कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने वाली धान की कुछ प्रमुख किस्में

By: Tractor Choice
Published on: 23-Apr-2026
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जलवायु परिवर्तन और धान की खेती की नई दिशा

जलवायु परिवर्तन ने कृषि क्षेत्र, विशेषकर धान की खेती, को गहराई से प्रभावित किया है। अनियमित बारिश, लंबे सूखे और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी परिस्थितियों ने किसानों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। पारंपरिक किस्में अब हर स्थिति में स्थिर उत्पादन देने में सक्षम नहीं रह गई हैं, इसलिए वैज्ञानिकों ने जलवायु-स्मार्ट किस्मों का विकास किया है। ये उन्नत किस्में कम पानी में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ प्रतिकूल परिस्थितियों को भी सहन कर सकती हैं। आज के समय में किसानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे इन आधुनिक तकनीकों और किस्मों को अपनाएं ताकि उनकी आय सुरक्षित रह सके और खेती टिकाऊ बन सके।

पूसा DST चावल 1

पूसा DST चावल 1 किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म विशेष रूप से सूखा और लवणीय मिट्टी जैसी कठिन परिस्थितियों को सहन करने के लिए तैयार की गई है। इसकी खासियत यह है कि यह MTU 1010 किस्म से विकसित की गई है और कठिन परिस्थितियों में भी 20 प्रतिशत तक अधिक पैदावार देने की क्षमता रखती है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी या मिट्टी में लवणीयता अधिक होती है, वहां यह किस्म किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

पूसा बासमती 1509

पूसा बासमती 1509 किस्म अपने कम समय में तैयार होने और पानी की बचत के लिए जानी जाती है। यह किस्म पारंपरिक बासमती किस्मों की तुलना में लगभग 15 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है। इसके अलावा, यह करीब 33 प्रतिशत तक पानी की बचत करती है, जिससे जल संकट वाले क्षेत्रों में इसकी खेती लाभदायक है। जल्दी पकने के कारण किसान समय पर गेहूं की बुवाई भी कर सकते हैं, जिससे फसल चक्र बेहतर बनता है और कुल उत्पादन में वृद्धि होती है।

पूसा RH 60 और उन्नत सुगंधित किस्में

पूसा RH 60 एक हाइब्रिड सुगंधित किस्म है, जो लंबे और आकर्षक दाने देती है। इसकी बाजार में अच्छी मांग है, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में। सुगंधित धान की यह किस्म किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करती है। इसके अलावा, पूसा नरेंद्र KN1 और CRD KN2 जैसी किस्में पारंपरिक कालानमक चावल का उन्नत रूप हैं, जो अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ कीट और रोगों के प्रति भी प्रतिरोधी हैं। इससे किसानों की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।

पूसा-2090 किस्म

पूसा-2090 किस्म लगभग 120 से 125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ 34 से 35 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है। इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें पराली जलाने की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है। यह किस्म टिकाऊ खेती को बढ़ावा देती है और उन किसानों के लिए बेहतर विकल्प है जो पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं और कम लागत में अधिक उत्पादन चाहते हैं।

डीआरआर धान 100 (कमला)

डीआरआर धान 100 (कमला) किस्म को ICAR-भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म जल्दी पकती है और पारंपरिक किस्मों की तुलना में 19 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन देती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह मीथेन गैस के उत्सर्जन को कम करती है, जो जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार प्रमुख गैसों में से एक है। इस प्रकार यह किस्म न केवल किसानों के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।

स्वर्णा-सब1 और CR धान 108

स्वर्णा-सब1 किस्म विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है। यह पौधा लगभग 14 दिनों तक पानी के नीचे जीवित रह सकता है, जो पूर्वी भारत के लिए बेहद उपयोगी है। इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं, जो स्थानीय उपयोग के लिए उपयुक्त हैं। वहीं, CR धान 108 किस्म 112 दिनों में तैयार हो जाती है और वर्षा आधारित खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में, जहां बारिश अनियमित होती है, यह किस्म किसानों को स्थिर उत्पादन देने में मदद करती है।

सामुलाई-1444 और एराइज हाइब्रिड

सामुलाई-1444 एक उच्च गुणवत्ता वाली किस्म है, जो 140 से 145 दिनों में पकती है और लंबे समय तक उगाई जा सकती है। इसकी बाजार और निर्यात में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है। दूसरी ओर, एराइज हाइब्रिड किस्म बड़े स्तर पर व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त है और पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक उत्पादन देती है। यह किस्म विशेष रूप से दक्षिण एशिया में लोकप्रिय है और किसानों के लिए अधिक लाभ कमाने का अवसर प्रदान करती है।

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प्रश्नोत्तरी

प्रश्न: जलवायु-स्मार्ट धान किस्मों की आवश्यकता क्यों बढ़ रही है ?

उत्तर: जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़ और अनियमित वर्षा के कारण स्थिर उत्पादन के लिए उन्नत, सहनशील धान किस्मों की जरूरत बढ़ी है।

प्रश्न: पूसा DST चावल 1 की मुख्य विशेषता क्या है ?

उत्तर: यह किस्म सूखा और लवणीय मिट्टी दोनों सहन करती है तथा कठिन परिस्थितियों में भी अधिक पैदावार देने में सक्षम है।

प्रश्न: पूसा बासमती 1509 किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है ?

उत्तर: यह जल्दी पकती है, कम पानी में उगती है और खेत जल्दी खाली कर देती है, जिससे अगली फसल समय पर बोई जा सकती है।

प्रश्न: स्वर्णा-सब1 किस क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ?

उत्तर: यह किस्म बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है और पौधा कई दिनों तक पानी में डूबा रहकर भी जीवित रह सकता है।

प्रश्न: डीआरआर धान 100 (कमला) किस कारण विशेष मानी जाती है ?

उत्तर: यह किस्म अधिक उपज देती है, जल्दी पकती है और मीथेन उत्सर्जन कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होती है।

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