ड्रैगन फ्रूट, जिसे भारत में “कमलम” के नाम से भी जाना जाता है, आज के समय में किसानों के लिए एक अत्यंत लाभदायक और आधुनिक फसल के रूप में उभर रहा है। पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और गन्ना की तुलना में यह कम पानी, कम लागत और कम देखभाल में बेहतर आय देने की क्षमता रखता है।
इसकी खेती में प्रति एकड़ 8-12 टन तक उत्पादन संभव है, जिससे किसानों को ₹8 लाख से ₹24 लाख तक की आय हो सकती है। बाजार में इसकी कीमत ₹100 से ₹200 प्रति किलोग्राम तक मिलती है, जो इसे एक उच्च मूल्य वाली फसल बनाती है। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को स्थिर और अच्छा बाजार मिलता है।
ड्रैगन फ्रूट एक बारहमासी पौधा है जो एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन देता है। एक पौधा साल में 3–4 बार फल देता है और एक पौधे से लगभग 50 से 120 फल प्राप्त हो सकते हैं। प्रत्येक फल का वजन 300 ग्राम से 800 ग्राम तक होता है। इस प्रकार, एक एकड़ में हजारों पौधे लगाकर अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। इसकी खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलता है।
इस फसल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कीट और रोगों का प्रकोप बहुत कम होता है। इसके कारण रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। साथ ही, यह कैक्टस प्रजाति का पौधा होने के कारण सूखा सहन कर सकता है, जिससे पानी की जरूरत भी कम होती है। यह विशेषता इसे उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बनाती है जहां पानी की कमी होती है। कम जोखिम और कम लागत के कारण छोटे और मध्यम किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं।
भारत सरकार और विभिन्न कृषि संस्थान ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं। उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां किसानों को प्रशिक्षण, पौध सामग्री और तकनीकी जानकारी दी जाती है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी मिलती है, जिससे वे बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। इसके अलावा, कई राज्यों में सब्सिडी और वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे किसानों को इस नई फसल को अपनाने में मदद मिलती है।
भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से फैल रही है। कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्यों में किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर रहे हैं। वर्तमान में देश में लगभग 3,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है, लेकिन यह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि भारत को अभी भी थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों से ड्रैगन फ्रूट आयात करना पड़ता है। यह स्थिति किसानों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है।
कृषि विश्वविद्यालय भी इस फसल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उदाहरण के रूप में, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रदर्शन किया गया है। विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को इस फसल की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में, जहां किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, अब धीरे-धीरे इस नई फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस प्रकार के प्रयास किसानों को नई तकनीक और बेहतर आय के अवसर प्रदान करते हैं।
ड्रैगन फ्रूट का मूल उत्पादन दक्षिणी मैक्सिको, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में हुआ था। बाद में यह फसल दुनिया के अन्य उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैल गई। लगभग 100 वर्ष पहले फ्रांसीसियों ने इसे वियतनाम में उगाना शुरू किया, जहां यह धीरे-धीरे लोकप्रिय हो गया। आज वियतनाम दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वर्तमान में यह फल 22 से अधिक देशों में उगाया जा रहा है, जिसमें एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व शामिल हैं।
ड्रैगन फ्रूट को “21वीं सदी का चमत्कारिक फल” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C, फाइबर और खनिजों से भरपूर होता है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके आकर्षक लाल और बैंगनी रंग के कारण यह बाजार में आसानी से ग्राहकों को आकर्षित करता है। इसके छिलके पर बने शल्क इसे एक “ड्रैगन” जैसा रूप देते हैं, जिससे इसका नाम पड़ा। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जो किसानों के लिए एक स्थायी और लाभकारी बाजार सुनिश्चित करती है।
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प्रश्न: ड्रैगन फ्रूट की खेती से कितनी बार उपज प्राप्त की जा सकती है ?
उत्तर: ड्रैगन फ्रूट का पौधा एक बार लगाने के बाद साल में 3-4 बार फल देता है और एक पौधे से लगभग 50 से 120 फल प्राप्त हो सकते हैं।
प्रश्न: ड्रैगन फ्रूट का वजन कितना होता है ?
उत्तर: ड्रैगन फ्रूट के प्रत्येक फल का वजन 300 ग्राम से 800 ग्राम तक होता है।
प्रश्न: भारत के अंदर कितने क्षेत्रफल में इस फल की खेती की जाती है ?
उत्तर: भारत के अंदर वर्तमान में लगभग 3,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है, लेकिन यह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रश्न: ड्रैगन फ्रूट की खेती से प्रति एकड़ कितने रुपए की आमदनी प्राप्त की जा सकती है ?
उत्तर: ड्रैगन फ्रूट की खेती में प्रति एकड़ 8-12 टन तक उत्पादन संभव है, जिससे किसानों को ₹8 लाख से ₹24 लाख तक की आय प्राप्त की जा सकती है।