ग्रामीण विकास में ‘ड्रोन सखी’ बनेंगी नई ताकत

By: tractorchoice Published on: 25-Jan-2026
Drone Sakhis in Rural Development

ग्रामीण महिला सशक्तिकरण के लिए योगी सरकार का प्रयास

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने उनकी जरूरत के अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। यह ऋण आसान और लचीली किस्तों में चुकाने योग्य होगा, जिससे महिलाओं पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि महिलाएं बिना किसी डर या दबाव के अपने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें। सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, मुर्गी पालन, सब्जी उत्पादन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्यों के जरिए वे अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी। जब महिलाओं को वित्तीय सहयोग मिलता है, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह ऋण सुविधा उन्हें सिर्फ रोजगार ही नहीं देगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत और निर्णय लेने में सक्षम बनाएगी।

स्वयं सहायता समूह बनेंगे ग्रामीण विकास की मजबूत नींव

उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ग्रामीण विकास की रीढ़ के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन समूहों को केवल बचत और ऋण तक सीमित न रखकर, उन्हें विकास के एक सशक्त माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के माध्यम से महिलाओं को पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपने व्यवसाय को शुरू करने और विस्तार देने में सक्षम हो सकें। स्वयं सहायता समूह महिलाओं को संगठित मंच प्रदान करते हैं, जहां वे आपस में अनुभव साझा करती हैं, नई योजनाएं बनाती हैं और एक-दूसरे का सहयोग करती हैं। इससे गांवों में सामूहिक विकास की भावना पैदा होती है और महिलाएं सामाजिक व आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनती हैं।

लाखों परिवारों को जोड़े जाने की व्यापक योजना

सरकार की योजना है कि पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक और अंत्योदय कार्डधारकों के करीब दो लाख परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए। इसके साथ ही वीबी जिरामजी कार्डधारकों और जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को भी इन समूहों से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज का कोई भी कमजोर वर्ग विकास की मुख्यधारा से पीछे न रह जाए। जब अधिक से अधिक परिवार समूहों से जुड़ेंगे, तो उन्हें न केवल वित्तीय सहायता मिलेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ भी सीधे प्राप्त होगा। यह पहल ग्रामीण समाज में समानता और समावेशी विकास को बढ़ावा देगी।

महिलाओं को सौंपी जाएंगी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाएं दी जाएंगी, जैसे समूह सखी, बैंक सखी, ड्रोन सखी और आजीविका सखी। ये भूमिकाएं महिलाओं को न केवल रोजगार के अवसर देंगी, बल्कि उन्हें गांव के विकास कार्यों में सक्रिय भागीदार भी बनाएंगी। बैंक सखी के माध्यम से महिलाएं बैंकिंग सेवाओं को गांव तक पहुंचाएंगी, जिससे वित्तीय लेन-देन आसान होगा। ड्रोन सखी खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देंगी, जबकि आजीविका सखी ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ेंगी। इन सभी जिम्मेदारियों से महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी और उनका सामाजिक सम्मान भी मजबूत होगा।

महिलाओं को जोड़ने के लिए तेज अभियान

योगी सरकार ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इसका लक्ष्य है कि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं इस व्यवस्था का हिस्सा बनें और विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं। गांव-गांव जाकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिससे महिलाओं को समूहों की उपयोगिता और लाभों की जानकारी दी जा सके। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि वे सामाजिक रूप से भी अधिक जागरूक और सशक्त बनेंगी। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

ग्राम पंचायत स्तर पर चलेगा मेगा कैंपेन

प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए एक व्यापक मेगा कैंपेन चलाया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से हर पंचायत में शिविर लगाकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पंचायत स्तर पर इस तरह के प्रयासों से महिलाओं तक सीधी पहुंच बनेगी और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संगठित महिला शक्ति का निर्माण होगा, जो सामाजिक और आर्थिक बदलाव की वाहक बनेगी।

सशक्त महिला से सशक्त गांव और सशक्त प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मानना है कि जब महिला सशक्त होती है, तो पूरा परिवार मजबूत बनता है, और जब परिवार मजबूत होता है, तो गांव और प्रदेश अपने आप सशक्त हो जाते हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को सीधे बाजार से जोड़ने की योजना है, ताकि स्थानीय उत्पादों को सही मूल्य मिल सके। इससे किसानों और महिलाओं को अपने परिश्रम का उचित लाभ मिलेगा। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि “विकसित उत्तर प्रदेश” के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगी। सशक्त महिला, सशक्त परिवार, सशक्त गांव और सशक्त प्रदेश—यही इस पूरी योजना की मूल भावना है।

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