अगर किसी कारणवश जुलाई तक धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में जुलाई के दौरान भी धान की नर्सरी तैयार कर सफल खेती की जा सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी है सही किस्म का चयन।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित पूसा बासमती की कई उन्नत किस्में देर से रोपाई यानी पछेती खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। ये किस्में कम अवधि में तैयार होती हैं, अच्छी पैदावार देती हैं और बाजार में बेहतर कीमत भी दिलाती हैं। इसलिए समय निकल जाने के बावजूद किसान उचित योजना बनाकर अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
देर से रोपाई की स्थिति में ऐसी धान किस्मों की आवश्यकता होती है, जो कम समय में पक जाएं और उत्पादन पर अधिक असर न पड़े। पूसा बासमती की उन्नत किस्में इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता लंबा और पतला दाना, प्राकृतिक सुगंध, बेहतर चावल गुणवत्ता तथा निर्यात में अधिक मांग है।
सामान्य धान की तुलना में बासमती धान का बाजार मूल्य अधिक होता है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ जुलाई में नर्सरी लगाने वाले किसानों को इन किस्मों को अपनाने की सलाह देते हैं।
पूसा बासमती 1509 देर से रोपाई के लिए सबसे अधिक पसंद की जाने वाली किस्मों में शामिल है। इसकी फसल लगभग 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, इसलिए यह जुलाई में नर्सरी लगाने वाले किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।
इस किस्म के पौधे मजबूत होते हैं और गिरने की संभावना कम रहती है, जिससे फसल का नुकसान भी कम होता है। इसके दाने लंबे, पतले और पकने के बाद बेहतरीन खुशबू वाले होते हैं। अच्छी कृषि प्रबंधन तकनीकों के साथ यह किस्म अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ बाजार में अच्छी कीमत भी दिलाती है।
पूसा बासमती 1847 उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो बेहतर पैदावार के साथ गुणवत्तापूर्ण बासमती चावल का उत्पादन करना चाहते हैं। यह किस्म लगभग 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और औसतन 28 से 32 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
इसके दाने लंबे, पतले और अत्यधिक सुगंधित होते हैं, जिसकी वजह से घरेलू बाजार के अलावा निर्यात में भी इसकी अच्छी मांग रहती है। इस किस्म की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (झुलसा) और ब्लास्ट (झोंका) जैसे प्रमुख रोगों के प्रति सहनशील मानी जाती है, जिससे किसानों का जोखिम काफी कम हो जाता है।
पूसा बासमती 1692 को विशेष रूप से बेहतर गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह किस्म कई सामान्य धान रोगों के प्रति अन्य किस्मों की तुलना में अधिक सहनशील मानी जाती है।
इसके लंबे और पतले दाने उत्कृष्ट गुणवत्ता के होते हैं तथा पकने के बाद अच्छी खुशबू देते हैं। देर से रोपाई की स्थिति में भी यह किस्म संतोषजनक उत्पादन देती है। जिन किसानों की नर्सरी या रोपाई किसी कारण से देर से हो रही है, उनके लिए यह किस्म एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प साबित हो सकती है।
पूसा बासमती 1121 भारत की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय बासमती किस्मों में गिनी जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पकने के बाद इसके दाने बेहद लंबे हो जाते हैं और इनमें प्राकृतिक सुगंध होती है। यही कारण है कि इस किस्म की घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काफी मांग रहती है।
हालांकि इसकी फसल लगभग 140 से 145 दिनों में तैयार होती है और औसत उत्पादन 19 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ रहता है। यदि क्षेत्र की जलवायु और समय इसकी अनुमति देते हैं, तो यह किस्म किसानों को उत्कृष्ट गुणवत्ता और बेहतर लाभ प्रदान कर सकती है।
पूसा बासमती 1885 पछेती खेती के लिए विकसित की गई नई उन्नत किस्मों में शामिल है। इसे अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके दाने लंबे, आकर्षक और सुगंधित होते हैं, जिससे बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी रहती है।
यह किस्म देर से नर्सरी लगाने और रोपाई करने वाले किसानों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। सही पोषण, सिंचाई और फसल प्रबंधन अपनाने पर यह कम समय में अच्छी उपज देने की क्षमता रखती है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है।
जुलाई में धान की नर्सरी तैयार करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाना जरूरी है। सबसे पहले हमेशा प्रमाणित और शुद्ध बीज का ही चयन करें ताकि पौध स्वस्थ और मजबूत तैयार हो। बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें, जिससे शुरुआती अवस्था में रोगों का खतरा कम हो सके। नर्सरी ऐसी जगह बनाएं जहां पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो, क्योंकि जलभराव से पौधों को नुकसान हो सकता है।
समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से पौध मजबूत बनती है और रोपाई के बाद तेजी से बढ़वार करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही किस्म के चयन के साथ वैज्ञानिक खेती अपनाकर जुलाई में भी किसान बासमती धान की सफल खेती कर बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
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