मध्यप्रदेश सरकार किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना को प्रदेश में “प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना” के रूप में लागू किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की बिजली पर निर्भरता को समाप्त करना, सिंचाई को आसान बनाना और उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर देना है। इसके तहत 52 हजार किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए जाएंगे, जिससे वे न केवल अन्नदाता बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकेंगे।
योजना के अंतर्गत अब तक 34,600 लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जा चुके हैं और लगभग 33 हजार कार्यादेश किसानों के खेतों में सोलर पंप स्थापना के लिए दिए जा चुके हैं। सोलर पंप लगने के बाद किसान सिंचाई के लिए बिजली बिल से मुक्त हो जाएंगे। साथ ही वे अपने खेतों में उत्पादित अतिरिक्त सौर ऊर्जा को सरकार को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त पंप की स्थापना के बाद 5 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी, जिससे किसानों को किसी प्रकार की तकनीकी चिंता नहीं रहेगी।
कुसुम-बी योजना के अंतर्गत 1 HP से 7.5 HP तक की क्षमता के सोलर पंप पर लगभग 90% तक अनुदान दिया जाएगा। किसान को कुल लागत का केवल लगभग 10% ही देना होगा। लगभग 60% राशि कृषक ऋण के रूप में होगी, जिसका ब्याज सहित भुगतान राज्य सरकार करेगी। शेष 30% राशि भारत सरकार द्वारा बेंचमार्क लागत के आधार पर अनुदान के रूप में दी जाएगी। यह सब्सिडी व्यवस्था सभी वर्गों SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग के किसानों के लिए समान रूप से लागू होगी।
योजना के अंतर्गत 1 HP से लेकर 7.5 HP तक के विभिन्न प्रकार के सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर 1 HP DC सरफेस पंप पर किसान को लगभग ₹12,427 देना होगा, वहीं 3 HP DC सबमर्सिबल (नॉर्मल कंट्रोलर) पंप पर ₹20,968 का अंशदान तय किया गया है। 5 HP DC सबमर्सिबल पंप के लिए किसान अंश ₹30,289 और 7.5 HP DC सबमर्सिबल पंप पर ₹41,537 देना होगा। यदि किसान USPC कंट्रोलर वाला पंप चुनते हैं, तो उनका अंशदान कुछ अधिक रहेगा। इससे किसानों को अपनी आवश्यकता और क्षमता के अनुसार पंप चुनने की सुविधा मिलेगी।
इस योजना का लाभ वही किसान उठा सकते हैं जो मध्यप्रदेश के स्थायी निवासी हों। किसान के पास कम से कम 3 हेक्टेयर भूमि होना अनिवार्य है और पंप की क्षमता 3, 5 या 7.5 HP होनी चाहिए। किसान के पास अस्थाई विद्युत कनेक्शन होना जरूरी है। जिस भूमि पर सोलर पंप लगाया जाएगा, वहां भविष्य में किसी भी प्रकार के विद्युत पंप पर अतिरिक्त अनुदान नहीं मिलेगा। इसके साथ ही किसान को स्व-प्रमाणीकरण देना होगा कि संबंधित खेत पर पहले से कोई विद्युत पंप चालू नहीं है। गलत जानकारी देने पर किसान को योजना से वंचित किया जा सकता है।
सोलर पंप के लिए आवेदन करने हेतु किसान को अस्थाई विद्युत कनेक्शन की रसीद, आधार कार्ड, जमीन के कागजात, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होगी। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से https://cmsolarpump.mp.gov.in वेबसाइट पर किया जा सकता है। आवेदन के बाद संबंधित विभाग द्वारा खेत का निरीक्षण किया जाएगा। स्वीकृति मिलने पर सोलर पंप स्थापित किया जाएगा और अनुदान की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाएगी।
इस योजना से किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी, सिंचाई के लिए स्वतंत्रता मिलेगी और अतिरिक्त ऊर्जा बेचकर आय बढ़ाने का अवसर प्राप्त होगा। खेतों में स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा प्रणाली उपलब्ध होगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। 5 साल तक मुफ्त रखरखाव से किसानों को तकनीकी परेशानियों से राहत मिलेगी। योजना की अधिक जानकारी के लिए किसान मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की वेबसाइट https://cmsolarpump.mp.gov.in पर विजिट कर सकते हैं या अपने नजदीकी बिजली निगम कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।