30 जुलाई को अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। इसके एक सप्ताह बाद यानी 6 अगस्त को ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ और लगा दिया है।
यानी अब भारत का टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो चुका है। कृषि मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार अमेरिका के टैरिफ के ऐलान के बीच भारत यूएस से मिनी ट्रेड डील की कोशिश कर रहा था।
लेकिन इस मिनी ट्रेड डील ना होने की सबसे बड़ी वजह थी कृषि और डेयरी सेक्टर। इस वजह से ही ये डील नहीं हो पाई है। अमेरिका में जीएम फूड का प्रोडक्शन काफी होता है।
जबकि भारत की पॉलिसी है कि हम जीएम फूड का आयात नहीं सकते है। अमेरिका चाहता था कि भारत ये फूड आयात कराए लेकिन भारत ने इस पर रोक लगा दी थी।
पीएम मोदी के इस बयान से ये तो साफ है कि भारत घरेलू हितों को ताक पर रखकर अमेरिका के कृषि-दुग्ध और जीएम उत्पादों के लिए वो देश को डंपिग ग्राउंड नहीं बनने देगी।
यही वजह है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर मार्च से पांच दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। अगले दौर की बातचीत अगस्त के अंत में हो सकती है।
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आपको बतादें कि अमेरिका बीते लंबे समय से भारत पर कृषि क्षेत्र को व्यापार के लिए खोलने के लिए दबाव बना रहा है। वो भारत को एक बड़े बाज़ार के रूप में देखता है लेकिन भारत खाद्य सुरक्षा, आजीविका और लाखों किसानों के हित का हवाला देकर इससे बचते रहा है। भारत ये कभी नहीं चाहता कि वह अमेरिका के दबाव में आकर अपने किसानों की स्थिति को डमाडोल होने छोड़ दे।
अगर हम बात करें 1950 और 60 के दशक की तो उस समय भारत अपने नागरिकों को खाना खिलाने के लिए भी विदेश से मिलने वाली सहायत पर निर्भर करता था।
लेकिन कृषि क्षेत्र में मिली कई बड़ी सफतलाओं ने उसकी ये स्थिति को पूरी तरह से पलटकर रख दिया है। आज का भारत ना सिर्फ अपने लिए अनाज उगाता है बल्कि दुनिया के जरूरतमंद देशों को मदद भी करता है।
भारत में आज भी किसानी से देश की आधी आबादी यानी करीब 70 करोड़ लोगों का भरण पोषण हो रहा है। यही वजह है कि कृषि क्षेत्र को भारत की रीड़ की हड्डी कहा जाता है। आज स्थिति ये है कि खेती भारत के करीब आधे कामगारों को रोजगार देती है।
आज की तारीख में अमेरिकी सरकार अपने कृषि बाजार को कई तरह की सब्सिडी देती है। इससे अनाज, फल-सब्जी से लेकर तमाम कृषि उत्पादों की कीमतें काफी कम रहती हैं।
अमेरिकी इन्हीं कम दामों के सहारे दूसरे देशों में अपने कृषि उत्पादों को डंप कर रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग किसानों का डायरेक्ट-इनडायरेक्ट तरीके से कई सरकारी मदद देता है। इसका असर ये होता है कि वहां के उत्पाद दूसरे देशों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं।
अमेरिका ने नाफ्टा ट्रेड डील के बाद बड़े पैमाने पर अपने देश से मक्का मैक्सिको को निर्यात किया। मैक्सिको के किसान इन बनावटी सस्ते दामों का मुकाबला नहीं कर सके। नतीजा हुआ कि कॉर्न उत्पादक बर्बाद हो गए।
ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बढ़ी और खेतिहर किसान शहरों में मजदूरी के लिए पलायन को मजबूर हुए। अब अमेरिका भारत को लेकर भी यही चाहता है। वो चाहता है कि भारत को एक डंपिंग यार्ड की तरह इस्तेमाल करे, जहां वह अपने सस्ते उत्पादों की मदद से भारतीय कृषि को ही तबाह करदे।
प्रश्न : अमेरिका ने भारत पर अब तक कितना टैरिफ लगा दिया है ?
उत्तर : 30 जुलाई को अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। इसके एक सप्ताह बाद यानी 6 अगस्त को ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ और लगा दिया है। यानी अब भारत का टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो चुका है।
प्रश्न : भारत की कितनी जनसँख्या कृषि पर निर्भर करती है ?
उत्तर : भारत में आज भी किसानी से देश की आधी आबादी यानी करीब 70 करोड़ लोगों का भरण पोषण हो रहा है। यही वजह है कि कृषि क्षेत्र को भारत की रीड़ की हड्डी कहा जाता है। आज स्थिति ये है कि खेती भारत के करीब आधे कामगारों को रोजगार देती है।
प्रश्न : अमेरिका के कृषि उत्पादों के सस्ते होने की प्रमुख वजह क्या है ?
उत्तर : अमेरिकी कृषि विभाग किसानों की डायरेक्ट-इनडायरेक्ट तरीके से कई सरकारी मदद करता है। इसका असर ये होता है कि वहां के उत्पाद दूसरे देशों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं।