गुलदाउदी के फूल की खूबी और प्रकार

By: tractorchoice
Published on: 20-Dec-2024

गुलदाउदी को जाड़े की रानी भी कहा जाता है। अमेरिका में इसको सामान्यत: ‘ग्लोरी ऑफ़ ईस्ट’ या ‘मम’ भी संक्षिप्त रूप से कहा जाता है। 

इसकी उत्पत्ति संभवत: चीन के अंदर मानी जाती है। यह बेहद विस्तृत रूप से बगीचे में उगाई जाती है और भारत में व्यावसायिक रूप से कृषि की जाने वाले पाँच फूलों में से एक होती है।

गुलदाउदी की प्रमुख खूबियों में मुख्यत: इसका इस्तेमाल माला बनाने के लिए, खुले फूलों के लिए, वेनी में लगाने, गुलदस्तों में सजाने एवं प्रदर्शनी के लिए तथा बगीचा सजाने में काफी बड़े पैमाने पर किया जाता है। 

अपनी इन्हीं सभी खूबियों की वजह से गुलदाउदी को जापान में राजशाही का प्रतीक आज भी माना जाता है।

यह मुख्यत: तीन प्रकार की होती है। पहली जिसमें सबसे बड़ा फूल आता है और सिर्फ एक फूल आता है। दूसरा है छोटी गुलदाउदी। इसमें एक पौधे में कई फूल लगते हैं। 

तीसरा है मिनी, इसको बिल्कुल छोटे गमले में लगाकर तैयार किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के फूल तैयार किए जाते हैं।

बड़ी गुलदाउदी 

  • बड़ी गुलदाउदी खरीदते वक्त इसको नाम से ही खरीदें। इससे आपको यह पता रहेगा कि किस पौधे में किस रंग का फूल खिलेगा।
  • अगर सफेद रंग के फूल पसंद हैं तो स्नो बाल, विलियम टर्नर, डॉरिज क्वीन, एसएस अर्नाल्ड, वैलिएंट, सिल्क ब्रोकेट आदि लगा सकती हैं।
  • यदि आपका पसंदीदा रंग लाल है तो लगा सकती हैं एचीवमेंट, डिग्निटी, गुस्मैन रेड, रेड वाइन आदि।
  • पीले फूल पसंद करती हैं तो लगाएं ऑटम किंग, कासा ग्रांडे, जे.एस. लॉयड, कीकूबेरी, माउंटेनियर, सोनार बांग्ला आदि।
  • पिंक रंग अच्छा लगता है तो कवर गर्ल, एस. मुखर्जी, इवा टर्नर, पिंक लेडी आदि लगाएं।
  • यदि आपको दो रंगों वाली गुलदाउदी अच्छी लगती है तो लगाएं ग्लोरिया डिओ, टेंपटेशन, अल्फ्रेड सिंपसन, प्राइड ऑफ जमशेदपुर, शिर्ले सनब्लास्ट आदि।
  • पर्पल कलर पसंद है तो महात्मा गांधी, राजा, सिल्क ब्रोकेड, लिली गैलोन आदि लगा सकती हैं।

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छोटी गुलदाउदी

  • सफेद रंग में मिलने वाली वैराइटी है व्हाइट मोदी, कॉटन बाल, बीरबल साहनी, एस.के. राजा आदि।
  • पीले फूल के लिए जयंती, ननाको, यलो चार्म आदि लगा सकती हैं।
  • पिंक कलर के लिए लगाएं पिंक मोदी, चांदनी, मैगी, नागपुर सिंगर आदि।
  • लाल रंग के लिए बिंदिया, जया, बजोरिया रेड आदि लगा सकती हैं।

मिनी गुलदाउदी

यह लाल, पीले और सफेद रंगों में मिलती है। इसकी खासियत यह है कि इसे बगैर पिंचिंग किए हुए भी काफी फूल मिलेंगे। i

नेशनल बोटैनिकल रिचर्स इंस्टीट्यूट, लखनऊ द्वारा तैयार प्रजातियां हैं इंडियाना, कुसुम, लिटिल डार्लिंग, मिनी जेसी इत्यादि।

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गुलदाउदी के पौधरोपण की प्रक्रिया 

इच्छुक कृषकों को गुलदाउदी के पौधरोपण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी होना अनिवार्य है। गुलदाउदी के पौधे लगाने के लिए गोबर की खाद, कोकोपीट, मौरंग, धान की भूसी को बराबर मात्रा में मिलाकर गमले भर लें। 

एक गमले के लिए सौ ग्राम नीम की खली, थोड़ा सा म्यूरेटा पोटाश पर्याप्त रहता है। इसे भी गोबर की खाद वाले मिश्रण में मिला दें। गुलदाउदी के पौधे को इसके माध्यम से काफी प्रचूर मात्रा में पोषण मिलता है।

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