मशरूम की खेती कब, कहाँ और कैसे होती है ?

By: Tractor Choice
Published on: 22-Apr-2026
मशरूम की खेती कब, कहाँ और कैसे होती है ? Image

मशरूम खेती का बढ़ता महत्व

पिछले कुछ वर्षों में मशरूम की खेती ने कृषि क्षेत्र में एक उभरते हुए व्यवसाय के रूप में अपनी पहचान बनाई है। पहले जहाँ इसका प्रचलन सीमित था, वहीं अब इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती जनसंख्या, पोषण के प्रति जागरूकता और शाकाहारी प्रोटीन स्रोतों की आवश्यकता ने मशरूम की मांग को और बढ़ावा दिया है। इसके बावजूद उत्पादन अभी भी मांग के अनुरूप नहीं है, जिससे यह क्षेत्र किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर बन गया है। सरकार और विभिन्न कृषि संस्थानों द्वारा प्रशिक्षण, अनुदान और योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वे इस व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें।

मशरूम के अन्य नाम और प्रमुख उत्पादक राज्य

मशरूम को भारत के विभिन्न क्षेत्रों में खुम्ब, खुंभी और कुकुरमुत्ता जैसे नामों से जाना जाता है। यह एक ऐसा कृषि उत्पाद है, जिसे कम जगह और सीमित संसाधनों में भी उगाया जा सकता है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र मशरूम उत्पादन के प्रमुख राज्य बन चुके हैं। इन राज्यों में बेहतर जलवायु, प्रशिक्षण सुविधाएँ और बाजार उपलब्धता के कारण मशरूम उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

प्रमुख मशरूम किस्में

मांग और पोषण मूल्य के आधार पर मशरूम की तीन प्रमुख किस्में सबसे अधिक उगाई जाती हैं— बटन मशरूम, ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम और दूधिया (मिल्की) मशरूम। बटन मशरूम का उपयोग सबसे अधिक होता है और यह बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है। ढींगरी मशरूम कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है, जबकि मिल्की मशरूम गर्म जलवायु के लिए उपयुक्त होती है। इन तीनों किस्मों की खेती करके किसान सालभर उत्पादन कर सकते हैं।

मौसम और उत्पादन चक्र

मशरूम की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे पूरे वर्ष किया जा सकता है। सितंबर से नवंबर तक ढींगरी मशरूम उगाई जाती है। इसके बाद फरवरी से मार्च के बीच बटन मशरूम की खेती की जाती है। वहीं जून से जुलाई के दौरान मिल्की मशरूम का उत्पादन किया जाता है। इस तरह उचित योजना बनाकर किसान सालभर निरंतर आय प्राप्त कर सकते हैं।

खेती के लिए आवश्यक सामग्री

मशरूम की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक बीज होता है जिसे स्पॉन कहा जाता है। इसे विश्वसनीय और सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान से ही खरीदना चाहिए। इसकी कीमत लगभग 30 से 50 रुपये प्रति किलो होती है। इसके अलावा 15×16 इंच की प्लास्टिक थैलियाँ, भूसा (गेहूं, चावल, राई या कपास का), और उपयुक्त वातावरण आवश्यक होते हैं। इन सभी चीजों का सही चयन उत्पादन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

ढींगरी मशरूम की विशेषताएँ

ढींगरी मशरूम को ऑयस्टर मशरूम भी कहा जाता है और यह किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है। इसे कृषि अवशेषों जैसे भूसे पर आसानी से उगाया जा सकता है, जिससे बेकार सामग्री का उपयोग भी हो जाता है। इसका उत्पादन चक्र 45 से 60 दिनों का होता है और इसे सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यही कारण है कि यह न केवल भारत बल्कि विश्वभर में लोकप्रिय हो रही है।

