भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया व्यापार समझौता भारतीय कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 50% प्रतिशत से घटाकर 18% प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय किसान लंबे समय से निर्यात के बेहतर अवसरों की तलाश में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस समझौते की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया। इस डील से किसानों को वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
टैरिफ में भारी कटौती के बाद अब अमेरिकी बाजार भारतीय कृषि उत्पादों के लिए पहले से कहीं ज्यादा खुला हो गया है। चावल, मसाले, दालें, फल और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद अब कम कीमत पर अमेरिका पहुंच सकेंगे। इससे न सिर्फ इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी, बल्कि भारतीय ब्रांड्स की मौजूदगी भी मजबूत होगी। अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल घरेलू मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। निर्यात बढ़ने से फसलों के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है, खासकर उन किसानों को जो पहले से ही एक्सपोर्ट क्वालिटी उत्पादन कर रहे हैं।
इस व्यापार समझौते का सीधा फायदा किसानों की आय पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ने से फसलों की मांग स्थिर रहेगी और कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होगा। इससे किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। खासतौर पर वे किसान जो ऑर्गेनिक खेती, प्रोसेस्ड फूड या विशेष किस्मों की फसलें उगाते हैं, उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है। यह समझौता किसानों को वैश्विक मानकों के अनुसार उत्पादन के लिए भी प्रेरित करेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में आधुनिकता आएगी।
इस समझौते का सबसे बड़ा असर मत्स्य पालन और झींगा निर्यात पर देखने को मिल सकता है। भारत पहले से ही झींगा निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में लाखों किसान इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। पहले 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारतीय झींगा अमेरिकी बाजार में महंगा पड़ता था, जिससे किसानों को नुकसान होता था। अब टैरिफ घटने से भारतीय झींगा अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा और अमेरिका में इसकी मांग बढ़ने की पूरी संभावना है।
निर्यात बढ़ने का फायदा केवल बड़े निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा। मत्स्य पालन और कृषि से जुड़े लाखों छोटे किसान, मजदूर, महिलाएं और ग्रामीण युवा इससे लाभान्वित होंगे। अगर अमेरिका से ऑर्डर बढ़ते हैं, तो हैचरी, फीड सप्लाई, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग और कोल्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और गांवों से शहरों की ओर पलायन पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है।
हालांकि, इस समझौते से मौके बड़े हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए सख्त गुणवत्ता मानक, फूड सेफ्टी नियम और ट्रेसबिलिटी सिस्टम का पालन करना जरूरी होगा। किसानों और मछली पालकों को अब ज्यादा वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों को अपनाना पड़ेगा। अच्छी बात यह है कि इस समझौते के साथ अमेरिका से नई तकनीक, आधुनिक मशीनें और बेहतर प्रोसेसिंग सिस्टम भारत आने का रास्ता भी खुलेगा, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और क्षमता दोनों में सुधार हो सकता है।
अगर अमेरिका भारत पर 50% प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाता, तो इसका असर बेहद नकारात्मक होता। इतनी ऊंची दर पर भारतीय कृषि उत्पाद और झींगा अमेरिकी बाजार में बहुत महंगे हो जाते। इसके चलते अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों से आयात करना शुरू कर देते और भारतीय निर्यात में भारी गिरावट आती। घरेलू बाजार में अधिक सप्लाई होने से कीमतें गिरतीं और किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ता। खासकर झींगा किसानों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक होती, क्योंकि उनकी उत्पादन लागत ज्यादा होती है। ऐसे में मौजूदा समझौता भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी राहत और नई उम्मीद बनकर सामने आया है।