मध्यप्रदेश के रीवा जिले में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। 1 अप्रैल से जिले में उर्वरक (खाद) का वितरण पूरी तरह से ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ई-टोकन किसी भी किसान को खाद उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। इस संबंध में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है।
समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि ई-टोकन प्रणाली को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी किसान बिना टोकन के खाद प्राप्त न कर सके। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले किसानों को इसकी पूरी जानकारी दी जाए, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को ई-टोकन प्रणाली के बारे में जागरूक किया जाए। इसके लिए समितियों और विपणन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे समय रहते गांव-गांव तक इस जानकारी को पहुंचाएं। इसके अलावा, जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनके लिए भी विशेष व्यवस्था करने को कहा गया है। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि ऐसे किसानों को शासन द्वारा उपलब्ध जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर खाद उपलब्ध कराया जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान वंचित न रह जाए।
बैठक में गेहूं उपार्जन को लेकर भी गंभीर चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंजीकृत किसानों के रकबे का 100 प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल वास्तविक किसानों को ही उपार्जन का लाभ मिलना चाहिए। यदि कहीं रकबे में अनियमित वृद्धि पाई जाती है, तो संबंधित एसडीएम को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य गलत तरीके से लाभ उठाने वालों पर रोक लगाना है।
समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी शिकायत “नॉन अटेंडेड” न रहे। सभी विभागों को लंबित मामलों का समय पर समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने विभागों से कहा कि वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाकर सी और डी श्रेणी से ए श्रेणी में आने का प्रयास करें। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
कलेक्टर ने “संकल्प से समाधान” अभियान के तहत आयोजित शिविरों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि विकासखंड स्तर पर आयोजित इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों का समय पर निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान ब्लॉक स्तर पर ही किया जाए, ताकि जिला स्तर पर अनावश्यक भीड़ न बढ़े।
इसके अलावा “जल-गंगा संवर्धन अभियान” के तहत चल रहे कार्यों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।
बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने ऐसे अधिकारियों को नोटिस जारी करने को कहा। वहीं चाकघाट, बैकुंठपुर और मनगवां नगर परिषद के सीएमओ की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश भी दिए गए। यह कदम प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में चल रहे सभी कार्य पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किए जाएं। खासतौर पर खाद वितरण और गेहूं उपार्जन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी विभाग जिम्मेदारी के साथ अपने कार्यों को पूरा करें।
1 अप्रैल से लागू होने वाली ई-टोकन प्रणाली से खाद वितरण में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी और केवल पात्र किसानों को ही समय पर उर्वरक मिल सकेगा। यह कदम किसानों के हित में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, जिससे वितरण प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित और निष्पक्ष बनेगी।
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