खेती- किसानी में ट्रैक्टर जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसके साथ सही कृषि यंत्रो का चयन भी है। आमतौर पर देखा जाता है, कि किसान मजबूत और उच्च क्षमता वाला ट्रैक्टर तो खरीद लेते हैं, लेकिन उसके साथ ऐसे फार्मिंग इम्प्लीमेंट जोड़ देते हैं, जो उस ट्रैक्टर, मिट्टी या फसल के अनुकूल नहीं होते। इसका सीधा असर लागत और उत्पादन दोनों पर पड़ता है। गलत इम्प्लीमेंट इंजन पर अनावश्यक दबाव डालता है, डीजल की खपत बढ़ाता है और समय की बर्बादी करता है। परिणामस्वरूप खेती की लागत बढ़ जाती है और उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाती।
इम्प्लीमेंट चुनते समय सबसे पहला और महत्वपूर्ण पहलू ट्रैक्टर की हॉर्स पावर (HP) है। कम HP वाले ट्रैक्टर के साथ भारी और चौड़े इम्प्लीमेंट लगाने से इंजन पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे ट्रैक्टर की परफॉर्मेंस गिरती है, माइलेज कम होता है और मशीन की उम्र भी घट सकती है। दूसरी ओर, यदि ज्यादा HP वाले ट्रैक्टर के साथ हल्के इम्प्लीमेंट लगाए जाएं तो उसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता, जिससे संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं होता।
उदाहरण के लिए, 20–25 HP ट्रैक्टर के लिए सिंगल बॉटम हल और हल्का कल्टीवेटर उपयुक्त होते हैं, जबकि 46–50 HP ट्रैक्टर 7 फीट रोटावेटर या स्ट्रॉ रीपर जैसे इम्प्लीमेंट आसानी से चला सकता है। इसलिए किसान को हमेशा अपने ट्रैक्टर की HP प्लेट और तकनीकी विवरण देखकर ही इम्प्लीमेंट का चुनाव करना चाहिए।
हर क्षेत्र की मिट्टी अलग होती है, कहीं काली और भारी, तो कहीं रेतीली या दोमट। ऐसे में एक ही प्रकार का इम्प्लीमेंट हर जगह समान परिणाम नहीं दे सकता है। भारी मिट्टी में गहरी जुताई के लिए मजबूत हल और हैवी ड्यूटी कल्टीवेटर की आवश्यकता होती है। यदि हल्की मिट्टी में वही भारी उपकरण उपयोग किया जाए तो अनावश्यक ईंधन खर्च होगा और मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो सकती है।
रेतीली या दोमट मिट्टी में हल्के और मध्यम श्रेणी के फार्मिंग इम्प्लीमेंट बेहतर परिणाम देते हैं। मिट्टी की सही तैयारी फसल की जड़ विकास, नमी संरक्षण और पोषक तत्वों के अवशोषण में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए इम्प्लीमेंट का चुनाव करते समय खेत की मिट्टी का परीक्षण और उसकी प्रकृति का मूल्यांकन जरूर करें।
हर फसल की अपनी अलग जरूरत होती है। गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए कल्टीवेटर और सीड ड्रिल उपयोगी माने जाते हैं। वहीं धान की खेती में रोटावेटर और पडलर की आवश्यकता अधिक होती है, क्योंकि धान के लिए गीली और मुलायम मिट्टी चाहिए होती है।
कपास, गन्ना और सब्जियों की खेती में विशेष ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट उपलब्ध हैं, जो पंक्तियों की दूरी, निराई-गुड़ाई और उर्वरक प्रबंधन को आसान बनाते हैं। यदि फसल के अनुरूप उपकरण का चयन किया जाए तो बुवाई समान रूप से होती है, पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और अंततः उत्पादन बढ़ता है।
खेती एक चरणबद्ध प्रक्रिया है, इसमें जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई जैसे प्रमुख चरण शामिल हैं। हर चरण के लिए अलग इम्प्लीमेंट की आवश्यकता होती है। कई किसान एक ही उपकरण से सभी कार्य करने की कोशिश करते हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, जुताई के लिए प्लाऊ या रोटावेटर उपयुक्त है, जबकि बुवाई के लिए सीड ड्रिल आवश्यक है। इसी प्रकार निराई-गुड़ाई के लिए वीडर और कटाई के लिए हार्वेस्टर या रीपर की जरूरत होती है। यदि हर चरण में सही उपकरण का उपयोग किया जाए तो समय की बचत होती है, मजदूरी लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।
आज के आधुनिक ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट हाइड्रोलिक सिस्टम और PTO (Power Take Off) पर आधारित होते हैं। इसलिए इम्प्लीमेंट खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपका ट्रैक्टर उसे उठाने और संचालित करने में सक्षम है या नहीं। अगर ट्रैक्टर की हाइड्रोलिक क्षमता कम है और इम्प्लीमेंट भारी है, तो संतुलन बिगड़ सकता है और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। इसी तरह PTO RPM मेल न खाने पर इम्प्लीमेंट सही गति से काम नहीं करेगा। इसलिए खरीद से पहले तकनीकी अनुकूलता की जांच अनिवार्य है।
इम्प्लीमेंट खरीदते समय केवल कम कीमत देखकर निर्णय लेना समझदारी नहीं है। मजबूत निर्माण, उच्च गुणवत्ता और नजदीकी सर्विस सेंटर की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है। सस्ते लेकिन कमजोर इम्प्लीमेंट बार-बार खराब हो सकते हैं, जिससे मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च आता है। अच्छे ब्रांड के इम्प्लीमेंट्स में स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिल जाते हैं और उनकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। किसान को खरीद से पहले बाजार में उपलब्ध विकल्पों की तुलना करनी चाहिए और विश्वसनीय डीलर से सलाह लेनी चाहिए।
सही इम्प्लीमेंट वही है, जो खेती की लागत घटाए और उत्पादन बढ़ाए। जरूरत से बड़ा इम्प्लीमेंट “स्टेटस” तो बढ़ा सकता है, लेकिन मुनाफा नहीं। नीचे दिए गए HP Compatibility चार्ट से किसान सही निर्णय ले सकते हैं:-
20–25 HP: सिंगल बॉटम हल, हल्का कल्टीवेटर
26–30 HP: 5–7 टाइन कल्टीवेटर, सिंगल स्पीड रोटावेटर
31–35 HP: 7–9 टाइन कल्टीवेटर, 5 फीट रोटावेटर, सीड ड्रिल
36–40 HP: 9–11 टाइन कल्टीवेटर, 6 फीट रोटावेटर, स्प्रेयर
41–45 HP: हैवी ड्यूटी कल्टीवेटर, मल्टीक्रॉप सीड ड्रिल
46–50 HP: 7 फीट रोटावेटर, स्ट्रॉ रीपर, बेलर
51–60 HP: हैवी प्लाऊ, सुपर सीडर, ट्रेल्ड स्प्रेयर
60 HP से अधिक: लेजर लैंड लेवलर, हैवी हार्वेस्टर अटैचमेंट
