एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के कृषि मशीनरी कारोबार ने जुलाई 2026 में ट्रैक्टर बिक्री के मामले में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कंपनी ने इस महीने कुल 8,731 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 7,154 यूनिट था। इस तरह कंपनी ने वर्ष-दर-वर्ष आधार पर लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की।
यह नतीजा दर्शाता है, कि भारतीय कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टरों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और किसान आधुनिक कृषि उपकरणों में निवेश करने के लिए पहले की तुलना में अधिक उत्साहित हैं। कंपनी के लिए यह प्रदर्शन बाजार में उसकी मजबूत उपस्थिति और ग्राहकों के भरोसे का भी संकेत है।
जुलाई 2026 के दौरान कंपनी की घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 8,194 यूनिट रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 6,624 यूनिट थी। यानी भारतीय बाजार में कंपनी ने करीब 23.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।
इस बढ़ोतरी के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती कृषि गतिविधियां, किसानों की बेहतर आर्थिक स्थिति और खेती में मशीनीकरण की बढ़ती जरूरत को प्रमुख कारण माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस ट्रैक्टरों की मांग लगातार बढ़ने से एस्कॉर्ट्स कुबोटा को घरेलू बाजार में अच्छा लाभ मिला और उसकी बाजार स्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई।
कंपनी की बिक्री में वृद्धि केवल एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि थोक (व्होलसेल) और खुदरा (रिटेल) दोनों स्तरों पर संतुलित प्रदर्शन देखने को मिला। डीलर नेटवर्क में पर्याप्त उपलब्धता और अंतिम ग्राहकों की लगातार खरीदारी ने बिक्री की गति को बनाए रखा।
इससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में वास्तविक मांग मौजूद है और किसानों की ओर से ट्रैक्टर खरीदने का रुझान लगातार बढ़ रहा है। कंपनी की मजबूत वितरण व्यवस्था और बिक्री-पश्चात सेवाओं ने भी ग्राहकों का विश्वास मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
जुलाई महीने में कई राज्यों में अच्छी बारिश होने से खेती-किसानी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं। लगातार वर्षा के कारण पहले मौजूद वर्षा की कमी घटकर लगभग 14 से 15 प्रतिशत तक सीमित रह गई। इससे जल स्रोतों में सुधार हुआ और किसानों को समय पर खेत तैयार करने तथा फसल की बुवाई करने का अवसर मिला।
बेहतर मानसून का सीधा असर कृषि मशीनरी की मांग पर भी पड़ा। जब खेती का दायरा बढ़ता है, तब ट्रैक्टरों की आवश्यकता भी बढ़ जाती है और इसका लाभ एस्कॉर्ट्स कुबोटा जैसी कंपनियों को मिला।
खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने से ग्रामीण बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। किसानों ने समय पर कृषि कार्यों को पूरा करने के लिए नए ट्रैक्टर खरीदने में रुचि दिखाई। अच्छी बारिश और खेतों में बढ़ती गतिविधियों ने कृषि निवेश को प्रोत्साहित किया, जिससे ट्रैक्टरों की मांग मजबूत बनी रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़े आत्मविश्वास और बेहतर बाजार भावना ने कंपनी की बिक्री को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि खेती में आधुनिक मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी एस्कॉर्ट्स कुबोटा का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। जुलाई 2026 में कंपनी ने 537 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि जुलाई 2025 में यह संख्या 530 यूनिट थी।
हालांकि निर्यात वृद्धि 1.3 प्रतिशत रही, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि विदेशी बाजारों में भी कंपनी के उत्पादों की मांग स्थिर बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर भारतीय ट्रैक्टरों की बढ़ती स्वीकार्यता और गुणवत्ता के प्रति विश्वास कंपनी के निर्यात कारोबार को आगे बढ़ाने में सहायक साबित हो रहा है।
हालांकि मौजूदा बिक्री के आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं, लेकिन भविष्य की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। खरीफ फसल का अंतिम उत्पादन, मानसून की निरंतर प्रगति, तीसरी तिमाही में त्योहारी सीजन का अपेक्षाकृत देर से शुरू होना और कृषि उपकरणों के निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की बढ़ती लागत उद्योग के लिए अहम चुनौतियां हो सकती हैं।
इसके अलावा पिछले वर्ष की तुलना में ऊंचे बिक्री आधार के कारण आगामी महीनों में समान वृद्धि दर बनाए रखना भी आसान नहीं होगा। इसलिए बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक रहेगा।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड का मानना है कि भारत में कृषि मशीनीकरण की रफ्तार आने वाले वर्षों में और तेज होगी। किसानों के बीच आधुनिक तकनीक अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति, सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं, बेहतर वित्तीय सुविधाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती निवेश क्षमता ट्रैक्टर उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
कंपनी का लक्ष्य बेहतर तकनीक, विश्वसनीय गुणवत्ता, मजबूत डीलर नेटवर्क और उत्कृष्ट ग्राहक सेवाओं के माध्यम से किसानों की बदलती जरूरतों को पूरा करना है। यदि मौसम अनुकूल बना रहता है और कृषि गतिविधियां इसी तरह मजबूत रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भी कंपनी के लिए विकास की संभावनाएं उज्ज्वल दिखाई देती हैं और ट्रैक्टर बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रहने की उम्मीद है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, मैसी फर्ग्यूसन, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
Mahindra & Mahindra Ltd.'s Farm Equipment Business is seeing a tremendous performance for July 2026, with the fact that the demand for the products is high in the domestic market, as the agricultural production conditions are improving. Better monsoon and good farm returns, along with positive rural sentiment, boosted the sales of tractors as well.
During July 2026, Mahindra sold 32,643 tractors in the domestic market, compared to 26,990 units in July 2025, registering a 21% year-on-year (YoY) growth. The increased demand for modern farm equipment has been fueled by their confidence in enhancing productivity and efficiency on their farms, which is evident in their attendance at the event.
Mahindra's total tractor sales, which include exports, rose to 34,420 units in July 2026 from 28,708 units a year ago in the same month. During the month, the company shipped 1,777 tractors, sustaining good sales in overseas markets and expanding its market share in India's tractor sector.
Impressive growth in sales was mainly due to positive conditions in the agricultural sector. One of the major factors was the substantial improvement in monsoon rainfall that resulted in improved soil moisture and favourable conditions for agricultural activities in a few states. Better rainfall also resulted in more water, easing the concerns of farmers and allowing them to invest in farm machinery.
Another significant contributor to the rise was the rise in water levels at dams, which has helped in providing irrigation water for crops during the ongoing kharif season. Improving water's availability has prompted farmers to increase farming area and demand for tractors and other farm machines.
The faster kharif sowing and the higher level of activity in crop sowing also contributed to the tractor demand, Mahindra added. With the assistance of timely rains and government schemes, the sowing process has been done properly, and farmers' purchases of agricultural machinery have risen.
The government has also contributed significantly in fueling the rural demand. The purchasing power of farmers has been enhanced by various agricultural schemes, enhanced access to credit and healthy farm cash flows. Consequently, many farmers are opting for new machines for higher productivity, less labour dependency and better farm operations.
Veejay Nakra, President – Farm Equipment Business, Mahindra & Mahindra Ltd, said that “We have sold 32,643 tractors in the domestic market during July 2026, registering a growth of 21% over last year. Significant recovery in rainfall, improved reservoir levels, accelerated kharif sowing aided by Government support, and healthy farm cashflows have led to positive rural & farmer sentiment.”
Mahindra is positive about the tractor industry going forward. The company is confident that sales of tractors will be strong in the next few months, especially with the good monsoons and the continued support of the government for agriculture, as well as the demand in the rural market. The market conditions are positive, and in this regard, Mahindra and the Indian farm equipment industry will continue to benefit in the second half of the financial year.
