नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने कई अंतरराष्ट्रीय और विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन के पहले सत्र के बाद जारी नई दिल्ली घोषणा-पत्र में जलवायु परिवर्तन, कृषि, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और आधुनिक तकनीक जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बौद्धिक संपदा, दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष सहयोग और विश्व व्यापार संगठन में सुधार जैसे मुद्दों पर भी सदस्य देशों ने अपना ध्यान केंद्रित किया।
इस घोषणा-पत्र की खास बात यह है कि कृषि क्षेत्र को भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा गया है। ब्रिक्स देशों के बीच खेती से जुड़ी तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी और सफल कृषि पद्धतियों को साझा करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
ब्रिक्स देशों में बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। खेती के अलावा पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और कृषि कारोबार भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए कृषि से जुड़ी चुनौतियां केवल किसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
आज किसानों को मौसम में बदलाव, पानी की कमी, बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अलग-अलग देशों के अनुभव और शोध एक-दूसरे के साथ साझा किए जाएं तो कृषि क्षेत्र के लिए नए और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र के तहत कृषि से जुड़े सहयोग के चार प्रमुख क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की दिशा में सहमति बनी है। इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि तकनीक और आधुनिक खेती की जानकारी का आदान-प्रदान है। इससे ब्रिक्स देशों में विकसित नई कृषि पद्धतियों और तकनीकों को दूसरे देशों तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।
कृषि अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना भी इस सहयोग का अहम हिस्सा है। कम पानी में अधिक उत्पादन, मौसम आधारित खेती, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कृषि लागत को नियंत्रित करने जैसी तकनीकों पर सहयोग किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि इन प्रयासों को खेतों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाता है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि क्षेत्र पर लगातार दिखाई दे रहा है। कहीं बारिश कम हो रही है तो कहीं कम समय में अत्यधिक वर्षा हो रही है। बढ़ते तापमान, सूखे और बाढ़ जैसी स्थितियां फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों की जरूरत है, जो बदलते मौसम में भी उत्पादन को बनाए रखने में मदद करें।
पानी का संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और कम संसाधनों में उत्पादन जैसी तकनीकें इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। ब्रिक्स देशों के बीच इनसे जुड़े अनुभवों को साझा करने से जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिल सकता है।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भविष्य में कई काम आसान बना सकता है। मौसम का पूर्वानुमान, फसलों की निगरानी, कीट एवं रोगों की पहचान और सिंचाई की बेहतर योजना बनाने में तकनीक उपयोगी हो सकती है।
उपग्रह और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खेतों तथा फसलों से संबंधित जानकारी हासिल की जा सकती है। हालांकि, किसानों को इसका लाभ तभी व्यापक रूप से मिलेगा, जब ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल उपकरण और तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा मजबूत होगी। स्थानीय भाषाओं में आसान जानकारी उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
घोषणा-पत्र में अंतरिक्ष सहयोग और दुर्लभ खनिजों को भी महत्व दिया गया है। अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल मौसम की निगरानी, भूमि की स्थिति समझने और प्राकृतिक आपदाओं का आकलन करने में किया जा सकता है। उपग्रहों से मिलने वाला डेटा खेती की योजना बनाने और फसल की निगरानी में मदद कर सकता है।
कृषि सहयोग का संबंध वैश्विक व्यापार से भी है। डब्ल्यूटीओ में सुधार और व्यापार नियमों से जुड़े फैसलों का असर कृषि उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। ब्रिक्स देशों के बीच समन्वय से कृषि व्यापार से संबंधित मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं।
वहीं नई कृषि तकनीक, उन्नत बीज, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। इनके माध्यम से कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नई तकनीकों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि सहयोग को किसी तत्काल नई किसान योजना या सीधे आर्थिक लाभ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से सदस्य देशों के बीच सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान का ढांचा मजबूत करने की दिशा में कदम है।
अगर इन सहमतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में किसानों को बेहतर तकनीक, मौसम आधारित सलाह, डिजिटल सुविधाओं और टिकाऊ खेती से जुड़े नए विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम इन पहलों के क्रियान्वयन और किसानों तक उनकी पहुंच पर निर्भर करेगा।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, और मैसी फर्ग्यूसन जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।