अंत में, इम्प्लीमेंट खरीदने से पहले ट्रैक्टर की HP प्लेट, PTO RPM और हाइड्रोलिक क्षमता की जांच अवश्य करें। जरूरत पड़ने पर कृषि विभाग, अनुभवी किसानों या अधिकृत डीलर से सलाह लें। सही ट्रैक्टर–इम्प्लीमेंट संयोजन से खेती आसान, किफायती और अधिक लाभकारी बन सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है, कि यदि ट्रैक्टर और इम्प्लीमेंट के बीच संतुलित तालमेल हो तो खेती अधिक लाभकारी बन सकती है। सही संयोजन से न केवल ईंधन की बचत होती है, बल्कि खेत की तैयारी भी बेहतर होती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार आता है। इसलिए ट्रैक्टर खरीदते समय जितना ध्यान मॉडल और ब्रांड पर दिया जाता है, उतना ही ध्यान इम्प्लीमेंट चयन पर भी देना चाहिए।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालिका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
गन्ना (Sugarcane) भारत की प्रमुख नकदी फसल है, और इसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। रेटून फसल वह होती है, जिसमें पहली कटाई के बाद जड़ों से दोबारा फसल उगाई जाती है। इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए शुगरकेन रेटून मैनेजर मशीन का उपयोग किया जाता है।
यह मशीन पुरानी फसल के अवशेष हटाकर, जड़ों के आसपास की मिट्टी को ढीला करती है और उर्वरक डालने में मदद करती है। रेटून मैनेजर का मुख्य उद्देश्य गन्ने की दूसरी और तीसरी फसल की पैदावार बढ़ाना है। पारंपरिक तरीकों में श्रम अधिक लगता था और उत्पादन कम होता था, लेकिन इस मशीन के प्रयोग से समय, श्रम और लागत तीनों में बचत होती है।
रेटून मैनेजर कई कार्य एक साथ करता है। यह गन्ने की सूखी पत्तियों और जड़ों के अवशेष को हटाता है, जिससे नई फसल को पोषण मिलता है। मशीन मिट्टी की गुड़ाई करती है और जड़ों के पास वायु संचार बढ़ाती है। इसके साथ ही यह उर्वरक को सही गहराई पर डालने में सक्षम होती है। कुछ आधुनिक रेटून मैनेजर में स्प्रे सिस्टम भी लगा होता है, जिससे कीटनाशक या सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और रोगों की संभावना कम होती है।
रेटून मैनेजर के उपयोग से किसान को कई लाभ मिलते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि रेटून फसल की उत्पादकता 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इससे किसान को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके अलावा, मजदूरी खर्च में कमी आती है। जहां पहले कई मजदूरों की आवश्यकता होती थी, अब एक ट्रैक्टर और रेटून मैनेजर से काम आसानी से हो जाता है। इससे समय की बचत होती है और फसल जल्दी तैयार होती है।
शुगरकेन कटर प्लांटर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जो गन्ने की बुवाई के लिए उपयोग की जाती है। यह मशीन गन्ने की कटिंग (सेट) को उचित आकार में काटकर सीधे खेत में बो देती है।
पहले गन्ने की बुवाई में काफी समय और श्रम लगता था, लेकिन कटर प्लांटर से यह कार्य तेज और सटीक हो गया है। यह मशीन बीज की सही दूरी और गहराई सुनिश्चित करती है, जिससे पौधों की वृद्धि समान रूप से होती है।
कटर प्लांटर गन्ने की डंडियों को समान आकार में काटता है और खेत में कतारबद्ध तरीके से लगाता है। कुछ मशीनों में उर्वरक डालने और मिट्टी चढ़ाने की सुविधा भी होती है।
यह मशीन आमतौर पर ट्रैक्टर से संचालित होती है और एक बार में कई कतारों में बुवाई कर सकती है। इससे खेत में समान दूरी बनी रहती है और सिंचाई व खाद प्रबंधन आसान हो जाता है।
कटर प्लांटर से बुवाई करने पर बीज की बचत होती है और अंकुरण प्रतिशत बढ़ता है। इससे पौधों की संख्या संतुलित रहती है और उत्पादन अधिक मिलता है।
यह मशीन बड़े किसानों के साथ-साथ सहकारी समितियों के लिए भी उपयोगी है। मशीनरी के प्रयोग से खेती आधुनिक और लाभकारी बनती है। समय की बचत और कम लागत के कारण किसान की आय में वृद्धि होती है।
आधुनिक यंत्रों के प्रयोग से गन्ना खेती में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहा है। रेटून मैनेजर जहां दूसरी फसल की पैदावार बढ़ाता है, वहीं कटर प्लांटर बुवाई को सरल और सटीक बनाता है। यदि किसान इन मशीनों को अपनाते हैं, और वैज्ञानिक सलाह के साथ खेती करते हैं, तो गन्ना उत्पादन में वृद्धि निश्चित है। इससे न केवल किसान की आय बढ़ेगी, बल्कि देश की चीनी उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। आधुनिक तकनीक ही गन्ना खेती के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
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भारतीय कृषि बाजार में Claas CROP TIGER 40 मिलने वाले समस्त शानदार मॉडल्स में से एक है। Claas CROP TIGER 40 एक अत्यंत ही शक्तिशाली कृषि उपकरण है, जो अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।
क्लास क्रॉप टाइगर 40 यंत्र की शक्तिशाली संरचना और नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल इसको एक विश्वसनीय और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने वाला यंत्र बनाती है। यह किसानों को जटिल तथा वक्त लेने वाले कृषि कार्यों को सुगम बनाने और उन्हें सुगमता और सुविधा के साथ करने में सहायता करता है।
क्रॉप टाइगर 40 एक शक्तिशाली कृषि कटाई यंत्र है, जो सभी ट्रैक्टरों के साथ सहजता से जुड़ जाता है। यह हर प्रकार की जमीन के लिए उपयुक्त है और कृषि उत्पादकता में सुधार करता है। यह सभी प्रकार के खेतों, सब्जियों की फसलों, फलों के बागों और अंगूर के बागों के लिए पूर्णतय उपयुक्त है।
भारत में Claas CROP TIGER 40 की कीमत बेहद किफायती है। इस उपकरण की ये सभी विशेषताएं इसे सभी किसानों के लिए एक किफायती बनातीं हैं।
Claas CROP TIGER 40, 76 ट्रैक्टर के साथ काम करने वाला एक अद्भुत कृषि यंत्र है। यह किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं और मांगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि वे कुशलतापूर्वक और परेशानी मुक्त ढ़ंग से कार्य कर सकें। इसमें कृषि क्षेत्र में काम करते समय स्थिर कार्यक्षमता प्रदान करने के लिए बेहतर गुणवत्ता हैं। भारत में Claas CROP TIGER 40 से किसानों को खेतों पर काम करने में सुगमता होती है।
कुबोटा हार्वेसकिंग DC-68G-HK एक अत्याधुनिक और शक्तिशाली कंबाइन हार्वेस्टर है, जिसे भारतीय खेतों और फसलों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह मशीन उन किसानों और कस्टम हायरिंग सर्विस देने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, जो कम समय में ज्यादा क्षेत्र की कटाई करना चाहते हैं।