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने जुलाई 2026 के ट्रैक्टर बिक्री आंकड़े जारी किए हैं, जो कंपनी के लिए बेहद उत्साहजनक रहे। भारत में ट्रैक्टरों की बढ़ती मांग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते कंपनी ने घरेलू बाजार में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। जुलाई 2026 में महिंद्रा ने घरेलू बाजार में 32,643 ट्रैक्टर बेचे, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 26,990 यूनिट था।
महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी ने साल-दर-साल (Year-on-Year) 21 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारतीय किसानों का भरोसा महिंद्रा ट्रैक्टरों पर लगातार बढ़ रहा है। बेहतर कृषि परिस्थितियों, सरकारी योजनाओं और किसानों की मजबूत क्रय क्षमता ने ट्रैक्टर बाजार को नई गति दी है। महिंद्रा ने अपनी गुणवत्ता, तकनीक और विश्वसनीयता के दम पर देश के प्रमुख ट्रैक्टर ब्रांड के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के लिए जुलाई 2026 घरेलू बिक्री के लिहाज से बेहद सफल महीना साबित हुआ। कंपनी ने 32,643 ट्रैक्टर बेचकर पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक बिक्री दर्ज की। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि क्षेत्र में बढ़ते निवेश और किसानों के सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाती है।
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसानों ने नई कृषि मशीनरी में निवेश बढ़ाया, जिससे ट्रैक्टरों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। महिंद्रा की विस्तृत डीलरशिप, भरोसेमंद बिक्री-पश्चात सेवा और विभिन्न एचपी श्रेणियों में उपलब्ध ट्रैक्टर मॉडल किसानों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं। यही कारण है कि कंपनी लगातार घरेलू बाजार में अग्रणी बनी हुई है और उसकी बिक्री में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है।
महिंद्रा ने केवल घरेलू बाजार में ही नहीं, बल्कि कुल ट्रैक्टर बिक्री और निर्यात के क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन किया। जुलाई 2026 में कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री (घरेलू + निर्यात) 34,420 यूनिट रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 28,708 यूनिट थी। इस प्रकार कुल बिक्री में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं, कंपनी का निर्यात 1,777 यूनिट रहा, जो पिछले वर्ष के 1,718 यूनिट की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि महिंद्रा के ट्रैक्टरों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी लगातार बनी हुई है। कंपनी की आधुनिक तकनीक, मजबूत गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय ब्रांड छवि विदेशी ग्राहकों को भी आकर्षित कर रही है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष वीजय नाकरा ने जुलाई 2026 की बिक्री पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कंपनी ने घरेलू बाजार में 32,643 ट्रैक्टर बेचकर 21 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। उनके अनुसार, इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कई सकारात्मक कारक रहे।
देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जलाशयों का जलस्तर बढ़ा, खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई और सरकार की विभिन्न कृषि सहायता योजनाओं ने किसानों का मनोबल बढ़ाया।
इसके अलावा किसानों की नकदी प्रवाह (Farm Cashflows) में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक आर्थिक माहौल ने ट्रैक्टरों की मांग को मजबूत किया। इन सभी परिस्थितियों ने ग्रामीण बाजार में विश्वास बढ़ाया और कृषि उपकरणों की खरीद को प्रोत्साहित किया।
महिंद्रा का प्रदर्शन केवल जुलाई महीने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में भी कंपनी ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। अप्रैल से जुलाई 2026 तक कंपनी ने घरेलू बाजार में 1,85,069 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह संख्या 1,56,189 यूनिट थी। यानी घरेलू बिक्री में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
इसी अवधि में कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री 1,92,461 यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की 1,62,797 यूनिट की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। वहीं निर्यात 7,392 यूनिट तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 6,608 यूनिट से 12 प्रतिशत अधिक है। ये आंकड़े बताते हैं कि महिंद्रा की विकास गति पूरे वित्त वर्ष की शुरुआत से ही मजबूत बनी हुई है।
जुलाई 2026 के बिक्री आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारतीय कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। समय पर और पर्याप्त वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई तेज हुई है। जलाशयों में बेहतर जल स्तर ने सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाई है, जिससे किसानों का आत्मविश्वास मजबूत हुआ।
इसके साथ ही सरकारी सहायता योजनाओं, कृषि ऋण की उपलब्धता और अच्छी फसल की उम्मीदों ने किसानों को नए ट्रैक्टर खरीदने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बेहतर होने से कृषि मशीनरी में निवेश बढ़ा है।
महिंद्रा ने इस सकारात्मक माहौल का लाभ उठाते हुए किसानों की जरूरतों के अनुसार आधुनिक और विश्वसनीय ट्रैक्टर उपलब्ध कराए, जिसके परिणामस्वरूप बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
महिंद्रा ग्रुप की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और आज यह दुनिया के सबसे बड़े और सम्मानित बहुराष्ट्रीय औद्योगिक समूहों में से एक है। समूह के 3.24 लाख से अधिक कर्मचारी 100 से ज्यादा देशों में कार्यरत हैं।
महिंद्रा भारत में फार्म इक्विपमेंट, यूटिलिटी व्हीकल, सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्रों में अग्रणी स्थान रखता है। ट्रैक्टर उत्पादन के मामले में महिंद्रा दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी मानी जाती है।
इसके अलावा कंपनी की मजबूत उपस्थिति अक्षय ऊर्जा, कृषि, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट जैसे कई क्षेत्रों में भी है। नवाचार, गुणवत्ता और ग्राहक विश्वास के कारण महिंद्रा ने वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान बनाई है।
महिंद्रा ग्रुप का लक्ष्य केवल व्यावसायिक सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी सतत विकास (ESG), ग्रामीण समृद्धि और बेहतर शहरी जीवन को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। कंपनी का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, नवाचार और टिकाऊ कृषि समाधान के माध्यम से किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाना है।
जुलाई 2026 के मजबूत बिक्री आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि यदि अनुकूल मानसून, सरकारी सहयोग और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना रहता है, तो आने वाले महीनों में भी ट्रैक्टर उद्योग में अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
महिंद्रा अपने व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो, मजबूत वितरण नेटवर्क, उत्कृष्ट ग्राहक सेवा और वैश्विक अनुभव के साथ भविष्य में भी भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय ट्रैक्टर बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, मैसी फर्ग्यूसन, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
हरियाणा सरकार ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और फसल अवशेष प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) 2026-27 के तहत फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े आधुनिक कृषि यंत्रों पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली और अन्य फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराना है, ताकि खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को कम किया जा सके। सरकार की इस पहल से किसानों को महंगी कृषि मशीनरी खरीदने में आर्थिक सहायता मिलेगी और खेती की लागत को कम करने में भी मदद मिल सकती है। पात्र किसान इस योजना के तहत 3 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
योजना के तहत व्यक्तिगत श्रेणी के पात्र किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी विभिन्न कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इनमें सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर और मल्चर जैसे प्रमुख कृषि यंत्र शामिल हैं। इसके अलावा रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल सीड ड्रिल, स्ट्रॉ बेलर और रेक, क्रॉप रीपर तथा ट्रैक्टर माउंटेड लोडर और ट्रैक्टर चालित टेंडर मशीन जैसे उपकरणों को भी योजना में शामिल किया गया है।
इन मशीनों की मदद से किसान फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों का उचित तरीके से प्रबंधन कर सकते हैं। इससे पराली को जलाने की जरूरत कम होगी और खेत की मिट्टी तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से किसानों को समय और श्रम की बचत का लाभ भी मिल सकता है।
सरकार ने बेलर मशीन का चयन करने वाले किसानों के लिए विशेष सुविधा का भी प्रावधान किया है। यदि किसी किसान का चयन स्ट्रॉ बेलर मशीन के लिए होता है, तो उसे इसके साथ रेक, स्ट्रॉ रेक अथवा श्रेडर मास्टर या रोटरी स्लेशर मशीन पर भी अनुदान का लाभ मिल सकता है। इससे किसानों को फसल अवशेषों को एकत्र करने और उनका प्रबंधन करने के लिए आवश्यक मशीनरी का बेहतर संयोजन उपलब्ध हो सकेगा।
हालांकि, सामान्य स्थिति में व्यक्तिगत श्रेणी का किसान केवल एक मुख्य कृषि यंत्र के लिए आवेदन करने का पात्र होगा। इसलिए आवेदन करने से पहले किसान को अपनी जरूरत और खेत की स्थिति के अनुसार उपयुक्त कृषि यंत्र का चयन करना जरूरी है। विभाग की योजना का उद्देश्य किसानों को ऐसी मशीनरी उपलब्ध कराना है, जिससे फसल अवशेषों का प्रबंधन खेत स्तर पर ही प्रभावी ढंग से किया जा सके और पराली जलाने की समस्या पर रोक लगाने में मदद मिले।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों के लिए कुछ आवश्यक पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदक किसान का पंजीकरण 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर होना अनिवार्य है। आवेदन करते समय किसान को परिवार पहचान पत्र (PPP), आधार कार्ड अथवा अन्य वैध पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और ट्रैक्टर की वैध आरसी जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के किसानों को जाति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। इसके अतिरिक्त आवेदक को शपथ पत्र देकर यह घोषणा करनी होगी कि वह अपने खेत में फसल अवशेष या पराली नहीं जलाएगा। किसान को यह भी प्रमाणित करना होगा कि पिछले तीन वर्षों में उसके परिवार के किसी सदस्य ने उसी कृषि यंत्र पर सरकारी सब्सिडी का लाभ नहीं लिया है। दस्तावेजों और पात्रता की सही जानकारी देना आवेदन प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण होगा।
कृषि विभाग ने योजना के तहत आवेदन से लेकर अनुदान प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी रखने की व्यवस्था की है। इच्छुक किसान निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन किसानों का चयन होगा, उन्हें अपने आवश्यक दस्तावेज संबंधित जिले के सहायक कृषि अभियंता कार्यालय में सत्यापन के लिए जमा कराने होंगे।
विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र एवं चयनित किसानों के लिए ऑनलाइन परमिट जारी किया जाएगा। किसानों के लिए यह जरूरी होगा कि वे आवेदन करते समय सही जानकारी दर्ज करें और सभी आवश्यक दस्तावेज स्पष्ट एवं वैध रूप में उपलब्ध कराएं। दस्तावेज सत्यापन के बाद जारी होने वाला परमिट कृषि यंत्र की खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ऑनलाइन परमिट जारी होने के बाद चयनित किसान विभाग द्वारा अधिकृत निर्माता या डीलर से ही संबंधित कृषि यंत्र खरीद सकेंगे। मशीन की खरीद के बाद किसान को खरीद से जुड़े आवश्यक दस्तावेज विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इसमें कृषि यंत्र का खरीद बिल, ई-वे बिल और जीपीएस लोकेशन जैसी जानकारी शामिल होगी। विभाग की ओर से निर्धारित समय सीमा के अनुसार किसानों को यह पूरी प्रक्रिया 7 सितंबर 2026 तक पूरी करनी होगी।
यदि किसान निर्धारित अवधि में मशीन खरीदने और जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उसे अनुदान प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए परमिट मिलने के बाद किसानों को बिना देरी किए अधिकृत डीलर से मशीन खरीदकर सभी जरूरी दस्तावेज समय पर जमा करने की सलाह दी गई है।
इस योजना में किसानों के साथ-साथ कृषि यंत्र निर्माताओं के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। निर्माता विभागीय पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। हालांकि, जिन निर्माताओं का पंजीकरण वर्ष 2025-26 में पहले ही स्वीकृत हो चुका है और जिनकी टेस्ट रिपोर्ट अभी वैध है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इससे किसानों को अधिकृत निर्माताओं और डीलरों के माध्यम से समय पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि 3 अगस्त 2026 का इंतजार न करें और जल्द से जल्द ऑनलाइन आवेदन पूरा करें। आवेदन केवल विभाग द्वारा अधिकृत पोर्टल के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। सही समय पर आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, परमिट प्राप्त करने और 7 सितंबर तक खरीद संबंधी दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी करने पर पात्र किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिल सकेगा। यह योजना किसानों की आर्थिक मदद के साथ-साथ पराली प्रबंधन, मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, मैसी फर्ग्यूसन, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्न: हरियाणा सरकार कृषि यंत्रों पर कितने प्रतिशत तक अनुदान दे रही है ?
