महाराष्ट्र के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमाफी योजना के तहत पात्र किसानों की तीसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में 3,51,192 किसानों को शामिल किया गया है। योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को अधिकतम 2 लाख रुपये तक के फसल कर्ज से राहत मिलेगी। राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने सोमवार को तीसरी सूची जारी होने की जानकारी दी। जिन किसानों का नाम इस सूची में शामिल है, उन्हें कर्जमाफी का लाभ पाने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
महाराष्ट्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य पात्र किसानों को बकाया फसल ऋण के बोझ से राहत देना है। योजना के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले किसानों का अधिकतम 2 लाख रुपये तक का फसल कर्ज माफ किया जाएगा। इसमें 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच वितरित किए गए ऐसे फसल ऋण शामिल हैं, जो 30 सितंबर 2025 तक बकाया थे और 31 मार्च 2026 तक चुकाए नहीं गए थे।
योजना के नियमों के अनुसार, पुनर्गठित और दोबारा पुनर्गठित किए गए ऋणों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। हालांकि, केवल सूची में नाम आने से कर्जमाफी की राशि स्वतः खाते में जमा नहीं होगी। किसानों को अपने बकाया ऋण का विवरण सत्यापित कराना होगा और आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पात्र किसानों के ऋण खातों में नियमानुसार राहत की राशि जमा की जाएगी।
तीसरी सूची में शामिल किसानों से सरकार ने अपने बकाया कर्ज की राशि का सत्यापन कराने की अपील की है। इसके लिए किसानों को नजदीकी आपले सेवा केंद्र पर जाकर आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रक्रिया से संबंधित किसान की पहचान और ऋण संबंधी विवरण का सत्यापन किया जाएगा।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने ऋण खाते का ब्योरा जांच लें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करें। सत्यापन और पात्रता संबंधी जांच पूरी होने के बाद ही कर्जमाफी की राशि संबंधित ऋण खाते में जमा की जाएगी। इसलिए सूची में नाम आने वाले किसानों के लिए समय पर प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल के अनुसार, बैंकों ने योजना के पोर्टल पर कुल 31.17 लाख बकाया ऋण खातों का विवरण अपलोड किया है। इन आंकड़ों की कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र किसानों की सूचियां जारी की जा रही हैं। सरकार ने किसानों की पहचान और ऋण संबंधी जानकारी के आधार पर चरणबद्ध तरीके से सूचियां जारी की हैं।
योजना के तहत पहली सूची 24 जुलाई को जारी की गई थी, जिसमें 16.96 लाख किसानों को शामिल किया गया था। इसके बाद 11 सितंबर को दूसरी सूची जारी हुई, जिसमें 4.20 लाख किसानों के नाम थे। अब 12 अक्टूबर को तीसरी सूची जारी की गई है, जिसमें 3,51,192 किसान शामिल हैं। तीनों सूचियों में शामिल किसानों की कुल संख्या लगभग 24.67 लाख बताई गई है।
तीसरी सूची में महाराष्ट्र के विभिन्न संभागों के किसानों को जगह दी गई है। इनमें छत्रपति संभाजीनगर संभाग के सबसे अधिक 2,06,450 किसान शामिल हैं। अमरावती संभाग के 85,076 किसानों को भी इस सूची में स्थान मिला है। इसके अलावा नागपुर संभाग के 30,738, नासिक संभाग के 14,244, पुणे संभाग के 11,928 और कोंकण संभाग के 2,756 किसान पात्र सूची में शामिल किए गए हैं।
सरकार के अनुसार, सूची में दर्ज बकाया ऋण की राशि 31 मार्च 2026 तक की स्थिति के आधार पर निर्धारित की गई है। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से आगे लगने वाले ब्याज और अन्य शुल्कों को भी योजना के प्रावधानों के अनुसार माफ किया जाएगा। इससे पात्र किसानों को बकाया कर्ज के बोझ से अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है।
योजना में उन किसानों के लिए भी प्रावधान किया गया है, जिन पर राष्ट्रीयकृत और वाणिज्यिक बैंकों से लिए गए ऋण के तहत 2 लाख रुपये से अधिक की बकाया राशि है। सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने बताया कि ऐसे किसानों के ऋण का भी सरकार की ‘हेयरकट’ नीति के तहत पूरा निपटान किया जाएगा।
हालांकि, इस श्रेणी में आने वाले किसानों के मामलों का निपटारा लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। ऐसे किसानों को अपने ऋण का विवरण संबंधित बैंक से सत्यापित कराना चाहिए, ताकि उनके मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
महाराष्ट्र सरकार ने योजना के क्रियान्वयन को आसान बनाने के लिए 19 अगस्त को मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी जारी की थी। इसके तहत दिवंगत किसानों, बुजुर्गों और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए फिंगरप्रिंट देने में असमर्थ किसानों के मामलों में भी लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र किसानों को तकनीकी या शारीरिक कठिनाइयों के कारण योजना का लाभ लेने में परेशानी न हो। ऐसे मामलों में निर्धारित वैकल्पिक प्रक्रियाओं और नियमों के अनुसार सत्यापन किया जाएगा।
तीसरी सूची में नाम आने वाले किसानों को सबसे पहले अपने बकाया ऋण का विवरण जांचना चाहिए। इसके बाद नजदीकी आपले सेवा केंद्र पर जाकर आधार प्रमाणीकरण पूरा कराना चाहिए। यदि ऋण राशि या खाते के विवरण में कोई अंतर दिखाई देता है, तो संबंधित बैंक से संपर्क करके उसका सत्यापन कराना उचित होगा। कर्जमाफी का अंतिम लाभ पात्रता की पुष्टि और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही मिलेगा। इसलिए किसानों को केवल सूची में नाम देखकर निश्चिंत नहीं होना चाहिए, बल्कि सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करनी चाहिए। इससे उनके ऋण खाते में नियमानुसार कर्जमाफी की राशि जमा होने का रास्ता साफ होगा।