मजबूत बनावट, उच्च क्षमता और भरोसेमंद परफॉर्मेंस इसे बाजार में खास पहचान दिलाती है। Kubota DC-68G-HK धान, गेहूं जैसी प्रमुख फसलों की कटाई के लिए उपयुक्त है और यह खेती के काम को तेज, आसान और अधिक लाभदायक बनाता है। अगर आप हार्वेस्टर को लोन पर लेने का विचार कर रहे हैं, तो यह मॉडल एक मजबूत निवेश साबित हो सकता है।
कुबोटा हार्वेसकिंग DC-68G-HK में V2403-M-DI-TE-CS1T मॉडल का वाटर-कूल्ड, 4-साइकिल, 4-सिलेंडर वर्टिकल डीजल इंजन दिया गया है, जो टर्बोचार्जर के साथ आता है। इसका इंजन विस्थापन 2434 cc है, जो इसे बेहतरीन ताकत और स्थिर प्रदर्शन प्रदान करता है।
यह इंजन 2700 RPM पर 49.2 kW यानी लगभग 68 HP की पावर जनरेट करता है, जिससे हार्वेस्टर भारी लोड में भी बिना रुकावट के काम करता है। इंजन का डिजाइन इस तरह किया गया है कि ईंधन की खपत संतुलित रहे और लंबे समय तक मशीन लगातार चल सके।
शानदार 60 लीटर की फ्यूल टैंक क्षमता के कारण यह हार्वेस्टर एक बार भरने पर लंबे समय तक खेत में बिना रुके काम कर सकता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
Kubota DC-68G-HK में क्रॉलर टाइप चालन प्रणाली दी गई है, जो इसे गीले, दलदली और फिसलन भरे खेतों में भी शानदार पकड़ देती है। इसके क्रॉलर की चौड़ाई 500 मिमी और ग्राउंड संपर्क लंबाई 1800 मिमी है, जिससे मशीन का वजन जमीन पर समान रूप से बंटता है। औसत जमीन संपर्क दबाव केवल 17.4 kPa है, जिससे खेत में मिट्टी कम धंसती है और मशीन आसानी से आगे बढ़ती है।
Kubota DC-68G-HK में हार्वेस्टर की 325 मिमी की ग्राउंड क्लीयरेंस इसे ऊबड़-खाबड़ खेतों में भी सुरक्षित संचालन का भरोसा देती है। इसकी ट्रैवलिंग स्पीड मध्यम में 0–1.23 मीटर/सेकंड और हाई में 0–1.75 मीटर/सेकंड है, जिससे किसान अपनी जरूरत के अनुसार गति चुन सकते हैं।
Kubota DC-68G-HK हार्वेस्टर का कटिंग सिस्टम बेहद प्रभावी और सटीक है। इसमें 900 x 1903 मिमी की पिकअप रील दी गई है, जो फसलों को सही तरीके से पकड़कर कटाई में मदद करती है। कटर बार की लंबाई 1980 मिमी है, जिससे एक साथ ज्यादा क्षेत्र की कटाई संभव होती है।
कटाई की ऊंचाई को हाइड्रोलिक सिस्टम के माध्यम से आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है, जिससे अलग-अलग फसलों और खेत की स्थिति के अनुसार मशीन को सेट किया जा सके।
कटाई की गति लगभग 1.23 मीटर/सेकंड है, जो इसे तेज और प्रभावी बनाती है। इसकी इकट्ठा करने की लंबाई 2075 मिमी है, जो फसल को सही तरीके से थ्रेशिंग सिस्टम तक पहुंचाने में मदद करती है।
Kubota DC-68G-HK में नुकीले दांत वाले अक्षीय प्रवाह (Axial Flow) थ्रेशिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। थ्रेशिंग सिलेंडर का व्यास 620 मिमी और लंबाई 1650 मिमी है, जो 560 RPM की गति से घूमता है। इससे दाने की अलगाव प्रक्रिया तेज और प्रभावी होती है, जबकि अनाज को नुकसान कम से कम होता है। अवतल क्षेत्र 0.9 वर्ग मीटर का है, जो ज्यादा मात्रा में फसल को संभालने में सक्षम है।
इसके अलावा, इसमें ऑसिलेटिंग और 3-वे एयर स्ट्रीम क्लीनिंग सिस्टम दिया गया है, जो अनाज को भूसी और अन्य कचरे से साफ करता है। इस उन्नत सफाई प्रणाली के कारण अनाज की गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
Kubota DC-68G-HK में 1250 लीटर की बड़ी ग्रेन टैंक क्षमता दी गई है, जिससे बार-बार अनलोड करने की जरूरत कम पड़ती है। इसका अनाज निर्वहन ऊंचाई रेंज 1.1 से 4.5 मीटर तक है, जिससे ट्रॉली या ट्रक में अनाज भरना आसान हो जाता है। अनाज अनलोडर की लंबाई 3.66 मीटर है और इसका टर्निंग एंगल 235 डिग्री है, जिससे हर दिशा में आसानी से अनलोडिंग संभव होती है। औसत अनाज निर्वहन समय लगभग 90 सेकंड है, जो काम की गति को और बढ़ा देता है।
इलेक्ट्रिकल सिस्टम में 12 वोल्ट बैटरी, लाइटिंग सिस्टम और कई प्रकार के अलार्म दिए गए हैं, जैसे कूलेंट टेम्परेचर, बैटरी चार्ज, इंजन ऑयल, ग्रेन टैंक फुल और सिलाई क्लॉज अलार्म। ये सभी फीचर्स मशीन की सुरक्षा और बेहतर रखरखाव में मदद करते हैं।
Kubota Harvesking DC-68G-HK की फसल क्षमता 5.75 से 10 एकड़ प्रति घंटे तक है, जो इसे अपनी श्रेणी का एक अत्यंत प्रभावी हार्वेस्टर बनाती है। कम समय में ज्यादा क्षेत्र की कटाई करने की क्षमता के कारण यह मशीन किसानों और कस्टम हायरिंग सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए बहुत लाभदायक साबित होती है।
अगर आप इस हार्वेस्टर को लोन पर लेने का विचार कर रहे हैं, तो यह एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। इसकी मजबूत बनावट, कम मेंटेनेंस, बेहतर ईंधन दक्षता और उच्च उत्पादन क्षमता इसे लंबे समय तक फायदे का सौदा बनाती है। Kubota DC-68G-HK न केवल आपकी कटाई की समस्या को हल करता है, बल्कि खेती को अधिक व्यावसायिक, तेज और लाभदायक बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
ट्रैक्टरचॉइस पोर्टल पर आपको आपकी पसंद के सभी ट्रैक्टर्स जैसे महिंद्रा, स्वराज, सोनालिका, मैसी फर्ग्युसन, फार्मट्रैक और आयशर आदि जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की सही और सटीक जानकारी दी जाती है।
एग्रीजोन एक भरोसेमंद कृषि मशीनरी ब्रांड है, जो किसानों के लिए आधुनिक और मजबूत उपकरण बनाता है। यह ब्रांड गुणवत्ता, टिकाऊपन और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है। एग्रीजोन की मशीनें खेती के काम को आसान, तेज और कम लागत में पूरा करने में मदद करती हैं। इसके उत्पाद फसल कटाई, मड़ाई और सफाई जैसे कार्यों में काफी उपयोगी होते हैं। एग्रीजोन का उद्देश्य किसानों की मेहनत को कम करना और उनकी उत्पादकता बढ़ाना है।
किसानों के बीच एग्रीजोन अपनी विश्वसनीयता और शानदार सेवाओं के कारण लोकप्रिय है। ट्रैक्टरचॉइसके इस लेख में आज हम आपको एग्रीजोन स्ट्रॉ रीपर के 2 बेहतरीन प्रदर्शन वाले स्ट्रॉ रीपर की जानकारी प्रदान करेंगे।
यह मशीन दो मॉडलों में उपलब्ध है – ASR-57" और ASR-63"। दोनों का उपयोग मुख्य रूप से फसल की कटाई और मड़ाई के लिए किया जाता है। ASR-57" मध्यम स्तर के कामों के लिए उपयुक्त है, जबकि ASR-63" बड़े क्षेत्र और भारी कार्यों के लिए अधिक सक्षम माना जाता है।
मुख्य ड्राइव में ASR-57" मॉडल में ASR-57" ड्राइव और ASR-63" मॉडल में ASR-63" ड्राइव दिया गया है, और मुख्य ड्राइव मशीन की शक्ति को सही तरीके से पूरी कार्य प्रणाली तक पहुँचाकर उसकी कार्यक्षमता को मजबूत और प्रभावी बनाता है।
