4500 किसानों को बड़ी राहत, 64.7% अतिरिक्त मुआवजे का मिल सकता है लाभ

By: Tractor Choice Published on: 08-Oct-2026
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ग्रेटर नोएडा के किसानों के लिए खुला मुआवजे का रास्ता

ग्रेटर नोएडा में जमीन देने वाले हजारों किसानों के लिए लंबे समय बाद राहत की उम्मीद बनी है। उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश के बाद अब उन पात्र किसानों के मामलों पर आगे की कार्रवाई हो सकेगी, जिन्हें जमीन अधिग्रहण या खरीद के बावजूद 64.7 फीसदी अतिरिक्त प्रतिकर नहीं मिल पाया था। यह मामला वर्ष 2002 से 2013 के बीच अधिग्रहित या खरीदी गई जमीन से संबंधित है। सरकार की मंजूरी के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण संबंधित मामलों की जांच कर पात्र किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा। हालांकि, भुगतान से पहले सभी रिकॉर्ड और पात्रता की जांच अनिवार्य होगी।

करीब 4500 किसानों को मिलने की संभावना

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, इस निर्णय का संभावित लाभ करीब 4,500 किसानों को मिल सकता है। इन किसानों को अतिरिक्त प्रतिकर दिए जाने पर प्राधिकरण को 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने पड़ सकते हैं। यह अनुमान सभी संभावित पात्र मामलों की संख्या और मूल प्रतिकर के आधार पर लगाया गया है। फिलहाल किसी भी किसान को सीधे भुगतान नहीं किया जाएगा। पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित किसान की जमीन किस अवधि में अधिग्रहित या खरीदी गई थी, मूल प्रतिकर कितना निर्धारित हुआ था और पहले किस स्तर तक भुगतान किया जा चुका है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक लाभार्थियों की संख्या स्पष्ट होगी।

2002 से 2013 तक के मामलों की होगी पड़ताल

सरकार का यह निर्णय मुख्य रूप से उन जमीनों से जुड़े मामलों पर लागू होगा, जो वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण अथवा खरीद की प्रक्रिया में आई थीं। उस दौरान कुछ किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ नहीं मिल सका था। इसके पीछे अलग-अलग परिस्थितियां रही हैं। कुछ किसान आर्थिक दिक्कतों या अन्य कारणों से अदालत तक नहीं पहुंच पाए थे। अब शासनादेश के जरिए ऐसे मामलों पर नियमानुसार विचार करने का अवसर मिला है। इसका मतलब यह नहीं है कि इस अवधि के सभी किसानों को स्वतः अतिरिक्त भुगतान मिल जाएगा। लाभ के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करना जरूरी होगा।

प्राधिकरण पहले खंगालेगा पुराने रिकॉर्ड

अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान करने से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पुराने रिकॉर्ड खंगालेगा। जमीन से संबंधित अधिग्रहण और खरीद के दस्तावेज, किसान का विवरण, मूल प्रतिकर की राशि और पहले किए गए भुगतान की जानकारी का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा यह भी जांच होगी कि संबंधित मामले में पहले किसी न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कोई लाभ दिया गया है या नहीं। रिकॉर्ड की जांच के बाद पात्र किसानों को अलग किया जाएगा। इसी आधार पर लाभार्थियों की सूची तैयार की जाएगी। इसलिए किसानों के लिए अपने जमीन और मुआवजे से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।

गजराज केस बना फैसले का अहम आधार

अतिरिक्त प्रतिकर का यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के चर्चित ‘गजराज एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य’ मामले से भी जुड़ा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश शासन को भेजे प्रस्ताव में इस मामले का उल्लेख किया था। प्राधिकरण का कहना था कि जिन किसानों को किसी वजह से 64.7 फीसदी अतिरिक्त प्रतिकर नहीं मिल पाया, उनके मामलों पर भी नियमानुसार विचार होना चाहिए। इसके बाद शासन स्तर से प्राधिकरण को कार्रवाई करने की अनुमति दी गई। उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की ओर से जारी अनुमति के बाद अब प्राधिकरण इन मामलों में आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

मूल मुआवजे के आधार पर तय होगी अतिरिक्त रकम

पात्र किसानों को मिलने वाला अतिरिक्त प्रतिकर उनके मूल मुआवजे के आधार पर तय किया जाएगा। यानी किसान की जमीन के लिए जो मूल प्रतिकर निर्धारित हुआ था, उसी राशि का 64.7 फीसदी अतिरिक्त प्रतिकर के रूप में गणना की जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी पात्र किसान का मूल प्रतिकर 10 लाख रुपये निर्धारित था, तो नियमों के अनुसार 64.7 फीसदी अतिरिक्त राशि की गणना इसी आधार पर होगी। हालांकि, यह केवल समझने के लिए उदाहरण है और वास्तविक भुगतान संबंधित रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर ही निर्धारित होगा। अंतिम राशि तय करने से पहले प्राधिकरण को प्रत्येक मामले की जांच करनी होगी।

500 करोड़ से ज्यादा की देनदारी से बढ़ेगी जिम्मेदारी

करीब 4,500 संभावित लाभार्थियों और 500 करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित खर्च के कारण इस मामले में प्राधिकरण की जिम्मेदारी भी काफी बढ़ गई है। बड़ी वित्तीय देनदारी को देखते हुए भुगतान से पहले रिकॉर्ड की जांच और पात्रता का निर्धारण सावधानी से करना होगा। प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना होगा कि अतिरिक्त प्रतिकर केवल उन्हीं किसानों को मिले, जो शासनादेश में निर्धारित शर्तों के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही पुराने रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति होने पर उसका भी समाधान करना होगा। यही प्रक्रिया यह तय करेगी कि कुल कितने किसान वास्तव में भुगतान के पात्र पाए जाते हैं और उन पर कितना वित्तीय भार आएगा।

अब पात्रता सूची का इंतजार

शासनादेश के बाद किसानों को अब अगली कार्रवाई का इंतजार है। प्राधिकरण की ओर से रिकॉर्ड की जांच और पात्रता तय किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 4,500 संभावित किसानों में से कितने वास्तव में अतिरिक्त प्रतिकर पाने के हकदार हैं। इसके बाद पात्र किसानों की सूची तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल सरकार के फैसले से उन किसानों को उम्मीद जरूर मिली है, जो वर्षों से अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे थे। हालांकि, अंतिम लाभ रिकॉर्ड की जांच और निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी होने पर ही मिलेगा। इसलिए किसानों की नजर अब प्राधिकरण की अगली कार्रवाई और पात्रता सूची पर रहेगी।

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