भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां करोड़ों किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। खेती की बढ़ती लागत और गुणवत्तापूर्ण कृषि संसाधनों की आवश्यकता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर विभिन्न किसान हितैषी योजनाएं संचालित करती हैं। इन्हीं योजनाओं में फ्री बीज वितरण योजना एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस योजना के तहत पात्र किसानों को मुफ्त या अनुदानित दरों पर उन्नत और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों तक पहुंच प्रदान करना और खेती की लागत को कम करना है। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उपयोग से किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
फ्री बीज वितरण योजना का प्रमुख लक्ष्य किसानों को आधुनिक और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना है, ताकि वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। अक्सर छोटे और सीमांत किसानों के पास महंगे बीज खरीदने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं होते। ऐसे में सरकार की यह योजना उनके लिए एक बड़ी राहत साबित होती है।
सरकार चाहती है कि किसान पारंपरिक और कम उत्पादक बीजों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग करें। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी बढ़ता है। यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
फ्री बीज वितरण योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की फसलों के उन्नत बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार जैसी प्रमुख खाद्यान्न फसलें शामिल होती हैं। इसके अलावा दलहन फसलों जैसे चना, अरहर, मूंग और उड़द के बीज भी वितरित किए जाते हैं। तिलहन फसलों में सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी और मूंगफली के बीज उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
कई राज्यों में सब्जियों और बागवानी फसलों के उन्नत बीज भी इस योजना के अंतर्गत दिए जाते हैं। इन बीजों का चयन स्थानीय जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके।
फ्री बीज वितरण योजना का लाभ मुख्य रूप से छोटे, सीमांत और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को दिया जाता है। हालांकि पात्रता की शर्तें राज्य सरकारों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। सामान्यतः योजना का लाभ लेने के लिए किसान का संबंधित राज्य का निवासी होना आवश्यक है।
किसान के पास खेती योग्य भूमि का रिकॉर्ड होना चाहिए और उसका नाम भूमि अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए। कई राज्यों में किसान पंजीकरण भी अनिवार्य होता है। महिला किसानों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य विशेष श्रेणियों के किसानों को कई बार प्राथमिकता भी दी जाती है। पात्रता से संबंधित सटीक जानकारी स्थानीय कृषि विभाग से प्राप्त की जा सकती है।
फ्री बीज वितरण योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है, कि किसानों की खेती की लागत कम हो जाती है। बीज किसी भी फसल उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है और उच्च गुणवत्ता वाले बीज बेहतर अंकुरण तथा अधिक उत्पादन सुनिश्चित करते हैं। जब किसानों को मुफ्त या कम कीमत पर प्रमाणित बीज मिलते हैं, तो उन्हें निजी बाजार से महंगे बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्नत बीजों के उपयोग से रोगों और कीटों का प्रभाव भी कम हो सकता है। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में किसानों को अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलता है। कुल मिलाकर यह योजना किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करती है।
फ्री बीज वितरण योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। आमतौर पर आधार कार्ड, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और भूमि संबंधी दस्तावेज आवश्यक होते हैं। कई राज्यों में बैंक खाता विवरण और किसान पंजीकरण संख्या भी मांगी जाती है।
यदि किसान किसी विशेष श्रेणी जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या महिला किसान के रूप में आवेदन कर रहा है, तो संबंधित प्रमाण पत्र भी आवश्यक हो सकते हैं। आवेदन करने से पहले किसानों को अपने सभी दस्तावेज अपडेट और सत्यापित कर लेने चाहिए ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
फ्री बीज वितरण योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया राज्य के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन के लिए किसान संबंधित कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। वहां आवश्यक जानकारी भरने और दस्तावेज अपलोड करने के बाद आवेदन जमा किया जाता है।
ऑफलाइन आवेदन के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसानों को बीज वितरण की सूचना दी जाती है। कई राज्यों में बीज सीधे कृषि विभाग के केंद्रों से वितरित किए जाते हैं।
फ्री बीज वितरण योजना कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बढ़ती कृषि लागत के बीच यह योजना किसानों को राहत प्रदान करती है और उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करती है। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उपयोग से उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
इसके अलावा यह योजना खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रसार में भी योगदान देती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर कृषि विभाग की घोषणाओं पर नजर रखें और पात्र होने पर इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं। इससे वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकते हैं।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्न: फ्री बीज वितरण योजना क्या है ?
उत्तर: यह सरकारी योजना किसानों को उन्नत और गुणवत्तापूर्ण बीज निःशुल्क या रियायती दरों पर उपलब्ध कराती है।
प्रश्न: फ्री बीज वितरण योजना का लाभ कौन ले सकता है ?
उत्तर: राज्य के पात्र किसान, जिनके पास वैध किसान पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हों।
प्रश्न: योजना के लिए आवेदन कैसे करें ?
उत्तर: किसान कृषि विभाग की वेबसाइट, पोर्टल या नजदीकी कृषि कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न: आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं ?
उत्तर: आधार कार्ड, किसान पंजीकरण, भूमि रिकॉर्ड, बैंक खाता विवरण और मोबाइल नंबर आवश्यक होते हैं।
प्रश्न: योजना के तहत बीज कब और कैसे मिलते हैं ?