ASR-57" की कार्य चौड़ाई 2250 मि.मी. है, जबकि ASR-63" की कार्य चौड़ाई 2351 मि.मी. है, और कार्य चौड़ाई जितनी अधिक होती है, उतनी ही अधिक फसल एक बार में मड़ाई के लिए ली जा सकती है, इसलिए ASR-63" की अधिक चौड़ाई इसकी उत्पादन क्षमता को भी बढ़ा देती है।
ASR-57" की बॉडी चौड़ाई 57 इंच है, जबकि ASR-63" की बॉडी चौड़ाई 61 इंच है, और बड़ी बॉडी चौड़ाई के कारण ASR-63" मॉडल अधिक स्थिरता के साथ-साथ ज्यादा कार्यक्षमता भी प्रदान करता है।
ट्रैक्टर हॉर्स पावर की आवश्यकता की बात करें तो ASR-57" के लिए न्यूनतम 50 HP और ASR-63" मॉडल के लिए न्यूनतम 55 HP हॉर्सपॉवर की जरूरत पड़ती है।
यह दर्शाता है, कि ASR-63" को चलाने के लिए अधिक शक्तिशाली ट्रैक्टर की जरूरत होती है।
थ्रेशर का व्यास दोनों मॉडल का 31 इंच है। समान व्यास होने से दोनों मशीनों में मड़ाई की गुणवत्ता एक जैसी बनी रहती है।
ASR-57" में 288 ब्लेड होते हैं, जबकि ASR-63" में 320 ब्लेड होते हैं, और अधिक ब्लेड होने से मड़ाई की प्रक्रिया तेज तथा अधिक प्रभावी हो जाती है।
बास्केट में ब्लेड की संख्या ASR-57" में 36 और ASR-63" में 38 है, और बास्केट में अधिक ब्लेड होने से मशीन की मजबूती के साथ-साथ उसकी कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है।
ASR-57" का कटर बार 7.5 फीट का है, जबकि ASR-63" का कटर बार 8 फीट का है, और बड़ा कटर बार एक बार में अधिक फसल काटने में सहायक होता है, जिससे समय और ईंधन की बचत होती है।
पहियों का आकार 7.00×19-10PR / 6.5×20 (वैकल्पिक) है। यह पहिए खेत में बेहतर संतुलन, पकड़ और स्थिरता प्रदान करते हैं।
ASR-57" में 2 ब्लोअर होते हैं, जबकि ASR-63" में 3 ब्लोअर होते हैं, और अधिक ब्लोअर होने से दाने और भूसे को अलग करने की प्रक्रिया अधिक तेज, प्रभावी और साफ-सुथरी होती है।
ASR-57" का वजन लगभग 1990 किलोग्राम है, जबकि ASR-63" का वजन लगभग 2040 किलोग्राम है, और अधिक वजन होने से मशीन को बेहतर स्थिरता मिलती है तथा काम के दौरान कंपन कम होता है।
ASR-57" का आकार (लंबाई × चौड़ाई × ऊँचाई) 3570 × 2520 × 1970 मि.मी. है, जबकि ASR-63" का आकार 3750 × 2625 × 1970 मि.मी. है, और बड़ा मॉडल आकार में थोड़ा बड़ा होने के कारण उसकी कार्यक्षमता भी अधिक होती है।
ब्लोअर फैन की गति दोनों मॉडल में 1260 RPM है। यह गति फसल की सही सफाई और भूसे से दानों को अलग करने में मदद करती है।
थ्रेशर ड्रम की गति दोनों मॉडल में 875 RPM है। यह गति फसल की सुरक्षित और प्रभावी मड़ाई सुनिश्चित करती है, जिससे दाने टूटते नहीं हैं।
ASR-57" और ASR-63" दोनों ही मॉडल किसानों के लिए उपयोगी और भरोसेमंद मशीनें हैं। ASR-57" छोटे और मध्यम किसानों के लिए एक किफायती विकल्प है, जबकि ASR-63" बड़े खेतों और ज्यादा उत्पादन वाले क्षेत्रों के लिए अधिक उपयुक्त है। किसान अपनी जरूरत, ट्रैक्टर की क्षमता और खेत के आकार को ध्यान में रखकर सही मॉडल का चुनाव कर सकते हैं।
ट्रैक्टर चॉइस पोर्टल पर आप महिंद्रा, सोनालिका, मैसी फर्ग्युसन, स्वराजऔर फार्मट्रैकआदि ट्रैक्टर्स और इम्प्लीमेंट के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
फार्मकिंग अपने मजबूत और टिकाऊ कृषि उपकरणों के लिए जाना जाता है। फार्मकिंग कंपनी के सभी इम्प्लीमेंट आधुनिक तकनीक से बने होते हैं, जो खेती को आसान और तेज बनाते हैं। फार्मकिंग के उपकरण कम रख-रखाव में लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन देते हैं। यह इम्प्लीमेंट मिट्टी की तैयारी से लेकर फसल बुवाई तक हर काम में उपयोगी होते हैं। फार्मकिंग किसानों को विश्वसनीय गुणवत्ता और बेहतर उत्पादकता का भरोसा देता है। ट्रैक्टरचॉइस के इस लेख में आज हम फार्मकिंग के कॉम्पैक्ट डिस्क हैरो के बारे में जानेंगे।
FK-CDH16, FK-CDH18, FK-CDH20, FK-CDH22 और FK-CDH24 सभी मॉडलों में 100×100 mm का स्क्वायर ट्यूबुलर फ्रेम दिया गया है, जो इन्हें अत्यधिक मजबूत और टिकाऊ बनाता है। यह फ्रेम भारी कृषि कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे कठिन और कठोर मिट्टी में भी मशीन आसानी से काम कर सके।
स्क्वायर ट्यूबुलर फ्रेम की खासियत यह है, कि यह झटकों को सहन करने में सक्षम होता है और लंबे समय तक बिना मुड़े या टूटे काम करता है। खेतों में लगातार उपयोग के दौरान मशीन पर भारी दबाव पड़ता है, ऐसे में यह फ्रेम मशीन की स्थिरता बनाए रखता है। मजबूत संरचना होने के कारण डिस्क हैरो का संतुलन बना रहता है, जिससे कटाई की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसान को समान रूप से जुताई मिलती है।
सभी मॉडलों में 32 mm का सॉलिड स्क्वायर रॉड गैंग बोल्ट/एक्सल दिया गया है, जो मशीन की मजबूती को और बढ़ाता है। यह एक्सल भारी भार को आसानी से संभाल सकता है और डिस्क को सही दिशा में स्थिरता प्रदान करता है। सॉलिड स्क्वायर रॉड का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि टूट-फूट की संभावना कम हो और मशीन लंबे समय तक बिना किसी बड़ी मरम्मत के काम कर सके।
जब खेत में पथरीली या सख्त जमीन होती है, तब यह मजबूत एक्सल डिस्क को सही स्थिति में बनाए रखता है। इससे मशीन की कार्यक्षमता बनी रहती है और ऑपरेटर को बेहतर नियंत्रण मिलता है। यह विशेषता इन सभी मॉडलों को व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त बनाती है।
इन सभी मॉडलों में डिस्क की संख्या अलग-अलग दी गई है, जो उनकी कार्यक्षमता और खेत के आकार के अनुसार तय की गई है। FK-CDH16 में 16 डिस्क, FK-CDH18 में 18 डिस्क, FK-CDH20 में 20 डिस्क, FK-CDH22 में 22 डिस्क और FK-CDH24 में 24 डिस्क उपलब्ध हैं।
सभी मॉडलों में फ्रंट गैंग में नॉच्ड डिस्क और रियर गैंग में प्लेन डिस्क का उपयोग किया गया है। नॉच्ड डिस्क मिट्टी को काटने और कठोर अवशेषों को तोड़ने में मदद करती है, जबकि प्लेन डिस्क मिट्टी को समतल करने और अच्छे से मिलाने का काम करती है। इस संयोजन से खेत की जुताई अधिक प्रभावी और संतुलित होती है।