उत्तर: हरियाणा सरकार RKVY 2026-27 के तहत फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े कृषि यंत्रों पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
प्रश्न: योजना के तहत किसान कब तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं ?
उत्तर: पात्र किसान इस योजना के तहत 3 अगस्त 2026 तक विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न: बेलर मशीन का चयन होने पर किसान को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा ?
उत्तर: बेलर मशीन के चयनित किसान रेक, स्ट्रॉ रेक या श्रेडर मास्टर और रोटरी स्लेशर मशीन पर भी अनुदान ले सकते हैं।
प्रश्न: कृषि यंत्र खरीदने के बाद किसानों को कौन-कौन से दस्तावेज अपलोड करने होंगे ?
उत्तर: किसानों को खरीद बिल, ई-वे बिल और कृषि यंत्र की जीपीएस लोकेशन विभागीय पोर्टल पर निर्धारित समय में अपलोड करनी होगी।
प्रश्न: योजना का लाभ लेने के लिए किसान को कौन सा पंजीकरण कराना अनिवार्य है ?
उत्तर: योजना का लाभ लेने के लिए किसान का 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है।
अगर किसी कारणवश जुलाई तक धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में जुलाई के दौरान भी धान की नर्सरी तैयार कर सफल खेती की जा सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी है सही किस्म का चयन।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित पूसा बासमती की कई उन्नत किस्में देर से रोपाई यानी पछेती खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। ये किस्में कम अवधि में तैयार होती हैं, अच्छी पैदावार देती हैं और बाजार में बेहतर कीमत भी दिलाती हैं। इसलिए समय निकल जाने के बावजूद किसान उचित योजना बनाकर अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
देर से रोपाई की स्थिति में ऐसी धान किस्मों की आवश्यकता होती है, जो कम समय में पक जाएं और उत्पादन पर अधिक असर न पड़े। पूसा बासमती की उन्नत किस्में इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता लंबा और पतला दाना, प्राकृतिक सुगंध, बेहतर चावल गुणवत्ता तथा निर्यात में अधिक मांग है।
सामान्य धान की तुलना में बासमती धान का बाजार मूल्य अधिक होता है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ जुलाई में नर्सरी लगाने वाले किसानों को इन किस्मों को अपनाने की सलाह देते हैं।
पूसा बासमती 1509 देर से रोपाई के लिए सबसे अधिक पसंद की जाने वाली किस्मों में शामिल है। इसकी फसल लगभग 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, इसलिए यह जुलाई में नर्सरी लगाने वाले किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।
इस किस्म के पौधे मजबूत होते हैं और गिरने की संभावना कम रहती है, जिससे फसल का नुकसान भी कम होता है। इसके दाने लंबे, पतले और पकने के बाद बेहतरीन खुशबू वाले होते हैं। अच्छी कृषि प्रबंधन तकनीकों के साथ यह किस्म अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ बाजार में अच्छी कीमत भी दिलाती है।
पूसा बासमती 1847 उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो बेहतर पैदावार के साथ गुणवत्तापूर्ण बासमती चावल का उत्पादन करना चाहते हैं। यह किस्म लगभग 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और औसतन 28 से 32 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
इसके दाने लंबे, पतले और अत्यधिक सुगंधित होते हैं, जिसकी वजह से घरेलू बाजार के अलावा निर्यात में भी इसकी अच्छी मांग रहती है। इस किस्म की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (झुलसा) और ब्लास्ट (झोंका) जैसे प्रमुख रोगों के प्रति सहनशील मानी जाती है, जिससे किसानों का जोखिम काफी कम हो जाता है।
पूसा बासमती 1692 को विशेष रूप से बेहतर गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह किस्म कई सामान्य धान रोगों के प्रति अन्य किस्मों की तुलना में अधिक सहनशील मानी जाती है।
इसके लंबे और पतले दाने उत्कृष्ट गुणवत्ता के होते हैं तथा पकने के बाद अच्छी खुशबू देते हैं। देर से रोपाई की स्थिति में भी यह किस्म संतोषजनक उत्पादन देती है। जिन किसानों की नर्सरी या रोपाई किसी कारण से देर से हो रही है, उनके लिए यह किस्म एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प साबित हो सकती है।
पूसा बासमती 1121 भारत की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय बासमती किस्मों में गिनी जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पकने के बाद इसके दाने बेहद लंबे हो जाते हैं और इनमें प्राकृतिक सुगंध होती है। यही कारण है कि इस किस्म की घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काफी मांग रहती है।
हालांकि इसकी फसल लगभग 140 से 145 दिनों में तैयार होती है और औसत उत्पादन 19 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ रहता है। यदि क्षेत्र की जलवायु और समय इसकी अनुमति देते हैं, तो यह किस्म किसानों को उत्कृष्ट गुणवत्ता और बेहतर लाभ प्रदान कर सकती है।
पूसा बासमती 1885 पछेती खेती के लिए विकसित की गई नई उन्नत किस्मों में शामिल है। इसे अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके दाने लंबे, आकर्षक और सुगंधित होते हैं, जिससे बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी रहती है।
यह किस्म देर से नर्सरी लगाने और रोपाई करने वाले किसानों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। सही पोषण, सिंचाई और फसल प्रबंधन अपनाने पर यह कम समय में अच्छी उपज देने की क्षमता रखती है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है।
जुलाई में धान की नर्सरी तैयार करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाना जरूरी है। सबसे पहले हमेशा प्रमाणित और शुद्ध बीज का ही चयन करें ताकि पौध स्वस्थ और मजबूत तैयार हो। बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें, जिससे शुरुआती अवस्था में रोगों का खतरा कम हो सके। नर्सरी ऐसी जगह बनाएं जहां पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो, क्योंकि जलभराव से पौधों को नुकसान हो सकता है।
समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से पौध मजबूत बनती है और रोपाई के बाद तेजी से बढ़वार करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही किस्म के चयन के साथ वैज्ञानिक खेती अपनाकर जुलाई में भी किसान बासमती धान की सफल खेती कर बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, मैसी फर्ग्यूसन, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
मध्य प्रदेश सरकार कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की खरीद पर आकर्षक अनुदान उपलब्ध करा रही है। इस मशीन की बाजार कीमत लगभग 14 लाख 40 हजार रुपये बताई गई है। पात्र किसानों को इसकी खरीद पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है।
सरकार का उद्देश्य है कि छोटे और मध्यम किसान भी आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें और खेती को अधिक लाभकारी बना सकें। इस योजना से किसानों पर मशीन खरीदने का आर्थिक बोझ कम होता है और वे आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर खेती की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।
मध्य प्रदेश में मानसून की अच्छी बारिश के बाद धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है। इसी बीच कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। जबलपुर जिले के पाटन क्षेत्र के ग्राम उजरोड में कृषि अधिकारियों ने किसान रूपेश पटेल के खेत का निरीक्षण किया, जहां पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई की जा रही थी।
अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक पारंपरिक रोपाई की तुलना में अधिक प्रभावी और किफायती है। मशीन के उपयोग से मजदूरों पर निर्भरता कम होती है, कम समय में अधिक क्षेत्र में रोपाई संभव होती है और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलता है। किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की खरीद पर 5 लाख रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन धान की खेती में कई तरह से लाभ पहुंचाती है। धान रोपाई के समय अक्सर मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है, लेकिन इस मशीन के माध्यम से यह परेशानी काफी हद तक दूर हो जाती है। मशीन कम समय में बड़े क्षेत्र में रोपाई कर देती है, जिससे श्रम लागत और समय दोनों की बचत होती है। इसके अलावा मशीन पौधों और कतारों के बीच समान दूरी बनाए रखती है, जिससे खरपतवार नियंत्रण, गुड़ाई और अन्य कृषि कार्य आसान हो जाते हैं। एक समान रोपाई होने से पौधों को पर्याप्त पोषण और प्रकाश मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है और फसल अधिक स्वस्थ बनती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैडी ट्रांसप्लांटर से सामान्यतः 18 से 21 दिन की कम उम्र वाली नर्सरी की रोपाई की जाती है। कम उम्र की पौध खेत में जल्दी स्थापित होकर अधिक कंसे (टिलर्स) विकसित करती है, जिससे प्रति पौधा अधिक बालियां निकलने की संभावना रहती है। यही कारण है कि इस तकनीक से उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलती है।
