नया साल 2026 किसानों के लिए बड़ी राहत और नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। MSP, किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, डिजिटल किसान कार्ड, सस्ती बिजली और बीज कानून जैसे फैसलों से खेती को मजबूती मिलने की संभावना है।
केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को सुरक्षित बनाने के लिए अहम नीतिगत सुधारों पर काम कर रही है। महंगाई, बढ़ती खेती लागत और मौसम के जोखिम को देखते हुए सरकार का फोकस सीधी आर्थिक मदद और तकनीकी समाधान पर है। अगर ये प्रस्तावित योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो 2026 किसानों की जिंदगी में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
इस साल केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि बढ़ाने पर विचार कर सकती है। फिलहाल किसानों को सालाना ₹6,000 की सहायता दी जाती है, लेकिन 2026 के बजट में इसे बढ़ाकर ₹8,000 से ₹10,000 किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
बढ़ती खेती लागत, खाद, बीज और डीजल के बढ़ते खर्च को देखते हुए यह प्रस्ताव पारित हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो इससे खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी खेती से जुड़ी जरूरतों में राहत मिलेगी।
2026 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था को और अधिक मजबूत किए जाने की संभावना है, जिससे किसानों को उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिल सके। सरकार गेहूं और धान की गारंटीड खरीद बढ़ा सकती है, जबकि दालों की सरकारी खरीद के दायरे को भी विस्तार देने की उम्मीद है। इसके साथ ही तिलहनों पर MSP समर्थन को और सख्त किया जा सकता है, ताकि बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। इन उपायों से फसल बेचते समय किसानों को अधिक सुरक्षा और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
2026 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े सुधार किए जाने की संभावना है, जिससे किसानों को समय पर राहत मिल सके। बीमा क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है ताकि किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
इससे बाढ़, सूखा और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में नुकसान की भरपाई जल्दी हो सकेगी। नुकसान का आकलन डिजिटल तकनीक के जरिए किया जाएगा, जिससे क्लेम भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। इसके साथ ही मौसम आधारित बीमा मॉडल को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
खेती सुधारों के तहत नया बीज कानून लाए जाने की संभावना है, जिसका उद्देश्य किसानों को नकली बीज और खाद से होने वाले नुकसान से बचाना होगा। सरकार नकली बीज और नकली खाद की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की तैयारी कर सकती है, जिससे बाजार में गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत होगा। इसके चलते किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध होंगे, जिससे फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद बनेगी और खेती में होने वाला आर्थिक नुकसान भी कम होगा।
सरकार का फोकस किसानों की सिंचाई लागत घटाने पर है और इसके लिए फ्री या सस्ती बिजली योजनाओं के दायरे को बढ़ाया जा सकता है। “हर खेत को पानी” लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा। इसके साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होने की संभावना है।
2026 में किसानों को डिजिटल किसान कार्ड मिलने की उम्मीद है, जिसमें जमीन और फसल से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ एक ही कार्ड में उपलब्ध होंगी। इस कार्ड के जरिए बीमा और सब्सिडी से संबंधित विवरण डिजिटल रूप में मिलेगा, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुँच सकेगा। इसके परिणामस्वरूप बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक कम होगी और व्यवस्था अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनेगी।
सरकार दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर अपना फोकस और बढ़ा सकती है, जिसके तहत तुअर, उड़द और मसूर जैसी दालों की 100% MSP पर खरीद संभव मानी जा रही है। इससे किसानों को दालों के बेहतर दाम मिलेंगे और देश की दालों के आयात पर निर्भरता घट सकती है।
2026 किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है, क्योंकि इन कदमों से खेती को मजबूती और स्थिरता मिलेगी तथा किसानों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी। यह पहल किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है और 2026 को आत्मनिर्भर किसान का साल बनाया जा सकता है।