मध्य प्रदेश सरकार कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की खरीद पर आकर्षक अनुदान उपलब्ध करा रही है। इस मशीन की बाजार कीमत लगभग 14 लाख 40 हजार रुपये बताई गई है। पात्र किसानों को इसकी खरीद पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है।
सरकार का उद्देश्य है कि छोटे और मध्यम किसान भी आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें और खेती को अधिक लाभकारी बना सकें। इस योजना से किसानों पर मशीन खरीदने का आर्थिक बोझ कम होता है और वे आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर खेती की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।
मध्य प्रदेश में मानसून की अच्छी बारिश के बाद धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है। इसी बीच कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। जबलपुर जिले के पाटन क्षेत्र के ग्राम उजरोड में कृषि अधिकारियों ने किसान रूपेश पटेल के खेत का निरीक्षण किया, जहां पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई की जा रही थी।
अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक पारंपरिक रोपाई की तुलना में अधिक प्रभावी और किफायती है। मशीन के उपयोग से मजदूरों पर निर्भरता कम होती है, कम समय में अधिक क्षेत्र में रोपाई संभव होती है और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलता है। किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की खरीद पर 5 लाख रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन धान की खेती में कई तरह से लाभ पहुंचाती है। धान रोपाई के समय अक्सर मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है, लेकिन इस मशीन के माध्यम से यह परेशानी काफी हद तक दूर हो जाती है। मशीन कम समय में बड़े क्षेत्र में रोपाई कर देती है, जिससे श्रम लागत और समय दोनों की बचत होती है। इसके अलावा मशीन पौधों और कतारों के बीच समान दूरी बनाए रखती है, जिससे खरपतवार नियंत्रण, गुड़ाई और अन्य कृषि कार्य आसान हो जाते हैं। एक समान रोपाई होने से पौधों को पर्याप्त पोषण और प्रकाश मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है और फसल अधिक स्वस्थ बनती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैडी ट्रांसप्लांटर से सामान्यतः 18 से 21 दिन की कम उम्र वाली नर्सरी की रोपाई की जाती है। कम उम्र की पौध खेत में जल्दी स्थापित होकर अधिक कंसे (टिलर्स) विकसित करती है, जिससे प्रति पौधा अधिक बालियां निकलने की संभावना रहती है। यही कारण है कि इस तकनीक से उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलती है।
साथ ही पौधों के बीच उचित दूरी रहने के कारण रोग और कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है। कृषि विभाग के अनुसार पारंपरिक मजदूरों से धान रोपाई कराने में प्रति एकड़ लगभग 6,000 से 7,000 रुपये तक खर्च आता है, जबकि पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से यही कार्य करीब 3,000 रुपये प्रति एकड़ में पूरा हो जाता है। इस तरह किसान रोपाई की लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक बचत कर सकते हैं।
पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई के लिए सबसे पहले 18 से 21 दिन की स्वस्थ और समान आकार की नर्सरी तैयार की जाती है। इसके बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर उसमें पर्याप्त पानी भरकर समतल किया जाता है ताकि मशीन आसानी से चल सके। तैयार पौध को मशीन की ट्रे में लगाया जाता है और मशीन निर्धारित दूरी तथा समान गहराई पर पौधों की रोपाई करती है। इस प्रक्रिया से कतारों और पौधों के बीच उचित दूरी बनी रहती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।
एक समान रोपाई होने के कारण सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और फसल प्रबंधन के कार्य भी आसान हो जाते हैं। कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान इस आधुनिक तकनीक को अपनाते हैं, तो खेती की लागत कम होगी, श्रमिकों की कमी की समस्या दूर होगी और धान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। सरकार द्वारा दी जा रही 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी इस दिशा में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायता साबित हो रही है।
पैडी ट्रांसप्लांटर सहित अन्य कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि अभियांत्रिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होता है। आवेदन के दौरान निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना आवश्यक है तथा सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदन स्वीकृत होने के बाद सरकार के नियमानुसार किसानों को अनुदान का लाभ प्रदान किया जाता है।
निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसान रूपेश पटेल को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती से संबंधित तकनीकी सुझाव भी दिए। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक मशीनों के साथ वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। ग्राम उजरोड में इस तकनीक की सफलता देखने के बाद आसपास के कई किसानों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
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