हरियाणा मंडियों में सरसों खरीद जारी: जानें नये बदलाव

By: Tractor Choice Published on: 31-Mar-2026
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हरियाणा की मंडियों में बड़ा बदलाव

हरियाणा की अनाज मंडियों में इस बार खरीद व्यवस्था पूरी तरह बदली हुई नजर आने वाली है। राज्य में 28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो रही है, लेकिन इस बार किसानों को पारंपरिक सिस्टम की जगह एक नई डिजिटल व्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने दशकों से चली आ रही प्रक्रिया में तकनीक को शामिल करते हुए इसे आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह बदलाव केवल व्यवस्था में सुधार के लिए नहीं, बल्कि किसानों को बेहतर और निष्पक्ष अनुभव देने के उद्देश्य से किया गया है।

बायोमेट्रिक पहचान हुई अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य रूप से करानी होगी। इसका मतलब है कि मंडी में फसल बेचते समय किसान या उसके परिवार के किसी सदस्य की पहचान डिजिटल तरीके से सत्यापित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि असली किसान ही अपनी उपज बेच सकें। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होने की संभावना है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी पूरी प्रक्रिया

सरकार ने इस बार मंडियों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। गेट पास जारी करने से लेकर नीलामी और फसल उठान तक हर चरण ऑनलाइन सिस्टम के तहत संचालित होगा। इससे हर गतिविधि का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद की स्थिति में तुरंत जांच संभव होगी। यह कदम खरीद प्रक्रिया को तेज, सटीक और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोबाइल ऐप से मिलेगा गेट पास

नई व्यवस्था के तहत अब गेट पास केवल मोबाइल ऐप के जरिए ही जारी किया जाएगा। किसानों को अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसकी फोटो ऐप पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद ही उन्हें गेट पास मिलेगा। इससे मंडी में आने-जाने वाले वाहनों की निगरानी आसान होगी और अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगेगी। यह प्रणाली समय की बचत भी करेगी और प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगी।

“मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल की भूमिका

फसल बेचने से पहले किसानों के लिए “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर अपनी फसल का विवरण दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से सरकार के पास किसानों और उनकी उपज का पूरा डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे खरीद की योजना बनाना आसान होगा और किसानों को भुगतान जैसी प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। हालांकि, मंडी में फसल लाने के लिए अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं रखी गई है, जिससे किसानों को कुछ राहत भी मिली है।

नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव

नीलामी प्रक्रिया में भी इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब बोली के समय बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। किसान स्वयं या उसके परिवार का कोई सदस्य इस प्रक्रिया को पूरा कर सकता है। इसके साथ ही मंडियों में जियो-फेंसिंग तकनीक लागू की गई है, जिसके तहत सभी प्रक्रियाएं मंडी परिसर के भीतर ही पूरी करनी होंगी। इससे बाहर बैठकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने की संभावना को खत्म करने की कोशिश की गई है।

जियो-फेंसिंग से बढ़ेगी निगरानी

जियो-फेंसिंग तकनीक के उपयोग से मंडी क्षेत्र की सीमाएं तय कर दी गई हैं। गेट पास से लेकर जे-फॉर्म तक की सभी प्रक्रियाएं इसी निर्धारित क्षेत्र के भीतर पूरी करनी होंगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी गतिविधियाँ वास्तविक समय और स्थान पर ही हों। इस तकनीक के जरिए निगरानी मजबूत होगी और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।

फसल उठान में भी डिजिटल ट्रैकिंग

सरकार ने फसल उठान प्रक्रिया को भी तकनीकी रूप से सुदृढ़ किया है। अब केवल वही वाहन फसल उठान कर सकेंगे, जो मंडी परिसर में मौजूद होंगे और उनकी लोकेशन ट्रैक की जाएगी। इसके अलावा हर चरण पर फोटो कैप्चर करना अनिवार्य किया गया है। इससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड तैयार होगा और जवाबदेही तय करना आसान होगा। यह कदम पारदर्शिता के साथ-साथ कार्यप्रणाली में अनुशासन भी लाएगा।

खरीद सीजन के लिए व्यापक तैयारियां

रबी मार्केटिंग सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इस बार व्यापक तैयारियां की हैं। सैकड़ों मंडियों और खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई हैं ताकि खरीद प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल सके। अधिकारियों को तकनीकी सिस्टम के संचालन के लिए प्रशिक्षित किया गया है और किसानों को भी नई व्यवस्था के बारे में जागरूक किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

भंडारण और भविष्य की दिशा

सरकार ने गेहूं के भंडारण को लेकर भी अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जूट और अन्य बोरियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिस पर करीब 470 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे फसल के सुरक्षित भंडारण और समय पर उठान में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, हरियाणा में इस बार खरीद सीजन तकनीकी बदलावों के साथ शुरू हो रहा है। हालांकि शुरुआती दौर में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद साबित हो सकती है।

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