केंद्रीय बजट 2026: खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

By: tractorchoice Published on: 01-Feb-2026
Agriculture will be a priority in the 2026 Union Budget

केंद्रीय बजट 2026 में कृषि को प्राथमिकता

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। यह बजट 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष की दिशा तय करता है। इस बजट में एक बार फिर खेती और ग्रामीण जीवन को केंद्र में रखा गया है, ताकि किसानों की आय बढ़े, रोजगार के अवसर पैदा हों और उन्हें स्थायी समर्थन मिल सके।

किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा लाभ

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कृषि से जुड़ी हर योजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण परिवारों तक पहुँचे। नए सुधारों का उद्देश्य कृषि से जुड़े कार्यों में रोजगार बढ़ाना, फसल उत्पादन में सुधार करना और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना है। इन प्रयासों से कृषि क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और कई क्षेत्रों में ग्रामीण गरीबी घटी है।

भारतीय कृषि के सामने चुनौतियाँ

बजट भाषण में वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया गया जो भारतीय कृषि को प्रभावित कर रही हैं। इनमें कृषि निर्यात में कमजोरी, बीज और उर्वरक की आपूर्ति में दिक्कतें और सप्लाई चेन में रुकावटें शामिल हैं। साथ ही, प्रिसिजन फार्मिंग और एआई जैसे नए तरीके खेती को बदल रहे हैं, जबकि पानी, ऊर्जा और खनिजों की मांग भी बढ़ रही है।

कृषि बजट में बड़ा इजाफा

कृषि को विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए सरकार ने इसके लिए बजट समर्थन बढ़ाया है। कृषि और किसान कल्याण विभाग का बजट 2013–14 में ₹21,933.50 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹1,27,290.16 करोड़ हो गया है। पीएलएफएस 2023–24 के अनुसार, भारत की लगभग 46.1 प्रतिशत कार्यशील आबादी अब भी खेती और इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है।

किसानों के लिए बहुभाषी एआई टूल

बजट 2026 की एक अहम घोषणा बहुभाषी एआई आधारित कृषि टूल है। यह टूल किसानों को फसल योजना, मौसम की जानकारी, कीट नियंत्रण और बाजार भाव से जुड़ी जानकारी देगा। यह क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिससे किसान समय पर सही फैसले ले सकेंगे।

उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा

सरकार ने नारियल, चंदन और अखरोट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए विशेष समर्थन की घोषणा की है। चंदन प्रणाली को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर संरक्षण, नियोजित खेती और बेहतर बाजार संपर्क पर काम किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ने और वन आधारित समुदायों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

नारियल, काजू और कोको के लिए नई योजनाएँ

नारियल के लिए एक नई प्रोत्साहन योजना लाई गई है, जिसके तहत पुराने या कम उत्पादन वाले पेड़ों को नए पौधों से बदला जाएगा। प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में यह योजना लागू होगी। इसके अलावा काजू और कोको के लिए अलग-अलग कार्यक्रम घोषित किए गए हैं, जिनका लक्ष्य आयात घटाना, प्रसंस्करण बढ़ाना और 2030 तक निर्यात को मजबूत करना है।

पशुपालन और एफपीओ को मजबूती

पशुपालन क्षेत्र में क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को समर्थन दिया जाएगा। इन कदमों से ऋण तक आसान पहुँच, सामूहिक खेती को बढ़ावा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

Similar Posts