आज के समय में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसल बनती जा रही है, क्योंकि बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, अच्छी कीमत तभी मिलती है जब फल बड़े, गहरे लाल रंग के और रस से भरपूर हों। कई बार किसान पूरी मेहनत करते हैं, लेकिन सही तकनीक और जानकारी का पालन न करने के कारण फल छोटे रह जाते हैं या उनका रंग और स्वाद उतना अच्छा नहीं बन पाता।
वास्तव में, स्ट्रॉबेरी की खेती में सिर्फ पानी और धूप ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि हर छोटे-बड़े पहलू पर सही तरीके से ध्यान देना जरूरी होता है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपकी स्ट्रॉबेरी की फसल में सुंदर, लाल और उच्च गुणवत्ता वाले फल आएं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा।
सही वैराइटी को चुनें
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सबसे पहला और सबसे अहम कदम है सही वैराइटी को चुनना। वैसे तो हर इलाके की जलवायु अलग होती है और उसी के अनुसार ही वैराइटी को चुनना चाहिए। चैंडलर, कैमारोसा, स्वीट चार्ली और विंटर डॉन जैसी उन्नत किस्में बड़े आकार और बेहतर रंग के लिए काफी मशहूर हैं। अगर वैराइटी सही होगी तो पौधा मजबूत बनेगा और फल का वजन भी काफी अच्छा आएगा। इसलिए हमेशा नर्सरी से पौधे लेते समय उनकी गुणवत्ता की अवश्य जाँच करलें।
मिट्टी की तैयारी करें
अच्छी फसल के लिए मिट्टी की तैयारी पर खास ध्यान सबसे जरूरी माना जाता है। असल में स्ट्रॉबेरी के लिए हल्की, भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इसकी खेती के लिए मिट्टी का पीएच 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए। हमेशा खेत की तैयारी करते समय सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती पोषण अच्छे से मिलता है। इससे जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधा तेजी से बढ़ता है।
खाद और पोषण
खाद और पोषण स्ट्रॉबेरी की खेती का सबसे बड़ा सीक्रेट माना जाता है। अच्छे फल के लिए 19:19:19 एनपीके घुलनशील खाद को 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर हर 10 से 15 दिन में ड्रिप या फोलियर स्प्रे के रूप में देना फायदेमंद रहता है।
स्ट्रॉबेरी के फूल आने से पहले पोटाश की मात्रा बढ़ाने से फल का आकार और वजन बहुत बेहतर होता है। इसके साथ ही कैल्शियम नाइट्रेट और बोरॉन का सही मात्रा में छिड़काव फल को चमकदार और एकसार बनाने में मदद करता है।
सिंचाई कैसे होगी
स्ट्रॉबेरी के लिए सिंचाई में बैलेंस बेहद आवश्यक होता है। जी हां, इसके पौधे को बहुत ज्यादा पानी देने से फल सड़ सकते हैं और कम पानी से फल छोटे रह जाते हैं तो हमेशा फल बनने के समय पर निरंतर और नियंत्रित सिंचाई करनी चाहिए। जी हां, ड्रिप सिंचाई इस फसल के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे नमी बनी रहती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती है।
मल्चिंग भी जरूरी
अच्छे फल के लिए मल्चिंग भी एक जरूरी तकनीक है, पॉली मल्च या भूसे की मल्चिंग से मिट्टी का टेंपरेचर कंट्रोल रहता है, नमी लॉन्ग टाइम तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं। इसके साथ ही कीट और रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर फफूंदनाशक और कीटनाशक का संतुलित यूज करना चाहिए।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।