केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान, गन्ने का नया एफआरपी 365 रुपए तय

By: Tractor Choice Published on: 13-May-2026
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केंद्र सरकार ने बढ़ाया गन्ने का एफआरपी

केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। यह फैसला देशभर के लाखों गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे पहले 2025-26 सीजन में गन्ने का एफआरपी 355 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी इस बार किसानों को प्रति क्विंटल 10 रुपये अधिक मिलेंगे। नया एफआरपी 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी रेट पर लागू होगा। 

सरकार का कहना है, कि इस फैसले से किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बढ़ती खेती लागत, मजदूरी, डीजल और खाद के खर्च के बीच यह फैसला किसानों के लिए आर्थिक सहारा साबित हो सकता है। किसानों को उम्मीद है कि इस बढ़े हुए मूल्य से उन्हें फसल का बेहतर लाभ मिलेगा और खेती को लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया फैसला

सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया। बताया गया कि यह फैसला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया गया है। 

आयोग ने किसानों की लागत, उत्पादन, बाजार स्थिति और चीनी उद्योग की आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद नई दर तय करने की सलाह दी थी। केंद्र सरकार का उद्देश्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सुरक्षा देना है ताकि उन्हें गन्ने की फसल का उचित दाम मिल सके। 

सरकार का कहना है कि गन्ना किसानों की आय को स्थिर और सुरक्षित बनाना प्राथमिकता है। यही कारण है कि हर साल एफआरपी की समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जाता है। इस बार की बढ़ोतरी किसानों की उम्मीदों के अनुरूप मानी जा रही है।

अधिक रिकवरी पर किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है, कि यदि गन्ने की रिकवरी दर 10.25 प्रतिशत से अधिक रहती है तो किसानों को अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। हर 0.1 प्रतिशत रिकवरी बढ़ने पर किसानों को 3.56 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इससे उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी किसान के गन्ने की रिकवरी दर अधिक है, तो उसे सामान्य एफआरपी से ज्यादा भुगतान प्राप्त होगा। 

इससे किसान अच्छी किस्मों की खेती और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। सरकार के अनुसार नया एफआरपी किसानों की उत्पादन लागत का लगभग 200.5 प्रतिशत है। यानी किसान अपनी लागत से दोगुने से अधिक मूल्य प्राप्त करेंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

पिछले साल की तुलना में कितना बढ़ा एफआरपी

अगर पिछले सीजन से तुलना करें तो इस बार एफआरपी में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 2025-26 में गन्ने का एफआरपी 355 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि 2026-27 सीजन के लिए इसे बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यानी प्रति क्विंटल 10 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है। पहली नजर में यह बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन बड़े स्तर पर यह किसानों की आय में महत्वपूर्ण अंतर पैदा करेगी। 

जिन किसानों की खेती बड़े क्षेत्र में होती है, उन्हें लाखों रुपये तक अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस फैसले के बाद देशभर के किसानों को कुल मिलाकर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान होगा। इससे ग्रामीण बाजारों में नकदी प्रवाह बढ़ेगा और स्थानीय व्यापार को भी फायदा मिलेगा।

राज्यों में अलग-अलग मिल रहा है गन्ने का दाम

हालांकि, केंद्र सरकार एफआरपी तय करती है, लेकिन कई राज्य सरकारें इससे अधिक राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) घोषित करती हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में किसानों को केंद्र के एफआरपी से ज्यादा कीमत मिलती है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार लगभग 370 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक भुगतान किया जाता है। 

हरियाणा में यह दर करीब 386 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि पंजाब में किसानों को लगभग 391 रुपये प्रति क्विंटल तक का मूल्य मिलता है। उत्तराखंड में भी किसानों को 370 रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है। हालांकि अंतिम दरें राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर घोषित की जाती हैं। इसलिए किसानों की नजर अब इस बात पर है कि विभिन्न राज्य सरकारें इस सीजन में क्या नई दरें तय करती हैं।

बढ़े हुए एफआरपी से किसानों को होगा बड़ा फायदा

गन्ने का एफआरपी बढ़ने से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में खेती की लागत लगातार बढ़ी है। डीजल, उर्वरक, बिजली, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च पहले की तुलना में काफी अधिक हो चुका है। ऐसे में एफआरपी बढ़ने से किसानों को राहत मिलेगी। इससे उन्हें फसल उत्पादन की लागत निकालने और मुनाफा कमाने में आसानी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है, कि यदि चीनी मिलें समय पर भुगतान करें तो किसानों की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। गन्ना किसानों की सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी रही है। कई बार किसानों को महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता है। इसलिए बढ़े हुए एफआरपी के साथ समय पर भुगतान भी जरूरी माना जा रहा है।

चीनी मिलों के लिए सरकार ने बनाए सख्त नियम

सरकार ने चीनी मिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों से गन्ना एफआरपी या उससे अधिक मूल्य पर ही खरीदा जाए। किसी भी स्थिति में इससे कम भुगतान नहीं किया जा सकता। इससे किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी मिलेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों का शोषण न हो और उन्हें उनकी उपज का सही दाम मिले। 

साथ ही अधिक रिकवरी वाले गन्ने पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था भी जारी रहेगी। इससे किसानों को अच्छी गुणवत्ता का गन्ना उत्पादन करने का प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए आगे और कदम उठाए जा सकते हैं। यदि चीनी मिलें समय पर भुगतान करती हैं तो किसानों का भरोसा और मजबूत होगा।

कपास किसानों के लिए भी सरकार का बड़ा ऐलान

गन्ना किसानों के साथ-साथ केंद्र सरकार ने कपास किसानों के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘कपास कांति मिशन’ को मंजूरी दी है, जिस पर 5659 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह योजना 2026 से 2031 तक पांच वर्षों तक चलेगी। सरकार का दावा है कि इससे लगभग 32 लाख किसानों को फायदा मिलेगा। इस मिशन के तहत रिसर्च, नई तकनीक, बेहतर बीज, उत्पादन बढ़ाने और कपास निर्यात को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 

सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और भारत की कपास उत्पादन क्षमता मजबूत होगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो गन्ने का एफआरपी बढ़ाना और कपास मिशन शुरू करना किसानों के हित में बड़ा फैसला माना जा रहा है। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि इन योजनाओं का लाभ जमीन पर कितनी तेजी से पहुंचता है।

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