उत्तर: आवेदन स्वीकृत होने के बाद निर्धारित वितरण केंद्रों से किसानों को बीज उपलब्ध कराए जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना की 23वीं किस्त जारी कर देश के करोड़ों किसानों को बड़ी सौगात दी। प्रधानमंत्री ने एक क्लिक के माध्यम से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किसानों के खातों में सहायता राशि भेजी।
इस अवसर पर देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में कुल 18,880 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि हस्तांतरित की गई। योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी किसान को 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि यह राशि किसानों को खेती-किसानी से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद करेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती प्रदान करेगी।
23वीं किस्त ऐसे समय जारी की गई है जब देश के अधिकांश हिस्सों में खरीफ फसलों की तैयारी चल रही है। किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि आदानों की खरीद के लिए धन की आवश्यकता होती है। ऐसे में सरकार द्वारा दी गई यह सहायता राशि किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता खेती की लागत को कम करने और किसानों की नकदी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे किसान बेहतर तरीके से फसल की तैयारी कर सकते हैं और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की प्रमुख किसान कल्याण योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
हर चार महीने के अंतराल पर 2,000 रुपये की एक किस्त जारी की जाती है। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को मजबूत करना और उन्हें खेती के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ वर्षों में यह योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरी है।
23वीं किस्त जारी होने के बाद देशभर के किसानों के मोबाइल फोन पर बैंक खातों में राशि जमा होने के संदेश आने शुरू हो गए हैं। कई राज्यों के किसानों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत और बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच यह सहायता राशि उन्हें काफी राहत देती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस योजना का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। किसानों का मानना है कि नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता उन्हें खेती के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद करती है और आर्थिक दबाव को कम करती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त का लाभ बिहार के लगभग 1.08 करोड़ पंजीकृत किसानों को भी मिला है। राज्य के विभिन्न जिलों में किसानों के खातों में राशि पहुंचने के संदेश प्राप्त होने लगे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पात्र किसानों तक समय पर लाभ पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं।
किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के समय यह सहायता राशि उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री की खरीद के लिए यह धनराशि महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेगी और खेती की तैयारियों को गति देगी।
23वीं किस्त जारी होने के अवसर पर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार के अनुसार जिले के सभी प्रखंडों में किसानों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। किसानों ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा और योजना से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
इस दौरान अधिकारियों ने किसानों को योजना के लाभ, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही किसानों को ई-केवाईसी, आधार सत्यापन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने की सलाह दी गई ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
किसान घर बैठे अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर की मदद से आसानी से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में 23वीं किस्त की राशि पहुंची है या नहीं। इसके लिए उन्हें पीएम-किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां होमपेज पर मौजूद "Farmers Corner" सेक्शन में जाकर "Know Your Status" विकल्प पर क्लिक करना होगा।
इसके बाद किसान को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करना होगा। "Get Data" पर क्लिक करते ही स्क्रीन पर किस्त से संबंधित पूरी जानकारी दिखाई देगी। यहां किसान FTO Status, Payment Success और ट्रांजैक्शन से जुड़ी अन्य जानकारियां भी देख सकते हैं। इससे उन्हें यह पता चल जाएगा कि भुगतान सफलतापूर्वक उनके खाते में पहुंचा है या नहीं।
कई बार तकनीकी कारणों, अधूरी ई-केवाईसी या भूमि रिकॉर्ड में त्रुटियों के कारण किसानों की किस्त अटक सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को सबसे पहले अपनी आवेदन स्थिति की जांच करनी चाहिए। यदि "e-KYC" या "Land Seeding" के सामने "No" दिखाई देता है, तो उसे तुरंत अपडेट करना आवश्यक है। किसान कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), बैंक शाखा या ऑनलाइन माध्यम से ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
यदि भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी कोई समस्या हो तो संबंधित कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय-समय पर बैंक खाते, आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी की स्थिति की जांच करते रहें। विभाग का मानना है कि खरीफ सीजन के बीच जारी की गई यह किस्त किसानों के लिए बड़ी राहत है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सरकार ने भविष्य में भी किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ऐसी योजनाओं को जारी रखने का भरोसा दिया है।
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वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। मौसम के बदलते स्वरूप के कारण कभी अत्यधिक वर्षा तो कभी लंबे समय तक बारिश की कमी जैसी परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। इन दोनों स्थितियों का सीधा प्रभाव किसानों की फसलों और उनकी आय पर पड़ता है। विशेष रूप से खरीफ सीजन में मानसून की अनिश्चितता किसानों के लिए चिंता का विषय बनी रहती है।
अचानक होने वाली भारी बारिश खेतों में जलभराव की समस्या उत्पन्न कर देती है, जबकि कम वर्षा या सूखा फसलों के विकास को प्रभावित करता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान समय रहते वैज्ञानिक खेती और उचित प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं तो प्राकृतिक परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए जल प्रबंधन, फसल चयन, आधुनिक सिंचाई तकनीकों और मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करना आवश्यक है।
जब किसी क्षेत्र में लगातार और अत्यधिक बारिश होती है, तो खेतों में पानी जमा होने लगता है। यह स्थिति फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है। लंबे समय तक पानी भरा रहने से पौधों की जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधों का विकास रुक जाता है। ऐसे में किसानों को सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए।
खेतों के चारों ओर और बीच में नालियां बनाकर जल निकासी की व्यवस्था करना एक प्रभावी उपाय है। धान जैसी कुछ फसलें पानी सहन कर सकती हैं, लेकिन अधिकांश दलहनी, तिलहनी और सब्जी फसलें जलभराव को सहन नहीं कर पातीं। इसलिए ऐसी फसलों में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। जल निकासी की समय पर व्यवस्था करने से फसलों को बचाया जा सकता है और उत्पादन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
अत्यधिक वर्षा के बाद खेतों में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कई प्रकार के रोग और कीट तेजी से फैलने लगते हैं। फफूंदजनित रोग, पत्ती झुलसा, जड़ गलन और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के कीट भी फसलों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए किसानों को बारिश के बाद नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करना चाहिए।
यदि किसी पौधे में रोग या कीट के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए। यदि तेज बारिश या आंधी के कारण फसल गिर गई हो, तो उसे यथासंभव सीधा करने का प्रयास करना चाहिए। समय पर रोग और कीट नियंत्रण से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करना भी किसानों के लिए लाभकारी साबित होता है।
जब बारिश सामान्य से कम होती है या सूखे जैसी स्थिति बन जाती है, तब खेत में उपलब्ध नमी को लंबे समय तक बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। मिट्टी में नमी संरक्षण के लिए मल्चिंग तकनीक अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। इस तकनीक में फसल अवशेष, सूखी घास, पत्तियां या अन्य जैविक पदार्थ मिट्टी की सतह पर बिछाए जाते हैं, जिससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है और मिट्टी लंबे समय तक नम बनी रहती है।
इसके अलावा खेतों में खरपतवार नियंत्रण भी आवश्यक है क्योंकि खरपतवार मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों का उपयोग कर लेते हैं। किसान यदि समय पर निराई-गुड़ाई करें और नमी संरक्षण उपाय अपनाएं तो कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों को पर्याप्त नमी मिल सकती है। इससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में कमी की संभावना घट जाती है।