साथ ही पौधों के बीच उचित दूरी रहने के कारण रोग और कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है। कृषि विभाग के अनुसार पारंपरिक मजदूरों से धान रोपाई कराने में प्रति एकड़ लगभग 6,000 से 7,000 रुपये तक खर्च आता है, जबकि पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से यही कार्य करीब 3,000 रुपये प्रति एकड़ में पूरा हो जाता है। इस तरह किसान रोपाई की लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक बचत कर सकते हैं।
पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई के लिए सबसे पहले 18 से 21 दिन की स्वस्थ और समान आकार की नर्सरी तैयार की जाती है। इसके बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर उसमें पर्याप्त पानी भरकर समतल किया जाता है ताकि मशीन आसानी से चल सके। तैयार पौध को मशीन की ट्रे में लगाया जाता है और मशीन निर्धारित दूरी तथा समान गहराई पर पौधों की रोपाई करती है। इस प्रक्रिया से कतारों और पौधों के बीच उचित दूरी बनी रहती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।
एक समान रोपाई होने के कारण सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और फसल प्रबंधन के कार्य भी आसान हो जाते हैं। कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान इस आधुनिक तकनीक को अपनाते हैं, तो खेती की लागत कम होगी, श्रमिकों की कमी की समस्या दूर होगी और धान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। सरकार द्वारा दी जा रही 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी इस दिशा में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायता साबित हो रही है।
पैडी ट्रांसप्लांटर सहित अन्य कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि अभियांत्रिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होता है। आवेदन के दौरान निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना आवश्यक है तथा सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदन स्वीकृत होने के बाद सरकार के नियमानुसार किसानों को अनुदान का लाभ प्रदान किया जाता है।
निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसान रूपेश पटेल को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती से संबंधित तकनीकी सुझाव भी दिए। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक मशीनों के साथ वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। ग्राम उजरोड में इस तकनीक की सफलता देखने के बाद आसपास के कई किसानों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने पंजाब के होशियारपुर स्थित अपने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 20 लाखवां ट्रैक्टर तैयार कर भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में एक नया इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि कंपनी की लगभग तीन दशक लंबी विनिर्माण यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रबंधन टीम ने विशेष समारोह आयोजित कर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।
उत्पादन लाइन से निकले 20 लाखवें ट्रैक्टर का विशेष रूप से अनावरण किया गया और इसे कंपनी की तकनीकी क्षमता, गुणवत्ता और किसानों के भरोसे का प्रतीक बताया गया। कंपनी का कहना है कि यह उपलब्धि केवल उत्पादन संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लाखों किसानों के विश्वास का परिणाम है जिन्होंने वर्षों से सोनालीका ट्रैक्टर्स को अपनी खेती का भरोसेमंद साथी बनाया है। इस अवसर पर पूरे प्लांट को विशेष रूप से सजाया गया और कर्मचारियों के योगदान को भी सम्मानित किया गया।
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने वर्ष 1996 में किसानों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक और शक्तिशाली ट्रैक्टरों के निर्माण की शुरुआत की थी। शुरुआत से ही कंपनी का लक्ष्य भारतीय किसानों को ऐसी मशीनें उपलब्ध कराना था जो कम लागत में अधिक उत्पादकता देने में सक्षम हों। समय के साथ कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार किया और नई तकनीकों को अपनाते हुए आधुनिक विनिर्माण सुविधाएं विकसित कीं।
आज होशियारपुर स्थित इसका इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत ट्रैक्टर निर्माण संयंत्रों में गिना जाता है। यहां अत्याधुनिक मशीनों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं के माध्यम से विभिन्न हॉर्सपावर श्रेणी के ट्रैक्टरों का निर्माण किया जाता है। कंपनी का मानना है कि निरंतर अनुसंधान, नवाचार और ग्राहकों की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद विकसित करने की रणनीति ने उसे देश और विदेश के बाजारों में मजबूत पहचान दिलाई है।
20 लाख ट्रैक्टर उत्पादन की उपलब्धि के अवसर पर कंपनी ने अपनी पूरी विनिर्माण यात्रा को प्रदर्शित करते हुए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान उत्पादन लाइन से तैयार हुए 20 लाखवें ट्रैक्टर को समारोहपूर्वक बाहर लाया गया और कर्मचारियों की मौजूदगी में उसका अनावरण किया गया। प्लांट परिसर में लगाए गए विशेष प्रदर्शनों के माध्यम से कंपनी ने अपने प्रमुख उत्पादन पड़ावों को भी दर्शाया। इनमें 1 लाख, 5 लाख, 10 लाख और अब 20 लाख ट्रैक्टर उत्पादन तक का सफर शामिल रहा।
यह प्रदर्शन कंपनी की लगातार बढ़ती उत्पादन क्षमता और मजबूत विनिर्माण प्रणाली को दर्शाता है। इस अवसर पर अधिकारियों ने कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। कंपनी ने भविष्य में और अधिक आधुनिक तकनीकों तथा वैश्विक गुणवत्ता मानकों के साथ उत्पादन बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने इस उपलब्धि को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा करते हुए इसे "इन्क्रेडिबल इंडियन सक्सेस स्टोरी" बताया। कंपनी के अनुसार यह सफलता नवाचार, ग्राहकों के विश्वास और उसके लोकप्रिय ब्रांड अभियान "जीतने का दम" की सोच का परिणाम है। कंपनी ने कहा कि 20 लाख ट्रैक्टर उत्पादन का यह मुकाम उसकी मजबूत विनिर्माण क्षमता, आधुनिक तकनीक और किसानों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसके ट्रैक्टर आज 150 से अधिक देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं और विभिन्न कृषि परिस्थितियों के अनुसार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में कर्मचारियों, डीलरों और ग्राहकों का विशेष धन्यवाद देते हुए कहा गया कि उनके सहयोग और विश्वास के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। कंपनी ने भविष्य में भी किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप नई तकनीकों वाले ट्रैक्टर विकसित करने का भरोसा जताया।
सोनालीका ट्रैक्टर्स आज भारत के प्रमुख ट्रैक्टर निर्माताओं में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर चुका है। कंपनी के ट्रैक्टर एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों सहित 150 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। वर्तमान में कंपनी 20 हॉर्सपावर से लेकर 120 हॉर्सपावर तक की क्षमता वाले ट्रैक्टरों का निर्माण करती है, जिनका उपयोग खेती के अलावा व्यावसायिक कार्यों में भी किया जाता है।
आधुनिक डिजाइन, ईंधन दक्षता और मजबूत इंजन के कारण कंपनी के उत्पाद घरेलू और विदेशी ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हैं। कंपनी लगातार अनुसंधान एवं विकास पर निवेश कर रही है ताकि बदलती कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप नए मॉडल बाजार में उतारे जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक विस्तार और निर्यात पर विशेष ध्यान देने की रणनीति ने सोनालीका को भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाया है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान सोनालीका ट्रैक्टर्स ने 53,661 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 23.1 प्रतिशत अधिक रही। इस शानदार प्रदर्शन के साथ कंपनी घरेलू ट्रैक्टर उद्योग में पहली तिमाही के दौरान सबसे अधिक मार्केट शेयर बढ़ाने वाली कंपनी बनकर उभरी। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि किसानों के बीच कंपनी के ट्रैक्टरों की मांग लगातार बढ़ रही है।
मजबूत उत्पाद गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, बेहतर सर्विस नेटवर्क और ग्राहकों के विश्वास ने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। होशियारपुर प्लांट में 20 लाख ट्रैक्टर उत्पादन की उपलब्धि इस बढ़ते विश्वास का प्रतीक मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि आने वाले वर्षों में वह नई तकनीकों, टिकाऊ उत्पादों और बेहतर ग्राहक सेवाओं के माध्यम से भारतीय कृषि क्षेत्र के विकास में अपना योगदान और मजबूत करेगी।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्न: सोनालीका ट्रैक्टर्स ने 20 लाखवां ट्रैक्टर किस प्लांट में बनाया है ?
