राजस्थान सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 का बजट पेश करते हुए कृषि और किसान कल्याण को केंद्र में रखा है। वित्त मंत्री दिया कुमारी ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस वर्ष कृषि बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 7.59% से अधिक वृद्धि की गई है। कुल ₹21.52 लाख करोड़ के व्यय प्रस्ताव के साथ राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती को आधुनिक बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। यह बजट कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
इस वर्ष ₹11,300 करोड़ कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों के लिए आवंटित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य किसानों को बेहतर संसाधन, आधुनिक तकनीक और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है। आधुनिक खेती पद्धतियों, टिकाऊ कृषि और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देकर 2047 तक राजस्थान को कृषि महाशक्ति बनाने की योजना है। ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
बजट में 35 लाख से अधिक किसानों को ₹25,000 करोड़ के ब्याज मुक्त अल्पकालिक ऋण देने की घोषणा की गई है, जिसके लिए ₹800 करोड़ ब्याज अनुदान दिया जाएगा। कृषि विश्वविद्यालयों में 445 रिक्त पदों पर भर्ती शुरू की जाएगी, जिससे कृषि शिक्षा और अनुसंधान को मजबूती मिलेगी। मिशन राज गिफ्ट के तहत मंडियों का विकास कर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
राजस्थान में जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। बिसलपुर बांध से 1,000 गांवों को जोड़ा जाएगा। सूखा राहत के लिए 600 ट्यूबवेल और 1,000 हैंडपंप लगाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 14 लाख से अधिक नए जल कनेक्शन दिए जाएंगे और ₹24,000 करोड़ की 400 से अधिक परियोजनाएं जारी हैं। शहरी जल जीवन मिशन के तहत 6,245 गांवों में 3 लाख नए कनेक्शन दिए जाएंगे।
सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की घोषणा की है। किसानों को मशीनें किराए पर उपलब्ध कराने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। सहकारी भंडार और गोदामों के विकास के लिए ₹350 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे फसल की बर्बादी कम होगी और किसानों को बेहतर बाजार सुविधा मिलेगी।
उपनिवेश क्षेत्रों के किसानों को 1 अप्रैल से 10 सितंबर 2026 के बीच बकाया चुकाने पर 100% ब्याज माफी दी जाएगी। कृषि यंत्रीकरण के लिए ₹160 करोड़ की सब्सिडी दी जाएगी, जिससे 50,000 किसानों को आधुनिक उपकरणों का लाभ मिलेगा। ₹96 करोड़ की लागत से 500 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे छोटे किसान भी उन्नत मशीनों का उपयोग कर सकेंगे।
डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दूध उत्पादकों को ₹5 प्रति लीटर की सब्सिडी दी जाएगी, जिसके लिए ₹700 करोड़ आवंटित किए गए हैं। मिशन हरियालो राजस्थान के तहत 19 करोड़ पेड़ लगाए जा चुके हैं और 10 करोड़ और लगाने की योजना है। अरावली संरक्षण के लिए ₹130 करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही जयपुर और जोधपुर में बायो-वेस्ट ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर स्वच्छ और टिकाऊ खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
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