एस. ने दिल्ली में आयोजित इंडिया क्लीन ट्रांसपोर्टेशन समिट में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को लेकर कंपनी की रणनीति साझा की। उन्होंने बताया कि 35 एचपी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का विकास लगभग पूरा हो चुका है और अब इसे बाजार में उतारने का फैसला प्रबंधन स्तर पर किया जाना है।

कंपनी सरकार से सब्सिडी अथवा दूसरे प्रोत्साहनों की उम्मीद कर रही है, ताकि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का व्यावसायिक उत्पादन और बिक्री आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो सके। कंपनी का मानना है कि शुरुआती कीमत कम होने से किसानों के बीच इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है।

25 एचपी मॉडल के बाद विकसित किया नया ट्रैक्टर

एस्कॉर्ट्स कुबोटा, एस्कॉर्ट्स समूह और जापान की कुबोटा कॉरपोरेशन के गठजोड़ से बनी कंपनी है। कंपनी पहले से अमेरिका में शौकिया किसानों के लिए 25 एचपी का इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बेच रही है। वहां से मिले ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर कंपनी ने अधिक क्षमता वाली बैटरी के साथ नया 35 एचपी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर विकसित किया है।

कंपनी के अनुसार दोनों इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को सामान्य थ्री-फेज बिजली कनेक्शन से चार्ज किया जा सकता है। इसके लिए अलग से महंगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे किसानों और अन्य ग्राहकों के लिए ट्रैक्टर की चार्जिंग प्रक्रिया को अपेक्षाकृत आसान बनाया जा सकता है।

डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की कीमत में बड़ा अंतर

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में सबसे बड़ी चुनौती उनकी शुरुआती कीमत है। कंपनी के अनुसार करीब 35 एचपी का डीजल ट्रैक्टर लगभग 5 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकता है, जबकि इसी श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की कीमत करीब 12.5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यानी शुरुआती खरीद कीमत में लगभग ढाई गुना का अंतर दिखाई देता है।

यही वजह है कि बिना सरकारी सहायता के किसानों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि केवल खरीद कीमत के आधार पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को महंगा मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके इस्तेमाल के दौरान ईंधन और संचालन खर्च कम हो सकता है।

लंबे समय में कम हो सकती है संचालन लागत

एस्कॉर्ट्स कुबोटा के मुताबिक, जो ग्राहक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का लंबे समय तक और अधिक घंटे इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह मॉडल आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। कंपनी का कहना है कि प्रतिदिन करीब आठ घंटे या उससे अधिक समय तक ट्रैक्टर चलाने वाले ग्राहक डीजल की तुलना में ईंधन और संचालन लागत में बचत कर सकते हैं।

कंपनी के अनुमान के अनुसार करीब तीन साल में शुरुआती अतिरिक्त लागत की भरपाई हो सकती है। इसके बाद इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर से मिलने वाला आर्थिक लाभ डीजल ट्रैक्टर की तुलना में काफी अधिक हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत ट्रैक्टर के इस्तेमाल, चार्जिंग लागत, काम के प्रकार और बिजली की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

मौजूदा डीलर नेटवर्क से होगी बिक्री और सर्विस

कंपनी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए अलग से नया डीलर नेटवर्क तैयार करने के पक्ष में नहीं है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा के अनुसार इलेक्ट्रिक और डीजल ट्रैक्टरों की बिक्री तथा सर्विस से जुड़ा मौजूदा ढांचा काफी हद तक समान है। इसलिए कंपनी के मौजूदा डीलर ही इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की बिक्री कर सकेंगे।

हालांकि, इलेक्ट्रिक मॉडल की सर्विसिंग और मरम्मत के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। कंपनी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों में टेलीमैटिक्स तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। इसके जरिए भारत में बैठे इंजीनियर दूर से ट्रैक्टर की समस्या का पता लगाने के साथ जरूरत पड़ने पर सॉफ्टवेयर अपडेट भी कर सकेंगे।

बैटरी स्वैपिंग के बजाय चार्जिंग को प्राथमिकता

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के संचालन के दौरान बैटरी खत्म होने की समस्या से निपटने के लिए बैटरी स्वैपिंग का विकल्प सुझाया जाता रहा है। हालांकि, कंपनी इसे ट्रैक्टरों के लिए ज्यादा व्यावहारिक नहीं मानती। जयगोपाल के अनुसार एक सामान्य बैटरी पैक का वजन करीब 250 किलोग्राम हो सकता है, इसलिए खेत में इसे सुरक्षित तरीके से निकालना और दूसरी बैटरी लगाना आसान नहीं है।

कंपनी का कहना है कि अधिकांश ट्रैक्टर प्रतिदिन 10 घंटे से कम चलते हैं, इसलिए रात के समय बैटरी को चार्ज किया जा सकता है। वहीं, जहां हाई-पावर डीसी चार्जिंग सुविधा उपलब्ध है, वहां फास्ट चार्जर से बैटरी को खाली से पूरी तरह चार्ज करने में करीब एक घंटे का समय लग सकता है।

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए विशेष सब्सिडी की मांग

एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने सरकार से इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए भी विशेष प्रोत्साहन और सब्सिडी योजना शुरू करने की मांग की है। कंपनी का सुझाव है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को इलेक्ट्रिक ट्रकों और बसों की तरह सरकारी सहायता का लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा रियायती ब्याज दर पर ऋण और अतिरिक्त प्रोत्साहन से किसानों की शुरुआती खरीद लागत कम की जा सकती है। कंपनी ने महिला के नाम पर पंजीकृत इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का सुझाव भी दिया है।

अगस्त 2026 में एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री

अगस्त 2026 में एस्कॉर्ट्स कुबोटा की कुल ट्रैक्टर बिक्री 10,072 यूनिट रही, जो पिछले साल के अगस्त से 19.1 प्रतिशत अधिक है। घरेलू बिक्री 20.5 प्रतिशत बढ़कर 9,523 यूनिट और निर्यात 0.9 प्रतिशत घटकर 549 यूनिट रहे। अप्रैल से अगस्त के बीच कुल बिक्री 20.5 प्रतिशत बढ़कर 55,665 यूनिट पहुंच गई। हालांकि, कंपनी की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की हिस्सेदारी अभी शुरुआती चरण में है।

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