उत्तर: पंजाब के होशियारपुर स्थित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 20 लाखवां ट्रैक्टर तैयार किया गया।
प्रश्न: सोनालीका ने अपना संचालन किस वर्ष शुरू किया था ?
उत्तर: कंपनी ने वर्ष 1996 में किसानों के लिए आधुनिक ट्रैक्टर निर्माण की शुरुआत की थी।
प्रश्न: सोनालीका के ट्रैक्टर कितने देशों में उपलब्ध हैं ?
उत्तर: कंपनी के ट्रैक्टर वर्तमान में 150 से अधिक देशों में निर्यात और उपयोग किए जाते हैं।
प्रश्न: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी ने कितने ट्रैक्टर बेचे ?
उत्तर: अप्रैल-जून 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी ने 53,661 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की।
प्रश्न: कंपनी ने इस उपलब्धि को किस नाम से संबोधित किया ?
उत्तर: कंपनी ने सोशल मीडिया पर इसे "इन्क्रेडिबल इंडियन सक्सेस स्टोरी" बताते हुए किसानों के भरोसे और नवाचार की सफलता कहा।
भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए जून 2026 का महीना काफी उत्साहजनक रहा। घरेलू बाजार में ट्रैक्टरों की कुल बिक्री 1,00,818 यूनिट रही, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 80,456 यूनिट था। यानी इस वर्ष ट्रैक्टर बिक्री में करीब 25 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखने को मिली।
अच्छी मानसून की उम्मीद, खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी, किसानों की बढ़ती आय और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। ट्रैक्टर कंपनियों ने भी नई तकनीक और बेहतर फीचर्स वाले मॉडल बाजार में उतारकर किसानों का भरोसा मजबूत किया है।
जून 2026 में महिंद्रा एंड महिंद्रा (ट्रैक्टर डिवीजन) ने सबसे अधिक 24,327 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 24.13 प्रतिशत रही, जबकि जून 2025 में यह 21.77 प्रतिशत थी। पिछले वर्ष कंपनी ने 17,518 ट्रैक्टर बेचे थे।
इस तरह महिंद्रा ने बिक्री और बाजार हिस्सेदारी दोनों में शानदार बढ़त हासिल की। ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत नेटवर्क, भरोसेमंद इंजन, बेहतर माइलेज और किसानों की पसंद के अनुरूप मॉडल कंपनी की सफलता के प्रमुख कारण रहे।
महिंद्रा समूह का स्वराज डिवीजन भी लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। जून 2026 में स्वराज ने 18,860 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 14,292 यूनिट था। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 18.71 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष 17.76 प्रतिशत थी।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्वराज ट्रैक्टरों की मजबूत पकड़ बनी हुई है। किसानों के बीच इसकी टिकाऊ गुणवत्ता और कम रखरखाव लागत इसे लोकप्रिय बनाती है।
सोनालिका ब्रांड की निर्माता इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड ने जून 2026 में 13,184 ट्रैक्टर बेचे। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 13.08 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष यह 12.97 प्रतिशत थी। जून 2025 में कंपनी ने 10,432 ट्रैक्टरों की बिक्री की थी।
घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात में मजबूत पकड़ और लगातार नए मॉडलों की लॉन्चिंग ने कंपनी की बिक्री को गति दी है। किसानों के बीच इसकी आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रदर्शन वाले ट्रैक्टरों की मांग लगातार बढ़ रही है।
ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (TAFE) ने जून 2026 में 12,069 ट्रैक्टर बेचे। हालांकि कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 11.97 प्रतिशत रही, जो जून 2025 के 12.20 प्रतिशत से थोड़ी कम है। पिछले वर्ष कंपनी ने 9,816 ट्रैक्टरों की बिक्री की थी।
बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद अन्य कंपनियों की तुलना में तेजी कम रहने से बाजार हिस्सेदारी में मामूली गिरावट दर्ज की गई। फिर भी मैसी फर्ग्यूसन और आइशर जैसे लोकप्रिय ब्रांडों के कारण कंपनी किसानों के बीच मजबूत पहचान बनाए हुए है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के एग्री मशीनरी ग्रुप ने जून 2026 में 10,371 ट्रैक्टरों की बिक्री की। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 10.29 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष यह 10.50 प्रतिशत थी। जून 2025 में कंपनी ने 8,449 ट्रैक्टर बेचे थे।
बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी के बावजूद कुल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण हिस्सेदारी में हल्की कमी आई। कंपनी आधुनिक तकनीक, मजबूत इंजन और प्रीमियम गुणवत्ता वाले ट्रैक्टरों के दम पर अपनी स्थिति बनाए हुए है।
जॉन डियर इंडिया ने जून 2026 में 7,165 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि जून 2025 में यह 6,178 यूनिट थी। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 7.11 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष 7.68 प्रतिशत थी। दूसरी ओर आइशर ट्रैक्टर्स ने 6,219 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले वर्ष 4,860 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई थी।
आइशर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 6.17 प्रतिशत हो गई, जो जून 2025 में 6.04 प्रतिशत थी। दोनों कंपनियां मध्यम और छोटे किसानों के लिए भरोसेमंद विकल्प के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं।
सीएनएच इंडस्ट्रियल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने जून 2026 में 4,667 ट्रैक्टरों की बिक्री की। पिछले वर्ष जून में कंपनी ने 3,468 ट्रैक्टर बेचे थे। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 4.63 प्रतिशत रही, जो जून 2025 के 4.31 प्रतिशत से अधिक है।
न्यू हॉलैंड जैसे लोकप्रिय ब्रांड के दम पर कंपनी लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। आधुनिक तकनीक और बेहतर ईंधन दक्षता वाले ट्रैक्टर किसानों को आकर्षित कर रहे हैं।
अन्य सभी ट्रैक्टर कंपनियों की संयुक्त बिक्री जून 2026 में 3,956 यूनिट रही, जबकि जून 2025 में यह 5,443 यूनिट थी। इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घटकर 3.92 प्रतिशत रह गई, जो पिछले वर्ष 6.77 प्रतिशत थी।
इससे स्पष्ट है कि बाजार धीरे-धीरे बड़ी और स्थापित कंपनियों के पक्ष में केंद्रित होता जा रहा है। मजबूत डीलर नेटवर्क, बेहतर आफ्टर सेल्स सर्विस और आधुनिक तकनीक के कारण प्रमुख कंपनियां छोटे ब्रांडों पर बढ़त बना रही हैं।
जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ट्रैक्टर उद्योग लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। यदि मानसून सामान्य रहता है, खरीफ और रबी दोनों सीजन में अच्छी खेती होती है तथा सरकार कृषि यंत्रीकरण, सब्सिडी और किसान सहायता योजनाओं को जारी रखती है, तो आने वाले महीनों में ट्रैक्टर बिक्री में और वृद्धि देखने को मिल सकती है।
महिंद्रा समूह फिलहाल बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है, जबकि इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स, टाफे, एस्कॉर्ट्स कुबोटा, जॉन डियर, आइशर और सीएनएच जैसी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा को लगातार मजबूत बना रही हैं। कुल मिलाकर जून 2026 के आंकड़े भारतीय कृषि क्षेत्र में बढ़ते मशीनीकरण और किसानों के बढ़ते निवेश का सकारात्मक संकेत देते हैं।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
भारत की अग्रणी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी सोनालीका ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया बिक्री रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने अपने लोकप्रिय ब्रांड सोनालीका और सोलिस के माध्यम से कुल 53,661 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की है। यह आंकड़ा कंपनी के इतिहास में किसी भी पहली तिमाही के दौरान अब तक की सबसे अधिक बिक्री है।
केवल तीन महीनों में 50 हजार से अधिक ट्रैक्टर बेचकर कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय किसानों के बीच उसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इस उपलब्धि के साथ सोनालीका ने न केवल अपनी बिक्री में नया कीर्तिमान बनाया, बल्कि भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में अपनी मजबूत स्थिति को भी और सुदृढ़ किया है। कंपनी का यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब कृषि क्षेत्र में आधुनिक मशीनों की मांग लगातार बढ़ रही है और किसान बेहतर तकनीक वाले ट्रैक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोनालीका ने पहली तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 23.1 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है, जो पूरे ट्रैक्टर उद्योग की अनुमानित 18.7 प्रतिशत वृद्धि से काफी अधिक है। यह अंतर दर्शाता है कि कंपनी की विकास गति उद्योग की औसत रफ्तार से कहीं आगे है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता कंपनी की मजबूत उत्पाद रणनीति, आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए ट्रैक्टरों का परिणाम है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मशीनीकरण तेजी से बढ़ रहा है और किसान ऐसे ट्रैक्टरों की तलाश में हैं जो कम ईंधन खर्च में अधिक कार्यक्षमता प्रदान करें। सोनालीका ने इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों में लगातार सुधार किया है, जिसका सीधा असर बिक्री के आंकड़ों में देखने को मिला है। कंपनी की यह उपलब्धि आने वाले समय में उसके लिए और अधिक बाजार अवसर भी तैयार कर सकती है।
