गेहूं की कटाई के बाद अक्सर किसानों के पास कुछ महीनों का ऐसा समय होता है, जब खेत खाली पड़े रहते हैं। यह समय जायद सीजन कहलाता है, जो रबी और खरीफ फसलों के बीच आता है। अगर किसान इस समय का सही उपयोग करें, तो वे अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। मक्का, मूंग, अरहर और मसूर जैसी फसलें इस दौरान उगाकर किसान 60 से 70 दिनों में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। ट्रैक्टर चॉइस के इस लेख में आज हम गेंहू कटाई के बाद के सीजन और बोई जाने वाली फसलों के बारे में जानेंगे।
जायद सीजन मार्च से जून के बीच का समय होता है, जब मौसम सर्दी से गर्मी की ओर बदल रहा होता है। आमतौर पर अप्रैल के पहले सप्ताह तक गेहूं की कटाई पूरी हो जाती है। हालांकि, कुछ वर्षों में तापमान के बदलाव के कारण कटाई में थोड़ी देरी हो सकती है। जो किसान गेहूं के बाद धान की खेती करते हैं, उनके पास बीच में काफी समय खाली रहता है। इस समय को यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह अतिरिक्त कमाई का बड़ा अवसर बन सकता है।
अगर खेतों को लंबे समय तक खाली छोड़ दिया जाए, तो यह किसानों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। वहीं, जायद सीजन में कम समय की फसलें उगाकर किसान कई फायदे प्राप्त कर सकते हैं:-
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी मेहनत से किसान इस समय में भी अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत का समय संक्रमण काल होता है, जिसमें सर्दी खत्म हो रही होती है और गर्मी शुरू हो जाती है। इस दौरान मौसम कई फसलों के लिए अनुकूल रहता है। गेहूं की कटाई के बाद जो किसान धान की खेती करते हैं, उनके पास बीच में काफी समय होता है। इस समय में अगर किसान सही फसल चुनें, तो वे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
जायद सीजन में कई ऐसी फसलें हैं, जो कम समय में तैयार हो जाती हैं और बाजार में उनकी अच्छी मांग होती है।
1. मक्का (कॉर्न)
मक्का जायद सीजन की सबसे अच्छी फसलों में से एक है। यह लगभग 60 दिनों में तैयार हो जाती है। इसका उपयोग खाद्य पदार्थों, पशु चारे और उद्योगों में किया जाता है। बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल सकता है।
2. मूंग (ग्रीन ग्राम)
मूंग की फसल 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। यह एक दलहनी फसल है, जिसकी बाजार में हमेशा मांग रहती है। इसे उगाते समय ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि जलभराव से फसल खराब हो सकती है।
3. अरहर (तूर दाल)
अरहर की कुछ कम अवधि वाली किस्में भी इस समय उगाई जा सकती हैं। यह फसल मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे अगली फसल को फायदा होता है।
4. मसूर (लेंटिल)
मसूर भी एक लाभकारी दलहनी फसल है, जो कम पानी में अच्छी पैदावार देती है। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है और बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है।
जायद सीजन में सफल खेती के लिए किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:-
अगर किसान इस बीच के समय में एक या अधिक फसलें उगाते हैं, तो उन्हें कई तरह के लाभ मिलते हैं। इससे उनकी आय बढ़ती है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और फसल चक्र भी बेहतर होता है। साथ ही, अलग-अलग फसलें उगाने से जोखिम भी कम हो जाता है।
गेहूं की कटाई के बाद का समय खाली बैठने का नहीं, बल्कि कमाई का सुनहरा अवसर है। सही योजना और फसल चयन के जरिए किसान जायद सीजन का पूरा लाभ उठा सकते हैं। मक्का, मूंग, अरहर और मसूर जैसी फसलें कम समय में अच्छी आय देती हैं। अगर किसान इस तरीके को अपनाते हैं, तो वे अपनी आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ खेती को और अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकते हैं।
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