जिन क्षेत्रों में अक्सर सूखे या कम वर्षा की समस्या रहती है, वहां किसानों को फसल चयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसे क्षेत्रों में कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों का चयन करना लाभदायक रहता है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कई उन्नत किस्में सूखा सहन करने की क्षमता रखती हैं और सीमित जल उपलब्धता में भी अच्छा उत्पादन देती हैं।
बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द और कुछ तिलहनी फसलें कम पानी में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त किसान फसल विविधीकरण को भी अपनाकर जोखिम कम कर सकते हैं। यदि किसी एक फसल को मौसम के कारण नुकसान होता है, तो अन्य फसलें आय का स्रोत बनी रह सकती हैं। सही फसल और किस्म का चयन किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल खेती करने में सहायता प्रदान करता है।
पानी की कमी वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही हैं। ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती रहती है। इसी प्रकार स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली वर्षा की तरह पानी का छिड़काव करती है और कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव बनाती है।
इन तकनीकों से पानी की बचत के साथ-साथ उर्वरकों का भी बेहतर उपयोग किया जा सकता है। केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी भी प्रदान करती हैं। इसलिए किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने खेतों में आधुनिक सिंचाई प्रणालियां स्थापित करनी चाहिए, जिससे जल संकट की स्थिति में भी फसल उत्पादन बनाए रखा जा सके।
प्राकृतिक आपदाओं से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को मौसम पूर्वानुमान की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त करनी चाहिए। भारतीय मौसम विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग समय-समय पर किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी करते हैं। बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और कीट नियंत्रण जैसे निर्णय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर लेने से नुकसान की संभावना कम हो जाती है।
साथ ही किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराना चाहिए। भारी बारिश, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल नुकसान होने पर बीमा योजना आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जल निकासी, नमी संरक्षण, आधुनिक सिंचाई, मौसम आधारित निर्णय और फसल बीमा जैसे उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल और आय दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
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भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने मई 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 83,092 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज की। पिछले वर्ष मई 2025 में यह आंकड़ा 74,744 यूनिट्स था। इस तरह उद्योग ने साल-दर-साल आधार पर 11.16 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, बेहतर कृषि गतिविधियां और किसानों की बढ़ती खरीद क्षमता ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) द्वारा जारी मई 2026 की रिटेल बिक्री रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि देश के प्रमुख ट्रैक्टर निर्माताओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि छोटी कंपनियों को बाजार में हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड का ट्रैक्टर डिवीजन मई 2026 में भी भारतीय बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना रहा। कंपनी ने इस अवधि में 19,077 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि मई 2025 में यह संख्या 16,519 यूनिट्स थी। कंपनी ने 15.48 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की।
इसके साथ ही कंपनी का बाजार हिस्सा भी 22.10 प्रतिशत से बढ़कर 22.96 प्रतिशत हो गया। यह वृद्धि दर्शाती है कि किसानों के बीच महिंद्रा ट्रैक्टरों की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है और कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने में सफल रही है।
महिंद्रा समूह के स्वराज डिवीजन ने भी मई 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया। कंपनी ने 15,205 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 13,649 यूनिट्स था। इस तरह स्वराज ने 11.40 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की।
हालांकि इसके बाजार हिस्से में बहुत बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। कंपनी का मार्केट शेयर 18.26 प्रतिशत से मामूली बढ़कर 18.30 प्रतिशत हो गया। इससे साफ है कि स्वराज ने अपनी मजबूत ग्राहक आधार को बनाए रखते हुए स्थिर वृद्धि दर्ज की है।
इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (सोनालीका) ने भी मई 2026 में सकारात्मक प्रदर्शन किया। कंपनी ने कुल 11,120 ट्रैक्टर बेचे, जबकि मई 2025 में यह संख्या 9,865 यूनिट्स थी। इसके परिणामस्वरूप कंपनी ने 12.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
बाजार हिस्सेदारी की बात करें तो सोनालीका का शेयर 13.20 प्रतिशत से बढ़कर 13.38 प्रतिशत हो गया। कंपनी का लगातार बढ़ता प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वह देश के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है और किसानों के बीच उसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।
मई 2026 की FADA रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा TAFE लिमिटेड की रही। कंपनी ने पिछले वर्ष के 7,503 यूनिट्स के मुकाबले 10,659 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की। इसके साथ ही कंपनी ने 42.06 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हासिल की, जो प्रमुख ट्रैक्टर निर्माताओं में सबसे अधिक रही।
TAFE का मार्केट शेयर भी 10.04 प्रतिशत से बढ़कर 12.83 प्रतिशत हो गया। यानी कंपनी ने बाजार हिस्सेदारी में 2.79 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की, जो रिपोर्ट में किसी भी बड़े ब्रांड के लिए सबसे अधिक है। यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत रणनीति और बढ़ती ग्राहक मांग को दर्शाता है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने मई 2026 में कुल 9,539 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि मई 2025 में यह संख्या 8,172 यूनिट्स थी। कंपनी ने 16.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो उद्योग की औसत वृद्धि से काफी बेहतर रही। बाजार हिस्सेदारी भी 10.93 प्रतिशत से बढ़कर 11.48 प्रतिशत हो गई।
कंपनी ने 0.55 प्रतिशत का अतिरिक्त मार्केट शेयर हासिल किया। यह वृद्धि दर्शाती है कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा अपने उत्पाद पोर्टफोलियो और डीलर नेटवर्क के दम पर किसानों के बीच मजबूत पकड़ बना रही है।
जॉन डियर इंडिया ने मई 2026 में 6,039 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 5,900 यूनिट्स था। हालांकि कंपनी ने 2.35 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की, लेकिन इसका बाजार हिस्सा 7.89 प्रतिशत से घटकर 7.27 प्रतिशत रह गया। दूसरी ओर, आयशर ट्रैक्टर्स ने 4,922 यूनिट्स की बिक्री के साथ 10.60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, हालांकि उसका मार्केट शेयर मामूली रूप से घटकर 5.92 प्रतिशत रह गया।
वहीं CNH इंडस्ट्रियल (न्यू हॉलैंड) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 24.29 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की और बिक्री 3,103 यूनिट्स से बढ़कर 3,857 यूनिट्स तक पहुंच गई। कंपनी का बाजार हिस्सा भी 4.15 प्रतिशत से बढ़कर 4.64 प्रतिशत हो गया।
मई 2026 की रिपोर्ट में सबसे बड़ी गिरावट "अन्य" श्रेणी में देखने को मिली। इस श्रेणी की बिक्री मई 2025 के 5,583 यूनिट्स से घटकर केवल 2,674 यूनिट्स रह गई। इसके चलते 52.10 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई। बाजार हिस्सेदारी भी 7.47 प्रतिशत से घटकर केवल 3.22 प्रतिशत रह गई, जो 4.25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि बड़ी और स्थापित ट्रैक्टर कंपनियां लगातार बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं, जबकि छोटे ब्रांड प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते जा रहे हैं। कुल मिलाकर, मई 2026 भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए एक सकारात्मक महीना साबित हुआ, जहां मजबूत ग्रामीण मांग और कृषि क्षेत्र की गतिविधियों ने बिक्री को 83 हजार यूनिट्स के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालिका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्न: मई 2026 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग की कुल रिटेल बिक्री कितनी रही है ?
उत्तर: मई 2026 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग की कुल रिटेल बिक्री 83,092 यूनिट्स रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक थी।
प्रश्न: मई 2026 में सबसे ज्यादा ट्रैक्टर बिक्री किस कंपनी ने की है ?
उत्तर: महिंद्रा एंड महिंद्रा ट्रैक्टर डिवीजन ने 19,077 यूनिट्स की बिक्री के साथ बाजार में पहला स्थान बरकरार रखा।
प्रश्न: प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों में सबसे अधिक वृद्धि किसने दर्ज की है ?
उत्तर: TAFE लिमिटेड ने 42.06 प्रतिशत की सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की और बाजार हिस्सेदारी में भी बड़ा सुधार किया है।
प्रश्न: सोनालीका ट्रैक्टर्स का मई 2026 में प्रदर्शन कैसा रहा है ?