पहली तिमाही के दौरान सोनालीका घरेलू ट्रैक्टर बाजार में अपना मार्केट शेयर बढ़ाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बनकर उभरी है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय किसानों का भरोसा कंपनी पर लगातार मजबूत हो रहा है। प्रतिस्पर्धी बाजार में किसी कंपनी के लिए बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना आसान नहीं होता, लेकिन सोनालीका ने बेहतर उत्पाद गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमतों और मजबूत बिक्री-पश्चात सेवाओं के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
कंपनी का विस्तृत डीलर नेटवर्क, आसान स्पेयर पार्ट्स उपलब्धता और तेज सर्विस सपोर्ट किसानों को बेहतर अनुभव प्रदान कर रहा है। यही कारण है कि नए ग्राहक भी तेजी से सोनालीका से जुड़ रहे हैं। बढ़ती बाजार हिस्सेदारी यह भी दर्शाती है कि कंपनी केवल बिक्री बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहकों के लंबे समय तक विश्वास को भी मजबूत करने में सफल रही है।
सोनालीका की सफलता के पीछे किसानों का बढ़ता विश्वास सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। कंपनी लंबे समय से ऐसे ट्रैक्टर विकसित कर रही है जो भारतीय खेती की परिस्थितियों के अनुरूप हों और कम लागत में अधिक उत्पादकता प्रदान करें। मजबूत इंजन, बेहतर हाइड्रोलिक क्षमता, ईंधन की बचत, आरामदायक ड्राइविंग और आधुनिक फीचर्स जैसे गुणों ने कंपनी के ट्रैक्टरों को किसानों की पहली पसंद बना दिया है।
इसके अलावा कंपनी लगातार अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश कर नई तकनीकों को अपने उत्पादों में शामिल कर रही है। कृषि कार्यों में दक्षता बढ़ाने वाले इन आधुनिक ट्रैक्टरों की मांग छोटे, मध्यम और बड़े किसानों के बीच तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि कंपनी की बिक्री लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है और उसकी बाजार स्थिति पहले से अधिक मजबूत होती जा रही है।
इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (आईटीएल) के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर रमन मित्तल ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए अपने आधिकारिक लिंक्डइन अकाउंट के माध्यम से किसानों, ग्राहकों और कंपनी की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कंपनी का मुख्य उद्देश्य हमेशा से किसानों के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस, विश्वसनीय और टिकाऊ ट्रैक्टर उपलब्ध कराना रहा है।
उनके अनुसार ग्राहकों का भरोसा, कर्मचारियों की मेहनत और नवाचार आधारित रणनीति की बदौलत कंपनी पहली तिमाही में अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ने में सफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी कंपनी किसानों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए उत्पाद और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराती रहेगी। रमन मित्तल के अनुसार किसानों का विश्वास ही कंपनी की सबसे बड़ी पूंजी है और यही विश्वास कंपनी को निरंतर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
पहली तिमाही में मिली रिकॉर्ड सफलता के बाद कंपनी अब अपने विस्तार कार्यक्रमों को और तेज करने की तैयारी कर रही है। सोनालीका का लक्ष्य देशभर में अपने डीलरशिप नेटवर्क को मजबूत बनाना, ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सेवा पहुंचाना और बिक्री के बाद मिलने वाली सुविधाओं को और अधिक प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही कंपनी किसानों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए ट्रैक्टर मॉडल भी बाजार में उतारने की योजना बना रही है।
आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रदर्शन और अधिक ईंधन दक्षता वाले ट्रैक्टरों पर विशेष जोर दिया जाएगा। कंपनी की ब्रांड टैगलाइन "बड़ा दम, बड़ा कदम" उसकी इसी सोच को दर्शाती है। रिकॉर्ड बिक्री से प्राप्त सकारात्मक परिणाम भविष्य में अनुसंधान, उत्पादन क्षमता और नए बाजारों में विस्तार के लिए भी कंपनी को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेंगे।
सोनालीका के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि कंपनी ट्रैक्टर उद्योग में अपने 30 वर्ष पूरे कर रही है। तीन दशकों की इस यात्रा में कंपनी ने भारतीय कृषि क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप लगातार नए उत्पाद विकसित किए हैं और किसानों का विश्वास जीता है। पहली तिमाही में दर्ज की गई रिकॉर्ड बिक्री और उद्योग से बेहतर वृद्धि दर इस बात का प्रमाण है कि कंपनी आज भी नवाचार, गुणवत्ता और ग्राहक संतुष्टि के क्षेत्र में अग्रणी बनी हुई है।
ताजा बिक्री आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय किसानों का भरोसा आने वाले वर्षों में भी सोनालीका पर मजबूत बना रहेगा। यदि आगामी तिमाहियों में भी कंपनी इसी गति से प्रदर्शन जारी रखती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 उसके इतिहास का अब तक का सबसे सफल वर्ष साबित हो सकता है। मजबूत तकनीक, व्यापक नेटवर्क और किसानों के प्रति समर्पित दृष्टिकोण के साथ सोनालीका भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में अपनी अग्रणी पहचान को और अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स लिमिटेड ने जून 2026 के दौरान संतुलित प्रदर्शन करते हुए कुल बिक्री में 3.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। कंपनी ने जून 2026 में कुल 8,107 यूनिट्स की बिक्री की, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 7,869 यूनिट्स था। इस वृद्धि का मुख्य कारण पावर वीडर की मजबूत मांग और पावर टिलर की स्थिर बिक्री रही, जिसने ट्रैक्टर बिक्री में आई गिरावट की भरपाई कर दी।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण की मांग लगातार बढ़ रही है और किसान आधुनिक कृषि उपकरणों को तेजी से अपना रहे हैं। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के बीच कॉम्पैक्ट कृषि मशीनों की लोकप्रियता बढ़ने से कंपनी को लाभ मिला है। विविध उत्पाद पोर्टफोलियो के कारण वीएसटी बाजार की बदलती परिस्थितियों में भी सकारात्मक वृद्धि बनाए रखने में सफल रही।
जून 2026 के दौरान भी पावर टिलर कंपनी का सबसे बड़ा उत्पाद वर्ग बना रहा। इस अवधि में वीएसटी ने 6,671 पावर टिलर बेचे, जबकि पिछले वर्ष जून 2025 में यह संख्या 6,651 यूनिट्स थी। इस प्रकार कंपनी ने इस श्रेणी में 0.3 प्रतिशत की मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। भले ही वृद्धि सीमित रही हो, लेकिन यह बताती है कि पावर टिलर की मांग लगातार बनी हुई है।
भारत के उन राज्यों में, जहां छोटे आकार की कृषि जोतें अधिक हैं, वहां पावर टिलर किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। कम ईंधन खपत, कम रखरखाव खर्च और कई कृषि कार्यों में उपयोग होने की क्षमता के कारण इनकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। वीएसटी इस क्षेत्र में वर्षों से अग्रणी कंपनियों में शामिल है और मजबूत डीलर नेटवर्क, बेहतर तकनीक तथा भरोसेमंद आफ्टर-सेल्स सर्विस के कारण उसने अपनी बाजार हिस्सेदारी को स्थिर बनाए रखा है।
जून 2026 के दौरान ट्रैक्टर सेगमेंट में कंपनी को कुछ दबाव का सामना करना पड़ा। कंपनी ने इस महीने 435 ट्रैक्टर बेचे, जबकि जून 2025 में यह संख्या 498 यूनिट्स थी। इस प्रकार ट्रैक्टर बिक्री में 12.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैक्टर बाजार में मांग कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें मानसून की स्थिति, कृषि आय, सरकारी योजनाएं, ग्रामीण वित्तपोषण तथा किसानों के खरीद निर्णय शामिल हैं।
कई बार किसान बेहतर बारिश या फसल की स्थिति का इंतजार करते हुए ट्रैक्टर खरीद को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। हालांकि जून महीने में गिरावट देखने को मिली, लेकिन कंपनी के कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर छोटे किसानों, बागवानी और विशेष कृषि कार्यों के लिए आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं। इसलिए एक महीने की कमजोरी को दीर्घकालिक रुझान नहीं माना जा सकता।
जून 2026 में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन पावर वीडर श्रेणी का रहा। कंपनी ने इस दौरान 1,001 पावर वीडर बेचे, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 720 यूनिट्स था। इस प्रकार इस श्रेणी में 39.0 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई। कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी और बढ़ती श्रम लागत के कारण किसान अब खरपतवार नियंत्रण के लिए आधुनिक मशीनों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