इन सभी मॉडलों में डिस्क का डायमीटर 510 mm, 610 mm और 660 mm के विकल्प में उपलब्ध है। अलग-अलग डायमीटर के कारण किसान अपनी जरूरत और मिट्टी की स्थिति के अनुसार सही डिस्क चुन सकते हैं। बड़ी डिस्क गहरी जुताई के लिए उपयुक्त होती है, जबकि छोटी डिस्क हल्की मिट्टी और सामान्य जुताई के लिए सही रहती है। कटिंग की चौड़ाई भी हर मॉडल में अलग है, जैसे FK-CDH16 की लगभग 1912 mm, FK-CDH18 की 2218 mm, FK-CDH20 की 2345 mm, FK-CDH22 की 2562 mm और FK-CDH24 की 2778 mm है। अधिक कटिंग चौड़ाई होने से कम समय में ज्यादा क्षेत्र में जुताई संभव होती है, जिससे समय और ईंधन की बचत होती है।
सभी मॉडलों में डिस्क के बीच की दूरी 228 mm रखी गई है, जिससे मिट्टी का प्रवाह बेहतर रहता है और जाम होने की समस्या कम होती है। सही दूरी होने से मिट्टी, फसल अवशेष और खरपतवार आसानी से निकल जाते हैं। बेयरिंग हब की संख्या मॉडल के अनुसार अलग-अलग है। FK-CDH16 में 6 बेयरिंग हब, FK-CDH18 में 8, जबकि FK-CDH20, FK-CDH22 और FK-CDH24 में 8 बेयरिंग हब स्प्लिट गैंग के साथ दिए गए हैं। स्प्लिट गैंग सिस्टम से मशीन की कार्यक्षमता बढ़ती है और रख-रखाव आसान हो जाता है। इससे डिस्क की मूवमेंट स्मूथ रहती है और घर्षण कम होता है।
इन मॉडलों का वजन उनकी क्षमता और मजबूती के अनुसार तय किया गया है। FK-CDH16 का वजन लगभग 840 kg, FK-CDH18 का 960 kg, FK-CDH20 का 1025 kg, FK-CDH22 का 1095 kg और FK-CDH24 का 1170 kg है। ज्यादा वजन होने से मशीन जमीन में बेहतर पकड़ बनाती है और डिस्क सही गहराई तक काम कर पाती हैं। यह स्थिरता जुताई की गुणवत्ता को बढ़ाती है और खेत को समान रूप से तैयार करने में मदद करती है। भारी वजन के बावजूद मशीन का संतुलन ऐसा रखा गया है कि ट्रैक्टर पर अधिक दबाव न पड़े और संचालन सुचारू बना रहे।
इन सभी मॉडलों के लिए अलग-अलग ट्रैक्टर पावर की आवश्यकता निर्धारित की गई है। FK-CDH16 के लिए 50–60 hp, FK-CDH18 के लिए 60–70 hp, FK-CDH20 के लिए 70–80 hp, FK-CDH22 के लिए 90–100 hp और FK-CDH24 के लिए 105–125 hp ट्रैक्टर उपयुक्त माना गया है। सही पावर के ट्रैक्टर के साथ उपयोग करने पर मशीन अपनी पूरी क्षमता से काम करती है और ईंधन की खपत भी संतुलित रहती है। यह रेंज छोटे, मध्यम और बड़े किसानों सभी के लिए उपयोगी है। अलग-अलग मॉडल उपलब्ध होने से किसान अपने खेत के आकार और ट्रैक्टर की क्षमता के अनुसार सही डिस्क हैरो चुन सकते हैं, जिससे खेती का काम तेज, आसान और अधिक प्रभावी बनता है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म पर आप खेती किसानी से जुड़ी सभी खबरें जान सकते हैं और इस पोर्टल पर आपको महिंद्रा, सोनालीका और मैसी फर्ग्युसन आदि ट्रैक्टर ब्रांड्स के ट्रैक्टर और इम्प्लीमेंट के बारे में सही व सटीक जानकारी मिलेगी।
महिंद्रा के इम्प्लीमेंट्स भारतीय किसानों के लिए मजबूत, भरोसेमंद और उपयोग में आसान कृषि उपकरणों के रूप में प्रसिद्ध हैं। ये उपकरण खेती की पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं, चाहे वह भूमि की तैयारी हो, बुआई हो, फसल की सुरक्षा हो, कटाई हो या फिर पोस्ट-हार्वेस्ट कार्य। महिंद्रा द्वारा बनाए गए रोटावेटर, डिस्क प्लाऊ, कल्टीवेटर, सीड कम फर्टिलाइज़र ड्रिल, स्प्रेयर, स्ट्रॉ रीपर, थ्रेशर, बेलर, ट्रेलर, फ्रंट लोडर और वर्टीकल कन्वेयर रिपर जैसे उपकरण खेती के कार्यों को तेज, सटीक और कम लागत में पूरा करने में सहायक होते हैं।
इन सभी इम्प्लीमेंट्स को भारतीय मिट्टी, जलवायु और कृषि परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इनकी बनावट मजबूत स्टील और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से की जाती है, जिससे ये लंबे समय तक टिकाऊ रहते हैं। महिंद्रा ट्रैक्टरों के साथ इनकी बेहतर संगतता के कारण ऑपरेशन आसान होता है, रख-रखाव सरल बनता है और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
वर्टीकल कन्वेयर रिपर एक आधुनिक कृषि उपकरण है, जिसका उपयोग फसल को जमीन से उठाने, मिट्टी से अलग करने और मशीन के अंदर सही दिशा में ऊपर की ओर ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें खड़े (वर्टीकल) रूप में लगे रिपर या ब्लेड होते हैं, जो मिट्टी में फंसी हुई फसल को ढीला करते हैं। इसके बाद कन्वेयर बेल्ट की सहायता से फसल को ऊपर की ओर ट्रांसफर किया जाता है।
यह मशीन खासतौर पर उन फसलों के लिए उपयोगी होती है, जो मिट्टी में गहराई तक जुड़ी होती हैं या कटाई के समय मिट्टी से चिपकी रहती हैं। वर्टीकल कन्वेयर रिपर का मुख्य उद्देश्य फसल को बिना नुकसान पहुँचाए साफ-सुथरे और सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना है।
इस मशीन का कार्य सिद्धांत सरल लेकिन प्रभावी होता है। सबसे पहले रिपर या ब्लेड मिट्टी में प्रवेश करते हैं और फसल के आसपास की मिट्टी को ढीला करते हैं। इसके बाद फसल कन्वेयर बेल्ट पर आ जाती है, जो उसे ऊपर की ओर ले जाती है। इस प्रक्रिया में मिट्टी नीचे गिर जाती है और फसल साफ होकर आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार हो जाती है।
इस प्रकार यह मशीन कटाई और लोडिंग प्रक्रिया को तेज बनाती है, श्रम की बचत करती है और फसल की गुणवत्ता को बनाए रखती है।
वर्टीकल कन्वेयर रिपर ट्रैक्टर के रियर या फ्रंट PTO से 540 RPM पर संचालित होती है। इसमें 7 क्रॉप डिवाइडर लगे होते हैं, जो फसल को सही दिशा में विभाजित कर मशीन के अंदर ले जाने में मदद करते हैं। इसकी कार्य चौड़ाई 2280 मिमी है, जिससे यह कम समय में बड़े क्षेत्र में काम कर सकती है।
इसका मुख्य फ्रेम 100 × 100 साइज का मजबूत बनाया गया है, जो मशीन को अतिरिक्त मजबूती और स्थिरता प्रदान करता है। इसमें 3 कन्वेयर लगे होते हैं, जो फसल के सुचारू और लगातार संचालन में सहायक होते हैं। मल्टी-कन्वेयर सिस्टम के कारण फसल का प्रवाह बिना रुकावट बना रहता है और मशीन की कार्यक्षमता बढ़ जाती है।
यह मशीन 22.4 kW (30 HP) से लेकर 44.7 kW (60 HP) तक के ट्रैक्टरों के लिए उपयुक्त है। इसका मतलब है कि छोटे और मध्यम श्रेणी के ट्रैक्टरों के साथ भी इसका उपयोग आसानी से किया जा सकता है। विभिन्न क्षमता वाले ट्रैक्टरों के साथ इसकी संगतता इसे किसानों के लिए एक बहुउपयोगी उपकरण बनाती है।
वर्टीकल कन्वेयर रिपर एक ट्रैक्टर PTO संचालित मशीन है, जिसे ट्रैक्टर के सामने की ओर लगाया जाता है। इसका डिजाइन इस प्रकार किया गया है कि यह तीन नंबर के सिस्टम के कारण बेहतर कार्य दक्षता प्रदान करती है। ट्रैक्टर के सामने लगने से ऑपरेटर को बेहतर दृश्यता मिलती है, जिससे काम अधिक सटीक और सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।