उत्तर: सोनालीका ने 11,120 ट्रैक्टर बेचे और 12.72 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ाई।
खेती की सफलता काफी हद तक सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर करती है। कई किसानों को आज भी बिजली कनेक्शन की कमी, बार-बार होने वाली बिजली कटौती और डीजल पंपों के बढ़ते खर्च के कारण सिंचाई संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने सौर सुजला योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे कम लागत में खेती कर सकें और सिंचाई के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर न रहें।
योजना के तहत किसानों को भारी सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि किसानों को बिजली बिल और डीजल खर्च से भी राहत मिलती है।
सरकार की यह पहल किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम मोखला निवासी किसान डोमार साहू सौर सुजला योजना के लाभार्थियों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनके खेत में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं थी, जिसके कारण खेती करना काफी कठिन था।
खासकर दूसरी फसल लेने में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। योजना के अंतर्गत उनके खेत में क्रेडा विभाग द्वारा सोलर पंप स्थापित किया गया, जिससे उनकी खेती में बड़ा बदलाव आया। डोमार साहू को इस योजना के तहत लगभग 2.73 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई, जबकि उन्हें केवल 15 हजार रुपये का अंशदान देना पड़ा।
उन्होंने बताया कि यदि वे बिजली कनेक्शन लेने का प्रयास करते, तो खेत तक लाइन पहुंचाने के लिए कई बिजली पोल लगाने पड़ते और इसमें भारी खर्च के साथ लंबा समय भी लगता। लेकिन सोलर पंप लगने के बाद उनकी सिंचाई व्यवस्था आसान हो गई और खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गई।
सौर सुजला योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी और किसान हितैषी योजना है, जिसका संचालन छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण यानी CREDA द्वारा किया जाता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना बिजली कटौती और डीजल खर्च की चिंता किए अपने खेतों की सिंचाई कर सकें।
सौर ऊर्जा एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जो पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। योजना के माध्यम से सरकार कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहती है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा उपलब्धता की समस्या को दूर करना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना भी इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है। सौर पंपों के उपयोग से किसान पूरे वर्ष सिंचाई कर सकते हैं, जिससे फसल उत्पादन और कृषि आय में वृद्धि होती है।
सौर सुजला योजना का लाभ केवल छत्तीसगढ़ राज्य के स्थायी किसानों को दिया जाता है। इसके लिए आवेदक के पास कृषि योग्य भूमि होना अनिवार्य है। योजना में प्राथमिकता उन किसानों को दी जाती है, जिनके खेतों तक बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं है या सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं।
इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, छोटे और सीमांत किसानों को विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाती है। सरकार का उद्देश्य उन किसानों तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का खर्च वहन नहीं कर सकते।
पात्र किसानों का चयन निर्धारित नियमों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है। इससे जरूरतमंद किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा प्राप्त होती है और उनकी खेती अधिक उत्पादक बनती है।
सौर सुजला योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसमें मिलने वाली आकर्षक सब्सिडी है। योजना के तहत किसानों को 3 एचपी और 5 एचपी क्षमता के सोलर पंप उपलब्ध कराए जाते हैं।
इन पंपों की लागत का अधिकांश हिस्सा सरकार वहन करती है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम हो जाता है। सामान्य वर्ग के किसानों को भी पर्याप्त सब्सिडी मिलती है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को अतिरिक्त रियायतें प्रदान की जाती हैं।
कई मामलों में किसानों को केवल 15 हजार से 25 हजार रुपये तक का अंशदान करना पड़ता है, जबकि लाखों रुपये की शेष राशि सरकार द्वारा दी जाती है।
यही कारण है कि आर्थिक रूप से कमजोर किसान भी आसानी से आधुनिक सोलर सिंचाई प्रणाली का लाभ उठा पा रहे हैं। यह सब्सिडी किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए किसान CREDA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। वहीं ऑफलाइन आवेदन के लिए जिला क्रेडा कार्यालय या संबंधित कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है
आवेदन करते समय किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं, जिनमें आधार कार्ड, भूमि स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की प्रति और पासपोर्ट आकार का फोटो शामिल है।
सभी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्र किसानों का चयन किया जाता है और उन्हें योजना के तहत सोलर पंप प्रदान किया जाता है। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
सौर सुजला योजना किसानों के लिए केवल एक सिंचाई योजना नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सोलर पंप लगने के बाद किसानों की सिंचाई लागत में उल्लेखनीय कमी आती है क्योंकि उन्हें बिजली बिल या डीजल पर खर्च नहीं करना पड़ता।
समय पर और पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध होने से फसल उत्पादन बढ़ता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। डोमार साहू जैसे अनेक किसानों ने इस योजना का लाभ लेकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली भविष्य की कृषि जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी योगदान दे रही है।
यही कारण है कि सौर सुजला योजना आज छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए विकास और समृद्धि का एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
भारतीय ट्रैक्टर उद्योग की प्रमुख कंपनी सोनालीका ट्रैक्टर्स ने मई 2026 में बिक्री और उत्पादन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। कंपनी ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुल 17,204 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज कर अपने इतिहास की सबसे बड़ी मासिक बिक्री हासिल की है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से लैस ट्रैक्टरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। कंपनी का मानना है, कि किसानों के मजबूत भरोसे और बढ़ती बाजार मांग ने इस रिकॉर्ड प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बिक्री के साथ-साथ उत्पादन के क्षेत्र में भी सोनालीका ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कंपनी ने मई 2026 के दौरान 17,029 ट्रैक्टरों का उत्पादन कर अब तक का सर्वाधिक मासिक उत्पादन दर्ज किया। यह आंकड़ा कंपनी की मजबूत उत्पादन क्षमता और बेहतर सप्लाई चेन प्रबंधन को दर्शाता है।
लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी ने अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाया है, जिससे समय पर ट्रैक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
सोनालीका का कहना है कि उसकी इस उपलब्धि के पीछे किसानों का अटूट विश्वास सबसे बड़ा कारण है। कंपनी वर्षों से किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे ट्रैक्टर विकसित कर रही है जो बेहतर प्रदर्शन, ईंधन दक्षता और टिकाऊपन प्रदान करते हैं।
इसी वजह से किसानों ने कंपनी के उत्पादों को प्राथमिकता दी है। घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी सोनालीका के ट्रैक्टरों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद मिली है।
रमन मित्तल ने अपने एक LinkedIn पोस्ट में इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि मई 2026 में दर्ज की गई 17,204 ट्रैक्टरों की बिक्री और 17,029 ट्रैक्टरों का उत्पादन कंपनी के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से भी अधिक प्रेरणादायक भारतीय किसानों की वह भावना है, जो हर चुनौती के बावजूद आगे बढ़ने और बेहतर भविष्य बनाने का संकल्प रखती है। कंपनी का ‘जीतने का दम’ का विजन इसी सोच को आगे बढ़ाता है और उसे निरंतर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।
देश में कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिक हो रहा है और किसान अब पारंपरिक तरीकों के बजाय उन्नत मशीनों का उपयोग करने पर अधिक जोर दे रहे हैं। ऐसे माहौल में उच्च प्रदर्शन वाले ट्रैक्टरों की मांग बढ़ना स्वाभाविक है।
सोनालीका का मानना है कि कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण की यह बढ़ती प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी। किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और खेती की लागत कम करने में आधुनिक ट्रैक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके कारण उनकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
कंपनी ने अपनी इस सफलता का श्रेय केवल ग्राहकों को ही नहीं बल्कि अपने डीलर नेटवर्क, कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों को भी दिया है। सोनालीका का मानना है कि मजबूत डीलर नेटवर्क ग्राहकों तक बेहतर सेवाएं और समय पर उत्पाद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
देशभर में फैले डीलरों और सेवा केंद्रों ने किसानों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध बनाने में कंपनी की मदद की है। यही कारण है कि कंपनी लगातार नए ग्राहकों को जोड़ने और पुराने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने में सफल रही है।
रिकॉर्ड बिक्री और उत्पादन के बाद कंपनी अब भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी काफी आशावादी नजर आ रही है। सोनालीका का कहना है कि वह अपनी उत्पादन क्षमता, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों तथा उत्पाद पोर्टफोलियो को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
कंपनी किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों से लैस ट्रैक्टर और कृषि समाधान विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। यदि बाजार में मांग का वर्तमान रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।
मई 2026 के रिकॉर्ड आंकड़ों ने सोनालीका की स्थिति को भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में और अधिक मजबूत बना दिया है। कंपनी वर्तमान में 20 एचपी से 120 एचपी तक की विभिन्न श्रेणियों में ट्रैक्टर उपलब्ध करा रही है, जो छोटे, मध्यम और बड़े किसानों की जरूरतों को पूरा करते हैं।
घरेलू बाजार के अलावा कई देशों में मजबूत निर्यात उपस्थिति रखने वाली सोनालीका ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार विकास दर्ज किया है। ताजा बिक्री और उत्पादन रिकॉर्ड यह दर्शाते हैं कि कंपनी न केवल किसानों की पहली पसंद बन रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान को लगातार मजबूत कर रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
Sonalika Tractors has claimed the best-ever May with overall sales of 17,204 tractors in domestic and export markets. The company also had a significant manufacturing achievement as the 17,029 tractors produced set another new monthly record for the company.
