नेपियर ( हाथी घास) की खेती

By: tractorchoice
Published on: 14-Jan-2025
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नेपियर बाजरा (पेनिसेटम टाइफॉइड्स) और नेपियर घास (पेनिसेटम पर्पुरियम) के बीच एक अंतर-प्रजातीय संकरण है।

इसे बाजरा-नेपियर हाइब्रिड या हाथी घास के नाम से जाना जाता है। यह एक बहुवर्षीय घास है, जिसे खेत में 2-3 वर्षों तक बनाए रखा जा सकता है। 

नेपियर घास की तुलना में हाइब्रिड नेपियर बड़े और नरम पत्तों का उत्पादन करता है। इस लेख में हम आपको नेपियर घास की खेती से जुडी सम्पूर्ण जानकारी देंगे।   

नेपियर घास की खेती के लिए जलवायु की आवश्यकता

यह घास गहरी, अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में 4.5-8.2 (औसतन 6.2) के पीएच पर सबसे अच्छी बढ़ती है। 

यह 25 से 40°C के बीच सर्वाधिक वृद्धि करता है और 15°C से कम तापमान पर वृद्धि कम हो जाती है। 10°C पर वृद्धि रुक जाती है। 

यह सामान्यतः 1,000 मिमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उगता है। यह मध्यम सूखे को सहन कर सकता है क्योंकि इसकी जड़ प्रणाली बहुत गहरी होती है, लेकिन लंबे समय तक जलभराव या पानी रुकने की स्थिति में यह संवेदनशील है। 

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भूमि की तैयारी: 

भूमि को अच्छी तरह तैयार करने के लिए आमतौर पर 2-3 बार जुताई और समतलीकरण किया जाता है। 

चूंकि यह एक लंबी अवधि की फसल है, अन्य फसलों की तरह बार-बार जुताई संभव नहीं होती। इसे समतल भूमि पर भी लगाया जा सकता है। 

नेपियर घास की किस्मे 

क्षेत्र

किस्में

मध्य भारत, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी पहाड़ियां

IGFRI हाइब्रिड नेपियर - 3  

पूरे देश      

पुसा जाइंट और NB-21 

तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात

Co-1, Co-2 और Co-3 

पहाड़ी, अर्ध-नम और उप-समशीतोष्ण भारत

IGFRI-7   

पंजाब              

PBN-83  

पूरे देश    

IGFR-10


नेपियर घास की बुवाई का समय: 

भारत में इसे पूरे वर्ष उगाया जा सकता है। सबसे उपयुक्त बुवाई का समय 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच का माना जाता है।

नेपियर घास की बीज दर:  

यह बाँझ हाइब्रिड है, इसलिए इसे जड़ों और तने के कटिंग से लगाया जाता है। इसकी खेती के लिए कटिंग की ही आवश्यकता होती है। 

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नेपियर घास की बुवाई विधि:  

नेपियर घास के तने या जड़ों की कटिंग से उगाया जाता है। कटिंग को 50 x 50 सेमी की दूरी पर लगाया जाता है। तने की दो गांठें मिट्टी के अंदर और एक गांठ बाहर रहनी चाहिए।  

खाद और उर्वरक प्रबंधन:  

भूमि तैयार करते समय 25-40 टन/हेक्टेयर गोबर खाद डालें। प्रति हेक्टेयर 53 किलो यूरिया, 87 किलो डीएपी और 67 किलो एमओपी (एनपीके: 40:40:40) की आवश्यकता होती है। हर कटाई के बाद 40 किलो नाइट्रोजन की टॉपड्रेसिंग करें।

सिंचाई:  

फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसे नम मिट्टी में लगाया जाना चाहिए। मार्च-मई में 15-18 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।  

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नेपियर घास की कटाई और उपज: 

पहली कटाई बुवाई के 75-80 दिनों बाद करें। इसके बाद हर 30-40 दिनों के अंतराल पर कटाई करें। प्रति वर्ष कम से कम 6-8 कटाई संभव है।  

प्रति हेक्टेयर औसतन 150 टन हरे चारे का वार्षिक उत्पादन लिया जा सकता है। अतिरिक्त चारे को काटकर सिलेज में बदल सकते हैं। 

इसे लेग्युम चारे के साथ 1:2 के अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है। गर्मियों में इसे सूखा कर हे में परिवर्तित किया जा सकता है।

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