इसे ट्रैक्टर पर चढ़ाना और उतारना बहुत ही सरल है, जिससे समय की बचत होती है और मशीन को जल्दी से खेत में काम के लिए तैयार किया जा सकता है।
इस मशीन की एक बड़ी खासियत यह है कि ट्रैक्टर पर कम लोड पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है। इसके कारण परिचालन लागत घटती है और किसान को अधिक लाभ मिलता है। साथ ही इसका ऑपरेटिंग सिस्टम सरल और सुचारू होता है, जिससे कम अनुभव वाले ऑपरेटर भी इसे आसानी से चला सकते हैं।
वर्टीकल कन्वेयर रिपर को ट्रैक्टर के सामने चेसिस पर मजबूती से फिक्स किया जाता है। इससे कार्य के दौरान मशीन में बेहतर स्थिरता और संतुलन बना रहता है। असमतल जमीन पर भी यह मशीन प्रभावी ढंग से काम करती है। मजबूत फिक्सिंग के कारण कंपन कम होता है और मशीन के पार्ट्स की उम्र बढ़ जाती है।
वर्टीकल कन्वेयर रिपर किसानों को समय, श्रम और लागत तीनों की बचत कराती है। यह मशीन फसल को नुकसान पहुँचाए बिना सुरक्षित तरीके से निकालती है, जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है। कटाई और लोडिंग प्रक्रिया तेज होने के कारण बड़े खेतों में भी कम समय में काम पूरा किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, वर्टीकल कन्वेयर रिपर एक आधुनिक, प्रभावी और उपयोगी कृषि उपकरण है। यह किसानों की कार्यक्षमता बढ़ाने, लागत कम करने और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिंद्रा के अन्य इम्प्लीमेंट्स की तरह ही, यह भी भारतीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है और किसानों को बेहतर उत्पादन तथा अधिक लाभ का भरोसा देता है।
भारतीय कृषि की फलती-फूलती दुनिया में, कई उल्लेखनीय परिवर्तन हो रहे हैं। खेती विकसित हो रही है, और अधिक कुशल और उत्पादक बन रही है। इस परिवर्तन में "कृषि डिस्क हैरो इम्प्लीमेंट" की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह किसानों के कामों को आसान बनाता है और फसल की पैदावार बढ़ाता है, इस प्रकार कृषि में क्रांति लाता है।
उत्तर के विविध भू-दृश्यों से लेकर दक्षिण के धूप से भरे खेतों तक, ये ट्रैक्टर उपकरण खेती को और भी स्मार्ट और कुशल बना रहे हैं। इसके अलावा, पूरा ब्लॉग पढ़ें क्योंकि हम जानेंगे कि कैसे भारत में ये कृषि डिस्क हैरो उपकरण भारतीय खेती को नया रूप दे रहे हैं, जिससे जुताई, रोपण और कटाई अधिक कुशल हो रही है। इसके अलावा, आइए भारत में खेती के भविष्य को आकार देने वाली तकनीक को समझें।
डिस्क हैरो एक कृषि यंत्र है जिसका उपयोग मिट्टी को तैयार करने और उसे बीज बोने के लिए उपयुक्त बनाने के लिए किया जाता है। सबसे पहले, इसमें एक सपाट फ्रेम पर पंक्तियों में लगी बड़ी, नुकीली धातु की डिस्क होती हैं।
इन घुमावदार डिस्क के दाँतेदार किनारे होते हैं जो मिट्टी को काटते और तोड़ते हैं। किसान कृषि डिस्क हैरो को ट्रैक्टर या किसी अन्य वाहन से जोड़ते हैं। घूमते हुए डिस्क खेत में चलाते समय ज़मीन में धँस जाते हैं।
परिणामस्वरूप, वे मिट्टी के बड़े-बड़े ढेले तोड़ देते हैं, खरपतवार काट देते हैं और पुरानी फसलों के बचे हुए हिस्सों को हटा देते हैं। इसके अलावा, वे ज़मीन को समतल और समतल बनाते हैं। लोग बीज बोने के लिए मिट्टी को उपयुक्त बनाने के लिए डिस्क हैरो ट्रैक्टर उपकरणों का उपयोग करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि यह नरम और अच्छी तरह से तैयार हो।
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डिस्क हैरो खेती में महत्वपूर्ण मशीनें हैं। इसके अलावा, ये मिट्टी को रोपाई के लिए तैयार करने, खरपतवारों को नियंत्रित करने और उसे फसलों के लिए उपयुक्त बनाने में मदद करते हैं। आइए गहराई से जानें कि किसान इन बहुमुखी कृषि उपकरणों का उपयोग कैसे करते हैं।
डिस्क हैरो का उपयोग मुख्य रूप से फसल बोने के लिए मिट्टी तैयार करने के लिए किया जाता है। ये जमी हुई मिट्टी को तोड़ते हैं, खरपतवार हटाते हैं और फसल अवशेषों को मिलाते हैं, जिससे ज़मीन रोपाई के लिए अधिक उपयुक्त हो जाती है।
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डिस्क हैरो ट्रैक्टर उपकरण एक चिकनी और बारीक जुताई वाली बीज क्यारी बनाते हैं, जो बीजों के समान रोपण और अंकुरण के लिए महत्वपूर्ण है। यह मिट्टी को बीजों को ग्रहण करने के लिए तैयार करता है और फसल की एकसमान वृद्धि को बढ़ावा देता है।
खरपतवारों को काटकर और उखाड़कर, डिस्क हैरो खरपतवार नियंत्रण में मदद करते हैं। इससे खरपतवारों और फसलों के बीच पोषक तत्वों और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा कम होती है, जिससे फसलें स्वस्थ होती हैं।
किसान मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ, उर्वरक या मृदा कंडीशनर मिलाने के लिए डिस्क हैरो का उपयोग कर सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ये सामग्रियाँ समान रूप से वितरित हों, जिससे मिट्टी की उर्वरता और संरचना में वृद्धि होती है।
डिस्क हैरो ज़मीन को समतल करते हैं, जो सिंचाई और अन्य कृषि मशीनरी के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है। समतल खेत पानी के असमान वितरण को रोकते हैं और कुशल रोपण और कटाई को सुगम बनाते हैं।
डिस्क हैरो के इन उपयोगों के अलावा, यह उल्लेखनीय है कि डिस्क हैरो का उपयोग जुताई के बाद मिट्टी के बड़े ढेलों को तोड़ने और रोपण के लिए एक महीन, अधिक समरूप बीज क्यारी बनाने के लिए भी किया जाता है।
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कृषि डिस्क हैरो कई लाभ प्रदान करता है, जिनमें बेहतर मिट्टी की तैयारी, बेहतर बीज-बिस्तर की गुणवत्ता और प्रभावी खरपतवार नियंत्रण शामिल हैं। जो कि निम्नलिखित हैं :-
प्रश्न : डिस्क हैरो क्या होता है ?
उत्तर : डिस्क हैरो एक कृषि यंत्र है, जिसका उपयोग मिट्टी को तैयार करने और उसे बीज बोने के लिए उपयुक्त बनाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न : डिस्क हैरो का क्या उपयोग होता है ?
उत्तर : डिस्क हैरो का उपयोग बुवाई से पहले मिट्टी तैयार करने के लिए किया जाता है, जिसमें मिट्टी के ढेलों को तोड़ना, खरपतवारों को नष्ट करना और फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाना शामिल है।
प्रश्न : डिस्क हैरो से क्या लाभ होते हैं ?