This new milestone underscores Sonalika's continued progress and success in the agricultural machinery industry and shows that farmers are increasingly interested in the company's innovative solutions. The company has exceeded its previous May sales and production figures, further enhancing its market position.
Raman Mittal, Joint Managing Director, ITL, states that the achievement is a testament to the spirit and capability of Indian agriculture, which continues to be resilient. He said that the company's success was tied to the aspirations of farmers who are dedicated to increasing their productivity and growth in every season.
The record month also showcases Sonalika capability to maintain production capacity and market demand balance. The company was able to successfully scale and continue production while at the same time ensuring timely delivery to customers in India and abroad.
Sonalika's sales and production levels during May are the highest ever, continuing on the growth curve, and it is dedicated to providing the farming community with innovative and reliable farm equipment solutions as per their needs.
भारत में कृषि क्षेत्र लगातार आधुनिक तकनीकों को अपना रहा है, जिसके चलते कृषि उपकरणों की मांग में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसी सकारात्मक माहौल का लाभ वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स लिमिटेड (VST Tillers Tractors Ltd.) को भी मिला है।
कंपनी ने मई 2026 के दौरान पावर टिलर और ट्रैक्टर दोनों श्रेणियों में प्रभावशाली बिक्री दर्ज की है। कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में कुल 4,472 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 3,486 यूनिट्स था।
इस प्रकार कंपनी ने सालाना आधार पर 28.3% प्रतिशत की वृद्धि हाँसिल की है। यह प्रदर्शन दर्शाता है, कि किसानों के बीच आधुनिक कृषि मशीनों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है और वीएसटी इस अवसर का सफलतापूर्वक लाभ उठा रही है।
मई 2026 की बिक्री रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण योगदान पावर टिलर से आया है। कंपनी ने इस महीने 4,019 पावर टिलर बेचे, जबकि पिछले वर्ष मई 2025 में यह संख्या 3,047 यूनिट्स थी। यानी पावर टिलर की बिक्री में 31.9 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई।
छोटे और मध्यम किसानों के लिए पावर टिलर एक किफायती और उपयोगी कृषि उपकरण माना जाता है। खेती की लागत कम करने और कार्य क्षमता बढ़ाने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
यही वजह है, कि वीएसटी की कुल बिक्री वृद्धि में पावर टिलर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकरण बढ़ने से आने वाले समय में भी इस उत्पाद की मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है।
हालांकि, ट्रैक्टर श्रेणी में वृद्धि की गति पावर टिलर की तुलना में कम रही, लेकिन कंपनी ने यहां भी सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं। मई 2026 में वीएसटी ने 453 ट्रैक्टर बेचे, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 439 यूनिट्स था।
इस प्रकार ट्रैक्टर बिक्री में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ट्रैक्टर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद कंपनी का सकारात्मक प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि ग्राहकों का विश्वास वीएसटी ब्रांड पर बना हुआ है।
कृषि कार्यों में उत्पादकता बढ़ाने और श्रम लागत कम करने के लिए किसान ट्रैक्टरों का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे इस श्रेणी में भी भविष्य में बेहतर संभावनाएं दिखाई देती हैं।
पावर टिलर और ट्रैक्टर दोनों श्रेणियों के संयुक्त प्रदर्शन ने कंपनी के कुल बिक्री आंकड़ों को मजबूत बनाया है। मई 2026 में वीएसटी ने कुल 4,472 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 3,486 यूनिट्स की तुलना में काफी अधिक है। कुल बिक्री में 28.3 प्रतिशत की वृद्धि किसी भी ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण निर्माता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि कंपनी की उत्पाद रणनीति, डीलर नेटवर्क और बाजार में ब्रांड की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि कृषि क्षेत्र में मशीनों की बढ़ती मांग का लाभ वीएसटी को मिल रहा है।
केवल मासिक आधार पर ही नहीं बल्कि वर्ष-दर-वर्ष (YOY) प्रदर्शन में भी कंपनी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मई 2026 तक पावर टिलर की कुल बिक्री 7,130 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 5,050 यूनिट्स थी। इस तरह 41.2 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं ट्रैक्टर बिक्री भी 756 यूनिट्स से बढ़कर 825 यूनिट्स हो गई, जो 9.1 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल बिक्री 7,955 यूनिट्स रही, जबकि पिछले वर्ष यह 5,806 यूनिट्स थी। कुल बिक्री में 37 प्रतिशत की वृद्धि कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति और बेहतर मांग को दर्शाती है।
भारत में कृषि क्षेत्र तेजी से मशीनीकरण की ओर बढ़ रहा है। किसानों को आधुनिक उपकरणों के लाभ समझ में आने लगे हैं और सरकार भी कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। ऐसे माहौल में पावर टिलर और छोटे ट्रैक्टरों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।
वीएसटी जैसे ब्रांड, जो छोटे और मध्यम किसानों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, भविष्य में इस बढ़ती मांग का बड़ा लाभ उठा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है, कि यदि मानसून सामान्य रहता है और कृषि गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं, तो कंपनी आने वाले महीनों में भी इसी प्रकार का सकारात्मक प्रदर्शन जारी रख सकती है।
वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स लिमिटेड भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल एवं कृषि उपकरण कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1911 में स्वर्गीय वी. एस. तिरुवेंगडासामी मुदलियार द्वारा की गई थी।
शुरुआत में कंपनी कर्नाटक और तमिलनाडु में पेट्रोलियम उत्पादों तथा ऑटोमोबाइल वितरण के व्यवसाय से जुड़ी हुई थी। समय के साथ कंपनी ने कृषि उपकरण निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा और आज यह भारत में पावर टिलर एवं कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर निर्माण की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
एक सदी से अधिक पुराने अनुभव, मजबूत तकनीकी क्षमता और किसानों की जरूरतों की गहरी समझ के कारण वीएसटी ने भारतीय कृषि क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। मई 2026 की बिक्री रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि कंपनी आज भी निरंतर विकास के मार्ग पर अग्रसर है और कृषि मशीनीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
भारत के कृषि मशीनरी क्षेत्र में अग्रणी कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस (FEB) ने मई 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रैक्टर बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में कुल 49,695 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष मई 2025 में बेचे गए 40,643 ट्रैक्टरों की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है।
घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में सकारात्मक प्रदर्शन के चलते कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2027 की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है। यह उपलब्धि महिंद्रा की मजबूत बाजार पकड़ और किसानों के बीच उसके उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।
महिंद्रा के लिए घरेलू बाजार मई 2026 में वृद्धि का सबसे बड़ा आधार साबित हुआ। कंपनी ने इस दौरान देशभर में 47,845 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 38,914 ट्रैक्टर था। इस प्रकार घरेलू बिक्री में 23 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई।
भारतीय कृषि क्षेत्र में बढ़ती मशीनीकरण की प्रवृत्ति, बेहतर कृषि आय और किसानों की बढ़ती निवेश क्षमता ने इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों के लिए आधुनिक मशीनों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ महिंद्रा को मिला है।
मई 2026 में कंपनी की कुल ट्रैक्टर बिक्री 49,695 इकाइयों तक पहुंच गई। इसमें घरेलू बिक्री के साथ-साथ निर्यात बाजारों में हुई बिक्री भी शामिल है। पिछले वर्ष की समान अवधि में कुल बिक्री 40,643 इकाइयों की थी। इस प्रकार कुल बिक्री में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिंद्रा न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रही है। कृषि क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और किसानों की सकारात्मक खरीदारी भावना ने कंपनी की बिक्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष वीजय नकारा ने कंपनी के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मई 2026 में दर्ज हुई मजबूत वृद्धि के पीछे रबी फसलों की समय पर कटाई एक महत्वपूर्ण कारण रही। किसानों ने अच्छी फसल प्राप्त करने के बाद कृषि मशीनरी में निवेश बढ़ाया।
रबी सीजन के सफल समापन के कारण किसानों के पास नकदी प्रवाह बेहतर रहा, जिससे ट्रैक्टरों की खरीद में तेजी देखने को मिली। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
कंपनी के अनुसार किसानों के लिए अनुकूल व्यापारिक परिस्थितियों ने भी ट्रैक्टर बिक्री को बढ़ावा दिया। कृषि उत्पादों के बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में सुधार हुआ और उनकी खरीद क्षमता बढ़ी।
जब खेती लाभदायक होती है तो किसान उत्पादन बढ़ाने और कार्यक्षमता सुधारने के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों में निवेश करते हैं। महिंद्रा के ट्रैक्टर अपनी विश्वसनीयता, टिकाऊपन और विभिन्न कृषि कार्यों में उपयोगिता के कारण किसानों की पहली पसंद बने हुए हैं। यही वजह है, कि कंपनी ने घरेलू बाजार में मजबूत वृद्धि दर्ज की।
महिंद्रा ने मई 2026 में निर्यात क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। कंपनी ने इस अवधि में 1,850 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि मई 2025 में यह संख्या 1,729 थी। इस प्रकार निर्यात बिक्री में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय ट्रैक्टरों की बढ़ती स्वीकार्यता और महिंद्रा की मजबूत वैश्विक उपस्थिति इस वृद्धि के प्रमुख कारण रहे। कंपनी लगातार नए बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने और वैश्विक ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
अप्रैल और मई 2026 को मिलाकर वित्तीय वर्ष 2027 के शुरुआती दो महीनों के आंकड़े भी कंपनी के लिए बेहद उत्साहजनक रहे हैं। इस अवधि में घरेलू बिक्री 94,249 ट्रैक्टर रही, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 77,430 था।
यानी घरेलू बिक्री में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, कुल ट्रैक्टर बिक्री 98,106 इकाइयों तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 80,697 ट्रैक्टरों की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है।
निर्यात बिक्री भी 3,857 ट्रैक्टर रही, जो एक वर्ष पहले के 3,267 ट्रैक्टरों की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत मजबूत मांग और सकारात्मक बाजार परिस्थितियों के साथ की है।
महिंद्रा समूह कृषि मशीनरी क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान रखता है और ट्रैक्टर उत्पादन की मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी माना जाता है। कंपनी ने दशकों से भारतीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षमता और उपयोग के ट्रैक्टर विकसित किए हैं।
छोटे किसानों से लेकर बड़े कृषि उद्यमों तक, महिंद्रा के उत्पादों की व्यापक मांग है। लगातार अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और ग्राहक-केंद्रित रणनीतियों के कारण कंपनी ने घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में नेतृत्व की स्थिति हासिल की है।
महिंद्रा ग्रुप की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और आज यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय व्यावसायिक समूहों में शामिल है। 100 से अधिक देशों में फैले अपने कारोबार और 3.24 लाख से अधिक कर्मचारियों के साथ समूह कृषि उपकरण, यूटिलिटी वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी सक्रिय है।
समूह का विशेष ध्यान पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों को बढ़ावा देने, ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करने और शहरी जीवन को बेहतर बनाने पर है। महिंद्रा का उद्देश्य केवल व्यावसायिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। मई 2026 के बिक्री आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि कंपनी अपने दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है और भारतीय कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
भारत के कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण की बढ़ती मांग के बीच एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड (EKL) ने मई 2026 में ट्रैक्टर बिक्री के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। कंपनी के कृषि मशीनरी व्यवसाय ने मई 2026 के दौरान कुल 12,310 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष मई 2025 में बेचे गए 10,354 ट्रैक्टरों की तुलना में 18.9 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि देशभर में किसानों का भरोसा आधुनिक कृषि उपकरणों पर लगातार बढ़ रहा है और ट्रैक्टरों की मांग मजबूत बनी हुई है।
कंपनी की घरेलू बिक्री ने मई 2026 में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। इस दौरान एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने देश के भीतर 11,887 ट्रैक्टर बेचे, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 9,703 ट्रैक्टर था। इस प्रकार घरेलू बिक्री में 22.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती कृषि गतिविधियों, बेहतर वित्तीय सुविधाओं और खेती में मशीनों के बढ़ते उपयोग ने इस वृद्धि को गति प्रदान की है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि किसानों के बीच कंपनी के ट्रैक्टरों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
मई 2026 के दौरान कंपनी को थोक और खुदरा दोनों बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। डीलर नेटवर्क के माध्यम से ट्रैक्टरों की मांग मजबूत बनी रही, वहीं अंतिम उपभोक्ताओं यानी किसानों की खरीदारी में भी निरंतर वृद्धि देखी गई। ग्रामीण बाजारों में कृषि कार्यों की तैयारी और आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों ने नए ट्रैक्टरों की खरीद को प्राथमिकता दी। इससे कंपनी की बिक्री को अतिरिक्त मजबूती मिली और कुल बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