पावर वीडर न केवल समय की बचत करते हैं बल्कि खेती की लागत को भी कम करते हैं और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं। सरकार द्वारा कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं और किसानों के बीच जागरूकता बढ़ने का भी इस सेगमेंट की मांग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वीएसटी ने इस क्षेत्र में नई तकनीक और बेहतर प्रदर्शन वाले उत्पाद पेश कर अपनी स्थिति और मजबूत की है।
जून 2026 के बिक्री आंकड़े यह साबित करते हैं कि कंपनी का विविध उत्पाद पोर्टफोलियो उसकी सबसे बड़ी ताकत है। जहां ट्रैक्टर बिक्री में गिरावट दर्ज हुई, वहीं पावर टिलर की स्थिर मांग और पावर वीडर की तेज वृद्धि ने कुल बिक्री को सकारात्मक बनाए रखा। कृषि उपकरण उद्योग में मांग मौसम, फसल उत्पादन, सरकारी नीतियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है।
ऐसे में जिन कंपनियों के पास विभिन्न प्रकार के उत्पाद होते हैं, वे बाजार के उतार-चढ़ाव का बेहतर तरीके से सामना कर पाती हैं। वीएसटी ने छोटे और मध्यम किसानों की जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पादों का विस्तार किया है, जिससे वह भारतीय कृषि मशीनीकरण के बढ़ते अवसरों का लाभ उठा रही है।
सिर्फ जून महीने ही नहीं बल्कि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत भी वीएसटी के लिए सकारात्मक रही। जून 2026 तक की संचयी बिक्री के आंकड़ों के अनुसार कंपनी ने कुल 18,741 यूनिट्स की बिक्री की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 15,304 यूनिट्स था। इस प्रकार कंपनी ने 22.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की।
पावर टिलर की बिक्री 13,801 यूनिट्स रही, जो पिछले वर्ष की 11,701 यूनिट्स की तुलना में 17.9 प्रतिशत अधिक है। वहीं ट्रैक्टर बिक्री लगभग स्थिर रही। कंपनी ने वर्ष की शुरुआत से जून तक 1,260 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,254 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। यह 0.5 प्रतिशत की मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि को दर्शाता है।
वर्ष-दर-वर्ष आधार पर भी सबसे अधिक वृद्धि पावर वीडर श्रेणी में दर्ज की गई। जून 2026 तक कंपनी ने 3,680 पावर वीडर बेचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 2,349 यूनिट्स थी। इस प्रकार इस श्रेणी में 56.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय किसान तेजी से आधुनिक कृषि उपकरणों को अपना रहे हैं।
बढ़ती श्रम लागत, समय की बचत और बेहतर उत्पादन की आवश्यकता किसानों को मशीनीकरण की ओर प्रेरित कर रही है। साथ ही सरकारी सहायता योजनाएं, आसान फाइनेंसिंग और तकनीकी जागरूकता भी इस वृद्धि में योगदान दे रही हैं। वीएसटी ने अपनी मजबूत उत्पाद श्रृंखला और लगातार नवाचार के दम पर इस तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है।
1911 में स्वर्गीय वी.एस. थिरुवेंगदास्वामी मुदलियार द्वारा स्थापित वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स लिमिटेड भारत की सबसे पुरानी ऑटोमोबाइल एवं कृषि मशीनरी कंपनियों में से एक है। शुरुआत में कंपनी पेट्रोलियम उत्पादों और ऑटोमोबाइल वितरण के व्यवसाय से जुड़ी थी, लेकिन समय के साथ उसने कृषि मशीनीकरण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। आज वीएसटी देश में पावर टिलर, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर, पावर वीडर और अन्य कृषि उपकरणों की प्रमुख निर्माता कंपनियों में शामिल है।
कंपनी विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उत्पाद विकसित करती है। अनुसंधान एवं विकास, नई तकनीकों, मजबूत विनिर्माण क्षमता और विस्तृत डीलर नेटवर्क के माध्यम से कंपनी लगातार अपनी बाजार स्थिति मजबूत कर रही है। जून 2026 के बिक्री आंकड़े और वित्त वर्ष की शुरुआत में दर्ज हुई मजबूत वृद्धि इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में भी वीएसटी भारतीय कृषि मशीनीकरण उद्योग में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ती रहेगी।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
भारत की अग्रणी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस (FEB) ने जून 2026 के बिक्री आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी ने इस महीने घरेलू बाजार में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 58,177 ट्रैक्टर बेचे, जो जून 2025 में बिके 51,769 ट्रैक्टरों की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक हैं। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टरों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
खेती के मशीनीकरण, किसानों की बढ़ती आय, सरकारी योजनाओं और खरीफ सीजन की तैयारियों ने ट्रैक्टर बिक्री को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिंद्रा लंबे समय से भारतीय ट्रैक्टर बाजार में अग्रणी कंपनी रही है और जून 2026 के आंकड़े एक बार फिर उसके मजबूत बाजार प्रदर्शन को साबित करते हैं। घरेलू बाजार में यह दो अंकों की वृद्धि कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत है और आने वाले महीनों में भी मांग मजबूत रहने की संभावना जताई जा रही है।
महिंद्रा की घरेलू बिक्री में 12% प्रतिशत की वृद्धि कई सकारात्मक कारकों का परिणाम मानी जा रही है। जून का महीना खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी का समय होता है, जिसके कारण किसान नए ट्रैक्टर और कृषि उपकरण खरीदना पसंद करते हैं। मानसून की शुरुआत के साथ खेतों में जुताई, बुवाई और अन्य कृषि कार्य तेज हो जाते हैं, जिससे ट्रैक्टरों की मांग बढ़ जाती है।
इसके अलावा सरकार की कृषि सहायता योजनाएं, आसान फाइनेंस विकल्प और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता निवेश भी ट्रैक्टर खरीद को बढ़ावा दे रहे हैं। महिंद्रा का व्यापक डीलर नेटवर्क, भरोसेमंद आफ्टर-सेल्स सर्विस और विभिन्न हॉर्सपावर श्रेणियों में उपलब्ध ट्रैक्टर किसानों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं। यही कारण है कि कंपनी लगातार बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और जून 2026 में भी उल्लेखनीय बिक्री दर्ज करने में सफल रही।
महिंद्रा ने जून 2026 में केवल घरेलू बाजार में ही नहीं बल्कि कुल ट्रैक्टर बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। कंपनी की कुल बिक्री (घरेलू + निर्यात) इस महीने 59,935 यूनिट रही, जबकि पिछले वर्ष जून 2025 में यह आंकड़ा 53,392 यूनिट था। यानी कुल बिक्री में भी 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं निर्यात के मोर्चे पर कंपनी ने 1,758 ट्रैक्टर विदेशों में भेजे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,623 ट्रैक्टर निर्यात किए गए थे।
इस प्रकार निर्यात में 8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि देखने को मिली। यह दर्शाता है कि महिंद्रा के ट्रैक्टरों की मांग केवल भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी लगातार बढ़ रही है। बेहतर गुणवत्ता, टिकाऊ तकनीक और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण महिंद्रा वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष वीजय नाकरा ने जून 2026 के बिक्री आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी ने घरेलू बाजार में 58,177 ट्रैक्टरों की बिक्री कर पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हालांकि एल नीनो (El Niño) की संभावित परिस्थितियों का पूरा प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सरकार द्वारा उर्वरक सब्सिडी को जारी रखना और स्थानीय स्तर पर किसानों के लिए लागू किए जा रहे विशेष सहायता कार्यक्रम जोखिम को काफी हद तक कम करने में मदद करेंगे।
उनके अनुसार इन सरकारी प्रयासों से खरीफ सीजन पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने जून 2026 में निर्यात बाजारों में 1,758 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक हैं। उनका मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में लगातार वृद्धि आने वाले महीनों में भी कंपनी के प्रदर्शन को सकारात्मक बनाए रखेगी।
जून 2026 के मासिक आंकड़ों के साथ-साथ वित्त वर्ष 2027 की संचयी बिक्री भी काफी उत्साहजनक रही। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में कंपनी ने घरेलू बाजार में 1,52,426 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह संख्या 1,29,199 यूनिट थी। इस प्रकार संचयी घरेलू बिक्री में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं निर्यात की बात करें तो कंपनी ने इस अवधि में 5,615 ट्रैक्टर विदेशों में भेजे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 4,890 यूनिट थी। यानी संचयी निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कुल मिलाकर अप्रैल से जून 2026 के दौरान महिंद्रा की कुल ट्रैक्टर बिक्री 1,58,041 यूनिट रही, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 1,34,089 यूनिट थी। कुल संचयी बिक्री में भी 18 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि कंपनी की बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाती है।
महिंद्रा का मानना है कि ट्रैक्टर बाजार की मजबूती के पीछे कई सकारात्मक आर्थिक और कृषि संबंधी कारक काम कर रहे हैं। सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही उर्वरक सब्सिडी, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि निवेश को बढ़ावा देने वाली योजनाएं तथा विभिन्न राज्यों में किसानों के लिए लागू विशेष सहायता कार्यक्रम ट्रैक्टर बिक्री को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