उत्तर : कृषि डिस्क हैरो कई लाभ प्रदान करता है, जिनमें बेहतर मिट्टी की तैयारी, बेहतर बीज-बिस्तर की गुणवत्ता, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण और श्रम व लागत में कमी शामिल हैं।
भारतीय बाजार में लेजर लैंड लेवलर के टॉप 5 ब्रांडों में महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, सोनालिका, जॉन डियर और दशमेश शामिल हैं। यह विभिन्न मॉडलों और फीचर्स के साथ आते हैं और खेती की उत्पादकता को बढ़ाने में सहयोग करते हैं।
ये उपकरण लेजर तकनीक का इस्तेमाल करके खेतों को बेहतर ढ़ंग से समतल करते हैं, जिससे मृदा में समान नमी वितरण, बेहतर अंकुरण और फसल की उपज में वृद्धि होती है।
महिंद्रा के लेजर लैंड लेवलर "धरती मित्र" नाम से जाने जाते हैं और ये खेत को समतल करने के लिए एक प्रभावी उपकरण हैं। महिंद्रा का धरती मित्र लेजर लेवलर 6.5 फीट, 7 फीट मानक बकेट, 7 फीट स्पोर्ट्स बकेट और 7 फीट स्पोर्ट्स ज़िग-ज़ैग व्हील बकेट जैसे विभिन्न मॉडलों में उपलब्ध है, जो 40/30 एचपी से अधिक ट्रैक्टरों के लिए उपयुक्त हैं।
महिंद्रा के लेजर लैंड लेवलर उन्नत तकनीक से लैस होते हैं और खेत को समतल बनाने के काम को आसान बनाते हैं, जिससे पानी की बचत होती है और उपज बढ़ती है।
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न्यू हॉलैंड लेजर लैंड लेवलर कंपनी के विभिन्न लेजर लेवलर मॉडलों और अन्य ब्रांडों को संदर्भित करता है। न्यू हॉलैंड लेजर लेवलर आमतौर पर 51-60 HP के ट्रैक्टरों के साथ उपयुक्त होते हैं और विभिन्न कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यह ब्रांड विभिन्न प्रकार के लेज़र लैंड लेवलर प्रदान करता है जो आधुनिक कृषि के लिए आवश्यक हैं।
सोनालिका लेजर लैंड लेवलर (Sonalika Laser Land Leveler) एक आधुनिक कृषि उपकरण है, जो लेजर तकनीक का उपयोग करके ऊबड़-खाबड़ खेतों को समतल करता है, जिससे समान जल वितरण, बेहतर बीज अंकुरण और अंततः उच्च फसल उपज प्राप्त होती है। यह पानी, बिजली और समय बचाता है, साथ ही अन्य कृषि आदानों के विवेकपूर्ण उपयोग में सुधार करता है। ये उपकरण भारतीय किसानों के बजट के अनुकूल हैं और विभिन्न मॉडलों में उपलब्ध हैं।
सोनालिका के लेज़र लेवलर भी लोकप्रिय हैं और खेती को अधिक कुशल बनाने में मदद करते हैं।
जॉन डियर लेजर लैंड लेवलर एक आधुनिक कृषि उपकरण है जो खेत को समतल करने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग करता है, जिससे समान जल वितरण, बीज अंकुरण और फसल की पैदावार बढ़ती है, साथ ही पानी और उर्वरक की बचत होती है।
यह एक तकनीकी रूप से उन्नत ट्रैक्टर संलग्नक है जो लेजर बीम का उपयोग करके वांछित ढलान पर खेत को सटीक रूप से समतल करता है। यह ब्रांड लेजर लैंड लेवलर के लोकप्रिय मॉडलों में से एक है, जो खेतों को समतल करने के लिए एक सटीक समाधान प्रदान करता है।
दशमेश लेजर लैंड लेवलर दसमेश मैकेनिकल वर्क्स द्वारा बनाया गया एक कृषि उपकरण है जो खेत को लेजर तकनीक से समतल करता है। यह कृषि उत्पादकता में सुधार करता है, पानी और उर्वरकों की बचत करता है, और खेत में खादों के बेहतर वितरण में मदद करता है। दशमेश 974 एक लोकप्रिय मॉडल है, जो नवीनतम तकनीक और मजबूत सामग्री से बना है। दशमेश के लेजर लैंड लेवलर भी भारत में काफी पसंद किए जाते हैं और कृषि कार्यों को प्रभावी बनाते हैं।
प्रश्न : लेजर लैंड लेवलर खेत को एकसार करने में क्या भूमिका निभाता है ?
उत्तर : सटीक समतलीकरण लेजर किरण का उपयोग करके खेत के हर हिस्से को बिल्कुल एकसार किया जाता है।
प्रश्न : लेजर लैंड लेवलर से सिंचाई में क्या लाभ होता है ?
उत्तर : खेत में पानी का समान वितरण होने से पानी की बर्बादी नहीं होती है।
प्रश्न : लेजर लैंड लेवलर से बीज अंकुरण में क्या लाभ होता है ?
उत्तर : समान रूप से समतल जमीन से बीज बेहतर ढ़ंग से अंकुरित होते हैं।
प्रश्न : लेजर लैंड लेवलर से उत्पादन में कितनी वृद्धि होती है ?
उत्तर : लेजर लैंड लेवलर से कुशल समतलीकरण के चलते फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होती है।
खेती किसानी में ट्रैक्टर एक बहुमुखी मशीन है। लेकिन, बिना कृषि उपकरण के साथ यह कार्य करने में असमर्थ है। इसलिए खेती किसानी में जो महत्व ट्रैक्टर का है वही कृषि उपकरणों का भी है। क्योंकि एक ट्रैक्टर कृषि यंत्रों का उपयोग कर विभिन्न कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त होता है। जैसे जुताई, बुवाई, कटाई और परिवहन आदि।
रोटावेटर एक कृषि उपकरण है जिसका उपयोग मिट्टी को तोड़ने, मिलाने और हवा देने के लिए किया जाता है, ताकि इसे बुवाई के लिए तैयार किया जा सके। रोटावेटर को रोटरी टिलर भी कहा जाता है। रोटावेटर, घूमने वाले ब्लेड का उपयोग करके मिट्टी को मिलाता है, उसे पलटता है और बारीक बना देता है।
रोटावेटर एक ऐसा उपकरण है जो मिट्टी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, जिससे बुवाई के लिए एक समान और अच्छी तरह से तैयार क्षेत्र बनता है।
सीड ड्रिल से बीजों को उचित दर और गहराई पर बोया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि बीज मिट्टी से ढके रहें। इससे वे पक्षियों और जानवरों द्वारा खाए जाने या धूप में सूखने से बच जाते हैं।
सीड ड्रिल मशीनों में, बीजों को पंक्तियों में लगाया जाता है। इससे पौधों को मिट्टी से पर्याप्त धूप और पोषक तत्व मिलते हैं। सीड ड्रिल एक ऐसा उपकरण है जो बीजों को एक समान गहराई और दूरी पर बोने में मदद करता है, जिससे पौधों की वृद्धि और उपज में सुधार होता है।
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स्प्रे पंप या स्प्रेयर पंप एक ऐसा उपकरण है, जो किसानों को पानी, खाद, दवा छिड़कने और कीटनाशक को फसलों पर आसान और तेजी से छिड़कने में मदद करता है। स्प्रे पंप यह सुनिश्चित करता है कि पौधों के हर हिस्से पर समान रूप से छिड़काव हो, जिससे कीटों और बीमारियों से सुरक्षा मिले। स्प्रेयर का उपयोग कीटनाशकों, शाकनाशकों और उर्वरकों को फसलों पर समान रूप से छिड़कने के लिए किया जाता है।
हार्वेस्टर एक कृषि मशीन है जिसका उपयोग फसलों की कटाई और थ्रेसिंग (अलग करना) के लिए किया जाता है। यह मशीनें आधुनिक कृषि में दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। हार्वेस्टर एक ऐसा उपकरण है जो फसलों को काटता और इकट्ठा करता है, जिससे कटाई का काम तेज और कुशल हो जाता है।
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कल्टीवेटर एक कृषि उपकरण है जिसका उपयोग खेत की जुताई और खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता है। यह मिट्टी को ढीला करने, खरपतवारों को हटाने और बीज बोने से पहले मिट्टी को समतल करने में मदद करता है। कल्टीवेटर का उपयोग मिट्टी को ढीला करने और खरपतवारों को हटाने के लिए किया जाता है, जिससे फसल की वृद्धि के लिए बेहतर स्थिति बनती है।
प्रश्न : हार्वेस्टर का उपयोग क्यों किया जाता है ?
हार्वेस्टर का उपयोग मुख्य रूप से फसलों की कटाई, थ्रेसिंग यानी अनाज को भूसे से अलग करने और सफाई के लिए किया जाता है, जिससे समय और श्रम की बचत होती है।
प्रश्न : स्प्रेयर का खेती में क्या उपयोग होता है ?
खेती में स्प्रेयर का उपयोग कई तरह से किया जाता है। मुख्य रूप से पौधों पर तरल पदार्थों जैसे उर्वरक, शाकनाशी, कीटनाशक या अन्य पोषक तत्वों का छिड़काव करने के लिए किया जाता है।
प्रश्न : कल्टीवेटर खेती में क्या कार्य करता है ?