भूसे का उपचार

मशरूम की खेती में भूसे का उपचार अत्यंत आवश्यक होता है ताकि उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु और फफूंद नष्ट हो सकें। इसके लिए गर्म पानी की विधि सबसे सरल और सस्ती है। इसमें भूसे को 50-60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 20-30 मिनट तक उबाला जाता है और फिर ठंडा करके उपयोग किया जाता है। इसके अलावा रासायनिक विधि में कार्बेन्डाजिम और फॉर्मलीन का उपयोग करके भूसे को कीटाणुमुक्त किया जाता है।

बुवाई की प्रक्रिया

बुवाई से पहले कमरे को 2 प्रतिशत फॉर्मलीन से साफ करना चाहिए। इसके बाद 4 किलो क्षमता वाली प्लास्टिक थैली में गीले भूसे के साथ लगभग 100 ग्राम स्पॉन मिलाकर भर दिया जाता है। थैली को अच्छी तरह बंद करके उसमें छोटे-छोटे छेद कर दिए जाते हैं ताकि हवा का संचार बना रहे। सही तरीके से की गई बुवाई अच्छे उत्पादन की आधारशिला होती है।

रखरखाव और देखभाल

बुवाई के बाद बैगों को साफ और नियंत्रित तापमान वाले कमरे में रखा जाता है। 2-4 दिनों में निरीक्षण करना आवश्यक होता है ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण को रोका जा सके। तापमान 30 डिग्री से अधिक होने पर पानी का छिड़काव या कूलर का उपयोग करना चाहिए। लगभग 15-25 दिनों में कवक जाल फैल जाता है और बैग सफेद दिखाई देने लगते हैं, जिसके बाद पॉलीथीन हटाकर उचित नमी और प्रकाश देना जरूरी होता है।

तुड़ाई, भंडारण और बाजार

मशरूम की पहली तुड़ाई 15-25 दिनों में की जा सकती है, जब इसके किनारे ऊपर की ओर मुड़ने लगते हैं। एक फसल चक्र में तीन बार तुड़ाई संभव है। एक किलो सूखे भूसे से लगभग 600-650 ग्राम मशरूम प्राप्त होते हैं। तुड़ाई के बाद मशरूम को तुरंत पैक नहीं करना चाहिए, बल्कि कुछ समय बाद ही पैकिंग करनी चाहिए। इसे ताजा या सुखाकर दोनों रूपों में बेचा जा सकता है। कम लागत (10-15 रुपये प्रति बैग) और अधिक बाजार मूल्य (200-300 रुपये प्रति किलो) के कारण यह खेती अत्यधिक लाभदायक साबित होती है।

ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीकाजॉन डियरस्वराजमहिंद्रान्यू हॉलैंडवीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्नोत्तरी

प्रश्न: मशरूम की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक क्या है?

उत्तर: मशरूम की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक बीज होता है, जिसे स्पॉन कहा जाता है। इसकी गुणवत्ता अच्छी होने पर ही उत्पादन बेहतर होता है।

प्रश्न: मशरूम की तीन प्रमुख किस्में कौन-कौन सी हैं ?

उत्तर: मशरूम की तीन प्रमुख किस्में हैं, बटन मशरूम, ढींगरी (ऑस् मशरूम और दूधिया (मिल्की) मशरूम।

प्रश्न: ढींगरी मशरूम की खेती किस मौसम में की जाती है ?

उत्तर: ढींगरी मशरूम की खेती सितंबर से नवंबर महीने के बीच की जाती है।

प्रश्न: मशरूम उत्पादन में भूसे का उपचार क्यों आवश्यक है?

उत्तर: भूसे का उपचार इसलिए आवश्यक है ताकि उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और फफूंद नष्ट हो जाएँ और मशरूम का उत्पादन स्वस्थ और सुरक्षित हो सके।

प्रश्न: एक किलो सूखे भूसे से कितनी मशरूम पैदावार हो सकती है ?

उत्तर: एक किलो सूखे भूसे से लगभग 600 से 650 ग्राम तक मशरूम की पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

Similar Posts