मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव अब केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक कृषि व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। अब तक दुनिया कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट को लेकर चिंतित थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली संकट खाद (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति पर पड़ने वाला है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर सीधे खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा और कई देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है।
ईरान के पास स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह सिर्फ तेल के लिए ही नहीं, बल्कि खाद की वैश्विक सप्लाई के लिए भी बेहद अहम है। दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत उर्वरक इसी रास्ते से गुजरते हैं। अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो लाखों टन खाद की आपूर्ति रुक सकती है, जिससे कई देशों की कृषि व्यवस्था प्रभावित होगी।
खाड़ी क्षेत्र के देश जैसे कतर, सऊदी अरब और ईरान खाद उत्पादन के बड़े केंद्र हैं। इन देशों के पास प्राकृतिक गैस की प्रचुर मात्रा है, जिससे वे कम लागत पर नाइट्रोजन और फॉस्फेट आधारित खाद का उत्पादन करते हैं। यही वजह है कि एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों के कई देश इन पर निर्भर हैं। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक खाद बाजार पर पड़ता है।
फारस की खाड़ी केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां स्थित कई देश खाद उत्पादन में अग्रणी हैं। उदाहरण के तौर पर, कतर की कंपनी QAFCO अकेले ही दुनिया के यूरिया उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्रदान करती है। इस क्षेत्र में उत्पादन ठप पड़ने का मतलब है वैश्विक स्तर पर खाद की भारी कमी।
ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव और हमलों ने खाद उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। रिफाइनरी और उत्पादन इकाइयों पर हमलों का खतरा बढ़ गया है, जिससे कंपनियां उत्पादन कम कर रही हैं या पूरी तरह बंद कर रही हैं। हाल ही में कतर के रास लफान क्षेत्र पर हमले के बाद एलएनजी और अमोनिया उत्पादन में गिरावट आई, जिसका सीधा असर खाद उत्पादन पर पड़ा है।
उत्पादन और सप्लाई में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की उपलब्धता कम हो गई है। अनुमान है कि लाखों टन खाद बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे आयात करने वाले देशों को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिल रही, जिससे खेती के मौसम में देरी और उत्पादन में कमी का खतरा बढ़ गया है।
सप्लाई में कमी का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। कुछ ही हफ्तों में खाद के दाम तेजी से बढ़े हैं। उदाहरण के तौर पर, मिस्र में यूरिया की कीमतों में लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह अन्य देशों में भी खाद महंगी हो रही है, जिससे किसानों की लागत बढ़ रही है और अंततः खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
खाद की कमी और बढ़ती कीमतें वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। यदि किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलती, तो फसल उत्पादन में गिरावट आएगी। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगा, जहां पहले से ही खाद्य संकट की स्थिति बनी रहती है। महंगाई बढ़ने से कमजोर वर्गों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और भुखमरी का खतरा भी बढ़ सकता है।
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प्रश्न: होर्मुज स्ट्रेट क्यों महत्वपूर्ण है ?
उत्तर: यह वैश्विक व्यापार का प्रमुख मार्ग है, जिससे लगभग 30 प्रतिशत उर्वरक और बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होता है।
प्रश्न: मध्य पूर्व तनाव का कृषि पर क्या असर पड़ रहा है ?
उत्तर: खाद आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे खेती प्रभावित, उत्पादन घटने और वैश्विक खाद्य संकट की आशंका बढ़ रही है।
प्रश्न: खाड़ी देश खाद उत्पादन में कैसे अहम हैं ?
उत्तर: कतर, सऊदी अरब जैसे देश सस्ती गैस से नाइट्रोजन-फॉस्फेट खाद बनाते हैं, जिन पर कई देश निर्भर हैं।
प्रश्न: खाद की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं ?
उत्तर: सप्लाई बाधित होने से बाजार में कमी आई, जिससे यूरिया सहित खाद के दाम तेजी से बढ़ गए हैं।
प्रश्न: खाद संकट का खाद्य सुरक्षा पर क्या प्रभाव होगा ?
उत्तर: खाद की कमी से उत्पादन घटेगा, महंगाई बढ़ेगी और गरीब देशों में भुखमरी तथा खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ेगा।