कल्टीवेटर एक कृषि उपकरण है, जो खेत की जुताई, खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी को ढीला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा कृषि और निर्माण उपकरणों में अग्रणी, एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड (ईकेएल) ने कुबोटा ब्रांड के तहत अपनी तीसरी पीढ़ी के राइड-ऑन राइस ट्रांसप्लांटर - KA6 और KA8 - लॉन्च किए हैं।
जापान में निर्मित, ये मॉडल उन्नत तकनीक को व्यावहारिक क्षेत्र उपयोग के साथ जोड़ते हैं। ये उच्च उत्पादकता, बेहतर ऑपरेटर आराम और सटीक रोपण प्रदान करते हैं।
ये ट्रांसप्लांटर 7 राज्यों - तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में पेश किए गए हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मशीनीकृत धान की खेती की मांग लगातार बढ़ रही है।
KA6 और KA8 ईंधन-कुशल कुबोटा इंजन द्वारा संचालित हैं जो क्रमशः 21 एचपी और 24 एचपी प्रदान करते हैं, जो कठिन क्षेत्र परिस्थितियों में भी विश्वसनीय प्रदर्शन सुनिश्चित करते हैं। दोनों मॉडलों में सुचारू संचालन और समान रोपण गहराई के लिए एक स्मार्ट टर्निंग सिस्टम, स्वचालित लिफ्ट फ़ंक्शन, मल्टीफ़ंक्शन कंट्रोल लीवर और क्षैतिज नियंत्रण तंत्र है। पुनः डिज़ाइन किए गए रोपण पंजे, छूटे हुए रोपण को कम करते हैं, और बेहतर पौध चयन मार्गदर्शिका उच्च सटीकता, बेहतर फसल वृद्धि और निरंतर उपज सुनिश्चित करती है।
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संचालकों के आराम को एक व्यापक प्लेटफ़ॉर्म, एर्गोनॉमिक लेआउट, सूर्यास्त के बाद के काम के लिए एलईडी लाइट्स, हल्के रोपण खंड और लंबे व्हीलबेस के साथ भी बढ़ाया गया है। ये विशेषताएँ संतुलन, स्थिरता और गति में आसानी में सुधार करती हैं, जिससे ट्रांसप्लांटर गहरे, गीले खेतों में लंबे समय तक उपयोग के लिए उपयुक्त हो जाते हैं।
लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए, मुख्य वित्तीय अधिकारी और पूर्णकालिक निदेशक, श्री भरत मदान ने कहा: "मशीनीकरण किसानों को सशक्त बनाने, उनकी गरिमा बढ़ाने और कृषि को अधिक कुशल बनाने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन है। नए केए सीरीज़ चावल ट्रांसप्लांटर, वैश्विक तकनीक को स्थानीय जानकारियों के साथ मिलाकर, सटीकता, आराम और नवाचार के साथ एक श्रम-गहन प्रक्रिया को बदल देते हैं।"
कृषि समाधान व्यवसाय प्रभाग के मुख्य अधिकारी, श्री राजन चुघ ने कहा, "KA6 और KA8 किसान-केंद्रित डिज़ाइन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जो श्रमिकों की कमी और लंबे कार्य घंटों जैसी वास्तविक चुनौतियों का समाधान करते हैं। उच्च हॉर्सपावर, स्मार्ट टर्निंग और एर्गोनॉमिक लेआउट के साथ, ये मशीनें चावल की रोपाई को तेज़, एकसमान और अधिक लाभदायक बनाती हैं।"
EKL एक प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनी है जिसके पास कृषि और निर्माण उपकरणों में 80 से अधिक वर्षों का अनुभव है। यह फार्मट्रैक, पावरट्रैक, कुबोटा ट्रैक्टर, फार्मपावर मशीनरी और निर्माण उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला बनाती है, जिसमें भारतीय नवाचार को जापानी परिशुद्धता के साथ जोड़ा गया है। EKL एक व्यापक डीलर नेटवर्क के माध्यम से पूरे भारत और दुनिया भर के किसानों को सेवा प्रदान करती है।
कृषि एवं निर्माण उपकरण क्षेत्र की वैश्विक अग्रणी कंपनी सीएनएच ने पुणे में अपने विनिर्माण केंद्र के निकट एक अत्याधुनिक पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (पीडीसी) का प्रारंभ किया है। यह नया केंद्र कंपनी की आफ्टर मार्केट सेवाओं को मजबूत करने और दक्षिण व पश्चिम भारत के ग्राहकों को तेज, विश्वसनीय और तकनीक-संचालित समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। सीएनएच की ओर से पुणे में खोला गया यह नया पार्ट्स वितरण केंद्र प्रमुख रूप से गन्ना हार्वेस्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और बेलर के लिए बेहतर सेवाएं प्रदान करेगा।
पुणे का यह नया पीडीसी विशेष रूप से CASE IH गन्ना हार्वेस्टर, न्यू हॉलैंड कंबाइन हार्वेस्टर और बेलर जैसे फसल समाधान उत्पादों के लिए एक समर्पित सेवा केंद्र के रूप में कार्य करेगा। केंद्र में उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ RFID-सक्षम प्रणाली को जोड़ा गया है, जो पुर्जों की ट्रैकिंग, उपलब्धता और वितरण में सटीकता और दक्षता को बढ़ाती है।
इससे डीलरों और ग्राहकों को समय पर पुर्जों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, जो कृषि मशीनरी के निर्बाध संचालन के लिए बेहद आवश्यक है। यह पुणे पीडीसी, सीएनएच के भारत में स्थापित चौथे वितरण केंद्र के रूप में नोएडा, इंदौर और सिकंदराबाद स्थित मौजूदा केंद्रों के नेटवर्क को और विस्तार देता है। चारों केंद्र मिलकर कंपनी की आफ्टर मार्केट सपोर्ट क्षमता को देशभर में मजबूत करते हैं, जिससे ग्राहकों को तेज व सुगम समाधान प्राप्त होते हैं।
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नए केंद्र के शुभारंभ अवसर पर सीएनएच इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नरिंदर मित्तल ने कहा, “सीएनएच में हमारा हर निवेश ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है। दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्र देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र हैं, जहां कृषि मशीनरी के सुचारू संचालन के लिए समय पर पुर्जों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।
पुणे में यह नया पीडीसी हमें ग्राहकों के और करीब लाता है और सेवा प्रतिक्रिया को और तेज तथा बेहतर बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह नया केंद्र न सिर्फ आफ्टरमार्केट नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि ग्राहकों को तकनीक-संचालित, विश्वसनीय पुर्जों और सेवा सहायता प्रदान करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को भी और गहरा करेगा।
सीएनएच का यह केंद्र टिकाऊ और स्मार्ट संचालन पर भी ध्यान केंद्रित करता है। पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग, ऊर्जा-कुशल तकनीक और कम पर्यावरणीय प्रभाव वाले प्रक्रियाओं को अपनाकर कंपनी अपने सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ा रही है। पुर्जों की तेज और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह केंद्र विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स प्रदाता डीएचएल (DHL) सप्लाई चेन के साथ साझेदारी में संचालित किया जा रहा है।
सीएनएच इंडिया पिछले 25 वर्षों से “मेड इन इंडिया” के तहत वैश्विक गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान कर रहा है। कंपनी भारत में CASE IH, New Holland और CASE Construction Equipment ब्रांड के तहत काम करती है, जिसे सीएनएच कैपिटल और ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटर का समर्थन प्राप्त है।
पुणे पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर का शुभारंभ कंपनी की ग्राहकों के साथ निकटता बढ़ाने, सेवा टर्नअराउंड समय में सुधार लाने और आफ्टरमार्केट दक्षता को और मजबूत बनाने की रणनीति को नई गति देता है।
इस विस्तार के साथ सीएनएच भारत के तेजी से बढ़ते कृषि एवं निर्माण क्षेत्रों को टिकाऊ, तकनीक-संचालित और विश्वसनीय समाधान प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता रहेगा।
प्रश्न: सीएनएच ने हाल ही में अपना नया पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (PDC) कहाँ स्थापित किया है ?
उत्तर: पुणे, महाराष्ट्र में।
प्रश्न: सीएनएच का यह नया पीडीसी किन कृषि उपकरणों के लिए बेहतर सेवा प्रदान करेगा ?
उत्तर: गन्ना हार्वेस्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और बेलर।
प्रश्न: इस पीडीसी में कौन-सी तकनीक पुर्जों की ट्रैकिंग और वितरण को बेहतर बनाती है ?
उत्तर: RFID-सक्षम प्रणाली।
प्रश्न: पुणे पीडीसी किस संख्या का पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर है ?
उत्तर: भारत में सीएनएच का चौथा पीडीसी।
प्रश्न: सीएनएच के अन्य पीडीसी किन-किन शहरों में स्थित हैं ?
उत्तर: नोएडा, इंदौर और सिकंदराबाद।