भारत में खेती लंबे समय तक केवल जीविका का साधन मानी जाती रही, लेकिन अब यह तेजी से एक लाभदायक बिजनेस मॉडल में बदल रही है। पहले किसानों को साल भर मेहनत करने के बाद भी सीमित मुनाफा ही मिलता था, जबकि आज नई तकनीक, बदलती बाजार की मांगे और सरकारी योजनाओं ने खेती की तस्वीर बदल दी है।
2026 तक भारतीय कृषि में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां किसान पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर स्मार्ट खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। अब खेती केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि हाई-वैल्यू फसलें किसानों की आय बढ़ाने का नया रास्ता बन रही हैं। सही फसल का चयन, मार्केट की समझ और आधुनिक तकनीकों का उपयोग खेती को एक सफल बिजनेस बना सकता है।
आज के समय में लोगों की जीवनशैली और खान-पान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। उपभोक्ता अब केवल पेट भरने के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य और गुणवत्ता के लिए पैसा खर्च कर रहे हैं। ऑर्गेनिक उत्पाद, सुपरफूड, औषधीय पौधे और न्यूट्रिशन से भरपूर अनाज की मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर किसान धीरे-धीरे नई फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। कंपनियां अब किसानों से सीधे खरीदारी कर रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। 2026 में वही किसान आगे रहेंगे जो बाजार की जरूरत समझकर खेती करेंगे।
ड्रैगन फ्रूट की खेती भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पहले यह फल विदेशों से आयात किया जाता था, लेकिन अब कई राज्यों में किसान इसकी खेती करके अच्छी आय कमा रहे हैं। इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कम पानी और कम देखभाल की जरूरत होती है। एक बार पौधा लगाने के बाद यह लगभग 20–25 साल तक उत्पादन देता है। बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर भी इसकी खेती संभव है। सरकार भी इस फसल को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण दे रही है। एक एकड़ में करीब 1800–2000 पौधे लगाकर किसान सालाना 1 से 2 लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं, और भविष्य में इसकी निर्यात मांग और बढ़ने की संभावना है।
पूरी दुनिया में आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचार की लोकप्रियता बढ़ रही है, जिससे औषधीय पौधों की मांग तेजी से बढ़ी है। अश्वगंधा, तुलसी, शतावरी और सर्पगंधा जैसे पौधे दवा उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन चुके हैं। कई फार्मा कंपनियां किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर रही हैं, जिससे किसानों को पहले से तय कीमत मिल जाती है। इन पौधों की जड़, बीज और पत्तियां सभी बाजार में ऊंचे दाम पर बिकती हैं। पारंपरिक खेती की तुलना में इसमें लागत कम और मुनाफा 3 से 4 गुना ज्यादा हो सकता है। 2026 तक हेल्थ इंडस्ट्री के विस्तार के साथ यह खेती किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा साधन बन सकती है।
मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार और रागी को अब “श्री अन्न” के रूप में नई पहचान मिल रही है। सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलेट्स को सुपरफूड के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में लोग हेल्दी डाइट की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे मिलेट्स आधारित उत्पादों की मांग बढ़ गई है। बिस्किट, स्नैक्स, हेल्थ ड्रिंक और रेडी-टू-ईट फूड बनाने वाली कंपनियां सीधे किसानों से खरीदारी कर रही हैं। मिलेट्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये कम पानी और खराब मौसम में भी अच्छी पैदावार देते हैं। एक एकड़ से लगभग 1 से 2 लाख रुपये तक की आय संभव मानी जा रही है, जिससे यह छोटे और मध्यम किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बन गया है।
अगर किसान लंबी अवधि के निवेश की सोच रखते हैं, तो चंदन और महोगनी के पेड़ बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इन पेड़ों की लकड़ी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत महंगी बिकती है और इसका उपयोग कीमती फर्नीचर, जहाज और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है। हालांकि इन पेड़ों को तैयार होने में 12–15 साल लगते हैं, लेकिन एक बार तैयार होने के बाद यह लाखों रुपये का रिटर्न दे सकते हैं। अतिरिक्त या खाली जमीन पर इन पौधों को लगाकर किसान भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक सुरक्षा बना सकते हैं।
मशरूम की खेती उन किसानों और युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर है जिनके पास जमीन कम है। इसे छोटे कमरे, शेड या घर के खाली स्थान में भी शुरू किया जा सकता है। बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम की मांग होटल, रेस्टोरेंट और सुपरमार्केट में लगातार बनी रहती है। इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फसल केवल 30–40 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे जल्दी आय शुरू हो जाती है। कम निवेश में शुरू होकर यह खेती धीरे-धीरे बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया विकल्प बन रही है।
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2026 में खेती में सफलता पाने के लिए केवल फसल चुनना ही काफी नहीं है, बल्कि सही रणनीति अपनाना भी जरूरी है। सबसे पहले मिट्टी की जांच कराना जरूरी है ताकि जमीन के अनुसार फसल का चयन किया जा सके। दूसरा, किसानों को डायरेक्ट मार्केटिंग पर ध्यान देना चाहिए और सोशल मीडिया, ऑनलाइन मंडी ऐप और किसान प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए ताकि बेहतर दाम मिल सके। तीसरा, नई खेती शुरू करने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेना बेहद जरूरी है। सही जानकारी, तकनीक और बाजार की समझ के साथ खेती सच में “मुनाफे की मशीन” बन सकती है और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती है।
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