राज्य सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के लिए नई-नई योजनाएं लागू कर रही है। इसी दिशा में बिहार सरकार ने सिंचाई सुविधा को सस्ता और सुलभ बनाने के उद्देश्य से 2 हॉर्स पावर (HP) की मोटर पर भारी सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसान कम कीमत में मजबूत और टिकाऊ सिंचाई मोटर खरीद सकें, जिससे उन्हें खेती के लिए पानी की व्यवस्था करने में आसानी हो।
आज भी राज्य के कई किसान सिंचाई के लिए डीजल पंप या महंगी बिजली पर निर्भर हैं, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ जाती है। डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और बिजली की आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में नियमित नहीं है। ऐसे में यह योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। सस्ती मोटर मिलने से किसान न केवल सिंचाई की लागत घटा पाएंगे, बल्कि समय पर फसल को पानी देकर बेहतर उत्पादन भी हासिल कर सकेंगे।
अगर किसान बाजार से Kirloskar, Crompton जैसे नामी ब्रांड की 2 HP मोटर खरीदते हैं, तो इसकी कीमत आमतौर पर 12,000 से 13,000 रुपए तक होती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए इतनी बड़ी राशि एक साथ खर्च करना आसान नहीं होता। लेकिन सरकार की इस सब्सिडी योजना के तहत यही मोटर किसानों को केवल 3,000 से 5,000 रुपए के बीच में मिल सकती है। यानी किसान को लगभग 7,000 से 10,000 रुपए तक की सीधी बचत होगी। यह बचत किसानों के लिए काफी मायने रखती है, क्योंकि इससे वे खेती से जुड़े अन्य जरूरी कामों जैसे बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर खर्च कर सकते हैं। इस तरह यह योजना किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी मदद करती है और उन्हें बेहतर संसाधनों तक पहुंच दिलाती है।
सरकार ने इस योजना में सामाजिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी की अलग-अलग दरें तय की हैं। एससी और एसटी वर्ग के किसानों को 2 HP मोटर पर 10,000 रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे उन्हें मोटर लगभग नाममात्र की कीमत पर मिल जाती है। वहीं सामान्य वर्ग के किसानों को लगभग 8,000 रुपए तक की सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इस व्यवस्था से समाज के कमजोर वर्ग के किसानों को ज्यादा सहायता मिल सकेगी और वे भी आधुनिक सिंचाई साधनों का उपयोग कर पाएंगे। सब्सिडी की यह राशि किसानों को मोटर खरीदने के बाद सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद बनती है।
यह 2 HP की मोटर किसानों के लिए कई तरह से लाभकारी साबित हो रही है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे सिंचाई की लागत में भारी कमी आती है। डीजल पंप की तुलना में यह ज्यादा किफायती और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। साथ ही, यह मोटर बिजली से चलने वाली होने के कारण कम खर्च में ज्यादा पानी की आपूर्ति कर सकती है। इसकी बनावट मजबूत होती है, जिससे यह लंबे समय तक टिकाऊ रहती है और बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। इससे किसानों को अतिरिक्त खर्च से राहत मिलती है। इसके अलावा, समय पर और पर्याप्त सिंचाई होने से फसलों की पैदावार बढ़ती है, जिससे किसानों की आमदनी में भी सुधार होता है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने होंगे। सबसे पहले भूमि संबंधी दस्तावेज जैसे LPC (Land Possession Certificate) जरूरी है, जिससे यह साबित हो सके कि किसान के पास खेती की जमीन है। एससी और एसटी वर्ग के किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। इसके अलावा, किसान का योजना में रजिस्ट्रेशन होना चाहिए और आधार से लिंक बैंक खाता भी जरूरी है, ताकि सब्सिडी की राशि सीधे खाते में ट्रांसफर की जा सके। इन सभी दस्तावेजों के बिना सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा, इसलिए आवेदन से पहले किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके सभी कागजात पूरे और सही हैं।
इस योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया को काफी सरल रखा गया है। सबसे पहले किसान को OFMASS Bihar से रजिस्टर्ड दुकान पर जाना होगा। वहां दुकानदार किसान का ऑनलाइन आवेदन करेगा। आवेदन के बाद कुछ दिनों के भीतर जिला कृषि कार्यालय से अप्रूवल लेटर जारी किया जाएगा। अप्रूवल लेटर मिलने के बाद किसान दोबारा उसी दुकान पर जाकर मोटर की खरीद कर सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि किसान को मोटर की पूरी कीमत पहले चुकानी होगी। खरीद के लगभग एक महीने के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस तरह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और आसान है, जिससे किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
कुल मिलाकर बिहार सरकार की यह योजना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कम कीमत में सिंचाई की सुविधा मिलने से किसानों का खेती पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे उनकी निर्भरता डीजल और महंगी बिजली पर घटेगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना खासतौर पर फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि वे कम पूंजी में बेहतर संसाधन हासिल कर पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाओं से किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी, फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। जो किसान सस्ती और भरोसेमंद सिंचाई व्यवस्था की तलाश में हैं, उनके लिए यह योजना एक सुनहरा अवसर है।