किसानों को इस राज्य में शून्य प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा कृषि ऋण

By: tractorchoice Published on: 15-Sep-2026
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घर बैठे किसान कर सकेंगे किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पोर्टल की शुरुआत की है। अब किसान घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे किसानों को आवेदन और संबंधित प्रक्रिया के लिए बार-बार सरकारी या बैंक कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। 

किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को खेती से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। किसान इस राशि का उपयोग बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि उपकरण, सिंचाई और अन्य खेती संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से KCC की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि अधिक से अधिक किसान समय पर कृषि ऋण की सुविधा प्राप्त कर सकें।

12 महीने में अपनी सुविधा के अनुसार चुका सकेंगे कृषि ऋण

मध्यप्रदेश सरकार ने कृषि ऋण चुकाने की व्यवस्था को भी किसानों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में कदम उठाया है। सरकार के अनुसार अब खरीफ और रबी फसल के ऋण की अलग-अलग अदायगी की बाध्यता को समाप्त करने की व्यवस्था की जा रही है। किसानों को 12 महीने की अवधि में अपनी सुविधा और आमदनी के अनुसार ऋण चुकाने का विकल्प मिलेगा। 

इससे किसानों को फसल की बिक्री के बाद मिलने वाली आय के हिसाब से भुगतान करने में सहूलियत हो सकती है। साथ ही सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी सरल बनाने पर जोर दिया है। इससे खेती के लिए पूंजी की जरूरत वाले किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार किसानों के साथ बीज से बाजार और खेत से निर्यात तक खड़ी है और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

किसानों को योजनाओं से जोड़ने के लिए ‘कृषक कवच’ योजना

सरकार ने ऐसे किसानों को भी सरकारी योजनाओं और कृषि ऋण की सुविधा से जोड़ने के लिए ‘कृषक कवच’ योजना शुरू करने की घोषणा की है, जो किसी प्रक्रिया या खातों की जांच लंबित होने के कारण अब तक योजनाओं का लाभ नहीं ले पाए हैं। इस पहल के माध्यम से किसानों की लंबित प्रक्रियाओं को पूरा कर उन्हें सरकारी योजनाओं की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 

सरकार का उद्देश्य है कि पात्र किसानों को केवल दस्तावेजी या तकनीकी कारणों से कृषि ऋण, सब्सिडी और अन्य योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इसके साथ ही किसानों को फार्मर आईडी बनवाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

सरकार के अनुसार फार्मर आईडी से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, समर्थन मूल्य पर भुगतान प्राप्त करने और खाद-बीज जैसी सुविधाओं पर सब्सिडी हासिल करने में आसानी हो सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में सिंचाई की सुविधा का विस्तार करने के लिए बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार प्रदेश में सिंचाई का रकबा 60 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है और अगले ढाई साल में इसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। 

सिंचाई का क्षेत्र बढ़ने से किसानों को फसलों के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता मिल सकती है और खेती की उत्पादकता में सुधार की संभावना बढ़ेगी। 

सरकार किसानों से पानी की हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल करने और फसल विविधीकरण अपनाने की अपील भी कर रही है। 

इसके तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे कम पानी में बेहतर उत्पादन और आमदनी हासिल की जा सके। सिंचाई विस्तार को सरकार कृषि विकास और किसानों की आय बढ़ाने की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।

किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली देने की तैयारी

कृषि क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता को बेहतर बनाने पर भी मध्यप्रदेश सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और अब दिन के समय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। किसानों के लिए दिन में बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे उन्हें रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करने की परेशानी से राहत मिल सकती है। 

बेहतर बिजली आपूर्ति से सिंचाई व्यवस्था अधिक सुविधाजनक होने के साथ खेती की लागत और समय प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है। सरकार का प्रयास कृषि क्षेत्र को बिजली, पानी और ऋण जैसी बुनियादी सुविधाओं से मजबूत करना है। 

इसी क्रम में ग्रामीण सहकारिता व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में 200 नए प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के कार्यालय शुरू किए गए हैं, जबकि ग्वालियर में अपेक्स बैंक की संभागीय शाखा की शुरुआत भी की गई है।

एग्री-टेक और फूड प्रोसेसिंग से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

सरकार अब खेती को केवल पारंपरिक कृषि गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक और कारोबार से जोड़ने पर जोर दे रही है। 

मुख्यमंत्री ने कृषि को प्रदेश की विरासत और एग्री-टेक तथा एग्री-बिजनेस को भविष्य की दिशा बताया है। किसानों को उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, मत्स्य पालन, पशुपालन और नई फसलों से जोड़ने के साथ कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग को बढ़ावा देने की योजना पर काम किया जा रहा है। 

इसका उद्देश्य किसानों को केवल कच्चा उत्पाद बेचने के बजाय मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के अवसर उपलब्ध कराना है। साथ ही किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने और उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर भी जोर है। 

कृषि क्षेत्र में डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी है, जिससे खेती से जुड़े फैसलों और उत्पादन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

मध्यप्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य, पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा

कृषि के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हर ब्लॉक में एक ‘वृंदावन ग्राम’ विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। 

सरकार ने चारा अनुदान को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये करने की जानकारी दी है, जिससे पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। 

इसके अलावा पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए नई गौपालन योजना शुरू की गई है। इसमें 40 लाख रुपये तक के ऋण पर 10 लाख रुपये तक का अनुदान देने की व्यवस्था बताई गई है। 

सरकार का मानना है कि खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोत बढ़ाए जा सकते हैं। इससे किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय आय के कई विकल्प मिल सकेंगे।

किसानों की समृद्धि के लिए ऋण, सिंचाई, बिजली और बाजार पर फोकस

मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि किसानों की समृद्धि में ही प्रदेश की आर्थिक मजबूती जुड़ी हुई है। इसी सोच के तहत कृषि ऋण को आसान बनाने, शून्य प्रतिशत ब्याज की व्यवस्था को सरल करने, ऑनलाइन KCC आवेदन की सुविधा देने, सिंचाई का रकबा बढ़ाने और किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने जैसी पहलों पर जोर दिया जा रहा है। 

साथ ही सहकारी बैंकों और PACS के नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बैंकिंग और ऋण सुविधाएं आसानी से मिल सकें। 

मुख्यमंत्री ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शिवपुरी की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक मदद देने की घोषणा भी की है। सरकार खेती को एग्री-टेक, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग और आधुनिक बाजार व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

कुल मिलाकर, किसानों को सस्ती और आसान ऋण सुविधा देने के साथ सरकार सिंचाई, बिजली, डिजिटल पहचान, पशुपालन, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर काम कर रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन और उत्पादों का मूल्य बढ़ाना तथा किसानों की आय को मजबूत करना है।

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