मसूर की खेती करने वालों के लिए खुशखबरी, MSP पर खरीदेगा नेफेड

By: Tractor Choice Published on: 30-Mar-2026
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मसूर की MSP खरीद मंजूर

बिहार के मसूर उत्पादक किसानों के लिए इस रबी सीजन में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) को राज्य में मसूर दाल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधे खरीद की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से किसानों को न केवल उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है, बल्कि उनकी आय में भी सीधा इजाफा होगा। यह कदम खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है, जो अक्सर बाजार में कम दाम मिलने से नुकसान उठाते हैं।

32,000 मीट्रिक टन मसूर खरीद का लक्ष्य

सरकारी जानकारी के अनुसार, NAFED इस सीजन में लगभग 32,000 मीट्रिक टन मसूर दाल की खरीद करेगा। यह पहली बार है जब बिहार में कोई केंद्रीय एजेंसी सीधे किसानों से दलहनी फसलों की MSP पर खरीद करेगी। अब तक राज्य में मुख्य रूप से धान और गेहूं जैसी फसलों की ही MSP पर खरीद होती रही है। ऐसे में मसूर जैसी दलहन फसल को इस योजना में शामिल करना कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

इस निर्णय के पीछे राज्य सरकार की सक्रिय पहल रही है। 11 फरवरी को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र सरकार से दालों की खरीद शुरू करने की मांग की गई थी। इसके बाद केंद्र ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिससे किसानों के लिए नई संभावनाएं खुल गई हैं।

किसानों की आय में वृद्धि और उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस फैसले को किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि MSP पर मसूर की खरीद शुरू होने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, यह कदम दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलता है, तो वे उसी फसल की खेती को और अधिक बढ़ावा देते हैं। इससे आने वाले वर्षों में मसूर और अन्य दालों का उत्पादन बढ़ सकता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

PACS और व्यापार मंडलों के जरिए होगी खरीद

NAFED के बिहार प्रमुख रंजय कुमार के अनुसार, मसूर खरीद की पूरी प्रक्रिया प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और व्यापार मंडलों के माध्यम से संचालित की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित तिथि से यह खरीद अभियान शुरू होगा और लगभग 60 दिनों तक चलेगा।

इस दौरान सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ना है। इसके लिए गांव स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, ताकि किसान समय पर रजिस्ट्रेशन करवा सकें और योजना का लाभ उठा सकें।

MSP पर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा दाम

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को मसूर का MSP 7,000 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। वर्तमान में खुले बाजार में मसूर का भाव लगभग 6,300 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जो MSP से कम है।

ऐसे में सरकारी खरीद किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, क्योंकि उन्हें बाजार की तुलना में अधिक कीमत मिलेगी। इससे किसानों को घाटे से बचाने में मदद मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

पिछले साल नहीं हो पाई थी खरीद

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी केंद्र सरकार ने मसूर सहित अन्य दलहनों की MSP पर खरीद की मंजूरी दी थी। हालांकि उस समय बाजार भाव MSP से अधिक होने के कारण खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी।

इस बार स्थिति अलग है, क्योंकि बाजार भाव MSP से कम है। ऐसे में किसानों के पास सरकारी खरीद का विकल्प मौजूद है, जिससे वे बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इस साल बिहार में करीब 1.37 लाख मीट्रिक टन मसूर उत्पादन का अनुमान है, जिससे तय लक्ष्य को पूरा करना आसान माना जा रहा है।

आधार आधारित भुगतान और पारदर्शी प्रक्रिया

इस पूरी खरीद प्रक्रिया को मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत लागू किया जाएगा। इसकी खास बात यह है कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान खरीद के तीन दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खाते में कर दिया जाएगा।

भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह आधार आधारित और पारदर्शी होगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। इससे किसानों को समय पर और बिना किसी कटौती के पैसा मिल सकेगा, जो पहले एक बड़ी समस्या थी।

किसानों से रजिस्ट्रेशन की अपील

बिहार सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए खरीद केंद्र स्थापित करेगी, किसानों का पंजीकरण करवाएगी और भंडारण व भुगतान की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में रजिस्ट्रेशन करवाएं, ताकि वे इस योजना का पूरा लाभ उठा सकें।

देश की दाल उत्पादन क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल केवल किसानों को बेहतर दाम देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश में दालों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत लंबे समय से दालों के आयात पर निर्भर रहा है, लेकिन इस तरह की योजनाओं से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। कुल मिलाकर, यह निर्णय बिहार के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनकी आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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