इसके अलावा खरीफ सीजन की शुरुआत के दौरान किसान नई कृषि मशीनरी में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे ट्रैक्टरों की मांग बढ़ जाती है। हालांकि एल नीनो जैसी मौसम संबंधी चुनौतियां कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन समय पर सरकारी हस्तक्षेप किसानों की आय और खेती की गतिविधियों को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसी वजह से उद्योग विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में भी ट्रैक्टर बाजार सकारात्मक रुख बनाए रखेगा।
महिंद्रा समूह की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और आज यह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में से एक है। समूह के 3.24 लाख से अधिक कर्मचारी 100 से ज्यादा देशों में कार्यरत हैं। महिंद्रा भारत में फार्म इक्विपमेंट, यूटिलिटी व्हीकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अग्रणी स्थान रखता है।
ट्रैक्टर उत्पादन के मामले में कंपनी वॉल्यूम के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता मानी जाती है। इसके अलावा कंपनी की मजबूत उपस्थिति नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी है। वर्षों से गुणवत्ता, विश्वसनीयता और तकनीकी नवाचार पर ध्यान देने के कारण महिंद्रा ने भारतीय और वैश्विक बाजारों में मजबूत प्रतिष्ठा हासिल की है।
महिंद्रा समूह का लक्ष्य केवल व्यावसायिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और बेहतर प्रशासन (ESG) के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व स्थापित करना चाहता है।
कंपनी ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने, शहरी जीवन को बेहतर बनाने और समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। जून 2026 के मजबूत बिक्री आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण की गति लगातार बढ़ रही है और किसान आधुनिक तकनीक वाले ट्रैक्टरों को तेजी से अपना रहे हैं।
यदि आगामी महीनों में मानसून सामान्य रहता है और सरकारी समर्थन जारी रहता है, तो ट्रैक्टर उद्योग में मांग और अधिक मजबूत हो सकती है। ऐसे में महिंद्रा की मजबूत उत्पाद श्रृंखला, व्यापक सर्विस नेटवर्क और किसानों के बीच बना भरोसा कंपनी को भविष्य में भी विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
फरीदाबाद, 1 जुलाई 2026: भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनियों में शामिल Escorts Kubota Limited (EKL) ने जून 2026 के लिए अपने एग्री मशीनरी बिजनेस के ट्रैक्टर बिक्री के आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी ने जून 2026 के दौरान कुल 13,695 ट्रैक्टर बेचे, जबकि जून 2025 में यह संख्या 11,498 ट्रैक्टर थी। इस प्रकार कंपनी ने सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टरों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और कंपनी का बाजार में प्रभाव भी बढ़ रहा है। बेहतर डीलर नेटवर्क, उत्पादों की विश्वसनीयता तथा किसानों के बीच बढ़ते विश्वास ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कंपनी का मानना है कि आने वाले महीनों में भी कृषि गतिविधियों के बढ़ने के साथ मांग में सकारात्मक रुझान बना रह सकता है।
जून 2026 में Escorts Kubota की घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 13,172 यूनिट रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने 10,997 ट्रैक्टर बेचे थे। इस प्रकार घरेलू बिक्री में 19.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी के अनुसार यह वृद्धि थोक (Wholesale) और खुदरा (Retail) दोनों बाजारों में मजबूत प्रदर्शन के कारण संभव हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मशीनरी की मांग में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। किसानों द्वारा खेती की तैयारी, सरकारी योजनाओं का समर्थन तथा वित्तीय संस्थानों से ऋण उपलब्धता ने भी ट्रैक्टर बिक्री को गति दी है। इसके अलावा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी ट्रैक्टरों की मांग बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है।
कंपनी ने बताया कि देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है। हालांकि इस वर्ष मानसून की शुरुआत सामान्य से कुछ देर से हुई है, जिससे कुछ राज्यों में बुवाई की गति प्रभावित हुई है। इसके बावजूद जलाशयों में उपलब्ध पर्याप्त जल ने कृषि गतिविधियों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का मनोबल फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून सामान्य रहता है तो कृषि कार्यों में तेजी आने की संभावना है, जिससे ट्रैक्टरों की मांग को और बल मिल सकता है। कंपनी का मानना है कि मानसून की स्थिति आगामी महीनों के कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक रहेगी।
एस्कॉर्टस कुबोटा ने अपने बयान में यह भी कहा कि वर्तमान में एल-नीनो (El Niño) की संभावित परिस्थितियां और मानसून की कमी भविष्य के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो खरीफ की बुवाई और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा खेती में उपयोग होने वाले उर्वरक, डीजल, श्रम और अन्य इनपुट लागत में वृद्धि भी किसानों के खर्च को बढ़ा रही है।
इन परिस्थितियों के कारण आने वाली तिमाहियों में ट्रैक्टर बाजार की वृद्धि की गति कुछ धीमी हो सकती है। फिर भी कंपनी का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है और कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक मांग बनी रहेगी।
घरेलू बाजार के साथ-साथ कंपनी के निर्यात कारोबार में भी वृद्धि दर्ज की गई। जून 2026 के दौरान कंपनी ने 523 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि जून 2025 में यह संख्या 501 ट्रैक्टर थी। इस प्रकार निर्यात बिक्री में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
हालांकि घरेलू बाजार की तुलना में यह वृद्धि सीमित रही, लेकिन वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा और विभिन्न देशों की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कंपनी लगातार नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने तथा उत्पाद पोर्टफोलियो को विस्तार देने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे भविष्य में निर्यात कारोबार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान कंपनी का कुल प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा। इस अवधि में घरेलू बाजार में 35,457 ट्रैक्टर बेचे गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह संख्या 28,848 थी। यानी घरेलू बिक्री में 22.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
कुल ट्रैक्टर बिक्री 36,862 यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की 30,581 यूनिट की तुलना में 20.5 प्रतिशत अधिक है। हालांकि निर्यात बिक्री पहली तिमाही में 1,405 ट्रैक्टर रही, जो पिछले वर्ष के 1,733 ट्रैक्टर की तुलना में 18.9 प्रतिशत कम रही। इसके बावजूद घरेलू बाजार की मजबूत मांग ने कुल बिक्री वृद्धि को सकारात्मक बनाए रखा।
कंपनी का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर बनी हुई है। कृषि गतिविधियों में निरंतर सुधार, किसानों की आय बढ़ाने वाली सरकारी योजनाएं, कृषि ऋण की उपलब्धता और कृषि मशीनीकरण की बढ़ती आवश्यकता भविष्य में ट्रैक्टर उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी महीनों में कारोबार की दिशा काफी हद तक मानसून की प्रगति, खरीफ फसलों की बुवाई की गति और कृषि लागत पर निर्भर करेगी।
यदि मौसम सामान्य रहता है तो ट्रैक्टर उद्योग में मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारत में कृषि मशीनीकरण का स्तर अभी भी विकसित देशों की तुलना में कम है, इसलिए इस क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
Escorts Kubota Limited भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक है, जिसे विनिर्माण क्षेत्र में लगभग आठ दशकों का अनुभव प्राप्त है। कंपनी का उद्देश्य "Spreading Prosperity & Impacting Lives" के विजन के साथ कृषि मशीनीकरण और निर्माण उपकरण क्षेत्र में आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है। कंपनी का व्यवसाय मुख्य रूप से Agri Machinery Business Division और Construction Equipment Business Division के माध्यम से संचालित होता है।
EKL लगातार नवाचार, उन्नत इंजीनियरिंग, लागत दक्षता और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का मानना है कि आधुनिक तकनीक, मजबूत वितरण नेटवर्क और किसानों के साथ दीर्घकालिक संबंध भविष्य में उसके विकास की सबसे बड़ी ताकत बने रहेंगे।
जून 2026 के बिक्री आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि कंपनी भारतीय कृषि क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपने व्यवसाय का सफलतापूर्वक विस्तार कर रही है और आने वाले वर्षों में भी विकास की नई ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए तैयार है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
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Farmer
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