कंपनी के अनुसार मई माह में किसानों के लिए अनुकूल माहौल बिक्री वृद्धि का प्रमुख कारण रहा। देश के विभिन्न हिस्सों में जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर मौजूद है, जिससे सिंचाई की स्थिति बेहतर बनी हुई है। इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थिरता और कृषि गतिविधियों में निरंतरता ने किसानों का विश्वास मजबूत किया है। जब किसानों को भविष्य की फसल और आय को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो वे कृषि मशीनरी में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित रहते हैं। यही कारण है कि ट्रैक्टर बाजार में मांग बनी हुई है।
हालांकि कृषि क्षेत्र में सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। उर्वरकों सहित कृषि इनपुट लागतों में बढ़ोतरी किसानों की लागत बढ़ा सकती है। इसके अलावा कुछ नकदी फसलों की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है, जिससे किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी कृषि इनपुट की उपलब्धता और कीमतों पर असर डाल सकते हैं। खरीफ सीजन से पहले ये कारक किसानों की क्रय क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और उद्योग के लिए निगरानी के महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों द्वारा उभरती अल नीनो परिस्थितियों की संभावना जताई जा रही है, जिससे वर्षा वितरण प्रभावित हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में जलाशयों में उपलब्ध पर्याप्त जल भंडार किसानों के लिए राहत का काम करेगा। इसके साथ ही कृषि मशीनरी की अंतर्निहित मांग भी मजबूत बनी हुई है। यदि मानसून सामान्य सीमा के आसपास रहता है तो ट्रैक्टर उद्योग को आगे भी सकारात्मक समर्थन मिल सकता है। इस कारण कंपनियां आगामी महीनों को लेकर आशावादी बनी हुई हैं।
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जहां घरेलू बाजार में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं निर्यात बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। मई 2026 में कंपनी ने 423 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि मई 2025 में यह संख्या 651 थी। इस प्रकार निर्यात बिक्री में 35 प्रतिशत की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग की स्थिति, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और कुछ क्षेत्रों में व्यापारिक चुनौतियां इस गिरावट के प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। हालांकि घरेलू बाजार की मजबूत मांग ने कुल बिक्री को सकारात्मक बनाए रखा।
वित्तीय वर्ष 2027 के पहले दो महीनों यानी अप्रैल और मई 2026 के संयुक्त आंकड़े भी कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं। इस अवधि में घरेलू बिक्री 22,285 ट्रैक्टर रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 17,851 ट्रैक्टरों की तुलना में 24.8 प्रतिशत अधिक है।
वहीं कुल ट्रैक्टर बिक्री 23,167 इकाई रही, जो पिछले वर्ष के 19,083 ट्रैक्टरों की तुलना में 21.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। हालांकि निर्यात बिक्री 882 ट्रैक्टर रही, जो पिछले वर्ष के 1,232 ट्रैक्टरों की तुलना में 28.4 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद कुल प्रदर्शन कंपनी की मजबूत बाजार पकड़ और ग्रामीण मांग की निरंतरता को दर्शाता है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड भारत के अग्रणी इंजीनियरिंग समूहों में से एक है, जिसके पास विनिर्माण उत्कृष्टता का लगभग आठ दशकों का अनुभव है। कंपनी कृषि मशीनीकरण और निर्माण उपकरण जैसे उच्च विकास वाले क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और देश के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान देने के उद्देश्य से कंपनी लगातार नई तकनीकों और नवाचारों पर काम कर रही है।
कृषि मशीनरी और निर्माण उपकरण व्यवसायों के माध्यम से एस्कॉर्ट्स कुबोटा देश के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उत्पाद गुणवत्ता, लागत दक्षता, तकनीकी नवाचार और ग्राहक संतुष्टि पर कंपनी का निरंतर फोकस उसे भारतीय कृषि मशीनरी उद्योग के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल करता है।
ट्रैक्टरचॉइस प्लेटफॉर्म किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी जरूरी और ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी कीमत, फीचर्स और खेतों में उपयोग से जुड़ी अपडेट नियमित रूप से साझा की जाती हैं। साथ ही सोनालीका, जॉन डियर, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी और कुबोटा जैसी प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की पूरी और विश्वसनीय जानकारी भी ट्रैक्टरचॉइस पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 22 मई 2026 से प्रदेश के सभी 2516 पेट्रोल पंपों पर ड्रम और जरीकेन में फ्यूल देने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि कई जगहों पर बड़े पैमाने पर पेट्रोल और डीजल का अवैध भंडारण किया जा रहा था, जिससे कालाबाजारी और कृत्रिम कमी जैसी समस्याएं पैदा हो रही थीं। ऐसे में सरकार ने फ्यूल वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए यह सख्त फैसला लिया। हालांकि इस निर्णय के बाद किसानों की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने कृषि कार्यों के लिए विशेष राहत देने का ऐलान भी किया है।
सरकार ने साफ किया है कि यह रोक किसानों के नियमित कृषि कार्यों पर लागू नहीं होगी। खेती-किसानी में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंपों के लिए किसानों को डीजल मिलता रहेगा। खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया ताकि किसानों को खेती के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। ग्रामीण इलाकों में कई किसान खेतों तक मशीनें ले जाने और सिंचाई के लिए ड्रम या जरीकेन में डीजल ले जाते हैं। सरकार ने ऐसी जरूरतों को समझते हुए प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वास्तविक किसानों को आवश्यक फ्यूल उपलब्ध कराया जाए। इससे खेती का काम बिना रुकावट जारी रह सकेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि ड्रम और जरीकेन में खुले तौर पर फ्यूल बिक्री से कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही थीं। कुछ लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीदकर उसका अवैध भंडारण कर रहे थे, जबकि कई मामलों में कालाबाजारी की शिकायतें भी मिली थीं। इससे आम लोगों और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को परेशानी होती थी। सरकार ने माना कि यदि इस व्यवस्था पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाता तो भविष्य में फ्यूल संकट जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती थी। इसलिए प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में फिलहाल पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी प्रकार की घबराहट या फ्यूल की कमी की आशंका नहीं रखनी चाहिए। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में लगभग 4 करोड़ 3 लाख लीटर पेट्रोल और 5 करोड़ 55 लाख लीटर डीजल उपलब्ध है। इसके अलावा 24 मई 2026 को नई खेप के रूप में 23 लाख 33 हजार लीटर पेट्रोल और 62 लाख 40 हजार लीटर डीजल राज्य को प्राप्त हुआ है। इन आंकड़ों से यह साफ है कि आने वाले समय में भी राज्य में फ्यूल सप्लाई सामान्य बनी रहेगी।
