उद्यानिकी किसानों के लिए नई योजना: हाईटेक सिंचाई सिस्टम पर 50% अनुदान

By: tractorchoice Published on: 04-Feb-2026
MP government's new smart fertigation scheme

आधुनिक सिंचाई तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू की है। यह योजना खेती को पारंपरिक तरीकों से आगे ले जाकर वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि इस तकनीक के माध्यम से पानी, खाद और श्रम—तीनों की बचत होगी, जिससे किसानों की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।

राज्य स्तरीय कार्यशाला में तकनीक के लाभों पर जोर

भोपाल स्थित प्रमुख उद्यान (गुलाब गार्डन) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी फसलों में सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली बेहद कारगर साबित हो रही है। यह तकनीक फसल की वास्तविक जरूरतों के अनुसार सिंचाई और खाद प्रबंधन सुनिश्चित करती है, जिससे उत्पादन में स्थिरता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। मंत्री ने इसे किसानों के लिए “खेती का भविष्य” बताया।

किसानों का सशक्तिकरण राज्य विकास की कुंजी

मंत्री कुशवाह ने अपने संबोधन में कहा कि मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और किसानों का सशक्तिकरण राज्य के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। सीमित जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती उत्पादन लागत आज खेती की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीकों को अपनाना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली न केवल पानी और उर्वरक की बचत करती है, बल्कि फसल को सही समय पर सही मात्रा में पोषण देकर उसकी उत्पादकता भी बढ़ाती है।

क्या है सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली

यह प्रणाली पूरी तरह से स्मार्ट तकनीक पर आधारित है। खेत में लगाए गए सेंसर मिट्टी की नमी, तापमान और वातावरण की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं। जैसे ही मिट्टी में नमी तय स्तर से कम होती है, सिस्टम अपने आप सिंचाई शुरू कर देता है। इसी तरह फर्टिगेशन यानी सिंचाई के साथ खाद देने की प्रक्रिया भी स्वचालित होती है। पौधों को उतनी ही मात्रा में उर्वरक दिया जाता है, जितनी उन्हें वास्तव में आवश्यकता होती है। इससे खाद की बर्बादी रुकती है और मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है।

किसानों को मिलने वाले प्रमुख फायदे

इस आधुनिक प्रणाली से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलता है। सटीक सिंचाई से पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है और फसल को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से उत्पादन बढ़ता है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। ऑटोमेशन के कारण श्रम की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे मजदूरी लागत घटती है। साथ ही, नियंत्रित सिंचाई के कारण खरपतवार भी कम पनपते हैं। कुल मिलाकर यह तकनीक खेती को अधिक टिकाऊ, कम लागत वाली और लाभकारी बनाती है।

योजना के तहत सब्सिडी और पात्रता

सरकार इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पूरे प्रदेश में लागू कर रही है। सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली की एक यूनिट की लागत लगभग 4 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा, यानी अधिकतम 2 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। योजना का लाभ वही किसान उठा सकते हैं, जिनके पास उद्यानिकी फसलों के लिए न्यूनतम 0.250 हेक्टेयर भूमि है। यह योजना एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत संचालित की जा रही है।

लक्ष्य, आवेदन और अधिकारियों की भूमिका

उद्यानिकी आयुक्त अरविंद दुबे के अनुसार, प्रदेश में 715 चयनित किसानों के खेतों में इस प्रणाली को स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 597 किसानों के आवेदन विभागीय पोर्टल पर प्राप्त हो चुके हैं। शेष पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। कार्यशाला में अधिकारियों से आग्रह किया गया कि वे किसानों को समय पर मार्गदर्शन दें और आवेदन प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराएं। साथ ही, तकनीकी सहायता तुरंत उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया ताकि किसान बिना देरी के इस आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें।

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