खेती में लगातार बढ़ती डीजल और पेट्रोल की कीमतें, मजदूरों की कमी और उत्पादन लागत में इजाफा किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनी किसानक्राफ्ट ने भारतीय किसानों के लिए दो नए इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण लॉन्च किए हैं। कंपनी ने ई-इंटर-कल्टीवेटर और ई-सेल्फ-प्रोपेल्ड रीपर को बाजार में उतारा है।
ये दोनों मशीनें पूरी तरह भारत में विकसित और निर्मित हैं। कंपनी का दावा है कि इनका उद्देश्य खेती की लागत कम करना, ईंधन पर निर्भरता घटाना और छोटे तथा मध्यम किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। खेती में आधुनिक मशीनों का उपयोग न केवल समय बचाता है बल्कि उत्पादकता बढ़ाने और श्रम लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उपकरण खरीदने से पहले किसान उसकी उपयोगिता, क्षमता, रखरखाव खर्च और परिचालन लागत की तुलना अवश्य करें। सही मशीन का चयन खेती को अधिक लाभदायक बना सकता है। यदि किसी किसान के पास सीमित भूमि है, तो उसके लिए हल्की, कम खर्च वाली और आसान संचालन वाली मशीन अधिक उपयोगी होती है।
किसानक्राफ्ट की नई इलेक्ट्रिक मशीनें इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं। इनमें ईंधन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे लंबे समय में किसानों का खर्च काफी कम हो सकता है। साथ ही कम शोर और आसान संचालन के कारण इनका उपयोग सभी आयु वर्ग के किसान आसानी से कर सकते हैं।
कंपनी के अनुसार, इन इलेक्ट्रिक मशीनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी बेहद कम परिचालन लागत है। जहां पारंपरिक पेट्रोल आधारित कृषि मशीनों को चलाने में लगभग 170 रुपये प्रति घंटा का खर्च आता है, वहीं इन नई इलेक्ट्रिक मशीनों को चलाने का खर्च केवल करीब 10 रुपये प्रति घंटा बताया गया है।
यानी किसान ऊर्जा लागत में 90 प्रतिशत से अधिक की बचत कर सकते हैं। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के दौर में यह बचत छोटे और मध्यम किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। कम ऊर्जा लागत के साथ-साथ मशीनों का रखरखाव भी अपेक्षाकृत सस्ता है, जिससे खेती का कुल खर्च कम होने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानक्राफ्ट ने स्पष्ट किया है, कि ये मशीनें किसी पुराने पेट्रोल मॉडल को इलेक्ट्रिक में बदलकर तैयार नहीं की गई हैं। इन्हें पूरी तरह समर्पित इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर डिजाइन और विकसित किया गया है। इसमें नई पीढ़ी की मोटर और उन्नत बैटरी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे मशीनों की कार्यक्षमता और टिकाऊपन बढ़ता है।
कंपनी के अनुसार, बाजार में लॉन्च करने से पहले इन मशीनों का भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रकार की मिट्टी और कृषि परिस्थितियों में 100 घंटे से अधिक परीक्षण किया गया। इसके अलावा, ई-इंटर-कल्टीवेटर को कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (FMTTI) से भी स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जिससे इसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन पर भरोसा बढ़ता है।
ई-इंटर-कल्टीवेटर को विशेष रूप से खरपतवार नियंत्रण और अंतर-खेती के कार्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें 32 जे-आकार के ब्लेड लगाए गए हैं, जो प्रभावी तरीके से खरपतवार हटाने में सक्षम हैं। इस मशीन का वजन लगभग 150 किलोग्राम है और कंपनी का दावा है कि यह एक घंटे में लगभग एक एकड़ भूमि पर कार्य कर सकती है।
एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह करीब 3.5 घंटे तक लगातार काम करती है। छोटे खेतों में मशीन को आसानी से घुमाने और संचालित करने के लिए इसमें रिवर्स ड्राइव की सुविधा भी दी गई है। इससे किसानों को संकरी जगहों पर भी मशीन चलाने में आसानी होती है।
कंपनी का दूसरा नया उत्पाद ई-सेल्फ-प्रोपेल्ड रीपर है, जिसे धान, गेहूं, बाजरा और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की कटाई के लिए विकसित किया गया है। इसकी खास बात यह है कि यह मध्यम रूप से गीले धान के खेतों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।
कंपनी के मुताबिक यह मशीन भी एक घंटे में लगभग एक एकड़ क्षेत्र की कटाई करने में सक्षम है। एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह लगभग 4 घंटे तक लगातार कार्य कर सकती है। इससे किसानों को कम समय में अधिक क्षेत्र की कटाई करने में मदद मिलती है और मजदूरों पर निर्भरता भी घटती है।
दोनों मशीनों में रिमूवेबल लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी का उपयोग किया गया है, जिसे पूरी तरह चार्ज होने में लगभग 5.5 घंटे का समय लगता है। मशीनों में IP67 रेटिंग वाला मोटर और कंट्रोलर लगाया गया है, जो धूल और पानी से बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।
इन इलेक्ट्रिक उपकरणों में पेट्रोल, इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, कार्बोरेटर और स्पार्क प्लग जैसी पारंपरिक चीजों की आवश्यकता नहीं होती। परिणामस्वरूप रखरखाव का खर्च काफी कम हो जाता है। इसके अलावा ये मशीनें कम शोर करती हैं और पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं।
किसानक्राफ्ट ने बताया कि उसके नए इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण अब देशभर में फैले 5,000 से अधिक डीलरों के नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध हैं। कंपनी आने वाले समय में इन मशीनों में मोबाइल ऐप आधारित बैटरी मॉनिटरिंग, आईओटी (IoT) आधारित जियो-फेंसिंग और किराये के व्यवसाय के लिए स्मार्ट ट्रैकिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ने की योजना बना रही है।
कंपनी का मानना है, कि बढ़ती ईंधन लागत, श्रमिकों की कमी और स्मार्ट खेती की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए ये इलेक्ट्रिक कृषि मशीनें किसानों के लिए एक किफायती, टिकाऊ और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान साबित हो सकती हैं। यदि इनका व्यापक स्तर पर उपयोग बढ़ता है, तो भारतीय कृषि में ऊर्जा बचत, लागत नियंत्रण और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।
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