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले सरकार किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं चाहती। यही कारण है कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार तैयारियां की जा रही हैं। इस समय किसानों को खेत की जुताई, बुवाई और सिंचाई जैसे कई कामों के लिए डीजल की आवश्यकता होती है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना बनाई है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में डीजल मिल सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांव और कृषि क्षेत्रों में फ्यूल सप्लाई पर विशेष नजर रखी जाए ताकि खेती का काम प्रभावित न हो। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को बिना किसी बाधा के कृषि कार्यों के लिए ईंधन उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे फ्यूल आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी करें। जिला स्तर पर समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं भी डीजल की कृत्रिम कमी पैदा न हो। प्रशासन को यह भी कहा गया है कि यदि किसी क्षेत्र में किसानों को डीजल मिलने में परेशानी आती है तो तत्काल समाधान किया जाए। पेट्रोल पंपों पर भी नियमित जांच की जाएगी ताकि नियमों का उल्लंघन न हो। सरकार चाहती है कि फ्यूल वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित रहे, जिससे आम जनता और किसानों दोनों को राहत मिल सके।
सरकार लगातार किसानों को यह भरोसा दिला रही है कि उनके कृषि कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार किसान हैं, इसलिए उनकी जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को समय पर डीजल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि खरीफ सीजन के दौरान किसी भी जिले में ईंधन संकट जैसी स्थिति न बने। किसानों को राहत देने के लिए स्थानीय स्तर पर भी विशेष व्यवस्था बनाने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम भविष्य में फ्यूल वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। ड्रम और जरीकेन में अनियंत्रित फ्यूल बिक्री बंद होने से कालाबाजारी पर रोक लगेगी और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सही मात्रा में ईंधन पहुंच सकेगा। वहीं किसानों को दी गई छूट से कृषि कार्यों पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। यदि प्रशासन सही तरीके से निगरानी करता है तो यह व्यवस्था लंबे समय तक सफल साबित हो सकती है। इससे राज्य में फ्यूल प्रबंधन मजबूत होगा और आम लोगों के साथ किसानों को भी संतुलित लाभ मिल सकेगा।
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प्रश्न: छत्तीसगढ़ सरकार ने ड्रम और जरीकेन में फ्यूल देने पर रोक क्यों लगाई ?
उत्तर: सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और कृत्रिम कमी रोकने के लिए यह सख्त फैसला लागू किया है।
प्रश्न: किसानों को इस फैसले में क्या राहत दी गई है ?
उत्तर: किसानों को ट्रैक्टर और सिंचाई पंप चलाने के लिए जरूरत अनुसार डीजल लेने की विशेष छूट दी गई है।
प्रश्न: राज्य में वर्तमान में कितना डीजल उपलब्ध है ?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में अभी लगभग 5 करोड़ 55 लाख लीटर डीजल उपलब्ध है, जिससे आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
प्रश्न: सरकार ने जिला प्रशासन को क्या निर्देश दिए हैं ?
उत्तर: जिला प्रशासन को डीजल आपूर्ति की निगरानी और किसानों को समय पर ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रश्न: खरीफ सीजन में सरकार की प्राथमिकता क्या है ?
उत्तर: सरकार की प्राथमिकता किसानों को बिना बाधा डीजल उपलब्ध कराकर खेती और सिंचाई कार्य सुचारु रूप से चलाना है।
देश की राजधानी दिल्ली में मौसम ने अचानक बड़ा बदलाव दिखाया है। मई के महीने में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानियाँ बढ़ा दी हैं। राजधानी में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा दिखाई देने लगा है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। सुबह से ही तेज धूप निकल रही है और दोपहर तक गर्मी असहनीय हो जाती है। लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और बाजारों में भी भीड़ कम दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार गर्मी सामान्य से अधिक पड़ सकती है, जिसका असर स्वास्थ्य और दैनिक जीवन दोनों पर पड़ेगा।
दिल्ली में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार होने के बाद लोगों का हाल बेहाल हो गया है। दोपहर के समय सड़कें तपती नजर आ रही हैं और गर्म हवाएं लोगों को झुलसा रही हैं। खासतौर पर दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, रिक्शा चालक, मजदूर और सड़क किनारे काम करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी के कारण बिजली और पानी की मांग भी तेजी से बढ़ गई है। कई इलाकों में लोग पानी की कमी की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है क्योंकि लू लगने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक तेज गर्म हवाएं चल सकती हैं और तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक रह सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की कमी और साफ आसमान के कारण सूरज की गर्मी सीधे धरती तक पहुंच रही है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही अधिक पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की भी अपील की गई है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है।
राजधानी में बढ़ती गर्मी का असर बिजली और पानी की खपत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।
कई इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर पानी की मांग भी तेजी से बढ़ी है। लोग लगातार ठंडा पानी और पेय पदार्थों का सेवन कर रहे हैं, जिससे जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
नगर निगम और जल विभाग ने लोगों से पानी की बर्बादी न करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में बिजली और पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है।
दिल्ली की तेज गर्मी का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, उल्टी और लू से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी में शरीर से पानी तेजी से निकलता है, जिससे कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए। नारियल पानी, नींबू पानी और फलों का सेवन करने की सलाह भी दी जा रही है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
भीषण गर्मी का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव किसानों और मजदूरों पर भी पड़ रहा है। खेतों में काम करने वाले किसानों को तेज धूप में काम करना मुश्किल हो रहा है।
वहीं निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मजदूरों ने दोपहर के समय काम बंद करना शुरू कर दिया है ताकि लू से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी फसलों पर भी असर डाल सकती है। यदि तापमान लगातार बढ़ता रहा तो सब्जियों और अन्य फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की संभावना कम है। तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। रात के समय भी गर्म हवाएं चलने से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है।
बड़े शहरों में बढ़ता प्रदूषण और कंक्रीट के जंगल भी तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में गर्मी और अधिक खतरनाक रूप ले सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है।
भीषण गर्मी और हीटवेव से बचने के लिए लोगों को कई जरूरी सावधानियाँ बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार दोपहर के समय बिना जरूरत घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। बाहर जाते समय छाता, टोपी या गमछे का इस्तेमाल करना जरूरी है। शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
हल्के और सूती कपड़े पहनने से शरीर को गर्मी से राहत मिलती है। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि वे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। इसके अलावा ज्यादा मसालेदार और तैलीय भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी व्यक्ति को चक्कर, तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सावधानी और जागरूकता ही भीषण गर्मी से बचने का सबसे अच्छा उपाय है।
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